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शाम 7 बजे के बाद जब हॉस्टल के दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब शुरू होता है खौफ का असली खेल! Chhapra Engineering College के Girls Hostel में, Principal का Driver हर नियम तोड़कर जबरन घुसता है। जिन लड़कियों को पढ़ने भेजा गया, वो उसके द्वारा छेड़छाड़ और बदसलूकी...

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बिहार: छपरा इंजीनियरिंग कॉलेज (Chhapra Engineering College) के गर्ल्स हॉस्टल से बेहद गंभीर और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। छात्राओं का आरोप है कि शाम 7 बजे हॉस्टल के दरवाजे बंद हो जाने के बाद, प्रिंसिपल का ड्राइवर सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर जबरन हॉस्टल परिसर में प्रवेश करता है। जब छात्राओं ने अपनी सुरक्षा को लेकर और इस अवांछित प्रवेश का विरोध किया, तो उन्हें झूठे मामलों और मुकदमों में फंसाने की धमकियाँ दी जाने लगीं। छात्रा की अनुपस्थिति में और बिना किसी पूर्व सूचना के उसके कमरे का ताला तोड़ना, सामान बाहर फेंकना और जबरन दूसरे छात्रों को शिफ्ट कर देना प्रशासनिक तानाशाही को दर्शाता है। उच्च शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा के कड़े इंतजामों का दावा किया जाता है, लेकिन हॉस्टल के भीतर इस प्रकार की घुसपैठ और धमकी भरे माहौल ने छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संस्थागत पदों की आड़ में इस प्रकार के दुर्व्यवहार और धमकियों के आरोपों ने प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। #bihar #chhapra #chhapraengineeringcollege #governmentengineeringcollegechhapra #viral #viralreelschallenge

Er. Firoz Naik Mirza

60,268 次观看 • 2 个月前

सुनिए ज़रा इस व्यक्ति को… क्या इसे विरोध कहते हैं? नहीं! - ये विरोध नहीं है। ये विचारों की लड़ाई भी नहीं है। ये तो विशुद्ध मानसिक कुंठा का विस्फोट है। ये अंदर भरी हुई हताशा और विकृति का जहर है, जो शब्दों के रूप में बाहर आ रहा है। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है — खुलकर है। आप नीति पर सवाल उठाइए, फैसलों की आलोचना कीजिए, सरकार को घेरिए। लेकिन किसी मंत्री के लिए इस स्तर की गाली-गलौज? ये किस किताब का लोकतंत्र है? सुचिता में विरोध का मतलब बहस होता है, तर्क होता है, तथ्य होते हैं। जब शब्द खत्म हो जाते हैं, तब गालियां शुरू होती हैं।और जब गालियां शुरू होती हैं, तब समझ लीजिए कि तर्क मर चुका है। किसी भी विचारधारा से मतभेद रखिए — पर भाषा की मर्यादा तो रखिए। क्योंकि जो व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में इस तरह जहर उगलता है, वो सिर्फ एक नेता का नहीं, पूरे लोकतांत्रिक संवाद का स्तर गिराता है। असहमति आपका अधिकार है। असभ्यता आपका चरित्र दिखाती है।

Rahul

14,740 次观看 • 7 个月前

हर त्योहार में एक तस्वीर कम होती है। एक तस्वीर… जिसमें घर तो पूरा होता है, बस उसका एक अपना नहीं होता। क्योंकि जब दुनिया त्योहार मना रही होती है, खाकी अक्सर ड्यूटी पर होती है। जब घरों में रौनक सजती है, वह सड़कों पर होती है। जब अपने एक-दूसरे के साथ होते हैं, वह किसी और के अपनों की सुरक्षा में होती है। और घर में… कोई उसकी पसंद की मिठाई संभालकर रख देता है, कोई दरवाज़े की ओर देखता रहता है, कोई बस उसके लौटने का इंतज़ार करता है। खाकी का फ़र्ज़ सिर्फ़ वर्दी नहीं निभाती, उसके अपने भी निभाते हैं थोड़ा इंतज़ार करके, थोड़ी कमी सहकर, और बहुत सारा प्यार संभालकर। 🎵 ‘खाकी का सितारा’ | The UP Police Anthem यह सिर्फ़ एक एंथम नहीं, उनकी कहानी है जो उत्सव के बीच ड्यूटी पर खड़े रहते हैं… और उन परिवारों की भी, जो हर त्योहार पर अपने किसी अपने को देश और समाज के नाम कर देते हैं। पूरा 6.5 मिनट का एंथम अब UP Police के Official YouTube Channel पर। #KhakiKaSitara #UPPAnthem #UPPolice

UP POLICE

74,072 次观看 • 1 个月前

Gurugram के लोगों का कसूर क्या है? उन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा है कि उन्हें दो-दो घंटे जाम में खड़े रहना पड़ता है? क्या उनका गुनाह ये है कि Gurugram में रहने वाले और काम करने वाले हर साल एक लाख करोड़ रुपये का tax देते हैं? क्या उनका कसूर ये है कि हरियाणा का 45% GST सिर्फ Gurugram से collect होता है? इस GST की वजह से हरियाणा का GST collection पंजाब के मुकाबले पांच गुणा है. क्या Gurugram के लोगों का कसूर ये है कि वो excise के नाम पर हरियाणा को 27% revenue देते हैं? Gurugram में रहने वाले लोग road tax देते हैं, toll tax देते हैं और इन सारे taxes के बदले हर साल हरियाणा की सड़कें नदी और नालों में तब्दील हो जाती हैं. 50-50 करोड़ के flats में रहने वालों का घर से बाहर निकलना बंद हो जाता है. Gurugram में बहुत सारी Multinational Companies हैं. जिनमें काम करने वाले दुनिया के बड़े-बड़े शहरों से आते हैं. बात दूर तलक जाती है और पूरी दुनिया में Gurugram का नाम खराब होता है. और ये कोई एक बार की बात नहीं है. हर साल की यही कहानी है. इसको कौन ठीक करेगा? Gurugram के लोगों की सुध कौन लेगा? इसका जवाब देने वाला भी कोई नहीं है. #MyTake #MyTake #Gurugram #gurugramtraffic

Rajat Sharma

17,945 次观看 • 1 年前

नाम नकुल (बजरंग दल) का का सदस्य है ये दो मुस्लिम लड़कों जीशान और शावेज़ को कानूनी मामले में फंसाना चाहता था। ​ इसलिए नकुल ने इन दोनों लड़को को 'लव जिहाद' और 'गैंगरेप' के झूठे आरोप में फंसाने के लिए अपनी ही बहन को उनके पास (कार में) भेजा। ​और फिर नकुल ने पीछे से जाकर अपनी बहन का एक वीडियो बनाया जिसमें लड़की यह नाटक करती है कि उसके साथ बहुत गलत हुआ है। इसके बाद हिंदू संगठनों (जैसे हिंदू परिषद/बजरंग दल) के लोग इकट्ठे हो जाते हैं और पुलिस को बुलाया जाता है। ​पुलिस जब लड़की को कस्टडी में लेकर मेडिकल जांच और कानूनी पूछताछ के लिए ले जाती है तो लड़की पुलिस की सख्त जांच और पूछताछ का दबाव नहीं झेल पाती। फिर क्या वह सच उगल देती है और कबूल करती है कि यह दोनों लड़को को फंसाने के लिए रचा गया एक झूठा षड़यंत्र था। ​साजिश का भंडाफोड़ होने के बाद मुख्य आरोपी नकुल फरार हो जाता है। पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई है किसी को फँसाने के लिए अपनी ही बहन को मोहरा बना देना इंसानियत और रिश्तों दोनों की हार है।

Harshita

234,117 次观看 • 2 个月前

ये वीडियो उस लड़की का है जिसका ओडिशा के थाने में यौन उत्पीड़न हुआ। ये वीडियो उस वक्त का है, जब थाने पहुंचने से पहले लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई थी। वीडियो में साफ पता चल रहा है कि छेड़छाड़ करने वाले बदमाश ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी का नाम ले रहे हैं और लड़की को धमका रहे हैं। जब लड़की अपने साथ हुए छेड़छाड़ का विरोध कर रही है तो बदमाश पूछ रहे हैं- 'तुम मोहन माझी को जानती हो? वो यहां के मुख्यमंत्री हैं। बहुत हद तक साफ हो चुका है कि इस मामले में भी BJP के नेता जुड़े हुए हैं, जो सीधे मुख्यमंत्री के नाम की धौंस दिखा रहे हैं। सवाल है 👇 • क्या यही वजह थी कि पुलिस लड़की की शिकायत नहीं दर्ज कर रही थी? • क्या पुलिस BJP से जुड़े बदमाशों को बचाने में लगी थी? • क्या इस मामले में BJP के किसी बड़े नेता का इन्वॉल्वमेंट है? • क्या यही कारण है कि लड़की को थाने में प्रताड़ित किया गया, उसका यौन उत्पीड़न किया गया? सवाल कई हैं, और ये सवाल नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी से है।
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ये वीडियो उस लड़की का है जिसका ओडिशा के थाने में यौन उत्पीड़न हुआ। ये वीडियो उस वक्त का है, जब थाने पहुंचने से पहले लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई थी। वीडियो में साफ पता चल रहा है कि छेड़छाड़ करने वाले बदमाश ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी का नाम ले रहे हैं और लड़की को धमका रहे हैं। जब लड़की अपने साथ हुए छेड़छाड़ का विरोध कर रही है तो बदमाश पूछ रहे हैं- 'तुम मोहन माझी को जानती हो? वो यहां के मुख्यमंत्री हैं। बहुत हद तक साफ हो चुका है कि इस मामले में भी BJP के नेता जुड़े हुए हैं, जो सीधे मुख्यमंत्री के नाम की धौंस दिखा रहे हैं। सवाल है 👇 • क्या यही वजह थी कि पुलिस लड़की की शिकायत नहीं दर्ज कर रही थी? • क्या पुलिस BJP से जुड़े बदमाशों को बचाने में लगी थी? • क्या इस मामले में BJP के किसी बड़े नेता का इन्वॉल्वमेंट है? • क्या यही कारण है कि लड़की को थाने में प्रताड़ित किया गया, उसका यौन उत्पीड़न किया गया? सवाल कई हैं, और ये सवाल नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी से है।

Congress

260,365 次观看 • 2 年前

एक घंटे के विडियो शूटिंग को VN में इडिट करके एक मिनट का बनाने में जान निकल जाती है मित्रों।डेढ सौ दो सौ कट वो भी 10 सेकंड से 1 मिनट तक के उनमें से ट्रिम करके सबसे बेहतर इम्प्रेशन वाला एक सेकेंड का दृश्य निकालो ओर फिर जब सबको ट्रिम के बाद एक घंटे का विडियो 3 मिनट का रह जाए तो उसमें से डिलीट करना शुरू करो कि कौन कौन सा सही बैठ रहा है ताकि विडियो एक मिनट के अंदर आ जाये।हालात खराब हो जाती हैं अंत में तो एक एक सेकंड के कट को मिटाने में बहुत सोचना पड़ता हैं।घंटो बीत जाते है इस विडियो इडिटिंग की प्रक्रिया में उसके बाद म्युजिक की लय पर दृश्यों को समायोजित करो।कई बार तो प्रोजेक्ट महीनो अटक जाता हैं कोई दृश्य म्युजिक के बोलों में कम पड़ जाये तो क्योंकि उसे दुबारा शूट करना होता हैं नही तो आत्मा तृप्त नही होती कलाकार की।मेरा एक प्रोजेक्ट 6 महीने VN में 126GB स्पेस खाता रहा ओर में शूट करता रहा।हाड़ तोड़ मेहनत के बाद जब एक रील के रूप मे शानदार विडियो बनकर तैयार होती हैं तो कलाकर उसे पच्चास बार खुद देखता सुनता है ओर फिर मशक़्क़त होती हैं एक कम से कम शब्दों में उसे टाइटल देने की क्योंकि वर्तमान युवाओं के पास बहुत ताकत है वो हर सेकेंड स्क्रीन पर स्क्रोल कर रहा हैं ओर तुरंत उपर सिरका देगा।यदि आप अपने व्यूअर को पहले तीन सेकेंड तक नहीं रोक सकते तो आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाती हैं ओर विडियो धुल जाती है कहते है जागरण देने का मजा तब आता है जब सुनने वाले हो वैसे ही रील अगर मिलियनो में नहीं देखी जाती है तो बनाने वाला डिमोटिवेट हो जाता हैं।कुलमिलाकर आज के जमाने में जो युवा मेहनत से कुछ अच्छा कंटेंट बना रहे है वो किसी तीन घंटे की बॉलिवुड फ़िल्म से कम नहीं हैं।ओर जब मिलियन में व्यूह कोई चपरी कंटेट ले आता हैं तो बहुत दुख होता हैं।ओर उटपंटाग हरकते करने वालों की संख्या भी बढ़ जाती हैं।जैसा हर शहर से ये फलाना शहर है प्रधान ,,,कहने वालों की संख्या बढ रही है।हमारे देश में में कंटेंट क्रिएट को लेकर कोई कानून या पॉलिसी नही है ओर जब तक सरकार ये बनायेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी क्योंकि ये बीमारी बहुत बड़े जनसमूह पर तेजी से मानसिक असर डालती हैं।

Thar_Desert_Photography

41,330 次观看 • 1 年前

व्यक्ति की उपमाएं उसके चरित्र का आईना होती हैं। जिसका मन विधर्मी होता है उसकी वाणी और उपमाएँ भी विधर्मी हो जाती हैं। कोई भी राजनीतिक-प्रशासनिक पद, वो चाहे प्रधान हो या मुख्य, उसे सच्चे साधु-संतों का अपमान करने का अधिकार नहीं होता है। जिन लोगों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है वो भी इस पाप में भागीदार हैं। चुप्पी साध लेना या आपत्ति न करना भी अनुमति और सहमति का प्रतीक होता है। जब अहंकार और घमंड, महात्माओं के निरादर में एक साथ हामी भरें तो समझ लेना चाहिए कि उस राज में न तो सज्जन सुरक्षित हैं, न संस्कृति, न सभ्यता, न समाज। भाजपा का शासनकाल ‘धर्म और राज-धर्म का दोहरा आपातकाल’ है।

Akhilesh Yadav

53,482 次观看 • 8 个月前

यह है सारा, एक बीपीओ कंपनी मे काम करती है, जिनकी रील ने एक कड़वे सामाजिक सच का आईना दिखाया है, जो वायरल है l रात के 2:45 बजे जब दुनिया सो रही होती है, सारा ऑफिस के बाथरूम में होती हैं, नाइट शिफ्ट के दौरान अचानक पीरियड्स आ जाते हैं, वह किसी तरह 'ब्लिंकिट' से पैड्स मंगाकर स्थिति संभालती हैं, ब्रेक में जो एक्स्ट्रा टाइम लगा, उसे पूरा करने के लिए उन्हें बाद में और ज़्यादा जागकर कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, कॉर्पोरेट की दुनिया में शारीरिक दर्द के लिए कोई माफ़ी नहीं होती, इस रील का सबसे चुभने वाला हिस्सा वह है, जहाँ सारा उन लोगों पर बात करती हैं, जो यह तो देखते हैं कि आपके पास पैसा है, आप अच्छा खा-पहन रहे हैं, अच्छी लाइफस्टाइल, घूमना-फिरना भी करती है, लोग तुरंत कम्फर्ट को देखकर नजर लगाने लगते हैं, लेकिन उस कम्फर्ट को कमाने के लिए जो स्ट्रगल किया जाता है, उसे कोई नहीं देखता, किसी की लाइफ को बाहर से देखकर जज करना बंद करें, क्योंकि हर सफलता के पीछे एक कड़ा संघर्ष होता है।

Vishal M. Yadav

143,787 次观看 • 15 天前

भाजपा और उसके संगी-साथी पराजय स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और अब उनमें ये डर बैठ गया है कि देश की 95% आबादी से बना पीडीए समाज जब भाजपा की करतूतों के ख़िलाफ़ एक साथ खड़ा हो जाएगा तो उनका क्या होगा। उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है। वो सदैव की तरह भूमिगत होकर बिलबिला रहे हैं। इन नकारात्मक लोगों ने आज़ादी से पहले भी देश से ग़द्दारी की और अंडरग्राउंड रहकर देश को ग़ुलाम बनानेवालों की ग़ुलामी की, स्वतंत्रता सेनानियों के ख़िलाफ़ चंद पैसों और वज़ीफ़े के लालच में मुख़बिरी का तुच्छ काम किया। इन्होंने पहले भी देश को धोखा देकर अकूत दौलत इकट्ठा की और अब भी कर रहे हैं। न इन्होंने तब हिसाब दिया था और न अब दे रहे हैं। देश और समाज के लिए एक गिरोह के रूप में ये एक विशाल ‘विषग्रंथी’ है। भाजपाइयों का जैसा संस्कार है, वैसा ही उनका शब्दकोश है और वैसी ही अभिव्यक्ति। भाजपाइयों की वर्चस्ववादी सोच पीडीए को सदैव अपशब्दों से संबोधित करती आई है, इसमें कुछ नया नहीं है। भाजपा ने अपनी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से जो अपमानजनक बात पोस्ट की है वो राजनीतिक नैतिक पतन का ऐसा दस्तावेज़ है जो देश के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है। भाजपाइयों की घृणित मानसिकता से इसके अतिरिक्त कुछ और अपेक्षा भी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे विषैली मानसिकता वाले लोगों को देखकर तो आस्तीन का साँप भी ख़ुद को डसकर आत्महत्या कर लेता है। दरअसल जब-जब पीडीए समाज के किसी भी व्यक्ति का ऐसा अपमान होता है, पीडीए एकता और संकल्प उतना ही दृढ़ होकर उभरता है। पीडीए की एकता और एकजुटता को इससे और भी बल मिला है। आज भाजपा ने एक ऐसी लकीर खींच दी है कि भाजपा में शामिल पीडीए समाज के सांसद, विधायक, पार्षद, पदाधिकारी और सामान्य सदस्य तक का राजनीतिक भविष्य शून्य हो गया है। अब वो किस मुँह से अपने-अपने समाजों के सामने जाएंगे। पीडीए ने तो 2024 के आम चुनाव में ही भाजपा में शामिल ऐसे नेताओं का चुनावी बहिष्कार करके उन्हें हार का और बाहर का रास्ता दिखा दिया था, अब तो पीडीए समाज के बीच उनकी हमेशा के लिए मानसिक नाकाबंदी हो जाएगी। भाजपा की ये गहरी चाल है कि वो पीडीए समाज के अपने सभी नेताओं की सियासत की नींव खोद दे और उनकी राजनीति हमेशा के लिए ख़त्म कर दे। भाजपा का भ्रष्टाचार और आपसी मतभेद ही उसे अंतिम चरण में ले आया है, जहाँ ये खलनायक आपस की गैंगवार में एक-दूसरे का काला चिट्ठा खोलकर, एक-दूसरे को ही ख़त्म कर देंगे। इतिहास गवाह है कि जैसे ही नकारात्मक शक्तियां हारने लगती हैं वो टूटने लगती हैं, इनके साथ भी ऐसा ही होना शुरू हो गया है और आख़िरकार ये होगा भी क्योंकि इन जैसे अवांछित लोगों के लिए इतिहास अपनी चाल नहीं बदलेगा। देखना ये है कि ये दग़ाबाज़ लोग देश छोड़कर भागते हैं या अपने काले अतीत को दोहराते हुए भूमिगत होते हैं, डरपोकों के पास वैसे भी ज़्यादा विकल्प नहीं होते हैं।

Akhilesh Yadav

48,668 次观看 • 5 个月前