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शेर को चाहे कितनी भी राबडी खिलाओ वो मांस खाना नहीं छोड़ता 🤣

107,746 次观看 • 7 个月前 •via X (Twitter)

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रेगिस्तान में बहुत कम जानवर मिलते थे सो बहुत कम जातियाँ ही मांस खा पाती थी। यह कोई गलत बात नहीं हैं। एम स्वामीनाथन के अनुसार सारे जरूरी पोषक तत्व शाकाहार से मिल नहीं सकते सो उनके लिए मांस खाना आवश्यक हैं। भक्तिकालीन बक़वास ने जाटों को भी शाकाहारी बना दिया। अब जाटों को खूब मांस पेलना चाहिए ताकि शरीर में कई जरूरी पोषक तत्वों की भरपाई हो सकें। मांस खाना स्मेक, MD, अफ़ीम, हुक्का व शराब से लाख गुना अच्छा है। इससे पशुपालक और शरीर दोनों को मजबूती मिलती हैं। कितनी अजीब बात हैं नशा बेचकर, हुक्का, तंबाकू और अफीम के नाम कैंगिग कर समुदाय को खोखला करने वाले, मांस पर आंसू बहा रहे हैं। भाई वैष्णव मत के प्रभाव से पहले सारे हिन्दू मांस ही खाते थे।

Jat Ethnic Religion

21,026 次观看 • 18 天前