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शोर यूँ ही न परिंदों ने मचाया होगा कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा…
54,968 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)
Комментарии: 10

फिर आएगा भूकंप,फिर आएगी आपदा, फिर आएगा प्रलय,फिर कुपित होगी प्रकृति तब असहाय होकर रोएंगे ये निर्दयी मानव रूपी पिशाच,बेबस होंगे प्रकृति जब तांडव कर रही होगी,रोएंगे, बौखलाहट में कोषेंगे प्रकृति को ही पर नहीं देखेंगे अपनी गिरेबान में झांककर असहाय होंगे पर नहीं छोड़ेंगे लालच फिर भी।

Some tome dedicated

बहुत ही खूबसूरत शायरी शोर तो वही मचाते हैं जो बाहर से आते हैं, न कि जो पहले से ही वहां रहते हैं! जिसे उजाड़ रहे हो वो ईश्वर की सबसे खूबसूरत रचना में से एक है 🫡 उन लड़को के लिए जिन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की !

इन्हें भी जीने दो 🙏 अमीरों के शौक के लिए इन्हें मत मारो।

Sir aap ko ek msg kiya hu please check kar len

ये ईश्वर की सबसे प्रिय संरचना में से एक की आवाज है वो सब देखते हैं।

Save tree 🌲🌲🌲

जिसकी जैसी नीयत है,वो वैसी ही फितरत रखता है। कोई परिंदों के लिए बंदूक, तो कोई परिंदों के लिए पानी रखता है ।। बहुत ही अमार्मिक काम किया होगा किसी ने

बहुत खूब कोर शब्द ...

दुःखद है हम विनाश की तरफ जा रहे है इसमें कोई शक नही है।

