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शहीद सैय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई को आख़िरी विदाई देने के लिए चीनी वफ़्द तेहरान पहुँचा।

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मौत उस की है करे जिस का ज़माना अफ़्सोस यूँ तो दुनिया में सभी आए हैं मरने के लिए। ०महमूद रामपुरी आख़िरी सलाम शहीद ख़ामेनेई..🫡 ईरान के सुप्रीम लीडर सैय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई की अलविदा की रस्में आज 4 जुलाई को तेहरान में शुरू हो गईं हैं। इंसानी तारीख़ में इससे पहले इतनी भीड़ किसी को अलविदा कहने कभी इकट्ठा नहीं हुई। ख़ामेनेई 9 जुलाई को जब अपनी पैदाइश के शहर मशहद में सुपुर्दे ख़ाक होंगे तक तक करीब दो करोड़ लोग उन्हें आख़िरी सलाम कह चुके होंगे। दुनिया के लगभग अस्सी से सौ देशों के बड़े बड़े नेता, धार्मिक, सामाजिक हस्तियों के ईरान पहुंचने का सिलसिला जारी है जो 9 जुलाई तक चलेगा। ये इसके बावजूद है जब कि अमेरिका ने तमाम मुल्कों को धमकी भी दे रखी है कि ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल न हों। ये इसके बावजूद है कि अमेरिका में पिछले चालीस साल से तमाम पाबंदियां लगा कर उसे तोड़ने की हर मुमकिन कोशिश की है। ये इसके बावजूद है कि अमेरिका और उसके पिट्ठू इजरायल ने सौ दिन तक चली जंग में ईरान को तबाह करने की हर मुमकिन कोशिश करके देख ली। इस के बावजूद ईरान , उसके लीडरान और अवाम ने दुनिया को बता दिया कि एक मुल्क के तौर उसका इक़बाल कितना बुलंद है..! उसके हौसले और जज्बे ने दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क को घुटनों पर ला दिया है। और इस सबके पीछे जिस सुप्रीम लीडर की कमान थे उसके जंग के पहले ही दिन शहीद होने के बाद भी ईरान न रुका,न झुका और न टूटा न हारा। इसलिए आज पूरी दुनिया उस शहीद को अलविदा कहने उमड़ पड़ी है। ▪️ इस तरह विदा होंगे ख़ामेनेई ▪️ तेहरान शहीद खामेनेई को खिराजे अक़ीदत पेश करने के लिए उनकी पार्थिव देह को खोमैनी मॉर्निंग हॉल में रखा गया है। यहां अंतिम संस्कार की रस्में शुरू हो गईं हैं। इसके बाद ख़ामेनेई और परिवार के सदस्यों के ताबूत को ग्रैंड मोसल्ला में रखा जाएगा, जहां आम लोग अंतिम विदाई देंगे। ▪️ कोम अंतिम यात्रा का काफिला 6 और 7 जुलाई को तेहरान के दूसरे इलाकों से होते हुए गुजरेगा करीब 120 किमी दक्षिण में स्थित क़ोम शहर पहुंचेगा। ▪️ नजफ 8 जुलाई को खामेनेई की अंतिम यात्रा का यह जुलूस इराक में दाखिल होगा। ईराक के नजफ और करबला में सार्वजनिक जुलूस निकाले जाएंगे। ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद साहब के चचेरे भाई और दामाद और शिया इस्लाम के पहले इमाम इमाम अली इब्न अबी तालिब की कब्र यहीं पर है। ▪️ करबला नजफ के बाद यह जुलूस 8 जुलाई को ही इराक के करबला पहुंच जाएगा। करबला में ही पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और अब्बास 680 ईस्वी में करबला की लड़ाई में शहीद हुए थे। ▪️ अपनी मिट्टी मशहद में दफ़न होंगे खामेनेई आख़िर में यह काफिला ईरान लौटेगा और ख़ामेनेई के अपने शहर मशहद पहुँचेगा। खामेनेई सन 1939 में मशहद में ही पैदा हुए थे और अपना ज्यादातर शुरुआती जीवन यहीं बिताया था। मशहद में ही 9 जुलाई को उन्हें सुपुर्द ख़ाक किया जाएगा। #khamanei #iran

Dr.Rakesh Pathak डॉ. राकेश पाठक راکیش

11,506 Aufrufe • vor 1 Monat