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संघ को समझना… सबके वश की बात नहीं…
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34 Kommentare

संघ ना हुआ, जोधपुर की नूरजहॉ का कोठा हुआ जो कोई समझ ही नहीं सकता

सबके वश की बात नहीं...

पर लोगों को समझ में आ रहा है अब धीरे धीरे। RSS Betrayed GC BJP Betrayed GC

संघ को समझना इसीलिए सबके बस की बात नहीं क्योंकि मोहन भागवत कहते हैं कि-: 1. मुसलमान के बिना हिंदुत्व अधूरा है। 2. रोटी बेटी का संबंध बनाएं। जातियां पंडितों ने बनाई। 3. हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग ढूंढने की क्या जरूरत है। 4. संघ ने क्या हिंदुओं का ठेका ले रखा है। अब कैसे समझें?

संघ को समझने और समझाने के सेवा भाव और देशभक्ति का जुनून चाहिए,जो हमे देश के प्रधानमंत्री में साफ दिखता है। बाकी आजकल लोग सोशल मीडिया पे मोदी जी, शाह जी, RSS और BJP के खिलाफ कुछ में बोल के और लिख के अपने आप को बड़ा साबित करने में लगे है। अच्छा है देश की जनता की सब सुनती और समझती है तभी RSS की स्वयंसेवक की बार बार चुनती है।

कभी कभी सपना आता होगा....???

संघ अब टोटली कन्फ्यूज्ड पथ पर चल रहा हैं। कुछ भी बकलोली वहां चल रहा है और संघी उसे जस्टिफाई करने का निरर्थक प्रयास करते हैं। संघ vs वामपंथ में कोई फर्क नहीं है। संघ अब हिंदू हित नहीं सेक्युलर हो चुका हैं जो अपने कार्यकर्ता के मारे जाने पर भी चुप रहता हैं। बंगाल और केरल देख लिया।

संघ को हम बहुत अच्छी तरह से समझते हैं, पर संघ प्रमुख जी को समझना होगा, पहले के सर संघ चालक मीडिया में बयान नहीं दिया करते थे, ऐसा हमने किसी ऐसे व्यक्ति से सुना जिनसे मैं बहुत प्रभावित हूं।😎

बिल्कुल क्योंकि संघ में सब सत्ता लोग भी लोग हैं इसलिए कोई समझ नहीं सकता इनको

Sangh mein ek dusre ke gand marte hein , jo ki aam admi nahi samjh sakta .. Past mein main khud ek bahot bada bhadwa tha 😂🤡 jo sangh ko support karta tha... Abb vote ke time jo Sangha wala yaa phir BJP wala hamare area mein vote mangne ayega phir unki gand ki khuji mitayenge😁

इतिहास रहा है संघ प्रमुखों का कभी भी भाजपा प्रमुख से तालमेल नहीं रहा !! जब से मोदी जी प्राइममिनिस्ट बने है संघ प्रमुख से पहली बार तालमेल अच्छा रहा है !! इसकी जांच होनी चाहिए.. दोनों मिल कर हम सवर्णों को झुनझुना तो नहीं पकड़ा रहे!!

हमें समझना भी नही है बाकी @RSSorg और @BJP4India को अब समझ आने लगा होगा विराट हिन्दू सम्मेलन के विशाल हजूम को देखकर

संघ को समझने में मुश्किल इसलिय हो रही है क्योंकि संघ में समझदार लोगों को साइड लाइन किया जा रहा है इससे आगे संघ को मराठी सिंड्रोम से आगे बढ़ने की भी जरूरत है बिहार के कॉलज में फुले की मूर्ति लग रही तो महाराष्ट्र के कॉलेज में भी वीर कुंवर सिंह दिखने चाहिय. भारत माता की जय !!

संघ को समझना सबके बस की बात नहीं, काहे क्वांटम फिजिक्स पढ़ा रहे क्या? 🤣🤣🤣

हिंदुओं में फूट डालने के लिए पूरी नंगई और बेशर्मी पर उतर आया ये पुराना वामपंथी। 👊 1. पहले ये लोग मोदी को गाली दे रहे थे। 2. फिर पूरी भाजपा का विरोध किया। 3. फिर भाजपा शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का विरोध किया। 4. फिर ABVP का विरोध किया। 5. और अब RSS का। 👊

यही चल रहा है और यह पाखंडी हिंदू राष्ट्र बनाएंगे

Ab taiyaar ho jao soonney ke liye “ kisi ne aapse salah maangi. 😂😂😂😂

तुम्हारी मत मारी गयी है l चार छह महीने के लिए सारे सोशल मिडिया अकाउंट बंद कर के हिमालय में ध्यान करो और शुद्ध मन में फिर से शुरुआत करो l संघ के काम में लोग अपना पूरा जीवन अर्पण कर देते है बिना किसी लाभ की अपेक्षा से l तुम्हारे जैसा दो कौड़ी का इन्फ्लुएंसर क्या ही समझेगा l

कल लाइव में इसी बात पे मैं इतना हसा के धर्मपत्नी सोच में पड़ गई .. इतना सताने के बाद भी ये इंसान हस रहा है 🤣

संघ को समझना वास्तव में मुश्किल है।😂 न हिन्दू के लिए खड़ा होता हैं न मुस्लिम के लिए? न ScStAct UGC Act का विरोध किया, न जातिगत आरक्षण में सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को जोड़ने का प्रयास किया।

जाती भगवान ने नहीं पंडित ने बनाया है।ये बयान भगवत मान जी का है,उनको सरकार का जाती वाद नहीं दिख रहा है

जबसे मोहन भागवत संघ का संचालक बना तब से ये आदमी सिफ Bakchodi करता है और कुछ नहीं मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं है ये आदमी

तुम्हारे हिसाब से संघ ठीक से काम नहीं कर रहा! संघ का विचार ठीक नहीं है। संघ समझने लायक नहीं है ! डॉ भागवत ठीक से वक्तव्य नहीं देते! तो ठीक है। तुम अच्छा कर लो! हमारी शुभकामनाये है। इसमें इतना रूदन करने की कहां जरूरत है ?

को समझना नामुमकिन है! हाँ भाई, नामुमकिन है तुम्हारे जैसे लोगों के लिए! क्योंकि संघ कोई पार्टी नहीं, कोई नेता नहीं, कोई पार्षद नहीं — संघ विचारधारा है! सनातन संस्कृति और परंपरा को जोड़ने वाली विचारधारा! जो हिंदू राष्ट्र की नींव रखती है!मोहन भागवत जी ने कहा 'हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों ढूंढना?' — ये हार मानने वाली सभ्यता नहीं भाई! ये समझदारी है! अयोध्या जीता, काशी की राह बनी, मथुरा की बारी आएगी — लेकिन अब हर गली में झगड़ा बढ़ाकर हिंदू समाज को थका क्यों रहे हो? सद्भाव बनाओ, एकता से लड़ो! नफरत फैलाकर engagement farming मत करो!संघ किसी की गुलामी नहीं करता! न किसी नेता के तलवे चाटता है, न पार्टी से पैसा लेता है, न पार्षद के आगे झुकता है! जो सनातन से सच्चा प्यार करता है, वो काम करता है, करके दिखाता है!हमने श्री कृष्ण कुंज नगर में करके दिखाया! वैलेंटाइन डे के दिन ही भगवान-शिव की मूर्ति स्थापना कराई! लोगों को बताया — सनातन ही सत्य है भाई! प्रेम देखना है तो शिव और सती का देखो! वो अनंत प्रेम है, वो शाश्वत है — वैलेंटाइन का ये पश्चिमी नकली रोमांस क्या बला है? हमने पश्चिमी संस्कृति को रोका, सनातन को मजबूत किया — बिना एक पैसा बाहर से लिए, सिर्फ मोहल्ले की एकता से!ऐसे कितने आए और गए भाई, जो संघ की विचारधारा को रोकने की कोशिश की! सब चले गए, संघ बना रहा! क्योंकि संघ विचारधारा है, जिंदा है, अमर है!अब संघ पर गाली मत दो! क्योंकि संघ को गाली हर स्वयंसेवक को गाली है! हर हिंदू योद्धा को गाली है!विचारधारा पर कायम रहो, काम करो, एकजुट हो! जय श्री राम! जय श्रीकृष्ण!

इतना भी पेलाई मत करिए मालिक की अंगड़ाई लेनी मुश्किल हो जाए..

समझना ही कौन चाहता है अब, मुझे तो आजतक समझ नहीं आया.

M b sangh me jata tha prathmik varg kia hu lekin ye muslamno ke bhuke hai ek muslim b aata tha shakha me uski gaand chaatne me lge rhte the jese maan hi lia ho usse party ka leader bnaege islie maine jb bhedbhav dekha to shakha jana hi chhod dia

संघ को अपना प्रमुख बदलने की आवश्यकता है।

@ajeetbharti ji..! Jab batane ko kuchh na ho toh.. aisi jumlebaazi shuru ho jati hai. Sangh ko Mohan Bhagwat ke style icon Salman Khan hi samjh skte hain... ya Mohan Bhagwat unko.. Nire Bhartiya kya jane.. RSS ko.?

Waise ajeet bhai, aj kal sangh mein guruji se jdya ambedkar ka gun gaan chal rha hai, 1940 -73 tam rss head the, 0 se national organization bana dia, 1948 mein ban or rss ke logo ko bhi jail mein dala gaya, par ab guruji nai, ab toh bus ambedkar hi chal rha hai

आप तो फाड़कर रख देते हो🤪

और जो समझदार ना हों उनके तो बिल्कुल नहीं 😂

अजीत भाई, बहुत ही स्पष्ट व सटीक विचार रखे हैं।❤ गोल-गोल बातें करने में मोहन भागवत जी को निपुणता प्राप्त है। इनके नेतृत्व में संगठन का वैचारिक पतन हो चुका है। एक समय था जब संघ को power house कहा जाता था। एक से एक बड़े तपस्वी योद्धा संघ में पैदा होते थे। अब दलालों का जमावड़ा है।

संघ को समझना सबके बस की बात नहीं क्योंकि संघ दोगला है। पावर के हिंदू के पास और उसके बाद ढाबा साहब और हिजाबी प्रेमी होकर घूमते फिरेगा। ऐसे दोगले और कुकर्मी को समझने के लिए पैनी दृष्टि चाहिए।
