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सुदामा कोटा का असली खेल समझिए #EWS
200,496 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)
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👉 यह बात सही है कि कुछ सवर्ण ग़रीब हैं यानी EWS हैं लेकिन उसके लिए सरकार की हजारों करोड़ ग़रीबों की मनरेगा जैसी योजनाएँ हैं आरक्षण कोई गरीबी हटाओ योजना नहीं है, आरक्षण तो प्रतिनिधित्व के लिए है, सवर्ण का प्रतिनिधित्व तो पहले से ही आबादी से कई गुना ज़्यादा है फिर EWS आरक्षण सिर्फ सवर्ण को क्यों? ♟️भारत में 10% सवर्ण के गरीबों को 10% EWS आरक्षण मिल रहा है, बाकी 50%UR कोटा उनके लिए तो है ही, EWS आरक्षण सभी गरीबों के लिए नही है, बल्कि ब्राह्मण, ठाकुर, खत्री, बनिया, माहेश्वरी और कायस्थों के लिए है जिनका सालाना आमदनी 08 लाख रुपये तक है यानी हर महीने 66,000 रुपये कमाने वाले गरीब कैसे ? ♟️EWS आरक्षण SC, ST, OBC बहुजन समाज के लिए बहुत बड़ा फ्रॉड है. यह आरक्षण कुछ मुट्ठी भर सवर्ण जातियों को दिया जाने वाला भारत में पहला "जातीय आरक्षण" है जो कि असंवैधानिक है। ♟️ पिछड़ों को आरक्षण देने के पीछे ठोस डाटा है। वैज्ञानिक आँकड़े हैं, कमीशन का रिकमेंडेशंस है सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक पिछड़ापन है। ♟️दलित और आदिवासियों का आरक्षण भी छुआछूत व हजारों वर्षों से शोषण व बन्चना जैसे सामाजिक और ऐतिहासिक उत्पीड़न के आधार पर दिया गया है। ♟️EWS के पीछे कोई वंचना, शोषण का मॉडल नहीं है, किसी कमीशन का रिकमेंडेशन नहीं है, कोई डाटा नहीं है, एक आधार है और वो है ग़रीबी हैं गरीब तो सब जगह हैं, फिर उन्हें क्यों नहीं ? #EWS से निकली आग ने सभी संस्थाओं को बर्बाद कर दिया है हर तरफ़ धांधली है, साल में 7 लाख 99 हज़ार कमाने वाला आदमी भी गरीब है, उसका कटऑफ़ OBC, SC से नीचे जा रहा है कहीं-कहीं तो ST से भी नीचे जा रहा है। ♟️ EWS ख़त्म करके सुदामा को ग़रीबी से निकालने के लिए ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रम चलाए जाने की ज़रूरत है नहीं तो OBC, SC, ST की आने वाली नस्लें बर्बाद हो जाएंगी!

अनपढ़ गवारों को क्या पता ईडब्ल्यूएस उसके लिए आरक्षण है जिसको किसी प्रकार का आरक्षण नहीं मिलता इसमें सभी धर्म के लोग हैं हिंदू मुस्लिम सिख इसाई जैन पारसी

अगर ईडब्ल्यूएस आरक्षण इतना ही अच्छा है तो जातिगत आरक्षण खत्म करके 50% ews आरक्षण और 50% अनरिजर्व कोटा होना चाहिए

कटोरा छाप भिखारी

बिल्कुल सही कहा है इस देश की ज्यूडिशरी में अधिकांश जज सवर्ण जातियों से है वो दिन रात सिर्फ अपनी जाति को ऊपर उठाने के लिए कार्य करते है,

मनुवादी ब्यवस्था चल रही है।

इसी को कहा जाता है पढ़ा लिखा जाहिल ये जाहिल जिस 50% की बात कर रहा है वो तो सब के लिए है उसमें तो कोई भी आ सकता है पिछवाड़ा में दम है तो आ जाओ उस 50% का fee भरो और आ जाओ उस 50% में एग्जाम देने

शिक्षक महोदय को कभी मेरिट, अति शिक्षित अभ्यर्थी के बारे में नहीं सुना है ताकि देश का तेज विकास हो, बस सुना है तो केवल आरक्षण आरक्षण आरक्षण जाति जाति जाति आरक्षित सीट आरक्षी सीट और कोई ज्ञान नहीं।

इस चू....... को कैसे पता है कि 10% आबादी है सवर्ण की और। इसको 40 % अनारक्षित कोटि का मतलब भी ठीक से समझ नही आता है कि वो सब के लिये खुली कोटि होती है ना कि सिर्फ़ सवर्ण के लिए।

बेटा धन्यवाद बेटा तुमको कम से कम तुम्हें पता तो है कि कौन ऊंची जाति का है हमें तो पता चला संविधान ने बराबर कर दिया था
