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सोनू पासवान ने फैज की हत्या कर दी लेकिन मीडिया खामोश प्रशासन खामोश ओर न्यायालय भी खामोश ना सोनू के घर पर बुलडोजर चला ना मीडिया का विधवा विलाप हुआ क्यों हत्या मुस्लिम की हुई है अगर हत्या हिंदू की होती ओर हत्यारा मुसलमान होता तो मीडिया प्रशासन सब...

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सूर्या चौहान की हत्या असद ने की . असद मुस्लिम था… चिराग त्यागी की हत्या यश ने की… यश हिंदू है… दोनों घटनाएँ गाज़ियाबाद जिले की हैं . दोनों मामलों में हत्यारे मृतकों के दोस्त थे . दोनों हत्याएँ सुनियोजित तरीके से की गईं . दोनों घटनाएं यूपी में हुई . क़ानून के मुताबिक दोनों मामलों में सख्त सज़ा का प्रावधान है . लेकिन दोनों घटनाओं में फर्क क्या है ? सूर्या का कातिल मुस्लिम है ,चिराग का कातिल हिंदू है . सूर्या के क़ातिल असद को योगी की पुलिस ने एनकाउंटर में मारने का दावा किया है. सूर्या चौहान की हत्या को लेकर बीजेपी सांसद , विधायक और मंत्री समेत तमाम हिंदू संगठनों ने मोर्चा संभाल रखा है. योगी आदित्यानाथ तक बयान दे चुके हैं . हत्यारे असद की आड़ में बीजेपी और मीडिया का ज्वाइंट बेंचर अपने काम पर लग गया है. असद का मुसलमान होना ही टीवी चैनलों के लिए एजेंडा बन गया है . सोशल मीडिया पर मामले पर काफी ज़्यादा आउटरेज देखा जा रहा है लेकिन सवाल ये है कि क्या चिराग त्यागी के मामले में भी वैसा ही आक्रोश क्यों नहीं दिख रहा है ? आख़िर सूर्या की हत्या पर आवाज़ बुलंद करने वाले चिराग की हत्या पर उतने मुखर क्यों नहीं दिखे ? हत्या तो दोनों की हुई लेकिन चिराग की हत्या को बीजेपी नेता और हिंदुवादी संगठन मुद्दा क्यों नहीं बना रहे हैं ? वजह सिर्फ एक है . पैरा एथलीट चिराग त्यागी का हत्यारा हिंदू है , मुसलमान नहीं . इसमें हिंदू- मुस्लिम एंगल नहीं है .

Ajit Anjum

73,722 views • 3 months ago

बरेली के सुभाष नगर में समरीन नामी युवती ने धर्मांतरण कर हिंदू युवक से शादी कर ली। इस ख़बर को हिंदी मीडिया की हेडलाइन ऐसी ही है जैसी भाजपा और हिंदूवादी संगठनों की भाषा होती है। भारत समाचार | Bharat Samachar ने लिखा "समरीन घर वापसी कर बनी सुमन।" वहीं Dainik Jagran ने लिखा, "प्यार के लिए समरीन ने अपनाया हिंदू धर्म, मित्रपाल संग शादी के बंधन में बंधी।" अब इस तस्वीर का रुख पलट कर देखिए। अगर युवक मुस्लिम होता और युवती हिंदू होती और वह युवती धर्मांतरण कर मुस्लिम युवक से शादी करती, तो यही मीडिया उस शादी को लव जिहाद करार दे रहा होता। जिस मुफ्ती ने निकाह पढ़ाया होता वह भी जेल में होता। वहीं सोशल मीडिया पर सक्रिया जाम्बी गैंग उस मुस्लिम युवक से शादी करने पर उस युवती पर लानत भेज रहा होता, अतीत में घटित कुछ एक घटनाओं का हवाला देकर उसके लिए बद-दुआएं कर रहा होता। यही निष्पक्षता है! जो अपने-अपने हिसाब से तय होती है। देश के मीडिया, देश सरकारी मशीनरी के निष्पक्षता के गुब्बारे की हवा आए दिन निकलती रहती है।

Wasim Akram Tyagi

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