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समाज के खोखलेपन की तस्वीर... लाठी डंडों से यह युद्ध आस्था धाम खाटू श्याम जी में लड़ा जा रहा है। महिलाओं पर भी लठ बरसाए जा रहे हैं और महिलाएं भी लठ बरसा रही हैं। बात कितनी बड़ी है, यह जाने बिना इस युद्ध की गंभीरता का आकलन नहीं...

26,417 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

11 条评论

अधिवक्ता जी 的头像
अधिवक्ता जी1 年前

जिनकी वजह से दुकानदारों के घर चलते है इनके परिवार पलते है ये मूर्ख उन्हीं श्रद्धालुओं पर लाठी डंडा बरसा रहे हैं...! आज के युग में मोन ख़ाली मीडिया ही नहीं है व्यक्ति भी यही सोच ले कर चलने lga है कि हमें क्या...!? खेर हारे का सहारा खाटू श्याम हमारा 🙌🙏🚩

Ink Idea 的头像
Ink Idea1 年前

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Lakhraj Awana1 年前

ये बहुत ही शर्मनाक व निंदनीय है ये कैसे एक आम भक्त पर दुकानदार गुंडे बनकर टूट पड़ते हैं। सजा मिलनी चाहिए । महिला अगर बचाने नहीं आती तो मार ही डालते ये गुंडे @RajPoliceHelp @SikarPolice @PoliceRajasthan @RajCMO @GovindDotasra

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Deepak1 年前

खरीददारी बंद कर दो। वैसे भी झंडे फूल बाहर ही रखवा देते है। सच्चे मन से जाओ और दर्शन कर आओ। कुछ मत खरीदो। सब लाइन में आ जाएंगे।

Ras Student 的头像
Ras Student1 年前

दुकान वालों की जिंदगी इन्हीं श्रद्धालुओं की वजह से चलती है लेकिन कोई बिना सामान खरीदे दुकान के सामने एक मिनट ही खड़ा नहीं होना चाहिए खाटूश्यामजी के आतंकी दुकान वाले

लक्ष्मण भाटी 🇮🇳 的头像
लक्ष्मण भाटी 🇮🇳1 年前

श्रद्धा व भक्ति स्थल पर ऐसा दृश्य देखकर बहुत दुख हो रहा हैं।

Ravi dhankar 的头像
Ravi dhankar1 年前

यह वहां के स्थानीय लोगों और दुकानदारों के लिए बहुत ही शर्म की बात है लोग दूर दूर से ईश्वर का दर्शन करने के लिए वहां आते हैं लेकिन वहां के दुकानदारों को मात्र अपने धंधे से मतलब है जबकि वो वहां कर्म के साथ साथ धर्म की सेवा भी कर सकते हैं। ऐसे दुकानदारों का बहिष्कार कर देना चाहिए और लोगों को अपने घर से या नजदीकी दुकान से ही सामान लेकर वहां जाना चाहिए

जय सनातन 的头像
जय सनातन1 年前

चोटियों जी आप नही पहचान पयोगे दर्शनार्थियों का दर्द वहां के लोकल लोग पार्किंग से लेकर मंदिर मैनेजमेंट तक लाठी लेकर लोगो को मारने तैयार रहते है ,अब ये बेचारे सहन नही कर पाए बाकी चुप निकल जाते है क्या करना एक दिन की बात है , वहां के लोग बहुत बदतमीज है

Dr. Sonu Sharma 的头像
Dr. Sonu Sharma1 年前

खाटू श्याम जी पहले सब सही था पर अब VIP दर्शन अधिक पार्किंग चार्ज प्रसाद भोग, चूरमा, पेड़े तकरीबन मिलावटी होटल्स के मनमाने चार्ज और दुर्व्यवहार गंदकी का साम्राज्य बेवजह लंबी परिक्रमा युक्त मार्ग जेबकतरे जैसे दूषण बढ़ गए है। प्रशाशन को समय रहते उचित कदम उठा लेने चाहिए।

Sanjeev Vaishnav 的头像
Sanjeev Vaishnav1 年前

भाई साहब खाटू श्याम जी में ज्यादातर दुकानदार, पार्किंग,होटल चलाने वाले हरियाणा और बाहर से आए लोग है जो अपनी मनमर्जी से गुंडागर्दी करते है मेरे साथ भी घटना हो रखी है पार्किंग को लेकर जब 50 रुपए की जगह 200 रुपए देने पड़े लोकल होकर भी।

सोनू जांगिड़ 的头像
सोनू जांगिड़1 年前

खाटू श्यामजी के नजदीक होकर (20km) भी कभी जाने का मौका नहीं बना लेकिन जबसे यह वीडियो देखा है अब जाने का मन‌ भी नहीं है। दुकानदार के रूप में यह लोग लालची लोग है जिन्हें भक्तों की आस्था से मतलब नहीं बस पैसे कमाने से मतलब है। परमानंद जी महाराज की जय हो (कुण्डा धाम)

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स्त्री ने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है । वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है । युधिष्ठिर जैसा अद्भुत आदमी द्रौपदी को जुए में दाँव पर लगा देता है ! फिर भी कोई यह नहीं कहता कि हम कभी युधिष्ठिर को धर्मराज नहीं कहेंगे । नहीं, कोई यह नहीं कहता ! बल्कि कोई कहेगा तो हम कहेंगे कि अधार्मिक आदमी है । नास्तिक आदमी है, इसक़ी बात मत सुनो ! स्‍त्री को जुए पर, दाँव पर लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत में स्‍त्री सम्पदा है, सम्पत्ति है । हम हमेशा से कहते रहें हैं, स्‍त्री सम्पत्ति है और इसीलिए तो पति को स्वामी कहते हैं । स्वामी का मतलब आप समझते हैं, क्या होता है ? अगर हिन्दुस्तान की स्‍त्री में थोड़ी भी अक्ल होती तो एक—एक शब्द से उसे ‘#स्वामी’ निकाल बाहर कर देना चाहिए । कोई पुरुष कोई स्‍त्री का स्वामी नहीं हो सकता । स्वामी का क्या मतलब होता है ? स्‍त्री दस्तखत कर देती है अपनी चिट्ठी में ‘ #आपकी_दासी ’ और पति देव बहुत प्रसन्न हो कर पढ़ते हैं । बड़े आनन्दित होते हैं कि बड़ी प्रेम की बात लिखी है । लेकिन इसका पता है कि स्वामी और दास में कभी प्रेम नहीं हो सकता । प्रेम की सम्भावना समान तल पर हो सकती है । स्वामी और दास में क्या प्रेम हो सकता है ? इसलिए हिन्दुस्तान में प्रेम की सम्भावना ही समाप्त हो गयी । हिन्दुस्तान में स्‍त्री—पुरुष साथ रह रहे हैं और साथ रहने को प्रेम समझ रहे हैं ! वह प्रेम नहीं है । हिन्दुस्तान में प्रेम का सरासर धोखा है । साथ रहना भर प्रेम नहीं है । किसी तरह कलह कर के 24 घण्टे गुजार देना, प्रेम नहीं है । ज़िन्दगी गुजार देनी प्रेम नहीं है । प्रेम की पुलक और है । प्रेम की प्रार्थना और है । प्रेम की सुगन्ध और है । प्रेम का सँगीत और है । लेकिन वह कहीं भी नहीं ! असल में गुलाम और दास में, मालिक में और स्वामी में, कोई प्रेम नहीं हो सकता । लेकिन हमारे खयाल में नहीं है यह बात कि पूरब की स्‍त्री नेहु विशेष कर भारत की स्‍त्री ने अपनी आत्मा का अधिकार ही स्वीकार नहीं किया है । आत्मा की आवाज भी नहीं दी है । उसने हिम्मत भी नहीं जुटायी कि वह कह सके कि ‘#मैं_भी_हूँ !

तृप्त ...🖤

210,828 次观看 • 2 年前

धीरे-धीरे सबका नंबर लगने लगा है. जब सेनाओं के लिए ‘अग्निपथ स्कीम’ आई थी, तो आवाज़ भी आई थी कि हमने तो ऐसी कोई स्कीम मांगी नहीं थी, हमसे किसी ने इस पर चर्चा ही नहीं की थी. और जनरल एमएम नरावने की बातें भी याद आती हैं, लेकिन उस समय कोई सेनाओं के पक्ष में नहीं बोल पाया था. सेनाओं की पुकार अनसुनी कर दी गयी और इस वर्ष अग्निवीरों के 4 वर्ष पूरे हो रहे हैं. अब CAPF के इस बिल के समय आप चमत्कारों की कामना ज़रूर कर सकते हैं, कि ये पास नहीं होगा, लेकिन BJP सरकार इस बिल को कल एकतरफ़ा पास करा देगी. मैं तो समझ ही नहीं पाती कि क्या किसी देश की सरकार समाज में कर दिये ध्रुवीकरण के बाद अब अपनी सेनाओं में भी दो खेमे खड़े कर रही है, CAPF में भी दो खेमे खड़े कर रही है!! क्या यह सरकार भारतीयों द्वारा, भारतीयों के हित में चलाई जा रही है, या इसमें कोई विदेशी प्रभाव शामिल हो गया है ? यह सवाल उठता है कि क्या यह सरकार अमेरिका या किसी बाहरी एजेंसी के प्रभाव में चल रही है !! बहुत संदेह होता है कि क्या कोई भारतीय नेतृत्व स्वयं अपने ही देश की सेनाओं को कमजोर करने का काम कर सकता है ? #CAPFBill_काला_कानून

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

33,371 次观看 • 5 个月前

SIR एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है और यह 20–22 वर्षों के बाद हो रही है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां जनसंख्या भी सबसे अधिक है, इसलिए तुलनात्मक दृष्टि से नाम कटने वालों की संख्या यहां ज्यादा दिखाई देती है। चुनाव आयोग ने बहुत स्पष्ट रूप से पूरा विवरण दिया है कि कितने लोग मृत पाए गए, कितने लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, कितनों के नाम डबल वोटर के रूप में दर्ज थे और कितने लोग अवेलेबल नहीं हैं। जो यह कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कितने घुसपैठिए निकाले गए, तो इसे अपने-आप समझना चाहिए कि SIR की प्रक्रिया के बाद जो लोग गायब हैं या सामने नहीं आ रहे हैं, वे घुसपैठिए हैं या कौन हैं। उदाहरण के तौर पर, बिहार में 42 लाख लोगों के नाम कटे, लेकिन 42 लोग भी सामने नहीं आए। मान लीजिए उत्तर प्रदेश में 70 लाख लोग गायब हैं, तो जो लोग अवेलेबल नहीं हैं, उनके नाम पर भी इस बात की संभावना रहती थी कि कोई और आकर वोट डाल दे।जो संभावना अब समाप्त हो गई है । अब SIR की प्रक्रिया में यदि इतने लोग गायब हैं और उनमें से कोई भी दावेदार सामने नहीं आ रहा, तो यह समझा जा सकता है कि ये कौन लोग हैं? जो संदिग्ध और संदेहास्पद परिस्थितियों में वोटर लिस्ट में दर्ज थे, लेकिन वास्तविकता में उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

14,534 次观看 • 8 个月前

आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

32,660 次观看 • 1 个月前

मेले में चूरू-सीकर प्रशासन कहां है??? सालासर बालाजी महाराज का शारदीय मेल परवान पर है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से हजारों श्रद्धालु रोज सालासर पहुंच रहे हैं। इनमें एक बड़ी संख्या पैदल चलकर सालासर पहुंचने वालों की भी है। मैं खुद पिछले तीन दिन से चूरू से सालासर की पदयात्रा में शामिल रहा। रास्ते में राजस्थान और हरियाणा के सेवाभावी लोगों की मनुहार मंत्रमुग्ध करने वाली थी। हर किसी के लिए हर कहीं चाय, पीने का पानी, नाश्ता, भोजन, गर्म पानी से स्नान, जूस, फ्रूट, दवा, पैरों की मालिश आदि आदि इतनी सारी सेवाएं उपलब्ध थी कि यात्री सफर की थकान भूल जाए। सभी प्रकार की सेवाएं समाजसेवी संस्थाओं और व्यक्तियों की ओर से थी और बहुत सुखद ये कि हर सेवा निरंतर और निर्विघ्न थी। सवाल सिर्फ यही आ रहा था कि जनता की इतनी बड़ी भागीदारी वाले आयोजन में भारी-भरकम सरकार और दोनों जिलों (चूरू-सीकर) का प्रशासन कहां है? क्या कर रहा है? क्या प्रशासन को किसी ने इत्तिला नहीं दी कि रोज हजारों श्रद्धालु हाइवे पर "जय बाबा की" के जयकारे लगाते हुए गुजर रहे हैं? क्या किसी ने प्रशासन को यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि इन श्रद्धालुओं में करीब आधी संख्या महिलाओं की भी है? क्या किसी ने यह नहीं बताया कि रास्ते में स्वच्छ भारत अभियान के तहत आए मोबाइल टाॅयलेट इस रास्ते में जगह-जगह रखे जा सकते हैं? क्या कोई यह बताने वाला नहीं मिला कि इस मार्ग पर कोई पैदल पथ नहीं है? वाहन और पदयात्रियों के लिए एक ही मार्ग है? सवाल तो और भी बहुत हैं। क्या प्रशासन ने इस राष्ट्रीय ख्याति के मेले को लेकर कोई कायदे की बैठक भी की? शायद नहीं। अगर की होती तो इन मुद्दों पर तो बात और अमल होता ही, साथ ही यह बात भी होती कि इस मेले में बहुत बड़ी संख्या में डीजे आते हैं और बहुत ज्यादा शोर करते हैं। इनके समाधान पर कोई बात हो सकती थी। जगह-जगह लगे भंडारो और पानी की व्यवस्था से बहुत बड़ी संख्या में प्लास्टिक का वेस्ट निकलता है इसके समाधान पर भी कोई बात हो सकती थी और स्वच्छ भारत अभियान के तहत कोई जागरूकता का कार्यक्रम चलाया जा सकता था। लेकिन लगता है प्रशासन ने इन पदयात्रियों को बाबा के भरोसे ही छोड़कर रखा हुआ है। इससे प्रशासन की बाबा हनुमान जी के प्रति सच्ची श्रद्धा और आस्था का भी प्रमाण मिलता है। हमारे चूरू और सीकर जिले के नेताओं की तो बालाजी में अटूट आस्था है ही कि उन्होंने कभी इन पदयात्रियों के बारे में कुछ भी नहीं सोचा। सोचा होता तो प्रशासन को कभी बताया भी होता, कुछ करने के लिए कहा भी होता क्योंकि प्रशासन के अफसर तो अस्थाई होते हैं, स्थाई तो नेता ही होते हैं। मेले और पदयात्रा के स्वत: और बालाजी की कृपा से सफलतापूर्वक संपन्न होने की प्रशासन को बधाई। दोनों जिलों के प्रशासक आधी आधी बांट सकते हैं। District Collector & Magistrate, Churu District Collector & Magistrate, Sikar CMO Rajasthan Bhajanlal Sharma Rajendra Rathore राजस्थानी ट्वीट

Arvind Chotia

29,797 次观看 • 1 年前

यह बांग्लादेश की मीडिया है जो रिपोर्ट कर रही है कि बांग्लादेश में लगातार रोहिंग्या मुस्लिम आते जा रहे हैं यहां कॉक्स बाजार जैसा दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी झोपड़पट्टी बन चुकी है और यह रोहिंग्या यहां एक के बाद एक 20 से 25 बच्चे पैदा कर रहे हैं बहुत सारे रोहिंग्या ने बांग्लादेशी डॉक्यूमेंट बना लिए हैं और यह रोहिंग्या लोग बांग्लादेशियों की नौकरी खा रहे हैं नए-नए रोहिंग्या पैदा हो रहे हैं और वापस कोई नहीं जा रहा और ऐसे में अगर भारत अपने यहां अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को बांग्लादेश भेजेगा तो बांग्लादेश जनसंख्या का प्रेशर झेल नहीं पाएगा फिर बांग्लादेश बर्बाद होता जाएगा

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

50,296 次观看 • 3 个月前

“आज देश में एक संप्रदाय के ख़िलाफ़ तलवारें बाँटी जा रही हैं। जज़्बाती और सांप्रदायिक नारे लगाकर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है और उसके ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने की कोशिश हो रही है। लेकिन यह सब सरकार को दिखाई नहीं दे रहा। एक बहरी–गूंगी और निकम्मी सरकार ने मानो आँखें बंद कर ली हैं, मुँह सिल लिए हैं और कानों पर ढक्कन डाल लिए हैं। इन्हें न अन्याय दिख रहा है, न आतंक और न ही समाज को तोड़ने वाली ये खतरनाक साज़िशें। जो लोग नफ़रत फैलाकर देश को सांप्रदायिकता की ओर धकेल रहे हैं, जो गुंडे और अराजक तत्व माहौल ज़हरीला कर रहे हैं; वे सरकार को नज़र नहीं आ रहे। जबकि इन्हीं के कारण कल किसी भी राज्य, किसी भी ज़िले, किसी भी शहर में कोई भी बड़ी और दुखद घटना घट सकती है। यह केवल लापरवाही नहीं, यह देश की एकता और शांति के साथ गंभीर खिलवाड़ है।” नगीना सासंद, Chandra Shekhar Aazad जी

Aazad Samaj Party - Uttar Pradesh

58,614 次观看 • 8 个月前

हमारे देश में और पूरी दुनिया में कंपनी लॉ बनाए जाते हैं। कंपनी लॉ के मुताबिक अगर कोई भी कंपनी ऋण मुक्त होना चाहती है तो उसके पास कई तरीके होते हैं। एक तरीका है- नई कंपनी बनाओ और जो ऋण आपके पास है, उसे ट्रांसफर कर दो। यह कोई क्राइम नहीं है, यह कानूनी व्यवस्था है। हमारे देश में हज़ारों ऐसी मिसाल हैं, जहां कंपनी ऋण से मुक्त होने के लिए नई कंपनियां खोलती हैं और ऋण ट्रांसफर कर देती हैं। इसलिए इस मामले में किसी कानून, PMLA का उल्लंघन नहीं हुआ है, क्योंकि यहां Money ही नहीं है, तो Laundering भी नहीं है। ऐसे में क्राइम कहां से हुआ? दरअसल, यहां क्राइम यह है कि दो व्यक्ति जिनकी मानसिकता ही आपराधिक है, वो एक फेक नैरेटिव चला रहे हैं। अगर क्राइम हुआ है, तो उन दो सूत्रधारों से हुआ है, जिन्होंने इस कानून का दुरुपयोग किया है और गलत प्रचार कर रहे हैं कि अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। यह एक राजनीतिक मसला है और प्रतिशोध की राजनीति है। सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ़ धमकी, प्रतिशोध, उत्पीड़न और डराने की राजनीति कर रही है। कानून का उल्लंघन तो वही करते हैं, जिनकी मानसिकता आपराधिक होती है। हम सबसे पुरानी पार्टी हैं, हमारा लंबा इतिहास है और हम पीछे नहीं हटेंगे। राहुल गांधी जी हमेशा कहते हैं कि जो लोग डराते हैं, वह खुद ही डरे हुए हैं। जो डरे हुए हैं, वह डराने की राजनीति अपनाते हैं और यह केस उसी की एक मिसाल है। : कांग्रेस महासचिव (संचार) श्री Jairam Ramesh

Congress

26,327 次观看 • 1 年前

🛕 सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी ने खुद को बताया था गैर-हिंदू। राहुल गांधी की गैर-हिंदू की तरह एंट्री की गई है। एक बार फिर से बता दें, इस वक्त की यह बड़ी खबर है। राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर जाने पर विवाद हो गया है। सोमनाथ के रजिस्टर में राहुल ने खुद को गैर-हिंदू लिखा है। सोमनाथ मंदिर में एक नियम है कि जो गैर-हिंदू होते हैं, वहां उनको प्रवेश करने से पहले इजाजत लेनी पड़ती है। तो उसी के तहत राहुल गांधी और अहमद पटेल, इन दोनों ने ही सिग्नेचर किए। इन दोनों ने अपने-अपने को डिक्लेयर किया कि वे नॉन-हिंदू हैं और उसके बाद उनको इजाजत दी गई। उसके बाद उन्होंने दर्शन किए हैं। इसकी तस्दीक भी उन सिग्नेचर्स से की जा रही है जो आप देख रहे हैं। बाकायदा यहां के पुजारियों ने कन्फर्म किया कि यह तस्वीर और यह जो सिग्नेचर आए हैं, ये असली हैं। उन्होंने समझाया कि हां, ये सिग्नेचर सही हैं और चूंकि नॉन-हिंदू हैं, इसलिए उन्होंने ये सिग्नेचर किए हैं। उसके बाद जाकर उन्होंने दर्शन किए हैं और विजिटर बुक में बाकायदा एंट्री भी की। पूरे मामले को लेकर अब यह जो विवाद उठा है, जैसे कि मंदिर की विजिटर बुक में आपने बताया कि राहुल की गैर-हिंदू की तरह एंट्री का यह पूरा मामला है, इस बारे में क्या रिएक्शन अभी तक सामने आए हैं? लेकिन रिएक्शन सीधा सा यह है कि बीजेपी से जुड़े लोग इन सिग्नेचर्स को तमाम जगहों पर पहुंचा रहे हैं। अलग-अलग मीडिया ग्रुप्स, समर्थकों के पास। उनका यह कहना है कि राहुल गांधी इस बात को छुपाते क्यों हैं? 🤔 अगर वे नॉन-हिंदू हैं, तो सोमनाथ मंदिर सभी के लिए खुला है, लेकिन एक नियम यह है कि गैर-हिंदू को इजाजत लेनी पड़ती है। और यह नियम वहां ट्रस्ट ने सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते लागू किया था। कुछ साल पहले से ही वे यह सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी से जुड़े लोग पूछ रहे हैं कि राहुल यह बात छुपा क्यों रहे हैं? यह बात उनको जाहिर करनी चाहिए थी। और चूंकि चुनाव का मौका है, इसलिए छोटी-छोटी बातों को भी तूल दिया जा रहा है, एक नए तरीके से। तो अब यह भी एक बड़ा विवाद का मसला बनता जा रहा है। 🗳️ राहुल के मंदिर जाने को लेकर तो पहले से ही विवाद कई दिनों से चला आ रहा है। बिल्कुल देखिए, वह एक अलग मसला है। वहां पर तो सवाल उठ रहे थे कि राहुल गांधी "सॉफ्ट हिंदुत्व" की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन अब यह बात सामने आ गई कि जो बात छिपाई जा रही थी, सोमनाथ जाकर वह बात साबित हो गई। एक बात और है, जो आज से पहले भी लोग बताते आए थे, लेकिन ट्रस्ट का यह नियम नहीं था। यह नियम अभी दो-तीन साल पहले लागू किया गया है, सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते। 🙏 अब सिर्फ शुक्रिया। फिलहाल पूरी जानकारी के लिए।

अखण्ड भारत संकल्प

12,412 次观看 • 3 个月前

पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के स्पष्टीकरण देने और उनको लेकर श्री मदन राठौड़ द्वारा की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया : देखिए, मेरी दृष्टि में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। पहली बात तो यह है कि मैं उनकी पार्टी के मामलों में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता। लेकिन जो हालात हैं, जिस प्रकार से बीजेपी के अध्यक्ष बोलते हैं, उनकी एक अलग ही एप्रोच है ,बोलने में भी और व्यवहार में भी। व्यक्तिगत रूप से वे अच्छे और व्यवहारिक व्यक्ति हैं, हमारे उनसे अच्छे संबंध हैं। लेकिन जब पार्टी का दबाव होता है तो पता नहीं वे क्या बोल जाएं,ऐसी स्थिति बन जाती है। चाहे टिप्पणी हमारे बारे में हो या वसुंधरा जी के बारे में ,क्या कोई पीसीसी अध्यक्ष या बीजेपी अध्यक्ष इस तरह कहता है कि वसुंधरा जी बार-बार मुख्यमंत्री बनेंगी क्या? ऐसी टिप्पणी कम से कम मोदी जी के लिए छोड़नी चाहिए थी, या फिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को करनी चाहिए थी। खैर, यह उनकी पार्टी का मामला है, हम क्या कर सकते हैं। वसुंधरा जी को जवाब देने या सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि लोग समझते हैं कि उनकी भावना क्या थी और उन्होंने किस संदर्भ में बात कही थी। अनावश्यक टिप्पणियां की गईं। हालांकि, यह उनकी अपनी मर्जी है। वसुंधरा जी कुछ कह रही हैं, मदन राठौड़ कुछ और कह रहे हैं यह उनकी पार्टी की स्थिति है। ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस में झगड़े हैं, लेकिन वास्तविक दुर्गति तो इनकी हो रही है। आप खुद देख रहे हैं कि कौन क्या बोल रहा है। इनकी स्थिति सड़कों पर आ गई है। हम सब एक हैं। राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और उसी तरह आगे बढ़ रही है। यहां पर परंपरा रही है कि सरकारें वन बाय वन बदलती हैं। जूली साहब यहां खड़े हैं, हमारे नेता प्रतिपक्ष हैं। वे भी मेरी बात का समर्थन करेंगे कि अगली बार कांग्रेस ही आएगी। मीडिया द्वारा श्री मदन राठौड़ की उस बयानबाजी पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर, जिसमें मेरे द्वारा पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता संबंधी प्रतिक्रिया का जिक्र किया गया: देखिए, लोग संदर्भ को पढ़ते नहीं हैं। मैंने कहा था कि हमने दुनिया के सामने एक अवसर गंवा दिया। मध्यस्थता करने का काम हिंदुस्तान को करना चाहिए था। दुनिया में भारत का एक अलग ही आभामंडल (औरा) है। हमारा देश शांति, भाईचारे और अहिंसा की बात करने वाला देश है। दुनिया के कई देश उम्मीद कर रहे थे कि भारत आगे आकर अपील करेगा और मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास करेगा। लेकिन उसके बजाय पाकिस्तान जैसे देश की चर्चा होने लगी, जिसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और जिस पर वर्षों से ऐसी छवि बनी हुई है। जब वही देश शांति स्थापित करने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से भारतीयों को दुख होता है। मैंने वही दुख प्रकट किया था। यदि मदन राठौड़ मेरे इस भाव को नहीं समझ पा रहे हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप बताइए, पाकिस्तान की क्या स्थिति है? इंदिरा गांधी जी के समय उसके दो टुकड़े हो गए थे। क्या वह कुछ कर पाया? फिर भी आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है। आज जब इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति से पूरी दुनिया प्रभावित और चिंतित है, तो जो भी देश शांति की बात करेगा, लोग उसकी ओर देखेंगे। इस समय दुनिया के कई देश इस्लामाबाद की ओर देख रहे हैं कि वहां क्या निर्णय होगा। मेरी बात केवल इतनी थी कि वह स्थिति भारत की होनी चाहिए थी। मेरा मतलब ये था।

Ashok Gehlot

24,914 次观看 • 5 个月前

दिव्या मदेरणा आजकल काफी प्रखरता से बोल रही हैं। ऐसा लगता है कि गांधी-नेहरू परिवार को घेरने की सरकार की रणनीति बहुत उलटी जा रही है और उसने काँग्रेस के नेताओं के बॉडी लैँग्वेज ही नहीं बदली, बल्कि उनके तेवर भी तीखे और पैने कर दिए हैं। मदेरणा ने आह्वान किया है कि जो लोग इस समय चुपचाप बैठे हैं और इस संघर्ष में भागीदार नहीं बन रहे, वे अपराधी हैं। मदेरणा की धारदार स्पीच आने वाले दिनों के लिए इस बात की आहट है कि काँग्रेस में नया नेतृत्व अच्छे से उभार पर है। पहले जब भाजपा सत्ता में नहीं थी तो उसके नेताओं के भाषण काफी पैने होते थे, लेकिन आजकल वहाँ से अभी ऐसे भाषण सुनाई नहीं दे रहे। इससे साफ है कि प्रतिरोध की आवाज़ में ही दमखम रहता है। Divvya Mahepal Madernna

Tribhuvan_Official

14,394 次观看 • 1 年前

#जो लोग मुसलमान के बच्चों को आतंकवादी बताते हैं कि वह मदरसे में पढ़ेंगे तो आतंकवाद बनेंगे मदरसे में आतंकवाद की शिक्षा देते हैं तो अब मैं उन लोगों से यह जानना चाहती हूं कि यह किस बात की शिक्षा मिली है तुम्हारे बच्चों को यह आतंकवाद की शिक्षा नहीं है क्या यह आतंकवादी नहीं बन रहे क्या क्या मंदिरों में भी आतंकवादी की शिक्षा देने लग गए हैं क्या मैं शासन और प्रशासन और प्रशासन से यह पूछना चाहती हूं कि यह सब कुछ क्या हो रहा है अगर यही कोई मुसलमान वीडियो बनाकर डाल देता तो अब तक बहुत एक्शन हो जाते और यही हिंदुओं ने डाली है तो अभी तक इस पर कुछ एक्शन या कार्रवाई भी नहीं हो रही

mohd Asif Help

43,274 次观看 • 2 个月前

आपको शर्म आनी चाहिए खड़गे जी... मल्लिकार्जुन खड़गे जी को दिक्कत महाकुंभ में उमड़ रही करोड़ों हिंदुओं की भीड़ से है। इन्हें हर उस अवसर से दिक्कत है जहां हिंदू समाज एकजुट होता है। एकजुट दिखता है। इन्होंने अन्य किसी धार्मिक आयोजन में उमड़ने वाली भीड़ पर कभी सवाल नहीं उठाए। प्रयागराज के महाकुंभ में सिर्फ भारतीय ही नहीं, विदेश से भी लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं। और सिर्फ हिंदू ही नहीं, हिंदू धर्म से प्रेम और इसके सिद्धांतों से सहमति रखने वाले अन्य उपासना पद्धति के लोग भी यहां पहुंच रहे हैं। विदेश से आ रही फ्लाइट्स के पायलट जब प्रयागराज के ऊपर से गुजरते हैं तो वे यात्रियों का ध्यान आकर्षित करवाते हैं कि यहां एक ऐसा अनूठा आयोजन चल रहा है जहां दुनिया की सबसे बड़ी भीड़ मौजूद है। नासा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से तस्वीर खींचकर जारी करता है। प्रयागराज महाकुंभ में इस बार व्यवस्थाएं कुछ अतिरिक्त रूप से विशेष की गई हैं और सोशल मीडिया के युग में महाकुंभ का प्रचार भी इससे पहले के महाकुंभों से कुछ ज्यादा हो गया है। कुंभ के आयोजन आदिकाल से चल रहे हैं। किसी सरकार या किसी पार्टी के मोहताज तो नहीं ही हैं महाकुंभ जैसे आयोजन। यहां किसी को आने के लिए पीले चावल भी नहीं दिए जाते और न ही कोई निमंत्रण पत्र जारी होता है। यहां स्वत: स्फूर्त लोग आते हैं। सब एक ही पानी में स्नान करते हैं। किसी से किसी की जाति नहीं पूछी जाती। किसी से किसी का वर्ग नहीं पूछा जाता। जातियों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश करने वाली कांग्रेस को यह कैसे बर्दाश्त हो सकता है कि एक हिंदू आयोजन में आधा देश उमड़ रहा है? ऐसे ऊटपटांग बयान किसी छुटभैयों की ओर से आ सकते हैं लेकिन खड़गे जी की ओर से ऐसे बयान आएं यह बेहद शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक हैं। आप करोड़ों हिंदुओं की भावना का इस तरह से मजाक नहीं उड़ा सकते। कुंभ में जाने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपना पैसा खर्च करके जाता है। जैसी जिसकी श्रद्धा होती है, उस हिसाब से जाता है। पिछले महाकुंभ के दौरान विदेश से एक आए एक व्यक्ति ने सवाल किया था कि महाकुंभ में इतने लोगों को कैसे बुलाया जाता है? उसे जवाब मिला कि किसी को भी नहीं बुलाया जाता। सिर्फ पंचांग के अंदर एक तिथि अंकित होती है और उसके हिसाब से देश भर के लोगों को इसकी सूचना मिलती है और लोग आने शुरू हो जाते हैं। ध्यान रहे, खड़गे जी कोई सामान्य इंसान नहीं हैं। वे उस पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जो पिछले तीन चुनावों से सत्ता से बाहर है और हर बार हारने के बाद ईवीएम पर सवाल उठाती है। जब आप तीन-तीन बार हारने के बावजूद देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं पर इस तरह से चोट करेंगे, उनका मजाक बनाएंगे और फिर उम्मीद करेंगे कि आपको उनके वोट भी मिल जाएं, यह बेहद मुश्किल है खड़गे जी। आपको शर्म आनी चाहिए ऐसे बयान देते हुए। लोग तो कुंभ में भी ऐसे ही जाएंगे और जो आधे मन से जाने का प्लान कर रहे हैं वह भी हो सकता है आपके बयान के बाद जाने का प्लान पक्का कर लें। आप होते कौन हो किसी को अपनी आस्था के हिसाब से किसी भी स्थान पर जाने से रोकने वाले या सवाल उठाने वाले? तत्काल लिखित में माफी नामा जारी कीजिए और महाकुंभ में जाकर 21 डुबकी लगाइए। शायद मां गंगा आपको माफ कर दे। Mallikarjun Kharge Congress

Arvind Chotia

111,324 次观看 • 1 年前