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सामने लोग खड़े हैं मजाल है कि छिछोरापन में कोई कमी हो जाए

1,316,724 views • 5 months ago •via X (Twitter)

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SIR एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है और यह 20–22 वर्षों के बाद हो रही है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां जनसंख्या भी सबसे अधिक है, इसलिए तुलनात्मक दृष्टि से नाम कटने वालों की संख्या यहां ज्यादा दिखाई देती है। चुनाव आयोग ने बहुत स्पष्ट रूप से पूरा विवरण दिया है कि कितने लोग मृत पाए गए, कितने लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, कितनों के नाम डबल वोटर के रूप में दर्ज थे और कितने लोग अवेलेबल नहीं हैं। जो यह कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कितने घुसपैठिए निकाले गए, तो इसे अपने-आप समझना चाहिए कि SIR की प्रक्रिया के बाद जो लोग गायब हैं या सामने नहीं आ रहे हैं, वे घुसपैठिए हैं या कौन हैं। उदाहरण के तौर पर, बिहार में 42 लाख लोगों के नाम कटे, लेकिन 42 लोग भी सामने नहीं आए। मान लीजिए उत्तर प्रदेश में 70 लाख लोग गायब हैं, तो जो लोग अवेलेबल नहीं हैं, उनके नाम पर भी इस बात की संभावना रहती थी कि कोई और आकर वोट डाल दे।जो संभावना अब समाप्त हो गई है । अब SIR की प्रक्रिया में यदि इतने लोग गायब हैं और उनमें से कोई भी दावेदार सामने नहीं आ रहा, तो यह समझा जा सकता है कि ये कौन लोग हैं? जो संदिग्ध और संदेहास्पद परिस्थितियों में वोटर लिस्ट में दर्ज थे, लेकिन वास्तविकता में उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है।

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एक बार फिर NEET परीक्षा की पारदर्शिता और उसे कंडक्ट कराने वाली एजेंसी NTA पर सवाल खड़े हुए हैं। ये सवाल हम नहीं उठा रहे। ये सवाल CBI की FIR से उठे हैं। CBI ने महाराष्ट्र में FIR दर्ज की, जिसमें दो गिरफ्तारियां हुईं हैं। ये गिरफ्तारियां 'एंटी करप्शन एक्ट' के तहत हुई हैं। ऐसे में कुछ सवाल है: • CBI कह रही है कि इस मामले में NTA का कोई अधिकारी शामिल नहीं है। ऐसे में सवाल है कि फिर एक्शन 'एंटी करप्शन एक्ट' के तहत क्यों लिया गया? • जब तीन लोग फरार हैं तो 2 लोगों को जमानत कैसे मिल गई? • क्या यह संभव है कि परीक्षा में इतनी बड़ी गड़बड़ी बिना किसी अधिकारी की मिलीभगत के हो जाए? एक तरफ प्रधानमंत्री 'परीक्षा पर चर्चा' करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ देश में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा हो, जिस पर कोई सवाल ना खड़ा हुआ हो। इस सबके बाद भी सरकार की प्राथमिकता सिर्फ REEL बनाने तक है। : NSUI प्रभारी Kanhaiya Kumar जी

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