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सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात इतिहासकार राजवीर सिंह चलकोई पहुंचे। समारोह में उन्होंने सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए युवाओं को इतिहास से प्रेरणा लेने का संदेश...

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4 साल का, 10 साल का और 15 साल का बच्चा ने पाछो तैयार करयो के... थने थारे बाप को, दादे को पाछो बदलो लेनो है ; राजवीर सिंह चलकाेई बाड़मेर में आयोजित सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जयंती समारोह में मुख्य वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ने हर किसी को भाव विभोर कर दिया। राजवीर सिंह ने कहा कि केवल राजाओं और वीर योद्धाओं का स्मरण किया जाता रहा है। लेकिन,मातृ शक्ति का योगदान में उस समय बेहद अहम था आप सोचिए राजस्थान की यह धरती जहां 18 साल तक के बालक एक योद्धा की तरह युद्ध में उतरते थे। यही कारण रहा कि 480 साल तक राजस्थान अकेले ने मुगलों को रोके रखा। किसी घर में 18 साल तक के बच्चे तक नहीं बचे थे। तो मैं इस मौके पर उन माताओं और मातृ शक्ति को भी दंडवत प्रणाम करता हूं।

Dinesh Bohra

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भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रचिंतक, महान शिक्षाविद् एवं राष्ट्र की अखंडता के अमर प्रहरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती पर उन्हें सादर नमन। राष्ट्रहित, एकात्मता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनका अद्वितीय समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा, ऊर्जा और पथप्रदर्शक बना रहेगा। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने BA Honours English में करने के बाद MA बांग्ला भाषा में किया। वे न सिर्फ़ भारतीय इतिहास के सब से कम आयु के भारत के किसी भी विश्वविद्यालय के कुलपति बने अपितु उन्हीं के कार्यकाल में 1937 में कोलकाता विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह बांग्ला भाषा में संचालित हुआ। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर समारोह के मुख्य अतिथि थे। यह अंग्रेज़ों के समय अंग्रेज़ी के स्थान पर किसी भारतीय भाषा में किसी भी विश्वविद्यालय का संभवतः पहला दीक्षांत समारोह था। यह मातृभूमि, मातृभाषा, भारतीयता और भारतीय भाषाओं के प्रति डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की प्रतिबद्धता, निष्ठा और विपरीत परिस्थितियों में उस पर अमल करने के साहस का प्रमाण है। भारत और भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता के इन्हीं मूल्यों को प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी ने नये सोपान तक पहुंचाया है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

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आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व कृषि मंत्री और देश के ऐसे किसान नेता, जिन्होंने पूरा जीवन किसानों की सेवा में समर्पित किया, स्व. चौधरी चरण सिंह जी की जयंती है। उनकी जयंती को किसान दिवस के रूप के मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह जी ऐसे किसान नेता थे जिन्होंने कांग्रेस में रहते हुए पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की किसान नीतियों का तीखा विरोध किया था और मानने से इंकार कर दिया था। उन्होंने जमींदारी प्रथा का अंत किया था और पूरा जीवन किसानों के लिए जीते रहे। लेकिन कांग्रेस के रहते ऐसे नेताओं का कभी सम्मान नहीं हुआ। अटल जी ने उनके जन्मदिन को किसान दिवस के रूप में मनाए जाने का फैसला लिया। मैं आज उनके चरणों में प्रणाम करता हूं।

Shivraj Singh Chouhan

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किसान हितों के प्रबल पैरोकार और जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जी के निधन का समाचार दुःखद है। आज पूरे देश में भारी शोक है। सत्यपाल मलिक जी का एक लंबा संघर्षशील जीवन रहा। उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत की और देश के तमाम संवैधानिक पदों पर रहकर सांसद के रूप में, केंद्रीय मंत्री के रूप में, आखिर में बतौर राज्यपाल उन्होंने किसान, गरीब, मजदूर, कृषि की आवाज को निर्भीकता से उठाने का कार्य किया। वे कभी सत्ता के दबाव में नहीं आये, ऐसा उनका जीवनकाल और संघर्ष रहा। उनके संघर्ष और निर्भीकता को देशवासी हमेशा याद रखेंगे। दिवंगत पुण्यात्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि और परिजनों व समर्थकों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ।

Deepender Singh Hooda

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