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Ana Sayfaya Dön

सायद आपके लिए महत्वपूर्ण हो।🤔 इस वीडियो में 𝗢𝗖𝗟. 𝗕𝗣𝗖𝗟. 𝗛𝗣𝗖𝗟, 𝗥𝗲𝗹𝗶𝗮𝗻𝗰𝗲 𝗝𝗶𝗼 𝗕𝗣. 𝗡𝗮𝘆𝗮𝗿𝗮. 𝗦𝗵𝗲𝗹𝗹 सभी कंपनियां के पेट्रोल का 𝗖𝗼𝗺𝗽𝗮𝗿𝗶𝘀𝗼𝗻 किया है। जानए बाजार में मिल रहे 𝟭𝟲 अलग अलग तरह के पेट्रोल, जैसे... 𝗫𝗣 𝟵𝟱,𝗫𝗣 𝟭𝟬𝟬 𝗣𝗼𝘄𝗲𝗿 𝟵𝟱, 𝗣𝗼𝘄𝗲𝗿 𝟵𝟳,𝗣𝗼𝘄𝗲𝗿 𝟭𝟬𝟬, 𝗦𝗽𝗲𝗲𝗱, 𝗦𝗽𝗲𝗲𝗱 𝟵𝟳, इन सभी...

41,059 görüntüleme • 1 ay önce •via X (Twitter)

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गद्दार-करी का फैलाया रायता, जनता जुगाड़ से कर रही है साफ़ 🔥👍 जैसे-जैसे पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ रही है, एक क्रिएटर ने फ़्यूल-मिक्सिंग का एक तरीका शेयर किया है। उनका दावा है कि 0% इथेनॉल वाले पेट्रोल को E20 पेट्रोल के साथ मिलाकर E10 ब्लेंड बनाया जा सकता है। क्रिएटर के अनुसार, इससे इथेनॉल के लेवल को बैलेंस करने और फ़्यूल की क्षमता (एफ़िशिएंसी) को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बिना सोचे-समझे फ़्यूल मिक्स करने की कोशिश न करें। अलग-अलग गाड़ियों की फ़्यूल से जुड़ी ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए हमेशा अपनी कार बनाने वाली कंपनी की सलाह और फ़्यूल कम्पैटिबिलिटी (अनुकूलता) को पहले चेक करें। गाड़ी के हिसाब से माइलेज और इंजन की परफ़ॉर्मेंस भी अलग-अलग हो सकती है। क्या आप अपनी कार की कम्पैटिबिलिटी चेक करने के बाद इस जुगाड़ को आज़माएंगे? 👇

Suresh Kapse

112,382 görüntüleme • 4 gün önce

भाजपा के दो समर्थक, दोनों कट्टर दक्षिणपंथी, सनातनी और राष्ट्रवादी, 20% एथेनॉल नीति पर चर्चा कर रहे हैँ । इनका कहना है कि जितना पेट्रोल आप एथेनॉल मिलाकर बचाते हैं, उससे 10 गुना ज़्यादा ईंधन ट्रैफिक जाम और खराब सड़कों में बर्बाद हो जाता है। बाइक और कार मालिकों को एथेनॉल के कारण अपने इंजन की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त किट लगवानी पड़ेगी, उसका खर्च कौन देगा? इथेनोल के उत्पादन में भारी मात्रा में पानी की खपत होती है और इसके पर्यावरणीय प्रभावों पर भी कहीं गंभीर चर्चा नहीं हो रही। इन दोनों से अलग मेरा कहना है कि अकेले दिल्ली में प्रवेश करते समय सभी बॉर्डर पर टोल के कारण जो लंबा जाम लगता है, उसमें जितना पेट्रोल बर्बाद हो जाता है, उसे 100% एथेनॉल नीति भी नहीं बचा पाएगी। Anand Ranganathan Ajeet Bharti

𝙼𝚛 𝚃𝚢𝚊𝚐𝚒

266,333 görüntüleme • 1 ay önce

RAS टाॅपर कुशाल चौधरी को सुनिए इस लड़के ने सेल्फ स्टडी से यह मुकाम हासिल किया है। किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट का उनकी सफलता में कोई योगदान नहीं है। हालांकि फिर भी कोई ना कोई कोचिंग इंस्टिट्यूट उनका फोटो छापने के लिए उनसे संपर्क जरूर करेगा। यह कुशाल का फैसला होगा कि वह किसी कोचिंग को अपने फोटो का उपयोग करने दे या नहीं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आप सेल्फ स्टडी के माध्यम से किसी परीक्षा के टॉपर भी बन सकते हैं। सेल्फ स्टडी में आपका ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता। समय भी कम खर्च होता है। सिर्फ और सिर्फ मेहनत लगती है। आपके भीतर समर्पण कितना है और आपके कमिटमेंट का स्तर क्या है, यही दो चीज महत्व रखती हैं। कोई कोचिंग आपको घोटकर नहीं पिला सकती। कोचिंग आपके गांव में भी नहीं होती। इसके लिए बड़े शहर जाना पड़ता है। वहां किराए पर कमरा लेना पड़ता है। कोचिंग की मोटी फीस लगती है। घर के खाने से आप वंचित रहते हैं। समय बचाने के चक्कर में मैगी जैसी चीजों पर भी निर्भर रहना पड़ता है। गांव आने जाने का खर्च अलग से लगता है। सिटी बसों के धक्के अलग खाओ। ऊपर से बड़े शहर में पढ़ने के लिए जाने वाले युवाओं को भटकाने वाले पहले से बैठे होते हैं। इसलिए अगर आप में वह तत्व है, आप पूरे मनोयोग से मेहनत करने के लिए तैयार हैं तो सेल्फ स्टडी पर फोकस कीजिए। यही आपकी नैया पार लगा सकती है। कुशाल चौधरी को पुनः शुभकामनाएं

Arvind Chotia

41,129 görüntüleme • 10 ay önce

देश- प्रदेश में पेट्रोल - डीजल और सीएनजी के बढ़ते दामों एवं ख़राब होती स्थिति पर मीडिया को आज प्रतिक्रिया दी : विपक्ष मांग क्या कर रहा है? राहुल जी क्या मांग कर रहे हैं? आप देशवासियों को बताओ कि स्थिति यह है, हमारी मजबूरी है, अंतरराष्ट्रीय स्थिति बन गई उसके कारण मजबूरी है और आने वाले वक्त में हमें यह कदम उठाने पड़ सकते हैं। अभी तो खाली मोदी जी ने देशवासियों को आह्वान किया कि आपको क्या-क्या कदम उठाने हैं। वो कदम उठाने के लिए जो कहा गया उसके बाद सब मुख्यमंत्रियों का उन राज्यों में जहां बीजेपी की सरकारें हैं, उनके मंत्रियों का नाटक हुआ, कोई रिक्शा में गए, कोई पैदल गए, कोई इलेक्ट्रिक वैन में गए और वो का वो तमाशा हो रहा है अभी भी। तमाशे से पब्लिक में मैसेज नहीं जाता है। अगर आप हकीकत में कुछ त्याग करते हो, उसका मैसेज सीधा उतरता गले के अंदर ,पर ये खाली तमाशे कर रहे हैं। अब कल परसों और बढ़ा दिए आज सीएनजी के बढ़ा दिए, ये क्या मजाक है। आप खुल के कहो भई ये हमारी मजबूरी है। लोग लाइक करेंगे उस बात को और वो भी समझेंगे कि नेता प्रतिपक्ष का सम्मान किया है, उन्होंने जो मांग की है उसका जवाब दिया है सत्ता पक्ष ने, एनडीए गवर्नमेंट ने, प्रधानमंत्री मोदी जी ने और अमित शाह जी ने। तो ये तो हुई कायदे की बात। ये जो कर रहे हैं वो बिल्कुल ही ऐसे काम कर रहे हैं जिससे कि लोगों में गलतफहमी पैदा हो और लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अब कल कितना बढ़ेगा। इस चिंता में लोग तकलीफ में हैं। पेट्रोल पंप पर लाइनें लग रही हैं ये स्वीकार नहीं कर रहे। मुझे आश्चर्य होता है कि जो हकीकत है कि पेट्रोल वाले कहते हैं एक हजार का पेट्रोल लो और कोई कोटा से आएगा, जयपुर, जोधपुर से आएगा, भरतपुर से आएगा, तीन बार रुक के उसको पेट्रोल भरवाना पड़ता है रास्ते में। तो ये जो प्रैक्टिकल हकीकत है उसको ये सरकार हमारे जो मुख्यमंत्री जी और इनके नेता हैं, यहां के जो हमारे मदन राठौड़ साहब हैं उनके अध्यक्ष हैं, इनका काम ही यही है, झूठ बोलो, बार बार असत्य बोलो और नकार दो कि हो ही नहीं रहा है। अरे भाई पब्लिक दुखी हो रही है। पेट्रोल डीजल मिल नहीं रहा है। लाइनें लगी हुई है। LPG नहीं मिलता दस से पंद्रह दिन तक, ये तो गांव गांव से खबर आ रही है। लोहावट से खबर आ गई, ओसियां से खबर आ गई। स्थिति ऐसी बिगड़ी हुई है। जो एजेंसी वाले हैं LPG वाले वो खुद हमें कहते हैं हमारी स्थिति ऐसी हो गई है, टेंशन होता है क्योंकि पब्लिक को जवाब क्या दें हम लोग? वो इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती। स्थिति स्पष्ट करती तो गांव गांव में मैसेज होता तो जो एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर है, पेट्रोल पंप के मालिक भी हैं, उनको जनता के आक्रोश का सामना नहीं करना पड़ता। गलती केंद्र की है और राज्य सरकार की।

Ashok Gehlot

12,631 görüntüleme • 3 ay önce

माननीय श्री नितिन गडकरी जी,Nitin Gadkari आपसे एक सवाल है। कृपया उत्तर अवश्य दें। जिन वाहनों में स्पष्ट रूप में लिखा है कि वे E20 Compatible नहीं है और केवल E10 पेट्रोल पर चलने के लिए उपयुक्त है, उन वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए? क्या वे अपनी गाड़ियाँ बेच दें या कबाड़ में डाल दें? यदि किसी वाहन के लिए E10 ही उपयुक्त है, तो फिर पेट्रोल पंपों पर E10 का विकल्प क्यों समाप्त किया जा रहा है? उचित व्यवस्था तो यह होनी चाहिए थी कि E10 और E20 दोनों प्रकार का पेट्रोल उपलब्ध रहता, ताकि जिसकी गाड़ी E10 Compatible है वह E10ले सके और जिसकी E20 कंपैटिबल है वह E20 का उपयोग करे। लेकिन आज स्तिथि यह है कि हर किसी को E20 ही लेना पड़ रहा है, चाहे उसके वहां के लिये वह उपयुक्त हो या नहीं । आप मंत्री है, आपके लिए नई गाड़ी लेना आसान होगा, लेकिन उस आम नागरिक का क्या, जिसने अपनी मेहनत और पसीने की कमाई से गाड़ी खरीदी है? मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कह रही हूं कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद मेरी गाड़ी का माइलेज लगभग 30% तक कम हो गया है। और अगर कोई अपनी गाड़ी को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे XP100 पेट्रोल भरवाना पड़ता है, जिसकी कीमत करीब ₹167/लीटर है। सबसे बड़ी बात, यह पेट्रोल हर पेट्रोल पंप पर भी उपलब्ध नहीं है। वाह गडकरी जी! आम आदमी के सामने ऐसा विकल्प रख दिया कि या तो महंगा पेट्रोल भरो या अपनी गाड़ी के इंजन की चिंता करते रहो। कुछ-कुछ वैसे ही हाल हो गया है जैसे LIC वाले कहते है —"जीने से ज्यादा मारने के फायदे है।" अब लगता है कि E10 से जायदा E20 के फायदे गिनाए जा रहे हैं, लेकिन जिनकी गाड़ियाँ E20 Compatible नहीं है, उनकी चिंता कौन करेगा? अगर इस नीति के पीछे कोई ठोस और तर्कसंगत कारण है, तो कृपया देश की जनता को उसका स्पष्ट उत्तर दीजिए। आज इस मुद्दे पर हर वाहन मालिक को आवाज उठानी चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ मेरी गाड़ी का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों का सवाल है जिनके वाहन E20 Compatible नहीं हैं।

Pooja Tiwari

20,249 görüntüleme • 1 ay önce

यह BOSD का Dhruv Rathee जर्मनी में रहता है जर्मन लड़की से शादी किया है ताकि फटाफट से सिटिजनशिप मिल जाए लेकिन यह दोगला कभी जर्मनी की समस्याओं पर वीडियो नहीं बनता क्योंकि इस मालूम है कि अगर इसने जर्मनी के समस्याओं पर वीडियो बनाया जर्मनी 1 मिनट में इसके पिछवाड़े लात मार कर भगा देगा जर्मनी में गंभीर बीमारियों से पीड़ित बड़ों को तो छोड़िए बच्चों को भी अस्पताल में एडमिट होने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है वहां इतनी खराब स्वास्थ्य व्यवस्था हो चुकी हैं और यह रिपोर्ट खुद जर्मनी की मीडिया डॉयचे वेले का है अब आप कल्पना करिए कि अगर यह दुर्दशा भारत में होती तो अब तक यह कितना वीडियो बना दिया होता

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

24,525 görüntüleme • 2 ay önce

मंदिरों को सरकारी प्रशासन के भ्रष्टाचार से बचाया जाए! सभी बड़े मंदिरों पर सरकार के प्रबंधन के बहाने भाजपा और उनके संगी-साथी अप्रत्यक्ष रूप से अपना क़ब्ज़ा करते जा रहे हैं। जो परंपरागत रूप से सैकड़ों सालों से इन मंदिरों के प्रबंधन-संचालन में आस्था से अपने कर्तव्य निभाते आ रहे हैं, उनसे उनके सेवा-भाव के अधिकार छीने जा रहे हैं साथ ही उनके ऊपर अविश्वास प्रकट करते हुए, एक तरह से ये आरोप भी लगाया जा रहा है कि वो इस काम में सक्षम नहीं है या फिर उनका संचालन त्रुटिपूर्ण है। मंदिरों में श्रद्धालु जो दान-पुण्य करते हैं उसका सदुपयोग मंदिर में दर्शन, प्रसाद-भेंट, सुरक्षा, जन सुविधा, धर्मशाला आदि धर्मार्थ कार्यों में होता आया है और सेवा-भाव से भरा आस्थावान प्रबंधन इसीको सुनिश्चित करता है क्योंकि उनका ऐसे धर्म-कर्म से एक बहुत गहरा भक्ति भावना से भरा लगाव होता है। जो लोग बाहरी होते हैं या पेशेवर होते हैं, वो इन सब धार्मिक-निवेश को लाभ-हानि की तराज़ू पर तोलते हैं, उनके लिए ये श्रद्धा का विषय नहीं होता है। ऐसे प्रकरण उपलब्ध हैं जब ऐसे प्रशासनिक लोगों ने मंदिर में चढ़ाये गये बेलपत्रों तक को बेचकर भ्रष्टाचार किया है। कारोबारी भाजपा और उनके धन लोलुप संगी-साथी याद रखें कि धर्म भलाई के लिए होता है, कमाई के लिए नहीं। ये अनायास नहीं है कि जबसे भाजपा आई है एक के बाद एक मंदिरों पर ‘प्रशासनिक क़ब्ज़ा’ होता जा रहा है। ये देश की सांस्कृतिक-धार्मिक परंपरा के विरुध्द है। जो भावना एक न्यास में होती है, वो प्रशासन के उन लोगों में कैसे हो सकती है, जिनका कब स्थानांतरण हो जाए, उन्हें पता नहीं होता और जो शासन के कृपापात्र होते हैं, वो ईश्वर के कृपा पात्र सच्चे न्यासियों जैसे हो ही नहीं सकते हैं। आस्थावान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा।

Akhilesh Yadav

64,997 görüntüleme • 1 yıl önce

जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से वार्ता (दिनांक 8 जनवरी 2025) - इक्वेशन खुद बनाते हैं कि भई किस प्रकार से हम कांग्रेस और बीजेपी दोनों मिल के चुनाव लड़ रही है, ये तो उनका (श्री अरविंद केजरीवाल का) अभियान है, तो मैं तो उनके अभियान के हिस्से के रूप में देखता हूं कि उन्होंने जानबूझ कर के ट्वीट किया होगा जिसके की और मैसेज स्ट्रांग जाए कि कांग्रेस बीजेपी मिली हुई है, जबकि ये असंभव है ,केजरीवाल जी जानते होंगे कि असंभव है कांग्रेस और बीजेपी मिल नहीं सकती, ये मेरा मानना है इसलिए मैं उसको उस रूप में लेता हूं, बाकी तो चुनाव तो अभी शुरुआत हुई है, देखते हैं क्या होता है, पर अच्छी मीटिंग हुई और मैं इस मौके पर कहना चाहूंगा केजरीवाल जी को भी कि ये तो राजनीति चलती रहेगी, हमनें जो यह स्कीम बनाई है 25 लाख का बीमा,वो यूनिवर्सल है। भारत सरकार को भी चाहिए वक्त आ गया है कि आप 70 वर्ष के उम्र के प्लस लोगों को देंगे फ्री इलाज, आपको राजस्थान की स्कीम जो है चिरंजीवी योजना है, हमारे यहां मुख्यमंत्री के नाम से योजना है, किस प्रकार से निरोगी राजस्थान रहे, फ्री मेडिसिन्स है, 25 लाख का बीमा है, राइट टू हेल्थ का एक्ट बनाया हमने सोच समझ के, इस पर अध्ययन करवाना चाहिए भारत सरकार को जिससे कि पूरे देश के अंदर राजस्थान की तरह ही आम लोगों को लाभ मिले क्योंकि ये एक प्रकार से आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर होता है, और जगह तो आप तय करते हो मुझे कितना पैसा खर्च करना है, बीमारी ऐसी चीज है किसके घर में आ जाए बीमारी, कौन सी बीमारी आए, किसी को मालूम नहीं रहता है, किसी को मालूम नहीं रहता है कि मेरे घर में किस व्यक्ति को क्या बीमारी हो गई परिवार के सदस्य को इसलिए बहुत जरूरी है कि इसमें सरकार आगे आए। टाइम आ गया है कि खर्चा इसमें बहुत ज्यादा लगता है लोगों का, बहुत महंगा इलाज होता है, और अभी जो देश भर में जो आयुष्मान भारत चल रहा है न, ये आम लोगों को जानकारी नहीं है कि सबके लिए नहीं है राजस्थान की तरह, ये सिर्फ मैक्सिमम 40% जनता के लिए है। जो डॉ. मनमोहन सिंह जी के वक्त में सर्वे हुआ था सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंसस उनके लिए खाली है। सबके लिए नहीं है। राजस्थान एकमात्र देश में राज्य है जहां सभी पब्लिक के लिए, सभी हाउसहोल्ड के लिए, 1 करोड़ 4 लाख हाउसहोल्ड के लिए सबको यह सुविधा दी गई 25 लाख के बीमा की। ये समझने की बात है। कवरेज पूरे हिंदुस्तान में जो है, कहीं 25% कहीं 40% है, कहीं 15% दी है , कहीं 60% है। आंध्रप्रदेश में 80% है हमारी तरह, हमारा है 90% पर आंध्र के अंदर भी सब जगह बीमा कितने का है ? 5 लाख का है। ये समझने की बात है, पूरे देश के राज्यों में कवरेज कम है, और बाद में बीमा 5 लाख का है। एकमात्र राजस्थान राज्य है जहां बीमा 25 लाख का है, ये दो बात समझने की आवश्यकता है। और तीसरी बात है राइट टू हेल्थ। राइट टू हेल्थ का जब हमनें कानून पास किया है, वैसा कानून हर राज्य में बनना चाहिए मेरा मानना है। तब जाके आप एक सेक्टर ऐसा है जहां पर कब खर्चा आ जाए परिवार पर, लोगों को ऑर्नामेंट बेचने पड़ते हैं, गिरवी रखने पड़ते हैं, प्रॉपर्टी बेचनी पड़ती है इलाज करवाने के लिए,उससे हर परिवार छुटकारा पा सके मेरा ध्येय ये है और ये मैं समझता हूं समय आ गया कि इस पे आगे बढ़ना चाहिए सबको। (Courtesy- First India News)

Ashok Gehlot

26,231 görüntüleme • 1 yıl önce

सभी स्त्री को समर्पित 🙏🙏 आखिरकार महिलाएं सेक्स क्यों चाहती हैं.. अक्सर से,क्स से जुड़ी बातें हम यानी महिलाएं खुलकर नहीं करती हैं। सामाज के हिसाब से ऐसी बाते करना एक महिला को शोभा नहीं देता है। से,क्स एक महिला और पुरुष दोनों की ही बेसिक बॉडी नीड होती है। हो सकता है कई लोगों को इसमें इंटरेस्ट जरा कम हो लेकिन जिन्हे से,क्स पसंद होता है वो एक टाइम पर इसके आदी भी हो जाते हैं। जब बात आती है महिलाओं में से,क्स की तो वो अपनी बातें खुल कर नहीं रख पाती हैं। बता दें, से,क्स महिलाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद कर सकता है। से,क्स के दौरान शरीर और मन दोनों को फायदा पहुंचता है। यह शरीर को एक्सरसाइज की तरह काम करने में मदद करता है जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहता है। यह दिल की सेहत, शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में, नींद को बेहतर बनाने में, तनाव को कम करने में और सतही तौर पर आनंद के अनुभव करने में मदद करता है। इसके अलावा, से,क्स उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है जो संभोग की समस्याओं से पीड़ित हैं जैसे कि से,क्स ड्राइव में कमी या तनाव संबंधी मुद्दों से ग्रस्त हैं। इसलिए, महिलाओं के लिए से,क्स जरूरी होता है, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसलिए, से,क्स के बारे में सोचने से पहले, यह जानना जरूरी होता है कि आपके शारीर और मन के लिए इससे क्या फायदा हो सकता है और आप इसे कैसे संभव तरीके से कर सकती हैं। यह पोस्ट जागरूकता के लिये है अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें
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सभी स्त्री को समर्पित 🙏🙏 आखिरकार महिलाएं सेक्स क्यों चाहती हैं.. अक्सर से,क्स से जुड़ी बातें हम यानी महिलाएं खुलकर नहीं करती हैं। सामाज के हिसाब से ऐसी बाते करना एक महिला को शोभा नहीं देता है। से,क्स एक महिला और पुरुष दोनों की ही बेसिक बॉडी नीड होती है। हो सकता है कई लोगों को इसमें इंटरेस्ट जरा कम हो लेकिन जिन्हे से,क्स पसंद होता है वो एक टाइम पर इसके आदी भी हो जाते हैं। जब बात आती है महिलाओं में से,क्स की तो वो अपनी बातें खुल कर नहीं रख पाती हैं। बता दें, से,क्स महिलाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद कर सकता है। से,क्स के दौरान शरीर और मन दोनों को फायदा पहुंचता है। यह शरीर को एक्सरसाइज की तरह काम करने में मदद करता है जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहता है। यह दिल की सेहत, शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में, नींद को बेहतर बनाने में, तनाव को कम करने में और सतही तौर पर आनंद के अनुभव करने में मदद करता है। इसके अलावा, से,क्स उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है जो संभोग की समस्याओं से पीड़ित हैं जैसे कि से,क्स ड्राइव में कमी या तनाव संबंधी मुद्दों से ग्रस्त हैं। इसलिए, महिलाओं के लिए से,क्स जरूरी होता है, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसलिए, से,क्स के बारे में सोचने से पहले, यह जानना जरूरी होता है कि आपके शारीर और मन के लिए इससे क्या फायदा हो सकता है और आप इसे कैसे संभव तरीके से कर सकती हैं। यह पोस्ट जागरूकता के लिये है अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें

तृप्त ...🖤

292,909 görüntüleme • 1 yıl önce

कल्पना कीजिए कि इस दुनिया में कुछ ऐसा भी है जो light से ज्यादा गति से चलती है और जिसे आप देख सकते हैं या महसूस कर सकते हैं। बिल्कुल ऐसा है, और ये चीज जुड़ी है परमाणु रिएक्टर से! आप इस वीडियो में एक न्यूक्लियर टेस्ट रिएक्टर देख रहे हैं!! इसमें जो पानी का रंग अचानक नीला हो जा रहा है, वो बहुत ही मजेदार scientific phenomena है. इस नीली रोशनी को चेरेंकोव रेडिएशन कहते हैं . आपने सुना होगा कि सुपरफास्ट जेट के उड़ने पर sonic boom होता है. अगर कोई जेट आवाज की गति से तेज उड़ता है तो एक sonic boom या तेज धमाके जैसा आवाज होता है. यह भी एक तरह का boom है फर्क बस इतना है कि वहां आवाज होती है, और यहां लाइट का बूम! जब कोई इलेक्ट्रॉन या अन्य चार्ज वाला कण (जैसे परमाणु रिएक्शन से निकलने वाला) किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे पानी या कांच) से इतनी तेज़ी से गुजरता है कि वो उस माध्यम में प्रकाश की गति से भी तेज गति से चलने लगता है, तब चेरेंकोव रेडिएशन होता है. ध्यान दें: यह प्रकाश की स्पीड से तेज नहीं होता (क्योंकि वैक्यूम में कोई चीज लाइट से तेज नहीं चल सकती), लेकिन पानी जैसे माध्यम में प्रकाश की गति कम हो जाती है -और वहीं ये कण उसे पीछे छोड़ देते हैं. नतीजा, एक नीली चमक पैदा होती है! जिसे आप इस न्यूक्लियर टेस्ट रिएक्टर के वीडियो में देख सकते हैं! इस प्रभाव का नाम पावेल चेरेंकोव के नाम पर रखा गया है. उन्होंने इसे सबसे पहले देखा और समझाया था ,और इसके लिए उन्हें 1958 में नोबेल पुरस्कार भी मिला था.

Ankit Kumar Avasthi

301,569 görüntüleme • 1 yıl önce

सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में दावा किया कि अमेरिका ने गाय के मूत्र का पेटेंट कराया है। आइए, इस दावे की वास्तविकता समझते हैं। 1. जिस अमेरिकी पेटेंट का हवाला दिया जा रहा है, वह किसी अमेरिकी संस्था का नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा दायर किया गया था। 2. यह पेटेंट 2020 में मेंटेनेंस (एक्सटेंशन) फीस जमा न होने के कारण समाप्त (Expired) हो गया। 3. यह पेटेंट गाय के मूत्र पर नहीं, बल्कि गाय के मूत्र के डिस्टिलेट (Cow Urine Distillate) के असर का है अर्थात दावा मूत्र पर नहीं, बल्कि उसके आसुत (distilled) अंश के संभावित प्रभाव पर था। 4. स्वयं पेटेंट में यह भी उल्लेख है कि इसी प्रकार का प्रभाव भैंस, ऊँट और हिरण के मूत्र के डिस्टिलेट में भी देखा गया। डिस्टिलेशन (Distillation) क्या है? किसी भी मिश्रण में उपस्थित विभिन्न घटकों का वाष्प दाब (Vapor Pressure) और क्वथनांक (Boiling Point) अलग-अलग होता है। इसी सिद्धांत का उपयोग करके डिस्टिलेशन के माध्यम से कुछ वाष्पशील (volatile) घटकों को अलग किया जाता है। यही तकनीक पानी के शुद्धिकरण, समुद्री जल के अलवणीकरण (desalination), रसायन उद्योग और यहाँ तक कि सीवेज के उपचार में भी उपयोग की जाती है। इसलिए किसी पदार्थ का डिस्टिलेट प्राप्त होना अपने-आप में उस मूल पदार्थ के औषधीय या सेवन योग्य होने का प्रमाण नहीं है। अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है। गाय सहित लगभग सभी जानवरों के मूत्र में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और खरनाक रोगजनक (pathogenic) बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यदि मूत्र में इतना शक्तिशाली एंटीमाइक्रोबियल कंपोनेंट होता, तो सबसे पहले उसी में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट हो जाने चाहिए थे। वास्तविकता यह है कि अनेक रसायनों और प्राकृतिक पदार्थों में प्रयोगशाला स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि (antimicrobial activity) पाई जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता कि वे सीधे पीने, खाने या चिकित्सा के लिए सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध हो जाते हैं। किसी पदार्थ को दवा मानने के लिए कठोर प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होते हैं। भारत जैसे देश में, जहाँ अभी भी वैज्ञानिक साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने की आवश्यकता है, संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच से इस प्रकार के अधूरे या भ्रामक दावे करना लोगों में भ्रम और अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा । सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा हमेशा उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और तथ्यों के आधार उस विषय के एक्सपर्ट को करनी चाहिए न कि प्रोपेगंडा के लिए भाषण बाजी करना चाहिए।

Santosh Yadav, Ph.D.

443,650 görüntüleme • 28 gün önce

यह वीडियो दिखाता है कि व्यक्ति कांग्रेस में जाने के बाद किस तरह से नरेंद्र मोदी से नफरत करते-करते राम मंदिर से भी नफरत करने लगता है यह वीडियो पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव के समय का है शंकर सिंह वाघेला पूरी जिंदगी RSS में रहे राम मंदिर के लिए संघर्ष भी किया फिर कांग्रेस में गए केंद्रीय मंत्री भी बने मनमोहन सरकार में फिर इनका बेटा पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस से बजट से लड़ा उसके बाद देखिए यह भगवान श्री राम और राम मंदिर के बारे में क्या सोचने लगे इनका कहना है भगवान राम चाहे टेंट में रहे चाहे मंदिर में रहे क्या फर्क पड़ता है राम तो मंदिर में आने वाला नहीं है भगवान राम को टेंट में ही रहना चाहिए था मंदिर तो फालतू में बनाया है जबकि गुजरात में सबसे बड़ा बंगला शंकर सिंह वाघेला का है गुजरात में निरमा के करसनभाई पटेल से लेकर गौतम अदानी खुद मुकेश अंबानी महीने में 20 दिन गुजरात में रहते हैं और न जाने कितने खरबपति उद्योगपति गुजरात में है लेकिन किसी का बंगला शंकर सिंह वाघेला के बंगले के सामने कुछ भी नहीं है शंकर सिंह वाघेला ने जो अपना बंगला "बसंत बगड़ो" बनवाया है वह 80 एकड़ में फैला है और देखने में ऐसा लगता है जैसे किसी फिल्म शूटिंग का कोई सेट हो और ऐसा सिस्टम लगाया है कि किसी विशेष मेहमान की कार सीधे ड्राइंग रूम मैं चली जाती है हालांकि रुबिका लियाकत ने बहुत सही सवाल किया कि आप न जाने कितने बीघे के बंगले में रहते हैं आप क्यों नहीं 1BHK में रहते हैं तब ये चुप हो गए सबसे बड़ा अफसोस यह होता है कि कभी यह व्यक्ति संघ का एक समर्पित कार्यकर्ता हुआ करता आज इसकी विचारधारा में इतना बदलाव आ गया है शंकर सिंह वाघेला जी भगवान राम सबके हैं आपके भी हैं मेरे भी हैं सबके

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

16,864 görüntüleme • 9 ay önce

जैसलमेर में बस दुखांतिका पर विधायक रविंद्रसिंह ने कहा कि "दिवाली से पहले इन लोगों से साथ ये कुठाराघात हुआ है। जिस तरीके से यह दुखद घटना हुई है। हम सभी की एक नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम उन परिवारों को हिम्मत दें। यह समय किसी पर टीका टिप्पणी करने का नहीं है। बल्कि, उन परिवारों को हिम्मत देने का है। हम और आप सभी की ये जिम्मेदारी है कि हम और तमाम लोग उनको हिम्मत दें।" भाटी ने कहा कि जाहिर से बात है कि दुर्घटनाएं होती है। कई लोग कह रहे हैं कि बस में पटाखे थे, जिसकी वजह से ये घटना हुई। कई लोग कह रहे हैं कि एक दरवाजा ही था। किसी को निकलने की जगह नहीं मिली। कोई कह रहें है कि AC के अंदर कोई चीजें हुई। लेकिन, अब तमाम चीजों को छोड़कर हमें जो घायल अवस्था में यहां तक पहुंचे हैं।उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हम सभी को मेहनत करनी चाहिए। वो तमाम परिवार जन...जो हो सकता है कि उनको अभी तक पता भी ना हो... कि उनके परिवारजन कहां है ? या किसी तरह से जानकारी की कमी है तो मैं अपील करना चाहूंगा कि आप आगे आएं और DNA सैंपल दें। हम आपके साथ हैं और हम सब आपके परिवार के लोग है।

Dinesh Bohra

40,388 görüntüleme • 10 ay önce

फाइनेंस बिल पर बात करते हुए देश की अर्थव्यवस्था पर कुछ बातें रखना जरूरी है ⦿ आजादी के बाद 78 साल के इतिहास में रुपया सबसे ज्यादा सस्ता हो गया है। World's Fastest Falling Currency का रिकॉर्ड बन गया है। पिछले 3 साल में 3 करेंसी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई है, ईरानियन रियाल, लेबनीज पाउंड और भारतीय रुपया ⦿ 78 साल के इतिहास में पेट्रोल, डीजल, LPG और यूरिया सबसे ज्यादा महंगा BJP की सरकार ने कर दिया है ⦿ BJP की गलत आर्थिक नीतियों के कारण 78 साल के इतिहास में गरीब और अमीर के बीच का अंतर सबसे ज्यादा हो गया है। ⦿ 78 साल में पहली बार ग्रेजुएट के बीच बेरोजगारी का प्रतिशत सबसे ज्यादा है, BJP सरकार के नारे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं ⦿ 78 साल में सबसे ज्यादा EPT आउटफ्लो यानी भारत के बाजार से सबसे ज्यादा पैसा विदेशी निवेशकों ने निकाला है, जो कि 20 बिलियन डॉलर का आंकड़ा है। ⦿ BJP के 12 साल में FDI लगातार कम हो रहा है, साथ ही ODI (Overseas Direct Investment) बढ़ा है। मतलब हमारी कंपनियां भारत के बाजार पर भरोसा करने के बजाय बाहर इनवेस्ट कर रही हैं ⦿ 78 साल में पहली बार भारत पर देश की अर्थव्यवस्था का 82% कर्ज है ⦿ सरकार कहती है कि हम टैक्स कोड सरल कर रहे हैं, लेकिन सरकार का IT एपिलेट में 8 लाख करोड़ रुपए और CIT में 5 लाख करोड़ रुपए अटका है और हर साल ये आंकड़ा बढ़ रहा है ⦿ देश के इतिहास में GDP के प्रतिशत में रक्षा बजट सबसे कम 1.6% किया गया है। जबकि UPA के समय ये GDP का 2.5% होता था ⦿ Strategic Autonomy को BJP सरकार ने सरेंडर कर दिया है, आज अमेरिका फैसला कर रहा है कि भारत कहां से और कितने में तेल खरीदेगा : लोकसभा में Deepender Singh Hooda जी का पूरा वक्तव्य

Congress

36,458 görüntüleme • 5 ay önce

हाय दइय्या, नासपीटा सिर खाए गौ... भारत से 15 हजार किमी से अधिक दूर है कोलंबिया। इस कोलंबिया में वेश्यावृत्ति, नशेबाजी और जुएं के अड्डों के लिए कुख्यात एक स्थान है बागोटा। इसी बागोटा में एक सेमिनार की गयी और सेमिनार में ज्ञान बांटने, बांचने के लिये भारत से बुलाया गया दत्तात्रेय गोत्र वाले पारसी/ईसाई पंडित अधेड़ गांधी को। और फिर दत्तात्रेय गोत्र वाले पारसी/ईसाई पंडित, अधेड़ गांधी के अजब ज्ञान की जो ग़ज़ब बाढ़ बागोटा में आयी उसने बड़े बड़े ज्ञानियों के होश उड़ा दिए... वीडियो देखिए और साथ में उसकी ट्रांसस्क्रिप्ट भी पढ़िए फिर बताइए कि... दत्तात्रेय गोत्र वाले पारसी/ईसाई पंडित अधेड़ गांधी जी क्या कहना बताना चाह रहे हैं.... ट्रांसस्क्रिप्ट... चलने का बिल्कुल अलग तरीका, है ना? तो उदाहरण के लिए, अगर आप एक दिलचस्प सवाल पूछते हैं। एक मोटरसाइकिल का वजन 100 किलो और एक कार का वजन 3,000 किलो क्यों होता है? कार में एक यात्री को ले जाने के लिए, अगर एक यात्री कार चला रहा है तो आपको कार में 3,000 किलो धातु की जरूरत होती है। और एक मोटरसाइकिल का वजन 100 किलो होता है, वह दो यात्रियों को ले जा सकती है। तो एक मोटरसाइकिल 150 किलो धातु के साथ दो यात्रियों को क्यों ले जा सकती है, और एक कार को 3,000 की जरूरत होती है? यह सवाल इलेक्ट्रिक में बदलाव के केंद्र में है। तो आपको क्या लगता है इसका जवाब क्या है?..? इंजीनियरिंग के छात्र हाँ... लेकिन कार को संरचना की आवश्यकता क्यों है? कोलंबियन भाषा में संचालक कहता है.... कृपया माइक्रोफोन के साथ प्रश्न पूछें ताकि दर्शकों में हर कोई सुन सके। हम इसे एक पल में आपके पास ले जाएंगे। तभी एक छात्र पूछता है: क्या मैं आपके प्रश्न का उत्तर दे सकता हूँ? छात्र: कुछ कहने की कोशिश करता है... तबतक पंडित अधेड़ गांधी फिर ज्ञान बांचता है.... ,"नहीं, मेरा सवाल है कि कार में ऐसा क्या है कि 3,000 किलो धातु की जरूरत होती है? और जवाब है, इंजन के कारण। क्योंकि टक्कर लगने पर इंजन ही आपकी जान लेता है। ठीक है, और मोटरसाइकिल हल्की होती है क्योंकि दुर्घटना होने पर इंजन गायब हो जाता है, है ना? हर बार, मोटरसाइकिलों के इंजन भारी और भारी होते जाते हैं। अगर आप देखें, तो आजकल मोटरसाइकिलों की शक्ति पुरानी मोटरसाइकिलों की तुलना में भारी और अधिक होती जा रही है। लेकिन मोटरसाइकिल में, जब आप पर कोई प्रभाव पड़ता है, तो इंजन आपसे अलग हो जाता है। इसलिए इंजन आपको चोट नहीं पहुँचाता। जबकि कार में, जब आप पर कोई प्रभाव पड़ता है, तो इंजन कार के अंदर आ जाता है। इसलिए पूरी कार को इंजन को आपकी जान लेने से रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इलेक्ट्रिक मोटर उस केंद्रीकृत ऊर्जा प्रणाली को तोड़ देती है। इलेक्ट्रिक मोटर आपको वहां एक मोटर लगाने, वहां एक मोटर लगाने, वहां एक मोटर लगाने, वहां एक मोटर लगाने की अनुमति देती है। दावा है कि, ट्रांसस्क्रिप्ट पढ़कर तो समझ में नहीं ही आया होगा कि... कहना क्या चाहता है... इसलिए वीडियो सुनकर ही समझिए कि, देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहा शेख चिल्ली आखिर कहना बताना क्या चाहता है...?

Satish Chandra Misra

41,561 görüntüleme • 11 ay önce