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सर का कहना है 99% अतरेक्शन एक से दो महीने मे ख़त्म हो जाते हैं।

13,581 views • 6 months ago •via X (Twitter)

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लोकतंत्र जिस नैतिक धागे से बंधा होना चाहिए वह कब का टूट चुका है। ऊपर से नीचे तक। चुनाव की एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि मतदाताओं में एक वर्ग पैसा मांगने वाला भी हो गया है। केवल चुनाव के समय नहीं बल्कि साल भर मांगने का सिलसिला चलता रहता है। भावी उम्मीदवार भी बांट रहा होता है तो विजयी भी। शादी ब्याह में आने का इतना दबाव होता है कि कई बार नेता दो दो मिनट के लिए जाते हैं और फिर अगली शादी में पहुँचने के लिए रवाना हो जाते हैं। सारे वोटर ऐसे नहीं होते लेकिन किसी भी दल के नेता से पूछिए । वो बताएँगे वोटरों का एक वर्ग ऐसा भी होता है। इसी बात को हमने अपनी मातृभाषा भोजपुरी में कहने का प्रयास किया है।

ravish kumar

63,768 views • 10 months ago