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सरकार व्यापारियों की बात क्यों नहीं सुनती है?
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24 Comments

आपके मुद्दे वाकई में दमदार होते है लेकिन शब्दों के चुनाव में थोड़ी कमी रह जाती है, अगर आप लुटेरे नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए मां बहन की गाली के संबोधन से अपनी बात शुरू करेंगे तो आपको ज्यादा सपोर्ट मिलेगा ।।

@PMOIndia @narendramodi @nsitharamanoffc @nsitharaman @FinMinIndia this is really to good Upadhyay ji you deserve in ministry .

The government never listen to God how they can listen to citizens of this country. Only way to remove them in next elections. No ease of doing business and they support service provider because they donate to BJP

क्योंकि सरकार जैसा कुछ है ही नहीं जो लोगों की कद्र करे वसूली गिरोह टाइप लगता है,सिस्टम जो किसी की मेहनत की कमाई लूटकर उन्हीं को जेल भिजवाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं चलाता है,भारतीय सत्ता (पार्टियां कोई भी हों) को एक लाइन में कोट करें तो "सत्ता के लिए लूट, लूटने के लिए सत्ता है"

@IncomeTaxIndia @FinMinIndia @cbic_india @nsitharamanoffc

Absolutely right 👍👍👍

True

Kyuki wyapari illegal encroachment karte hain. Jabse GST aya hai pareshan the ab UPI ne in wyapariyon ko aur pareshan kar diya hai

This Govt especially @FinMinIndia is taking its supporters for granted. There is continuous torture of professionals. They need to realise that they dropped to 240 for some reasons.

साभार @narendramodi ने इतनी मोटी कानून की किताब देने के लिए

व्यापारी सिर्फ टैक्स ही नहीं देता—उस पर उन भुगतानों का भी दबाव हो सकता है, जिनकी कोई सरकारी रसीद और बही-खाते में वैध एंट्री नहीं होती। कई व्यापारी और उद्योगपति शिकायत करते हैं कि अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कराने या अनावश्यक परेशानी से बचने के लिए उनसे अनौपचारिक भुगतान या त्योहारों पर “तोहफों” की अपेक्षा की जाती है—चाहे मामला बिजली, श्रम, प्रदूषण, नाप-तोल, GST या आयकर से जुड़ा हो। यदि किसी सरकारी काम के लिए निर्धारित शुल्क है, तो वह ऑनलाइन/चालान से हो, उसकी रसीद मिले और पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक हो। और यदि कोई अधिकारी निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त पैसा या उपहार मांगता है, तो शिकायत की ऐसी स्वतंत्र व्यवस्था हो जिसमें व्यापारी की पहचान सुरक्षित रहे और शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हो। व्यापार करने की कीमत टैक्स हो सकती है—रिश्वत नहीं। ईमानदार व्यापारी को इंस्पेक्टर राज और अनौपचारिक वसूली से सुरक्षा मिलनी चाहिए। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए: Minimum Human Interface • Maximum Digital System • Every Payment Receipted • Zero Unofficial Collection.

व्यापारी बहुत मोटा माल कमाते हैं,आप क्या जानो वकील साहब, नेता इनसे माल निचोड लेते हैं, इसलिए व्यापारी दबा कर कमाते है। जमीनों का कारोबार करने वाले व्यापारियों का तो कहना ही क्या..😂😀😂😀

उसी से लूटेंगे तभी तो बांटेंगे और सत्ता की मलाई चाटेंगे

🔔 समजती है , जो सिर्फ बजाने के काम आता है 😱😱😱

तो सर यही बता दीजिए की सरकार किसकी बात सुन रही है छात्रों की,जनता की, या उन पीड़ितों की बात सुन रही है जिनके घर बुलडोजर से नेस्तनाबूत कर दिए हैं।सरकार जनता की आवाज बिल्कुल नहीं सुन रही है क्योंकि उसके हाथ में सबसे शक्तिशाली हिंदू मुसलमान नामक बज्रास्त्र है।

चोर समझतीं है।डर बैठ गया

Very good 👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍

**व्यापारी भी कमाल का जीव है! 😄** गाय खूंटे से बंधकर दूध देती है, **व्यापारी काम-धंधे से बंधकर टैक्स देता है।** गाय को चारा मिलता है, व्यापारी को मिलता है—**नोटिस, नियम और हिसाब-किताब!** 😂 **गाय दुधारू है… और व्यापारी टैक्सदारू!** 🐄💰

Mar jaye saare govt officials

सरकार व्यापारियों को कर समझती है सरकार को बस जनता से व्यापारी से टैक्स चाहिए और वह पैसे से वह विदेश घूमने या बर्बाद करें नेताओं की मर्जी

आप पर गर्व है 🙏👍🙏

Kyonki Ve MOSTLY gujrati

आपकी बिरादरी के वकील लोग भी बहुत रुपया कमा रहे हैं, बड़े वकीलों का तो क्या ही कहना....😂😀

जिस राष्ट्र में बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में पीड़ित महिलाओं की जाति देखकर धाराएं लगती हो किसी को भारी मुआवजा किसी को कुछ भी नहीं, जाति देखकर योजनाएं बनती हों, किन्हीं जाति के लोगों को जेल भिजवाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं चलती हों उस राष्ट्र पर भी गर्व करना एक शोध का विषय है
