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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजू-ए-क़ातिल में है।

16,179 просмотров • 1 месяц назад •via X (Twitter)

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अल्लामा इक़बाल का "बस नाम रहेगा अल्लाह का" हिंदुस्तान के वामपंथी बड़ा गाते हैं ढपली बज़ा.... उनका उदेश्य मुद्दे से ज्यादा ऐसा कर हिंदुस्तान बहुसंख्यक हिन्दू को चिढ़ाना होता है पर पाकिस्तान में भी अब हमारे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल साहब का "सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है।" गुंज रहा है.. बता दूँ इसकी मूल रचना एक अन्य क्रन्तिकारी शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी ने की थी... पर इसका जो प्रशिद्ध और प्रचलित स्वरुप है वो पंडित ज़ी द्वारा लिखा गया... वैसे ये भी बड़ा ही मज़ेदार वाकया है कि राम प्रसाद बिस्मिल साहब राजपूत जाति के थे और उन्हें पंडित ज़ी उनके ज्ञान के चलते चंद्र शेखर आज़ाद ने कहना शुरू किया बाद में उनके नाम के साथ स्थाई तौर पर जुड़ गया... वहीं आज़ाद जजन्मा एक ब्राह्मण थे.... लेकिन बिस्मिल उन्हें हमेशा "ठाकुर साहब" कह बुलाते थे वज़ह आज़ाद बड़े निर्भीक और गुस्सैल थे...

Ajai Singh Yadav ( Il mostro)

15,536 просмотров • 29 дней назад