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सलमान खान : तो फिर आम्रपाली आम्रपाली : जी सलमान खान: i am totally convinced आम्रपाली : क्या ? सलमान खान : आपने कुछ ग़लत तरीकें से बोला होगा "अरिशफा" बुरा मान गई क्यों अरिशफा i am right OR I am right अरिशफा : मैंने उनको पहले भी कई...

344,072 просмотров • 23 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 12

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Ashutosh Mishra23 дней назад

आम्रपाली क्या कहकर बुलाया बच्चा

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कल्कि23 дней назад

आम्रपाली बहुत प्यारी लग रही है ❤️

Фото профиля 𝐑𝐚𝐠𝐡𝐯𝐞𝐧𝐝𝐫𝐚 𝐘𝐚𝐝𝐚𝐯⭐
𝐑𝐚𝐠𝐡𝐯𝐞𝐧𝐝𝐫𝐚 𝐘𝐚𝐝𝐚𝐯⭐23 дней назад

सलमान खान अब बुड्ढा हो गया है उम्र दिखने लगी है

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Rita Yadav23 дней назад

आम्रपाली को इस लड़की असरीफा से को बच्चा नहीं बोलना चाहिए था

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Pramod Ydv23 дней назад

कितनी खूबसूरत है यार ये

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Aditya Yadav23 дней назад

अबकी बार का शो है

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Suman Yadav23 дней назад

Ye bachi nhi ...mujhe ye nhi पसंद...

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sarfuddin Alam23 дней назад

Ha muje yad hi songs

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Mak23 дней назад

Salman bimar lag raha hai may be he is suffering from disease ..

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Mansi Upadhyay23 дней назад

आम्रपाली तो मोटी........🤣🤣🤣

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prince atm22 дней назад

Arre bhdbe ye likhke tu kya sabit Krna chahta h pura show hindi me aata h aor desh ki 75% janta ise roz dekh rahi h

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yadav chhaya23 дней назад

Nice

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पहले तो फ़र्ज़ी फैलाया कि 8.5 CGPA है, बहुत बढ़िया ब्रिलियंट स्टूडेंट था। नहीं चला। कोई ले आया कि नहीं भाई, 6.3 टाइप का CGPA था, which is not good. उसके बाद चलाया गया कि प्रताड़ित करते थे, तीन महीने से प्रताड़ना हो रही थी। पूछा गया कि भाई, तीन महीने से ये बात थी, और तुम अवेयर भी हो कि SC/ST सेल है, लॉ है, सारा कुछ है। उसके माँ-बाप को भी पता था। वो माँ-बाप जो अभी पेड़ के नीचे बैठकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्होंने क्यों नहीं किसी को रिपोर्ट किया? लिखित में, मौखिक में, कोई रिकॉर्ड तो होना चाहिए। वो भी नहीं चला। फिर आ गया CCTV फुटेज। CCTV फुटेज में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि क्या हो रहा है। तो लगे कहने, नहीं-नहीं, वो तो कैलकुलेटर है। कैलकुलेटर तो सबके आगे रखा हुआ था। और उसका फोन, जिससे वो कर रहा था, एविडेंस के तौर पर सीज़ कर लिया गया। अब बोला जा रहा है कि CCTV फुटेज का केवल एक छोटा सा पोर्शन ही मीडिया को क्यों रिलीज़ किया गया। ये मेरी समझ से बाहर है। क्या पूरा एग्जाम दिखाया जाए? भाई, जब वो एक्ट हुआ है, उतना ही तो आएगा ना, उतना ही तो दिखाया जाएगा। भाई, चोरी कर रहा था, पकड़ा गया।

Ajeet Bharti YouTube

130,562 просмотров • 8 дней назад

कैसे देश की जनता से धोखाधड़ी की चुनाव आयोग ने राहुल गांधी जी EVM के खिलाफ है जहां तक मुझे खबर है मोदी जी को भी पता था अगर वह हरियाणा हार गए तो RSS उनको हटा देगा EVM पर मेरा अभी भी केस चल रहा हैं और हम अगले हफ्ते ही EVM पर बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं और ऐसा आंदोलन होगा जो कभी खत्म नहीं होगा जब तक EVM बेन नहीं होगी हरियाणा चुनाव में भी EVM से धांधली हुई हैं :- एडवोकेट महमूद प्राचा जी पहले मध्य प्रदेश में अब हरियाणा में 99% चार्ज EVM मिल रही हैं मैंने तो बहुत पहले ही सबूत जुटा कर सबके सामने रख दिये थे वीडियोग्राफी भी दिखाई थी और अबकी बार भी दिखाऊंगा वीडियो ग्राफी क्या विपक्ष #EVM_हटाओ_लोकतंत्र_बचाओ का साथ देंगा?

Vikas Bansal

153,341 просмотров • 2 лет назад

सवाल : सर, जादूगरी आज पूरे विश्व में कला कहलाती है, कल मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अशोक गहलोत जी हेराफेरी करते हैं। जवाब : हेराफेरी है। ये सरकार पूरी हेराफेरी से ही चल रही है। सरकार नाम की चीज है नहीं। ये सरकार खुद ही हेराफेरी कर रही है और लोगों को भ्रमित कर रही है और कुछ काम नहीं कर रही है। मैजिशियन की कला तो देश में ही नहीं अंतरराष्ट्रीय जगत में बहुत ही प्रसिद्ध कला है। उसका उद्गम स्थान कहते हैं हिंदुस्तान से ही हुआ था। सैकड़ों साल पहले, जादू कला का उद्गम जो है हिंदुस्तान से चला था दुनिया के मुल्कों में अमेरिका हो या इंग्लैंड हो। तो हमें तो गर्व होना चाहिए। अब मुख्यमंत्री को पता ही नहीं है इस कला बैकग्राउंड क्या है तो फिर वो ऐसे कमेंट करेंगे और क्या करेंगे? किसी ने कह दिया होगा उनके पीआर देखने वाले ने कि आप ये जुमला बोल दो। वो जुमला बोल गए। अपने मन से नहीं बोले थे मुझे मालूम है। सवाल : पिताजी के साथ आप विदेश में इस कला का प्रदर्शन करने गए थे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर। जवाब : वो छोड़िए, वो तो विदेश गए हम लोग। पिताजी जापान भी गए थे। हम हांगकांग भी गए थे। लंबी कहानी है। सवाल : आपने सरकार चलाई। जादूगरी करते थे हर कामकाज, मॉडल लेकर आए। जवाब : लोग प्यार से कहते हैं भाई जादूगर तो प्यार से, आप लोगों के प्यार, आपकी मोहब्बत, प्रदेशवासियों का विश्वास अटूट है। मेरी लाइफ की पूंजी यही है। मुझे जिंदगी में जो प्यार, जो विश्वास मुझे मिला है प्रदेशवासियों से, वो मिसाल बहुत कम है। मैं समझता हूं कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे प्रदेश के लोगों ने कमी नहीं रखी। छत्तीस ही कौम के लोगों ने मुझे जो विश्वास दिया है, वोट दिया नहीं दिया परंतु उनका प्यार, उनकी मोहब्बत, उनका विश्वास अटूट रहा है। जब जाकर एक आदमी मेरी कम्युनिटी का है MLA विधानसभा में और वो माली कम्युनिटी का मैं खुद ही था कांग्रेस के अंदर ,तब भी मुझे मुख्यमंत्री रखा पाँच साल, दस साल, पंद्रह साल। ये आप समझ लीजिए इससे बड़ा क्या उदाहरण हो सकता है देश के अंदर कि जिस व्यक्ति का एक MLA हो और वो व्यक्ति जो है, चाहे सोनिया जी थी, चाहे राहुल जी थे, सबका सहयोग रहा, प्रियंका जी का रहा और मुझे तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बना दिया। पहली बार जब बनाया होगा तो क्या सोचा होगा? कुछ तो देखा होगा । कुछ तो जो मैंने काम किया PCC के अंदर तो कुछ ऐसे काम हुए होंगे पार्टी के इंटरेस्ट के अंदर जिसके कारण से मुझे अवसर मिला। तो मैं समझता हूं कि वो मेरी जिंदगी की बहुत बड़ी एसेट है, पूंजी है। उसको साथ लेकर मैं आगे बढ़ना चाहता हूं।

Ashok Gehlot

51,815 просмотров • 2 месяцев назад

25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में: आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे। तीन-तीन बार मुख्यमंत्री कम नहीं होता देखो। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। अभी संकट जो मैं कह रहा हूँ देश संकट में है, तो क्यों नहीं तुम आगे आ-आकर के हम सब मिलकर देश की रक्षा करें? कांग्रेस का औरा जो राजस्थान में है, हिंदुस्तान में वो हमें महसूस है, दिल्ली में रैली होती है सबसे अधिक लोग राजस्थान से जाते हैं। हाईकमान इस बात को जानता है। 20-25 साल से मैं देख रहा हूँ। इसलिए कृपा करके सब मतभेद भूलो, सब एक हो जाओ। और इस मीडिया वालों को, मेजर क्या वो मीडिया जो मुख्य मीडिया है वो मीडिया जो आपका क्या कहलाता है, गोदी मीडिया। अब गोदी मीडिया का गोदी हटे ये उन मीडिया वालों से चाहिए कि अब गोदी हटवा दें वो अपना। वो तब हटवा पाएँगे जब ईमानदारी के साथ में सामाजिक सरोकार रखेंगे, देश हित में बात करेंगे, और सरकार के दबाव में नहीं आएँगे तो जाकर के ये तमगा गोदी मीडिया का हटेगा। और सोशल मीडिया में मैं कहना चाहूँगा कृपा करके आप सच्चाई पे चलो, और आप सचिन पायलट को नुकसान मत करो। बहुत नुकसान कर चुके हो, बहुत नुकसान कर चुके हो। इतना नुकसान कर दिया आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं बराबर सुनता रहता हूँ उनको। अब मैं कहता हूँ अब किसको जाके मैं कहूँ? किसको जाके कहूँ? कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता है और कमेंट कर देते हैं हम लोगों पर। कुछ एबीसीडी पता नहीं उनको, और रिवोल्ट हो गया, रिवोल्ट हो गया। अरे, रिवोल्ट कैसे हो गया? अगर 100 लोगों ने कहा कि हमने साथ दिया हाईकमान का, सरकार हमने बचाई है। हम में से किसी को भी बना देते मुख्यमंत्री, क्या गलत कहा उन्होंने? क्या गलत कहा उन्होंने? और उसको रिवोल्ट बता रहे हैं वो हाईकमान के खिलाफ है, पर मैंने माफी माँगी सोनिया गांधी से फिर भी, मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था। मैं नेता था विधायक दल का, मुझे तीन बार बिना माँगे हुए सोनिया गांधी ने मुझे मुख्यमंत्री पद दिया। 1998 के अंदर, 2008 में सेकंड टाइम मुख्यमंत्री बनाया मुझे सोनिया जी ने, थर्ड टाइम तो मैं 21 पे आया हुआ था। 2013 में मैं 21 पे आया हुआ था, तभी तीसरी बार राहुल गांधी जी ने, सोनिया जी ने, प्रियंका जी ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया। मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद जहाँ गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, उस कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? मैं मना करूँगा? वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया। हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा। जिस मीडिया ने बातें फैलाई थी, मैं चुप रहा, और चुप भी मैं इसलिए रहा मुझे सोनिया जी को बताना था कि चाहे ये पायलट के खिलाफ रिवोल्ट था या क्या था, मुझे मतलब नहीं है। आज मैं आया हूँ सिर्फ इसलिए कि मैंने जो है, मैं नेता था विधायक दल का। ऑब्ज़र्वर आए हुए थे एआईसीसी के, एआईसीसी ऑब्ज़र्वर के मायने होते हैं। चाहे वो खड़गे साहब थे चाहे अजय माकन जी थे, और मैं प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया। हालाँकि, मैंने रात को कहा था कि आप अभी इस मीटिंग को बंद करते हैं, कल वापस मीटिंग बुलाकर के अपन बात करेंगे। वो स्थिति बनी नहीं हमारी, इसलिए वो इसलिए जो है, वो नहीं हो पाया प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। मैंने जाके सॉरी फील किया मैडम के सामने कि मैं विधायक दल का नेता था। मुझे सब कुछ पार्टी ने दिया है, उसके बाद में भी ये स्थिति बन गई तो मैं माफ़ी चाहता हूँ। ये बात थी।

Ashok Gehlot

124,964 просмотров • 4 месяцев назад

पत्रकार : कल आपके यहां जो कार्यक्रम हुआ है, उसको लेकर क्या कोई गलत संकेत गए? जवाब : कोई गलत संकेत नहीं है। वो तो जो आदिवासी जो थे कार्यकर्ता वो आए थे, खाली मिलने के लिए आए थे। जॉइनिंग की बात थी नहीं कहीं। मुझे कहा गया भाई वो जिद किए हुए हैं बच्चे, बीस - पच्चीस दिन से बात चल रही थी। मैं मना कर रहा था, यहां आने की जरूरत नहीं है। मैं खुद आऊंगा बांसवाड़ा मिल लेंगे बच्चों से। अब 500 किलोमीटर बस लेकर कोई आए तो मुझे अजीब लगता है और मैं हमेशा डिस्करेज करता हूं। कल की बात छोड़ दीजिए। जब कभी कोई मुझसे मिलने की बात करते हैं तो मैं मना करता हूं, इतनी दूर से क्यों आ रहे हो? मैं टूर प्रोग्राम बनाऊंगा, वहीं मिल लेंगे अपन। पर इन लोगों ने जिद पकड़ ली कि नहीं, हमें तो मिलना ही है। तो जब मालवीय जी ने बार बार कहा तो फिर अल्टीमेटली मैंने कहा कि भई ठीक मिला दीजिए। तो मिलने मुझसे भी आए थे, तो मुझसे मिलना है तो मैंने भी कहा और उनके खुद ने भी टाइम ले लिया था पीसीसी से भी कि हम जाकर वहां भी आशीर्वाद लेंगे, मिल लेंगे अध्यक्ष जी से मिलेंगे और कोई बात थी ही नहीं। ना ज्वाइनिंग की थी, ना चर्चा हुई ज्वाइनिंग की और वो तो कार्यकर्ता थे। ज्वाइनिंग नेताओं की होती है। 500 कार्यकर्ता, 400 आए थे कल। जो आंकड़े बता रहे हैं अब 400 कार्यकर्ता क्या वो कार्यकर्ता तो उन्हें कब तो वो गए और कब वापस आए। तो ये तो क्या कार्यकर्ता गांव में होते हैं ना। अगर मान लो बाप पार्टी का मोह भंग हो रहा है, आ गए तो अच्छी बात है। वेलकम करना चाहिए सबको। इतनी सी बात है। बाकी तो मीडिया वाले जो है आप लोग, आप भी कम नहीं हो, कैसे आप किस प्रकार से माहौल बिगाड़ो, कैसे डराओ नेताओं को, उसमें भी कई मीडिया के हमारे साथी जो हमारे बड़े प्यारे हैं, उनकी बड़ी भूमिका होती है। भाई इससे ज्यादा कुछ भी नहीं है। हम सब एक हैं, एक होकर चलेंगे, एक होकर सरकार बनाएंगे और सरकार बननी निश्चित है राजस्थान में दिमाग के अंदर रखो। बाकी सब बातें छोड़ दो। कोई नाराजगी नहीं है, कोई नाराजगी ना अध्यक्ष जी को, ना मुझे है। अध्यक्ष जी क्या नाराजगी बताएंगे? कोई नाराजगी नहीं बताई उन्होंने। उनको तो जो महसूस हुआ, उन्होंने बता दी बात। पर मीडिया वाले बार- बार, बार- बार अगर आप ऐसे क्वेश्चन पूछोगे जो उनकी जानकारी में नहीं होगी बात को तो वो जवाब क्या देंगे? तो इस प्रकार का मैं समझता हूं। कोई बात नहीं, पूरी कांग्रेस एकजुट है और अभी मैं बार बार कह रहा हूं सुन लीजिए आप लोग देश को जरूरत कांग्रेस की है। कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में, खड़गे साहब के नेतृत्व में एकजुट है। डेमोक्रेसी खतरे के अंदर मैं बार बार चेता रहा हूं पिछले छह महीने साल भर से वो हकीकत है। इसमें कोई आपस में मनमुटाव, झगड़ों का कोई स्थान होना ही नहीं चाहिए। सब मिलकर काम कैसे करें, यह हमारा ध्येय होना चाहिए। वो हमारा ध्येय है। उसी ध्येय से हम आगे बढ़ रहे हैं सब लोग और हम जानते हैं कि मीडिया वाले हमें क्वेश्चन क्या पूछेंगे। अब जब आपने सब कैमरे लगाए तो बाकी बातों में जानता हूं कि भूमिका आपकी है। बाकी तो आप लोग क्या पूछने वाले हो, क्यों पूछने वाले हो, मुझे मालूम था। तो इसलिए आप मुझसे , हम सब से एक्सपेक्ट मत करो कि हम कोई ऐसी बात बोलेंगे जिससे आपस में लड़ाई बढ़े यह बात है।

Ashok Gehlot

82,236 просмотров • 2 месяцев назад

जोधपुर में पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण संबंधी प्रश्न के जवाब में : मैं कह चुका हूं, बगैर अशोक गहलोत की मौजूदगी के अंदर प्रोग्राम की गरिमा घटा दी। जिस व्यक्ति ने जब कभी बीमार पड़े हैं, उनको कैंसर हो गया था। मुंबई हो, दिल्ली हो या सिविल लाइंस हो, जितनी बार मैं मिला हूं, कोई नहीं मिला उनसे, और अंतिम जो है उनसे मिलने वाला व्यक्ति था वो मैं भी। जब वो उनका स्वर्गवास हुआ एसएमएस में उनसे मिलने वाला अंतिम व्यक्ति मैं था और मिल के मैं घर पहुंचा, इत्तला आई वो तो समाप्त हो गए, उनकी डेथ हो गई है तो मेरा रिश्ता इस प्रकार का उनसे था और जो हमने रिस्पेक्ट दिया उनको जब वो उपराष्ट्रपति बने मैं एक सौ छप्पन पर आ गया था वो बत्तीस पर आ गए थे, जब मुख्यमंत्री हटे, तब भी मैं उनके घर गया, शपथ लेते ही उनसे मैंने कहा आराम से आप रखिएगा, जल्दबाजी नहीं कीजिए खाली करने की। पूरी सिक्योरिटी आपकी कायम रहेगी, डॉक्टर पूरे आपके ध्यान रखेंगे, कोई तकलीफ आपको आए, आप मुझे फौरन इत्तला करना। तीन बातें मैं उनको कह के आया था और उसके बाद लगातार हम लोग ऐसे रिश्ते रहे। वो भी कहीं जाना होता आराम से मुझे वो इत्तला करते कि मैं भी आपके साथ चल रहा हूं, प्लेन के अंदर हम साथ जाते थे। सरकार बदलने के बाद मेरे तमाम मंत्री थे, जो सीनियर थे मोहनलाल सुखाड़िया जी के वक्त के चंदनमल जी बेड, खेत सिंह जी राठोड़ , प्रद्युमन सिंह जी, गुलाबी सिंह शक्तावत जी तमाम उनके यहां जाते रहते थे, हम कभी एतराज ही नहीं करते थे। आज जमाना बदल गया, मंत्री तो छोड़ दीजिए, MLA भी आ जाए कहीं हम लोगों के यहां पर तो पचास तरह का शक् होने लग जाते हैं उसके ऊपर। हमारे वक्त में, मैं जाता था होली दिवाली वो आते थे मेरे यहां पर। वो रिश्ते रखे हमने और डेथ हुई तो हमने चला करके उनके लिए स्मारक बनाया। वो तो पूरे राजस्थान जानता है कि अगर ये बीजेपी वाले होते ना तो उपराष्ट्रपति बनने पर इनको कोई सम्मान किया, बता दीजिए किया हो तो, मैं तो ऑफिशियली कह रहा हूं ना मैं खुद आरोप लगा रहा हूं, बीजेपी का एक इतना बड़ा पुराना नेता सन बावन से चुनाव जीतता आ रहा है, वो उपराष्ट्रपति बने तो क्या बीजेपी वालों को शानदार स्वागत नहीं करना चाहिए था? किया क्या ? मैंने किया मुख्यमंत्री निवास में बुलाकर के। संपर्क मैंने रखा उसके बाद में भी, और डेथ हुई तो हम लोगों ने स्मारक बनाया उनके लिए। सब दुनिया जानती है। पूरे राजस्थान में यह चर्चा आज भी है उस वक्त भी थी कि अगर बीजेपी वाले होते शायद वो भी ऐसा स्मारक बनाने की बात या जमीन देने की बात नहीं सोच सकते थे। कोई सम्मान नहीं दिया गया ये स्थिति है। इसलिए मैंने कल कहा कि भाई मेरा तो क्षेत्र है वो मेरे क्षेत्र में प्रोग्राम हो रहा है। सरकारी प्रोग्राम नहीं होता तो मैं नहीं करता, यह प्रोग्राम JDA का था अगर मान लीजिए प्रोग्राम प्राइवेट कोई करता तो फिर भी मैं कोई कमेंट नहीं करता। यह प्रोग्राम सरकारी था। रक्षा मंत्री को बुलाया गया और आप लोकल MLA को नहीं बुलाओ, छोड़िए पूर्व मुख्यमंत्री की बात, छोड़िए मेरे क्या रिश्ते थे तब, यह इनकी एप्रोच है। ये तो इस देश में डेमोक्रेसी खत्म कर ही रहेंगे यह इनका संकल्प है। उसी रूप में तमाम बंगाल हो या बिहार हो, चाहे असम हो, देश में राजनीति चल रही बहुत खतरनाक चल रही है।

Ashok Gehlot

26,489 просмотров • 4 месяцев назад

सीधे मुद्दे की बात तो यही है कि इतना कुछ होने के बाद भी पटना के फैसल खान उर्फ 'खान सर' को जो डिजिटल पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर, अभी भी आदरणीय और अविस्मरणीय बताने में लगे हुए हैं, उन्हें Vistaar News पर Gyanendra Tiwari (Vistaar News) और Himanshu Dhariwal की ये रिपोर्ट बहुत ध्यान से देखने और सुनने की जरूरत है. ताकि वो ये समझ जाएं कि अब पटना में जारी इस मौजूदा विवाद के बीच ऐसे गालीबाज और गोलीबाज व्यक्ति की पैरोकारी करने के लिए उन्हें थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी. अब सिर्फ 'खान' वाला खदान खोदने से ही काम नहीं चलेगा, हिन्दू-मुस्लिम का एंगल ढूंढ कर फैजल खान जैसे फूहड़ मास्टरों को सहानुभूति का बैंगल पहनाने वाला ट्रिक भी पुराना हो गया है. अब कानून के मुताबिक कार्रवाई की बात तो होकर रहेगी. मतलब ज्ञानबिंदु वाले रौशन आनंद की गिरफ्तारी पर दबी जुबान में सिर्फ ये कहकर आगे बढ़ जाना कि हां, वो गिरफ्तारी भी गलत है! ऐसा होना तो नहीं चाहिए था! ये कहकर काम नहीं चलेगा...और फिर इस फैसल खान के हिस्से बिहार के सिस्टम और शासन प्रशासन की बपौती सौंपने वाले लहजे में ये कह कर भी काम नहीं बनेगा कि 'खान सर' को पुलिस से कह कर रौशन आनंद को भी छुड़वा लेना चाहिए.. कि जैसे फैसल खान मुसल्लहपुर हाट वाले खान सर नहीं हुए कि गैंग्स ऑफ वासेपुर वाले फैजल खान हो गए! न न न न , ये PR स्टंट तो अब बच्चा भी पकड़ लेगा। सीधे मुद्दे की बात तो ये भी है कि जो बात आज भोपाल के न्यूज़रूम से निकल कर दिल्ली और पटना तक पहुंच रही है, वो बात नोएडा के स्टूडियो में बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी और बिल्कुल इसी लहजे और एटीट्यूड में कही जानी चाहिए थी.. लेकिन नोएडा से ये इसलिए भी संभव नहीं हो पाया क्योंकि कभी इसी नोएडा ने फैजल खान को अपना मंच दिया था..पॉडकास्ट के नाम पर जब यही फैजल खान इस देश के पत्रकारों को लेकर घटिया, गलीच और धमकी भरी बकवास करता था तब उसके सामने बैठे नोएडा के इसी न्यूज़रूम से निकले हुए पॉडकास्टर पत्रकार खीखी कर दांत निकाल रहे होते थे... सब खाली व्यूज के चक्कर में! बाकी BETWOON 2026 भैया, आपको तो ये पूरी रिपोर्ट दो बार देखनी चाहिए. आप कहां अदाणी और अनिल अग्रवाल पर चले गए! आप फैसल खान और रौशन आनंद के बीच की इस कोचिंग क्लैश को सिर्फ 'खान' के नाम पर फ्लैश मार कर कैसे दिखा सकते हैं? #bihar #patna #KhanCoachingCentre #GyanbinduCoachingCentre #PatnaPolice

Bharat Suraj भारत सूरज

21,563 просмотров • 4 месяцев назад

मेरा टिकट कटने और इलेक्शन हारने के बाद 1980 में मैं चौधरी चरण सिंह जी से टिकट मांगने गया तो वो बोले आपकी तो जमानत जब्त हुई थी मैं बोला नहीं साहब मैं सिर्फ 1100 वोटों से हारा हूँ उन्होंने इलेक्शन कमीशन की किताब मंगाई और देखा तो चौंक गए मैं सच में कम वोटों से ही हारा था! मुझे टिकट मिला और मैं चुनाव जीत गया कई दिन बाद मैं उनसे मिलने गया चौधरी चरण सिंह जी बोले बड़े कमज़ोर हो रहे हो मैंने कहा साहब टेक्सटाइल की हड़ताल चल रही है चन्दा इकट्ठा कर रहे हैं तो वो बोले 25000 हम भी देते हैं 1980 में 25000 आज के 25 लाख से भी ज्यादा है मैं उस रकम को सुन कर चौंक गया। उस रकम को मैंने हड़ताल में लगाया लेकिन उसमें से 11000 रुपए बच गए जिन्हें मैं चौधरी साहब को वापस करने गया तो वो चौंक गए अरे भाई ये पैसे तो हमने आपको दिए थे मैं बोला साहब पैसे मजदूरों के लिए दिए थे जो बच गए वो आपकी अमानत है.! (आजम खान साहब और कपिल सिब्बल जी)

Jeetu Besla

328,595 просмотров • 1 месяц назад

मुख्यमंत्री जी के इमरजेंसी के विषय में दिए वक्तव्य के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में : देखिए फर्क इतना ही है जब इमरजेंसी लगी थी उस वक्त कई लोग जेल गए थे, इमरजेंसी की जो घटना थी उसको ले के कांग्रेस नेताओं ने इंदिरा गांधी जब वापस आंधी चली उनकी तब प्रधानमंत्री बनीं तब भी हमनें पब्लिकली कहा इसमें कई खामियां हुई कुछ गलतियां हुई हैं उसके लिए हमें खेद है , वो चैप्टर क्लोज हो गया , इससे ज्यादा आप क्या चाहते हैं ? जेल हम भी गए हैं भजनलाल जी को नहीं मालूम है। इतना ही फर्क है कि वो गए जेल इमरजेंसी के अंदर गए और हम लोग जेल गए जब इंदिरा गांधी को आपने जो चुनाव जीत कर आई थी चिकमंगलूर से बावजूद उसके आपने पार्लियामेंट से उनको निष्कासित कर दिया और जेल भेज दिया उनके समर्थन में लाखों लोग जेल गए हैं हिंदुस्तान भर के अंदर। दो हजार लोग तो मेरा ख्याल से जोधपुर से गए होंगे तो वो माहौल अलग था, उनको भजनलाल जी को भी इत्ते नए हैं न वो, पहली बार मुख्यमंत्री बने गए पहली बार विधायक बने हैं नौजवान हैं तो अभी उनको कई जानकारियां हैं नहीं इसलिए ऐसी बातें वो बोल देते हैं, माइंड नहीं करना चाहिए। वो भजनलाल जी हैं , भजनलाल जी भजन करने वाले भी होते हैं , उनको तमाम बातों की जानकारी नहीं है। सजायाफ्ता बर्खास्त विधायक श्री कँवरलाल मीणा की मर्सी पिटीशन के संबंध में पूछे प्रश्न के जवाब में : मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है पहले मैं जानकारी प्राप्त करूंगा उसके बाद में कोई कमेंट दे सकता हूं।

Ashok Gehlot

23,469 просмотров • 1 год назад

अनिल यादव जी, वैसे तो मैं इस तरह के पोस्ट को एंटरटेन नहीं करती, लेकिन आप बिना मेरी अनुमति के मेरी वीडियो का इस्तेमाल कर रहे है जो की एक क़ानूनन अपराध है और साथ ही आपने मेरी पत्रकारिता पर सवाल खड़े किये है तो मेरे अपने लिए नहीं पर मेरे दर्शको के लिए ये जानना बहुत ज़रूरी है की आख़िर हुआ क्या था! जैसा की आप देख सकते है, अनिल जी ने वीडियो को बहुत बेहतरीन ढंग से एडिट किया है और बीच में जो घटना हुई उसे स्टार्ट में लगा दिया ताकि थंबनेल देखकर लोग इनके वीडियो को और व्यूज दे दे! अब जरा इस वीडियो को देखिए जहाँ मैं लाइव कर रही थी. यहाँ कई पत्रकार अगल-बगल लाइव कर रहे थे, जिस व्यक्ति से ये बात कर रहे थे उस वक्त वो और उसके बगल वाला व्यक्ति चुपचाप खड़े थे! जैसे ही मैंने बात करना शुरू किया इन्होंने पहली बार में टोक दिया तो मैं पीछे हट गई! उसके बाद जब मैं दुबारा आगे बढ़ी, तो वो चायवाला ख़ुद बोलना चाह रहा था और मेरी तरफ़ मुड़ा, मैंने मौक़ा दिया बोलने का। लेकिन आगे आप देख ही सकते है कैसे छीना झपटी करते हुए इन्होंने उसे खींच लिया! मैंने फिर बड़े इज़्ज़त से कहा आप कर लीजिए और आगे बढ़ गई! इन्होंने इसके ठीक आधे घंटे के भीतर ये वीडियो पोस्ट किया! जब इन्होंने देखा की कई घंटे बीतने के बाद भी मैंने इनके वीडियो को एंटरटेन नहीं किया, तो ये मेरी फोटो पर ज़बरदस्ती कमेंट करने लगे! मैंने फिर भी कोई तवज्जो नहीं दी।आखिर में इतना ही कहूँगी, एक दशक से ज़्यादा फील्ड पर काम कर रही हूँ! तमाम पुरुष सहयोगियों के साथ विपरीत परिस्थितियों में काम किया है लेकिन एक पुरुष पत्रकार की ओर से ऐसी हरकत इससे पहले कभी नही देखी! बेहद दुर्भाग्यपूर्ण!

Shivangi Thakur

101,026 просмотров • 10 месяцев назад

प्रिय बेटा बड़कू नवरात्रि का अवसर है । घर घर में आरती हो रही है “पूत कपूत सुने हैं पर न माता सुनी कुमाता “ । मुझे यह भरोसा नहीं हो रहा है कि वाकई में मेरा कोई बेटा “कपूत” भी हो सकता है। मुझे मजबूरी में वह वीडियो जारी करना पड़ रहा है जिसमें मुझे पीटने का सच तुम्हारे नाना और मेरे पिता जी बयान कर रहे हैं। मेरी वही बहन जिसके साथ तुम्हारे पिता जी और मेरे पति रघुराज सिंह ने अवैध संबंध बनाये और उसका जीवन बर्बाद किया और मेरा भी जीवन बर्बाद किया। वही बहन मुझे जब पीट रही थी तो मैंने उसका प्रतिकार किया। खैर सभी को पता चल जाएगा यह सच भी । अभी कई और वीडियो हैं जिसमे तुम्हारे पिता श्री के बारे में तुम्हारे बाबा बड़े महाराज और दादी जी बहुत कुछ कह रही हैं। उन्होंने इनके कृत्यों से ही आजिज आकर यहाँ तक कहा कि वे उनकी मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार भी नहीं करें। यह सब कुछ मैं पब्लिक डोमेन में एक के बाद एक जरूर डालूँगी । मुझे पता है बेटा तुम्हारी मजबूरी। तुम्हें सारा सच पता है। तुम भी मेरे साथ सड़क पर जाने को मजबूर किए गए थे। रात में मुझे तुम सभी बच्चों के साथ घर से बाहर सोना पड़ा था। मुझे उम्मीद है तुम्हें सद्बुद्धि भी आएगी और सोचोगे कि तुम्हारी माँ के साथ क्या किया गया था और माँ ने कितनी प्रताड़ना एक व्यक्ति की अय्याशी और आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से झेली है। किस मजबूरी में माँ ने मुँह खोला। फिर भी तुम बेटा अपने करियर के लिए और सुख सुविधाओं के लिए जो भी कर रहे हो उससे मुझे एतराज नहीं। मैं चाहती हूँ दुनिया की सारी ख़ुशी तुम्हें मिले। बस तुम्हें दुनिया मेरा नालायक बेटा न कहे। सारे साक्ष्य एक के बाद एक मिलेंगे। फ़िलहाल वह सच जो तुमने किसी दबाव में आधा बताया , आधा छिपाया और जितना बताया वह भी झूठ । एक बार देखो और फिर हो सके तो एक बार और लिखना । बेटा मैं मजबूर हूँ ! जवाब तो देना ही पड़ेगा। और हाँ अंत में फिर दोहरा रही हूँ मेरे चरित्र हनन से कुछ नहीं होगा यह जाँच एजेंसियों को बताना ही होगा कि इतने अवैध हथियारों का जखीरा कहाँ से आया और क्या कोई इसके पीछे आपराधिक गठजोड़ है। क्या कोई बड़ा अंतर्राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह से इसका संबंध है। मार पिटाई के मैनिपुलेटेड वीडियो तुम्हारे पापा की मदद नहीं कर पायेंगे। क्योंकि उनका अपराध बहुत बड़ा है और लोगों की सुरक्षा के लिए उनका कृत्य बहुत खतरनाक भी है। तुम्हारी माँ

Bhanvi Kumari Singh Bhadri

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सवाल: मुख्यमंत्री ने कहा है कि निकाय चुनाव में सरकार ने पुलिस का इस्तेमाल नहीं किया? जवाब: इससे बड़ा सफेद झूठ कोई हो नहीं सकता। अगर मुख्यमंत्री भजनलाल जी यह बात बोलते हैं कि पुलिस का इस्तेमाल हुआ ही नहीं है, तो मैं समझता हूँ पूरे प्रदेश के अंदर जहाँ-जहाँ पुलिस का इस्तेमाल हुआ है, वहां के लोग हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी के बारे में क्या सोचते होंगे इसका आप अंदाज़ कर सकते हैं। राजस्थान को लेकर सोशल मीडिया तक में नेशनल न्यूज़ बन गई है। बंगाल पैटर्न पर यहाँ पर क्या नहीं हुआ? उठा कर ले गए, मुक़दमे दर्ज कर दिए, मकान गिराने की धमकियाँ दी गईं ,सब कुछ हुआ, उसके बाद में अगर ऐसा कहें ! और पुलिस के अधिकारियों का भी इस्तेमाल हुआ, कुछ अधिकारियों ने दबाव में आके ये काम किया, वो उचित नहीं है। ऐसे वक्त में उनको अपने कर्त्तव्य को याद करना चाहिए। मैंने सुना है कि कुछ तो बहुत बड़े अधिकारी हैं, उनका नाम क्या लेवें। वहाँ के डायरेक्शन से मजबूरी के अंदर लोगों को करना पड़ा । नीचे वाले हमें मैसेज दे रहे हैं 'साहब, हम क्या करें? आपने जो कमेंट किया है सच्चाई है, परंतु अगर हमारे बड़े-बड़े अधिकारी हमें मैसेज देंगे, तो हम क्या कर सकते हैं?' तो आप सोच सकते हो कि डीजी तक का नाम आए, शायद डीजी साहब ने चार दिन की छुट्टी इसलिए ली, सुना मैंने, पता नहीं ली कि नहीं ली, मुझे नहीं मालूम है। आज ही मालूम पड़ा कि डीजी साहब ने चार दिन की छुट्टी ले ली। तो छुट्टी क्यों ली? या तो इसलिए ली होगी कि भई विपक्ष वाले भी हमें बार-बार फोन करेंगे कि भई हर-हर जगह, हर ज़िले के अंदर गड़बड़ी हो रही है, तो मैं किस-किस को जवाब दूंगा, या तो यह हो सकता है। इसके मायने यह हुए कि अगर डीजी साहब ने छुट्टी ली है तो इसका मतलब उनको मालूम था कि पूरे प्रदेश के तमाम ज़िलों में जो स्थिति बनी हुई है वो सच्चाई है और मैं क्यों बार-बार जवाब देता फिरूँ। क्योंकि आप जानते हैं कि जब मुख्यमंत्री का आदेश हो जाता है और मुख्यमंत्री जी ने आज इस बात का खंडन नहीं किया कि मैंने चुनाव के पहले कलेक्टरों को और एसपी को बुला के बात नहीं करी थी। इसका खंडन करना चाहिए था, 'पुलिस का हस्तक्षेप नहीं हुआ' यह कहने के बजाय उनको कहना चाहिए था, 'कोई एसपी, कलेक्टर से मैंने बात नहीं करी, चर्चा ही नहीं करी चुनाव के बारे में।' यह कहना चाहिए था। इसलिए मैं समझता हूँ फिर वो एक्सपोज़ हुए हैं यह बात बोल करके कि 'पुलिस का हस्तक्षेप हुआ ही नहीं राजस्थान के अंदर।' यह बात है।

Ashok Gehlot

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बड़ा इंसान वह होता है जो सामने वाले को कभी छोटा महसूस नहीं करवाता मैंने NDTV में 17 साल काम किया इस दौरान निधि कुलपति जी से जब भी कभी बात हुई तो कभी भी यह एहसास नहीं हुआ कि वह मुझसे कितनी सीनियर हैं और मैं कितना जूनियर उनके सामने तो मैं कल भी बच्चा ही था, आज भी हूँ लेकिन उन्होंने हमेशा मुझे इतनी इज़्ज़त दी कि शब्द नहीं हैं हालत यह होती थी कि निधि जी ही हमेशा मुझसे इस तरह बात करती थी जैसे उनको कुछ नहीं पता और मैं ही सब कुछ जानता हूं ये उनकी ख़ासियत थी हर मुद्दे या चीज़ को समझने की जिसमें वो अपने ज्ञान का प्रदर्शन ना करके सामने वाले का ज्ञान और जानकारी अर्जित करती थी कभी मैंने उनको किसी पर गुस्सा करते हुए, चिल्लाते हुए या ऊंची आवाज में बात करते हुए नहीं देखा-सुना मैंने NDTV पिछले साल ही छोड़ दिया था लेकिन कल जब निधि जी का रिटायरमेंट का दिन था और यह एहसास हुआ कि अब वो एंकरिंग करती नहीं दिखेंगी तो ऐसा लगा जैसे मानो वो उस संस्थान से जा रही हैं जिसमें मैं भी काम करता हूँ दरअसल दोस्तों हम लोग NDTV घराने के लोग हैं वो NDTV जो हर गरीब, कमज़ोर, लाचार, पीड़ित, वंचित और शोषित की आवाज़ था वो NDTV जो चैनल नहीं विचार था इसलिए हमको यह फर्क नहीं पड़ता कि हम तकनीकी रूप से एक संस्थान में काम करते हैं या नहीं हम विचारों से जुड़े हुए हैं और विचार कभी मरता नहीं पत्रकारिता के क्षेत्र में निधि जी ने जो योगदान दिया उसके लिए देश उनका आभारी रहेगा निधि जी की एंकरिंग हमें हमेशा याद दिलाएगी कि एक एंकर को कैसा होना चाहिए मैंने बहुत कम लोग देखे हैं जो इतने मशहूर और वरिष्ठ होते हुए भी सम्मानित, विनम्र, सभ्य, और सुसंस्कृत होते हैं @NidhiKNDTV जी, आपको आगे के जीवन के लिए अनंत कोटि शुभकामनाएं

Sharad Sharma

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आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

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कोटा में प्रसूताओं की मौत के सम्बन्ध में मीडिया से बातचीत की : देखिए बहुत ही गंभीर स्थिति है। जिस रूप में यह 4 मई से आने लगे अब आप सोच सकते हो कि 4 मई, 4 जून, लगभग डेढ़ महीना हो गया। तो इनमें से जो चार की डेथ हो गई है। और अभी तक उनका एफ़.एस.एल. वगैरह की रिपोर्ट आती है, अभी तक आई नहीं है। अब डॉक्टर कहते हैं चार-छह महीने लगते हैं। तो मालूम करना पड़ेगा वास्तव में चार-छह महीने लगते हैं या कम, या इमरजेंसी में और कहीं भेज के हम करवा सकते हैं क्या रिपोर्ट? राजस्थान के अलावा भी, यह तो हमें मालूम करना पड़ेगा, हमें मालूम नहीं। बाकी जो पाँच पेशेंट भर्ती हैं, उनकी किडनी की स्थिति में थोड़ा-बहुत फ़र्क है। किसी की ज़्यादा, किसी की कम पर सबकी किडनी डैमेज है। ठीक है? डायलिसिस किसी की तीन बार होता है सप्ताह में, किसी की दो बार, किसी की एक बार होता है। ये स्थिति बनी हुई है। परिवार वाले करीब-करीब ये सब गरीब हैं। एक भी परिवार ऐसा नहीं मिला जो कि यह सब कुछ करने के लिए सक्षम हो। एक बेटा मान लो टैक्सी ड्राइवर था, वो टैक्सी बंद हो गई, ये सेवा कर रहा है वो। ये स्पेशल केस है, ये मामूली केस नहीं है कि किन कारणों से ये प्रसव के बाद में स्थिति बनी है, ये बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। डॉक्टर भी कहते हैं हमें नहीं मालूम। टीमें आई हैं, एम्स की भी आई हैं और स्टेट गवर्नमेंट की भी आई है, उसका तो मैं स्वागत करता हूँ कि कम से कम टीमें आई हैं, एम्स की भी और स्टेट गवर्नमेंट की भी। उनकी रिपोर्ट क्या है? यह यहाँ के डॉक्टरों को मालूम नहीं है और यह स्थिति इतनी सीरियस है, ऐसी बातें पब्लिक से भी शेयर करनी चाहिए कि भाई, कुछ कमी रह गई थी दवाओं में? या इलाज में? देखभाल में? ये नौबत क्यों आई? क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल में दवाएं वही है कह रहे हैं। यहाँ के डॉक्टर कह रहे हैं प्राइवेट अस्पताल में दवाएं वही थी, वहाँ ये स्थिति नहीं बनी है। तो वहाँ नहीं बनी फिर यहाँ ही क्यों बनी? जेके के अंदर भी दो डेथ हुई। तो जेके में दो डेथ हुई, यहाँ चार डेथ, यहाँ दो? तीन डेथ। तीन डेथ, यहाँ आ गए, वो यहाँ आ गए शिफ्ट हो गए थे। यहाँ भी, आप ठीक कह रहे हैं। तो ये स्थिति है। मेरी मांग मुख्यमंत्री जी से और स्वास्थ्य मंत्री जी यह रहेगी कि इस केस को आप स्पेशल मानो। खाली इलाज फ्री हो गया, उसमें भी क्या है? कई लोग समझते नहीं हैं। दवाएं जैनरिक दी जा रही है मान लो। हमने खुद ने फैसला किया 10 साल पहले जैनरिक दवाओं का, डायलिसिस फ्री किया हम लोगों ने। परंतु कई लोगों को भ्रम रहता है, कई लोग कहते हैं ब्रांडेड दवाएं दो तो ज़्यादा से जल्दी ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों ने शिकायत करी, तो उनको भी तसल्ली दिलानी चाहिए कि जैनरिक दवाएं और ब्रांडेड में कोई फ़र्क नहीं है। फिर भी मान लो, क्योंकि स्पेशल केस है, तो मान लो पाँच मरीजों के लिए आप ब्रांडेड दवाएं देकर इनको खुश कर सकते हैं। कॉन्फिडेंस बिल्ड कर सकते हैं, तो करना चाहिए। बात छोटी सी होती है। कुछ इनको इमदाद मिलनी चाहिए। किसी के निधन पर इमदाद करते हैं लोगों की। उनकी तो ऐसी स्थिति है जो डेढ़-डेढ़ महीने से भुगत रहे हैं बेड पर। डीमोरलाइज हैं, ठीक होंगे तो बाद में हमारा क्या होगा? किडनी हमारी खराब हो गई तो डायलिसिस रोज कौन करेगा? यहाँ आने देंगे क्या? ये उनको भ्रम था तो मैंने डॉक्टर से बात करी और उनको विश्वास दिलाया कि आपको कोई मना नहीं करेगा। आप आएं, डायलिसिस करवाएं। पर जिंदगी में डायलिसिस पे जिंदा रहे आदमी, वो ही बहुत बड़ी बात है ना? अगर आपकी किडनियां खराब हो गई है, इलाज के अभाव में या गलत दवाओं से या किन कारणों से, तो सरकार का सबसे पहला काम है कि इसकी तह में जाना चाहिए कि ये हुआ क्यों है? लोग मरे क्यों हैं और क्यों भुगत रहे हैं? ये मालूम जब तक नहीं होगा, तब तक आगे बात बढ़ेगी ही नहीं। ये हम कह के आए है। 1/2 ,

Ashok Gehlot

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