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सलुम्बर रावत देवव्रत सिंह चुण्डावत द्वारा रक्त तिलक 🗡️

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मेवाड़ के 77वें महाराणा और एकलिंग जी दीवान विश्वराज सिंह जी मेवाड़ (Vishvaraj Singh Mewar) का राज तिलक हुआ संपन्न। सलूम्बर के रावत साहब देवव्रत सिंह जी चूंडावत ने अंगूठा काटकर रक्त से विश्वराज सिंह जी मेवाड़ का राजतिलक किया। पितामह भीष्म ने जैसे हस्तिनापुर गद्दी के लिए ज्येष्ठ पुत्र होते हुए भी त्याग किया वैसे ही रावत साहब देवव्रत सिंह जी के पूर्वज चूंडा जी ने मेवाड़ के लिए त्याग किया, तभी से मेवाड़ में नए महाराणा चुनने का अधिकार चूंडावतो के पाटवी ठिकाने सलूम्बर को है। मेवाड़ का असली उत्तराधिकारी और गादीपति उसी को माना जाता है, जिसके पास : 1 - सलूम्बर के चूंडावतो की तलवार और स्याही। 2 - महाराणा प्रताप के छोटे भाई महाराज शक्ति सिंह जी के वंशज शक्तावतों के पाटवी ठिकाने भीण्डर के शक्तावतों का भाला और 3 - राणा सांगा के समय त्याग करने वाले झाला अज्ज़ा जी सज्जा जी तथा महाराणा प्रताप के समय त्याग करने वाले झाला मन्ना जी वंशजो के पाटवी ठिकाने बड़ी सादड़ी के झालाओ का चंवर ये तीनो चीजे जिसे प्रदान की जाती है, वही मेवाड़ का महाराणा बनता है। ये तीनो चीजे पुरे मेवाड़ के ठिकानेदारों और आमजन की मौजूदगी में महाराणा भगवत सिंह जी देवलोक गमन उपरान्त उनके ज्येष्ठ पुत्र महेंद्र सिंह जी को प्रदान की गयी थी, जिसके बाद आज विश्वराज सिंह जी को प्रदान की गयी है। जय एकलिंग जी जय महाराणा जय क्षात्र धर्म

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