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संविधान में हिंदुस्तान की आत्मा है

78,430 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

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Tamal Dasvor 1 Jahr

When you failed to set narrative on #IndiaPakWar against Modi's India, you started another drama.

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Brahmarshi Aniketanandvor 1 Jahr

ये ड्रामेबाज फिर संविधान दिखाने लगा?

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Anju Chopravor 1 Jahr

Back to Savidhan

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Ajay Sharmavor 1 Jahr

काश तुम्हारी आत्मा भी होती और कुछ शर्म कर लेते 🤣😆🤣😆

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Lt.Cdr ShaShi Singh (R)vor 1 Jahr

Same lollipop 🍭 Again and again.

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Modi ka pariwarvor 1 Jahr

Shameless party

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Vaddepally Praveen 🇮🇳 🕉️vor 1 Jahr

अगर आप जाति के आधार पर लोगों को बांटेंगे, पीएम मोदी और आरएसएस के खिलाफ बेवजह नफरत फैलाएंगे, तो आपको लोकसभा चुनाव में जीती हुई सीटें भी नहीं मिलेंगी। आपको सजा मिलेगी। नफरत को अपने पास ही रखें, उसे न रगड़ें

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ASHOK अशोक Lohiya🌞vor 1 Jahr

इसी संविधान की हत्या कर इंदिरा जी देश मे आपातकाल लगा कर नागरिकों के अधिकार छीने थे।

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Ajai Singhvor 1 Jahr

संविधान में सिर्फ तुम्हारी आत्मा नहीं है न ही तुम्हारे खानदान के किसी सदस्य को संविधान में आस्था रही है ।अगर आस्था होती तो तेरे पिता मरहूम राजीव गांधी ने अपने कांग्रेसी गुलामों के सरपरस्ती में सन् 1984 में दिल्ली में निर्दोष सिखों का नरसंहार निर्दयतापूर्वक न कराया होता है।

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Himanshu Jain (Modi ka Parivar)vor 1 Jahr

चुप रहे #OperationSindoor के समय पता है जानता गाली देगी। सालों तक मरवाते रहे लोगों को सिंदूर की क़ीमत नहीं थी UPA में

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कैसे 42वें संशोधन ने बदली संविधान की आत्मा? भारत का संविधान केवल कानून की किताब नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और स्वतंत्र चेतना का संहिताबद्ध दस्तावेज़ है। लेकिन क्या होगा जब इस संविधान की आत्मा – प्रस्तावना – में राजनीतिक कारणों से हस्तक्षेप किया जाए? कुछ ऐसा ही इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान 1976 में किया था। पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर जी ने उन 10 बिंदुओं पर प्रकाश डाला है, जब बाबा साहेब के संविधान के साथ सत्ता के लोभ में छेड़छाड़ की गई और सेक्युलर व समाजवादी शब्द को संविधान से जोड़ा गया। इस रिपोर्ट में जानिए आपातकाल की सच्चाई: कैसे 42वें संशोधन ने बदली संविधान की आत्मा?

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