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सवर्णों सौगंध है #UGC_Roll_Back हो जाता है तो भी भाजपा को वोट नहीं देना है। पहले बंगाल हराओ फिर उत्तर प्रदेश हराओ उसके बाद मध्यप्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ आदि हराते हुए 2029 में पूरे भाजपा को बर्बाद कर दो।ये इसी के पात्र है।

10,609 просмотров • 7 месяцев назад •via X (Twitter)

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दो में से एक ही बात हो सकती है या तो ये मुख्यमंत्री के ‘संज्ञान’ में हो रहा है या ‘अज्ञान’ में मतलब उन्हें पता ही नहीं है, ये दोनों ही परिस्थितियाँ प्रदेश के लिए हानिकारक हैं। सहारनपुर से लेकर सोनभद्र-मिर्ज़ापुर तक, यूँ तो पूरे प्रदेश में ही अवैध खनन जारी है लेकिन इससे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बुंदेलखंड क्षेत्र है। चंबल जैसी संरक्षित नदी भी इसका अपवाद नहीं है। नदियाँ तो जीवन देती हैं, भाजपाई कम-से-कम नदियों को तो अपने लालच और भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ाएं। भाजपा के भ्रष्टाचार के गोरखधंधे का ‘हिस्सा-बाँट’ पूरे प्रदेश का ‘बंटाधार’ कर रहा है। भाजपा जाए तो चैन आए!

Akhilesh Yadav

57,394 просмотров • 1 год назад

जो लोग संविधान में प्रगतिशील संशोधन करने और मूलभूत बदलाव करने के बीच का अंतर नहीं समझते उन्हें टिकट देकर भाजपा ने भारी भूल की है, लेकिन फिर भी इससे ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्योंकि जनता ने हर भाजपा प्रत्याशी को हराने का फ़ैसला पहले ही कर लिया है। दरअसल भाजपा संविधान को पलटकर ग़रीबों, वचितों, शोषितों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के हक़-अधिकार व आरक्षण मारकर और पूंजीपतियों के हक़ में नीति-योजना बनाकर, सारा फ़ायदा-मुनाफ़ा अपने खेमे के कुछ गिने-चुने खरबपतियों को दे देना चाहती है। जो चुनावी-चंदे के नाम पर अपने बेशुमार फ़ायदे का हिस्सा भाजपाइयों को दे देते हैं। सही मायनों में ये जनता से वसूली का तरीक़ा है क्योंकि कोई भी पूंजीपति अपनी जेब से नहीं देता है, वो तो जनता से ही वसूलकर भाजपाइयों के दल और उनका व्यक्तिगत ख़ज़ाना भरता है। इसीलिए अपने वर्तमान और भविष्य को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश और देश की जनता, इस बार बहकावे में नहीं आनेवाली और भाजपा को हराकर और हटाकर ही दम लेगी। भाजपा हराओ, संविधान बचाओ! #नहीं_चाहिए_भाजपा

Akhilesh Yadav

335,345 просмотров • 2 лет назад

अब तो उल्टा ये कहना पड़ेगा कि चुनाव आयोग का कोई झंडा हो तो वो भाजपाइयों के घर पर लगा दे। अब बस यही बचा है कि चुनाव आयोग भाजपाइयों के घर पर बूथ बना दे और भाजपाइयों को पीठासीन अधिकारी। क्या चुनाव आयोग ने भाजपा को ठेके पर अपना काम दे दिया है या भाजपा ने चुनाव आयोग को संविदा पर रख लिया है। प्रशासनिक पर्यायवाची कोश में ‘चुनाव आयोग’ को ‘भाजपा’ के पर्यायवाची के रूप में जोड़ देना चाहिए। भ्रष्ट-भाजपा शासनकाल में आश्चर्य ये नहीं है कि सरेआम वोट काटने-बढ़ाने का अपराध हो रहा है, आश्चर्य ये है कि संवैधानिक संस्थाओं को ये नज़र नहीं आ रहा है। आज वोट छीनेनवाले कल को जनता का बाक़ी सब भी छीन लेंगे। बाक़ी सब में भाजपाई भी शामिल होंगे, कोई बचेगा नहीं। भाजपाई भी याद रखें : ठगों का रिश्ता, सिर्फ़ ठगी से होता है और किसी से नहीं। इस कहते हैं: अंधेर नगरी, चौपट आयोग!

Akhilesh Yadav

31,716 просмотров • 7 месяцев назад