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हिंदू को बचाने अब कोई अवतार आने वाला नहीं है !
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भगवान भी उसके लिए कुछ नहीं करते हैं जो खुद के लिए कुछ नहीं करता है

सोचना पड़ेगा ही-!मंदिर में फूल है तो त्रिशूल भी है। मंदिर में भजन है तो कृष्णा का सुदर्शन भी है,हनुमान दिखाये गदा ही काम आये,मंदिर में माँ काली है तो शस्त्र से हाथ खाली नहीं है।पहाड़ों कीमंदिर में माँ नैना बोले तू आंखें खोले,माँ ज्वाला भी शस्त्रों के काम आवे राख करने में साथ आवे

आप बात कर रहे बचने और बचाने की जबकि हिन्दू तो खुद मिटने को तैयार है लेकिन समझने को तैयार नहीं है! जाति, वाद, secular, Liberal, भाईचारा और ना जाने कितने मतों में बंटा हुआ है! देश की राजनीति और राजनेता अपने अपने सत्ता स्वार्थों के लिए बांट रहे और हम हिन्दू बंट रहे!

मैं बोल बोल कर थक गया हु। हमें इस युद्ध में अर्जुन बनना है। सारथी तो हमारे साथ हैं।

भागवत गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं - स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि। धर्म्याद्धि युद्धाछ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते।। अपने स्वधर्म (क्षात्र धर्म) को देखकर भी तुम्हें विकम्पित अर्थात् कर्तव्य-कर्म से विचलित नहीं होना चाहिये; क्योंकि धर्ममय युद्ध से बढ़कर क्षत्रिय के लिये दूसरा कोई कल्याणकारक कर्म नहीं है। वो आगे ये भी कहते हैं - अथ चैत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि। ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि।। अब अगर तू यह धर्ममय युद्ध नहीं करेगा, तो अपने धर्म और कीर्ति का त्याग करके पाप को प्राप्त होगा। सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ। ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि।। जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुःख को समान करके फिर युद्ध में संग्लग्न होना चाहिए । इस प्रकार युद्ध करने से हम पाप को प्राप्त नहीं होंगे। अतः जिस दिन हिन्दू शास्त्र को अध्ययन करना शुरू करेंगे, हमें शत्रुबोध का ज्ञात हो जाएगा।

भगवान के भजन को गंदेगाने कह कर हमारे महान संगीत विद्या का अपमान करना बंद कर नीच तू उधव के समान कोरा ज्ञान रखता हे भक्ति को समझने के लिए तुझमें शक्ति नहीं राधा राधा करते जो कीर्तन करते हें तूने आज उन सभी का अपना किया हे

बिलकुल सही बात कही आपने हम हिंदूओ को अपने लिए और अपने हिंदू राष्ट्र भारत के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। जिहादी सोच वाले सुअरों के लिए


