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हम शांति के पक्ष में हैं... #PMModiPodcast

17,216 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 9

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21_ME_011_ Anurag chatterjee1 год назад

लेकिन चीन से जमीन नही ले आ पा रहे वाह मोदी जी वाह

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Viral_OR_Cash1 год назад

शांति, जैसे कि : मस्जिदों के सामने गालियाँ देना, तलवारें और त्रिशूल चलाना पुलवामा की जाँच का खुलासा ना करना Fake news factory चलाना सब संस्थान कंट्रोल में रखना और वहाँ अपने गुर्गे बैठाना 24*7*365 साम्प्रदायिकता बनाए रखना चुनाव आयोग तक को appoint करने के लिए CJI हटाना 😅😅

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Ashish Kushwaha1 год назад

Woooooooooooooooooooow Very Good 😊

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Solar Heavy1 год назад

- Moonlight

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Amit1 год назад

@grok बीजेपी के सत्ता में आने के बाद कितने दंगे हुवे देश में

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Ashutosh Singh(मोदी का परिवार)1 год назад

जय श्री राम🙏

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mahendra chajjed1 год назад

But more than a year .... Manipur still Waiting

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मोहित गौड़1 год назад

#मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार #मऊगंज_नरसंहार

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Vishal jain1 год назад

I PROUD OF OUR PM.

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हमें रौब से कहा जाता है कि कश्मीर में शांति आ गई है। हम पूछना चाहते हैं कि क्या शांति सिर्फ़ राजनीतिक लफ़्फ़ाज़ी से आती है? ▪️दिहाड़ी मज़दूरों के लिए शांति नहीं है; ▪️कश्मीरी पंडितों के लिए शांति नहीं है; ▪️स्थानीय नागरिकों के लिए शांति नहीं है; ▪️पर्यटकों के लिए शांति नहीं है; ▪️तीर्थयात्रियों के लिए शांति नहीं है; ▪️सुरक्षाबलों के लिए शांति नहीं है। एक तरफ़ NDA सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम चल रहा था, दूसरी तरफ़ कश्मीर में निहत्थे तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमला हो रहा था और तीसरी तरफ़ भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मैच चल रहा था। अब हम पूछना चाहते हैं, क्या क्रिकेट और आतंकवाद साथ साथ चल सकते हैं? #Kashmir

Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ

1,023,838 просмотров • 2 лет назад

हम दुनिया में शांति चाहते हैं। ईरान हमारा पड़ोसी है और मुश्किल वक्त में हमेशा हमारे साथ खड़ा रहा है। ईरान के साथ हमारे व्यापारिक संबंध हैं और हम वहां से कच्चा तेल आयात करते हैं। जब UN में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठा था, तब भी ईरान ने हमारा पक्ष लिया। हम चाहते हैं कि ईरान को कोई परेशानी और नुकसान न हो। जो भी देश शांति चाहता है, उनके साथ हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। जब हम लोग शांति से रहेंगे, तभी प्रगति और विकास होगा। अगर दुनिया में हर ओर युद्ध ही युद्ध होगा तो लोगों की मुसीबतें बढ़ेंगी। जब तक लड़ाई बंद नहीं होगी, तब तक दुनिया में शांति नहीं आएगी। कांग्रेस का हमेशा ये उसूल रहा है कि सभी मिल-जुलकर रहें और दुनिया में शांति स्थापित हो। हमें एक दूसरे से लड़ना नहीं चाहिए, जो भी समस्याएं हैं, उन्हें बातचीत से सुलझानी चाहिए। : कांग्रेस अध्यक्ष श्री Mallikarjun Kharge

Congress

24,240 просмотров • 1 год назад

जब नोबेल शांति पुरस्कार समिति के अध्यक्ष से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा खुद को बार-बार नोबेल शांति पुरस्कार का हक़दार बताने के दावे के बारे में सवाल पूछा गया तब उनका जवाब - "नोबेल शांति पुरस्कार के लंबे इतिहास में इस समिति ने हर तरह के कैंपेन और मीडिया का अटेंशन देखा है। हमें हर साल हज़ारों-हज़ार चिट्ठियाँ मिलती हैं, जिनमें लोग यह लिखते हैं कि उनके लिए शांति का क्या मतलब है। समिति जिस कमरे में बैठकर विचार करती है, वहाँ सभी पुरस्कृत हस्तियों के चित्र लगे हैं-जिन्होंने साहस और ईमानदारी से काम किया है। हम अपने निर्णय काम और अल्फ्रेड नोबेल की इच्छाओं के आधार पर लेते हैं।"

Ankit Kumar Avasthi

163,869 просмотров • 11 месяцев назад

हम सदन में अपनी बात रखना चाहते हैं। हम देश को बताना चाहते हैं कि जनता के मुद्दों के लिए हम किस स्तर से अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन हमें वक़्त ही नहीं दिया जा रहा है। सत्ता पक्ष के लोग कानून के खिलाफ बात करते हैं तो उन्हें मौका दिया जाता है। मैं दुख के साथ कहना चाहता हूं कि जो लोग किसी विषय पर नहीं बोलना चाहते, सिर्फ दूसरों पर टीका-टिप्पणी करने में लगे रहते हैं, उन्हें सरकार और सभापति की ओर से प्रोत्साहन मिल रहा है। मैं बार-बार उठता रहा, लेकिन उन्होंने कभी हमारे लिए गंभीरता नहीं दिखाई। सभापति को किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए। दोनों पक्षों को बराबरी का दर्जा देना चाहिए। एक तरफ नेता सदन को बात करने के लिए मौका दिया जाता है, दूसरी तरफ विपक्ष में बैठे हुए लोगों को मौका ही नहीं मिलता। इस बारे में हमने कई बार अपील की, लेकिन वे सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं। जब हमें बोलने का मौका ही नहीं मिलता तो अपनी बात हम कहां रखें? आज तक ऐसा नहीं हुआ कि जब सत्ता पक्ष ही सदन बंद करने के लिए आगे आता है। हम लोग शांति से सुनना चाहते हैं, डिबेट करना चाहते हैं, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग वेल के नजदीक आकर चिल्लाते हैं। सभापति हमेशा कहते हैं कि मैं किसान का बेटा हूं। इस पर मेरा कहना है कि हम भी किसान और मजदूर के बेटे हैं। मैं कभी डरने वाला नहीं हूं। मैं अपने स्वाभिमान के लिए लड़ता रहूंगा। हम लड़ते आए हैं और ये लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हमें समान अधिकार नहीं मिल जाते। संविधान के तहत हमें जो मिलना चाहिए, वह अगर नहीं मिला तो हम लड़ते ही रहेंगे। सदन में जब हम खड़े होते हैं तो पूरा सत्ता पक्ष खड़ा हो जाता है। उन्हें शांत कराना और हमें बोलने देना यह सभापति का काम है और कई सारे लोग यह करते आए हैं। आजकल तो सदन में ऐसा माहौल हो गया है कि टीवी भी उनका, दिखाने वाले भी उनके... यानी सब कुछ उनके कंट्रोल में है। हम जब बोलते हैं, तब दिखाया नहीं जाता। ऐसा पहले नहीं था। पहले सभापति को भी दिखाया जाता था और जो बोलते थे, उनको भी दिखाया जाता था। हमारे लोग ही बाहर पूछते हैं क्या आप सदन में नहीं थे- क्योंकि आप दिखे नहीं। ये सब करके लोगों के बीच ऐसा नजरिया बनाना चाहते हैं कि सदन में विपक्ष के लोग ही हंगामा करते हैं। अगर आप कभी गैलरी में बैठेंगे तो आपको पता चलेगा कि असलियत में हंगामा सत्ता पक्ष कर रहा है। सदन में हमारे बोलने के समय सत्ता पक्ष के लोग हंगामा करने लगते हैं, ऐसे में हमें जोर से बोलना पड़ता है, जो कि हमें पसंद नहीं है, लेकिन ये सब मजबूरी में करना पड़ता है। अगर सत्ता पक्ष अपनी गलतियां नहीं सुधारेगा और दूसरों को बात करने के लिए मौका नहीं देगा, तो लोकतांत्रिक तरीके से सदन कैसे चल पाएगा?

Mallikarjun Kharge

50,714 просмотров • 1 год назад