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Ana Sayfaya Dön

हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ गीत नया गाता हूँ। ~अटल बिहारी वाजपेयी🌷

15,189 görüntüleme • 1 ay önce •via X (Twitter)

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एक नए भारत का निर्माण आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के नेतृत्व में हो रहा है और गरीबों के कल्याण में यह योजना महत्वपूर्ण रोल अदा करेगी। कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं होता। एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो मैं इन निराश और हताश लोगों को अटल जी की पंक्तियाँ सुनाकर अपनी बात समाप्त करता हूँ। गीत नया गाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ गीत नया गाता हूँ। और यह भी कहना चाहता हूँ कि इनके हंगामे से हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ गीत नया गाता हूँ। गीत नया गाता हूँ। विकास का गीत, जनकल्याण का गीत, गरीब कल्याण का गीत। #125days_RozgarKiNayiGuarantee

Shivraj Singh Chouhan

86,398 görüntüleme • 8 ay önce