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हर मौज थी बेचैन बहकने को कभी से ख़ुद आप ही दरिया में नहाने नहीं उतरे ...

10,974 просмотров • 5 месяцев назад •via X (Twitter)

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झूठ, कपट, निंदा को त्यागो, हर प्राणी से प्रेम करो । कभी न देखो भेद किसी में, सबमें ही भगवान बसा है। घर पर आए अतिथि को प्यारे, यथा-शक्ति सत्कार करो। मिट जाएं अभिमान की रेखाएं, प्रेम से हर व्यवहार करो। पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएँगे। कभी साधु, कभी सन्त बनकर, तुमको ही आज़माएँगे। कभी भूखा बन द्वार खटके, कभी प्यासा बन जाए। जो सेवा से चूक गया है, वो पछताए, बस पछताए। निर्मल मन के दर्पण में, राम के दर्शन पाएगा। जो सच्चे भाव से प्रेम करेगा, वही प्रभु को पाएगा। मतलब से जो नाता जोड़े, वो खाली ही रह जाएगा। जो निष्काम सेवा करता है, उसका जीवन सफल हो जाएगा। भजन का सार- ➡ झूठ, द्वेष और दिखावे से दूर रहो ➡ हर जीव में भगवान का दर्शन करो ➡ अतिथि को देवता मानकर सेवा करो ➡ निर्मल मन में ही प्रभु निवास करते हैं

Akanksha Awasthi

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