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हवस का मौलाना. मुल्लों के सामने छोटी बच्ची भी सुरक्षित नहीं है

1,445,672 次观看 • 24 天前 •via X (Twitter)

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भावुक कर देने वाला वीडियो 👇 केरल कुंभ मेले में एक अघोरी साधु बैठे हैं, जिनसे लोग आशीर्वाद लेने आ रहे हैं आमतौर पर लोग साधु-संतों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। यहाँ भी बड़े-बूढ़े और अन्य लोग साधु का आशीर्वाद ले रहे हैं जब एक छोटी बच्ची साधु के पास आती है, तो साधु का व्यवहार बदल जाता है। वह स्वयं उस बच्ची के सामने हाथ जोड़ते हैं, उसे देवी के रूप में सम्मान देते हैं और उससे आशीर्वाद माँगते हैं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि हिंदू धर्म में 'कन्या' (छोटी बच्ची) को साक्षात शक्ति या देवी का रूप माना जाता है। एक तपस्वी, जिसने सांसारिक मोह माया त्याग दी है, वह भी एक छोटी बच्ची के सामने नतमस्तक होकर समाज को नारी शक्ति के सम्मान का संदेश दे रहा है। यह वीडियो केवल धार्मिक भक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि यह बेटियों के प्रति आदर और उनके देवी तुल्य होने के भाव को दर्शाता है।

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“जय श्रीराम” बोलने वाले मौलाना को अंततः माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने अपने शब्दों का अर्थ समझाया, तर्क दिए, पुलिस सुरक्षा भी मिली—फिर भी कट्टरपंथी दबाव के आगे उन्हें झुकना पड़ा। यह प्रश्न केवल एक मौलाना का नहीं है। क्या भारत में किसी व्यक्ति को सद्भाव, सम्मान या राष्ट्रीय एकता के भाव से “जय श्रीराम” कहने पर भी कट्टर धमकियों का सामना करना पड़ेगा? हिंदू समाज को भी आत्ममंथन करना होगा। उदारता अच्छी है, पर अपनी आस्था, अस्मिता और अभिव्यक्ति के अधिकार के मूल्य पर नहीं। भाईचारा एकतरफा समर्पण नहीं हो सकता; वह समान सम्मान, समान साहस और समान स्वतंत्रता पर खड़ा होता है। कट्टरपंथ के सामने चुप्पी, तुष्टिकरण और भ्रम—तीनों का नशा उतारना आवश्यक है।

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