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𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐜𝐞𝐥𝐞𝐛𝐫𝐚𝐭𝐞𝐬: 𝐀 𝐭𝐞𝐞𝐧𝐚𝐠𝐞𝐫 𝐜𝐨𝐦𝐩𝐥𝐞𝐭𝐞𝐬 𝐃𝐚𝐧𝐝𝐚𝐤𝐫𝐚𝐦𝐚 𝐏𝐚𝐫𝐚𝐲𝐚𝐧𝐚𝐦 - 𝐚 "𝐩𝐢𝐧𝐧𝐚𝐜𝐥𝐞-𝐥𝐞𝐯𝐞𝐥" 𝐩𝐚𝐫𝐚𝐲𝐚𝐧𝐚𝐦 - 𝐚𝐧 𝐚𝐜𝐜𝐨𝐦𝐩𝐥𝐢𝐬𝐡𝐦𝐞𝐧𝐭 𝐚𝐜𝐡𝐢𝐞𝐯𝐞𝐝 𝐛𝐲 𝐨𝐧𝐥𝐲 𝐚 𝐫𝐚𝐫𝐞 𝐟𝐞𝐰 𝐢𝐧 𝐭𝐡𝐞 𝐩𝐚𝐬𝐭 𝐬𝐞𝐯𝐞𝐫𝐚𝐥 𝐜𝐞𝐧𝐭𝐮𝐫𝐢𝐞𝐬. वाराणसी में आयोजित एक ऐतिहासिक समारोह में 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद (माध्यंदिन शाखा) के अत्यंत कठिन दण्डक्रम पारायण को...

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महाराष्ट्र के 19 वर्षीय युवा वैदिक साधक श्री देवव्रत महेश रेखे जी ने अद्वितीय साधना और अद्भुत स्मरण शक्ति से 2000 वैदिक मंत्रों को कंठस्थ करते हुए जो अभूतपूर्व उपलब्धि अर्जित की है, वह पूरे आध्यात्मिक जगत के लिए प्रेरणा का नव-दीप है। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 'दण्डकर्म पारायणम्' को 50 दिनों तक अखंड, शुद्ध और पूर्ण अनुशासन के साथ संपन्न करना, हमारी प्राचीन गुरु-परंपरा के गौरव का पुनर्जागरण है। मेरे लिए विशेष गर्व का विषय है कि यह वैदिक अनुष्ठान पवित्र काशी की ही दिव्य धरा पर सम्पन्न हुआ। उनके परिवार, आचार्यों, संत-मनीषियों और उन सभी संस्थाओं का हृदय से अभिनंदन, जिनके सहयोग से यह तपस्या सिद्धि को प्राप्त हुई। देवव्रत जी, आपकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाश-स्तंभ बने, ऐसी मंगलकामना के साथ हार्दिक बधाई।

Yogi Adityanath

482,577 Aufrufe • vor 7 Monaten

दोस्तो इस स्थान के बारे में शायद किसी को पता हो क्योंकि ये ऐसा इंसान है जो घने जंगल के बीच ने बसा है और प्राकृतिक सौंदर्य तो इसका देखते बनता है यहां एक तरफ गर्म पानी तो उसी के बगल थोड़ा पानी बहता है मैं सभी से अनुरोध करूंगा एक बार इस आश्रम में जाने का जरूर कष्ट करे आप लोगों को लगेगा कि सच में स्वर्ग में आ गए है l इसका पानी इतना ज़्यादा स्वच्छ है कि अपना चेहरा देख सकते हो ।+++++++++++++++++++++++++ श्री श्री 1008 श्री स्वामी सच्चिदानंद महाराज जी न्यास सतना से 60 कि.मी. दूर सुदूर जंगल में स्थित श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी के नाम से जाना जाता है। सतना से यहां पहुंचने के लिए पक्की सड़क बिरसिंहपुर से होकर जाती है। श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी एक प्राचीन स्थल है जिसका वर्णन महाभारत काल में अघमर्षण तीर्थ के नाम से किया गया है। कहा जाता है कि महाभारत काल में अज्ञात वास के दौरान पांडवों ने यहां आकर तपस्या की थी। धारकुंडी आश्रम की गुफा को ऋषि महात्मा वेद संज्ञक की तपस्थली माना जाता है, ऐसी ऐतिहासिक मान्यता है कि यह धारकुंडी आश्रम से आधा किलोमीटर दूर है। दूर अधरपन कुंड है जहां पांडवों ने अज्ञात वास किया था और द्रौपदी को प्यास लगने पर पांडव जल लेने इसी कुंड पर गए थे जिसमें एक शापित यक्ष अजगर के रूप में रहता था। ऐतिहासिक मान्यता है कि धारकुंडी आश्रम से आधा किलोमीटर दूर अधरपन कुंड है, जहां पांडवों ने अज्ञातवास किया था, लेकिन जब द्रौपदी को प्यास लगी तो पांडव जल लेने के लिए इस कुंड पर गए, जिसमें एक शापित यक्ष अजगर के रूप में रहता था, जो पांडवों से प्रश्न का उत्तर देने पर ही जल पीता था, प्रश्नों का उत्तर न देने पर चारों इयो को मूर्छित कर दिया था, फिर युधिष्ठिर के उत्तर देने पर चारों भाइयों को होशपूर्वक मुक्त कर दिया था और साथ ही यक्ष भी उदार हो गया था, इसलिए उक्त कुंड को अघमर्षण अघमर्षण कहा जाता है। इसे पाप मुक्त कुंड कहा जाता है और तब से सप्तमी रविवार को यहां काफी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं।++++++++ इस धारकुंडी आश्रम का निर्माण श्री श्री 1008 श्री स्वामी सच्चिदानंद जी परमहंस ने भक्तों की सेवा और सहयोग से किया है। पूज्य श्री 1008 श्री स्वामी सच्चिदानंद जी अपने गुरु देव ब्रह्मलीन श्री स्वामी परमानंद जी परमहंस के आशीर्वाद से वर्ष 1956 में इस निर्जन वन में आए थे। यहीं रहकर आपने साधना और तपस्या करके आत्मसाक्षात्कार किया और आज भी आप यहीं विराजमान हैं। वर्तमान में आश्रम में लगभग 80 महात्मा लोग निवास करते हैं और पूज्य श्री के निर्देशानुसार साधना भजन करते हैं। श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने और साधना करने आते हैं, जिनके भोजन और रहने की व्यवस्था आश्रम की ओर से की जाती है। प्रतिदिन सौ से पांच सौ तक दर्शनार्थी आते रहते हैं। लेकिन सप्तमी रविवार, गुरुपूर्णिमा और अन्य त्योहारों पर यहां काफी भीड़ होती है।

अनभिज्ञ

35,122 Aufrufe • vor 1 Jahr

विश्वास, विकास और जनकल्याण के 12 साल! माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत की जनकल्याण व्यवस्था ने ऐसा परिवर्तन देखा है जिसने शासन को सीधे जनजीवन से जोड़ दिया है। अंत्योदय, अंतिम व्यक्ति तक पहुंच के सिद्धांत ने यह सुनिश्चित किया है कि विकास केवल आंकड़ों तक सीमित न होकर, हर जरूरतमंद तक वास्तविक रूप से पहुंचे। 'मोदी की गारंटी' के माध्यम से जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना ने करोड़ों परिवारों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा व नई आशा का संचार किया है। जहां पहले अभाव था, वहां अब अवसर है और जहां संघर्ष था, वहां अब स्थिरता है। साथ ही डीबीटी ने भी व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर जन-जन के विश्वास को मजबूत किया है। ‘विकसित भारत’ की यह यात्रा हर नागरिक के जीवन में सम्मान, गरिमा और उज्ज्वल भविष्य के विश्वास को सशक्त करने की एक प्रेरणादायी और ऐतिहासिक यात्रा है। #12YearsOfGaribKalyan

Dharmendra Pradhan

12,303 Aufrufe • vor 1 Monat

#HBDHoodaJi Congress Mallikarjun Kharge Rahul Gandhi Priyanka Gandhi Vadra Bhupinder Singh Hooda Deepender Singh Hooda Udai Bhan जन्मदिन की पूर्व संध्या पर ब्राह्मण समाज ने दिया हुड्डा साहब को आशीर्वाद पूरे हरियाणा से ब्राह्मण समाज के मौजिज लोग पहुंचे जन्मदिन की बधाई देने पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर पूरे हरियाणा से ब्राह्मण समाज उन्हें आशीर्वाद देने के लिए पहुंचा। प्रदेश के सभी जिलों से ब्राह्मण समाज के मौजिज लोग, नेता, प्रतिनिधिमंडल और विप्र फाउंडेशन के लोग हुड्डा को बधाई देने के लिए पहुंचे। इस मौके पर पार्टी विधायक नीरज शर्मा और कुलदीप वत्स भी मौजूद रहे। हजारों की तादाद में लोगों की मौजूदगी ने बधाई समारोह का रूप ले लिया, जिसका आयोजन हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज और विप्र फाउंडेशन ने किया। कार्यक्रम में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी विशेष तौर पर मौजूद रहे। ब्राह्मण समाज की तरफ से इन दोनों को भी आशीर्वाद दिया गया और सम्मानित किया गया। इस मौके पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने समाज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की तरफ से कुछ मुद्दे उनके समक्ष रखे गए हैं। इनमें चाहे आरक्षण का मुद्दा हो, धौली की जमीन का मुद्दा हो, आयोग या फिर सरकार में प्रतिनिधित्व का मुद्दा, कांग्रेस सरकार बनने पर पहले भी सभी पर विशेष तौर पर जोर दिया गया है और भविष्य में भी इसे अमल में लाया जाएगा। कांग्रेस सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया था। सरकार में भागीदारी से लेकर एचएसएससी, एचपीएससी, बोर्डो में नियुक्ति समेत हर क्षेत्र में समाज को विशेष स्थान दिया गया था। हुड्डा ने कहा कि समाज ने जिस तरह जन्मदिन के मौके पर और लगातार कांग्रेस के कार्यक्रमों में आशीर्वाद दिया है वह खाली नहीं जाएगा। आने वाले समय में हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बना तय है। इस मौके पर कुलदीप वशिष्ठ, पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा, सुमन शर्मा, राजकुमार शर्मा और हर जिले से ब्राह्मण समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। जन्मदिन की पूर्व संध्या पर ब्राह्मण समाज ने दिया हुड्डा साहब को आशीर्वाद पूरे हरियाणा से ब्राह्मण समाज के मौजिज लोग पहुंचे जन्मदिन की बधाई देने पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर पूरे हरियाणा से ब्राह्मण समाज उन्हें आशीर्वाद देने के लिए पहुंचा। प्रदेश के सभी जिलों से ब्राह्मण समाज के मौजिज लोग, नेता, प्रतिनिधिमंडल और विप्र फाउंडेशन के लोग हुड्डा को बधाई देने के लिए पहुंचे। इस मौके पर पार्टी विधायक नीरज शर्मा और कुलदीप वत्स भी मौजूद रहे। हजारों की तादाद में लोगों की मौजूदगी ने बधाई समारोह का रूप ले लिया, जिसका आयोजन हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज और विप्र फाउंडेशन ने किया। कार्यक्रम में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी विशेष तौर पर मौजूद रहे। ब्राह्मण समाज की तरफ से इन दोनों को भी आशीर्वाद दिया गया और सम्मानित किया गया। इस मौके पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने समाज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की तरफ से कुछ मुद्दे उनके समक्ष रखे गए हैं। इनमें चाहे आरक्षण का मुद्दा हो, धौली की जमीन का मुद्दा हो, आयोग या फिर सरकार में प्रतिनिधित्व का मुद्दा, कांग्रेस सरकार बनने पर पहले भी सभी पर विशेष तौर पर जोर दिया गया है और भविष्य में भी इसे अमल में लाया जाएगा। कांग्रेस सरकार के दौरान ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया था। सरकार में भागीदारी से लेकर एचएसएससी, एचपीएससी, बोर्डो में नियुक्ति समेत हर क्षेत्र में समाज को विशेष स्थान दिया गया था। हुड्डा ने कहा कि समाज ने जिस तरह जन्मदिन के मौके पर और लगातार कांग्रेस के कार्यक्रमों में आशीर्वाद दिया है वह खाली नहीं जाएगा। आने वाले समय में हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनना तय है ।

Jitender Kumar Bhardwaj

62,736 Aufrufe • vor 2 Jahren

यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। श्रीराम लल्ला की मूर्ति का निर्माण करते समय, अरुण योगीराज जी ने एक अत्यंत विशेष और अनुशासित प्रक्रिया का पालन किया, जो नौ महीने तक चली। इस दौरान, हर दिन दो बार, श्रीराम की मूर्ति के समक्ष नित्य पूजा और मंत्रों का जाप किया गया। यह पवित्र कार्य प्रतिष्ठित आचार्यों द्वारा किया गया, जिनकी उपस्थिति और आशीर्वाद से मूर्ति में दिव्य ऊर्जा का संचार हुआ। नित्य पूजा का यह विशेष आयोजन न केवल मूर्ति के निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा था, बल्कि यह आत्मिक शुद्धता और श्रद्धा का प्रतीक भी था। आचार्यगण मंत्रोच्चारण के माध्यम से वातावरण को शुद्ध करते हुए श्रीराम के दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए लगातार साधना में जुटे रहे। इस ध्यानपूर्ण प्रक्रिया ने मूर्ति को न केवल रूप बल्कि आध्यात्मिक बल भी प्रदान किया, जिससे यह मूर्ति अत्यधिक पवित्र और महिमामयी बन पाई। #viral #viralvideo

UttarPradesh.ORG News

291,530 Aufrufe • vor 1 Jahr

प्रचंड चण्डिका माँ छिन्नमस्ता के अलौकिक पूजन दर्शन। माँ छिन्नमस्ता, जिन्हें प्रचंड चंडिका के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में से एक हैं. वे अपने एक हाथ में अपना ही कटा हुआ सिर पकड़े और दूसरे हाथ में खड्ग लिए चित्रित होती हैं. उनके इस स्वरूप में, वे रक्तपान करती हैं और उनके धड़ से तीन रक्त की धाराएं बहती हैं। एक कथा के अनुसार एक बार भगवती भवानी अपनी सहेलियों जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गईं। स्नान करने के बाद भूख से उनका शरीर काला पड़ गया। सहेलियों ने भी भोजन मांगा। देवी ने उनसे कुछ प्रतीक्षा करने को कहा। बाद में सहेलियों के विनम्र आग्रह पर उन्होंने दोनों की भूख मिटाने के लिए अपना सिर काट लिया। कटा सिर देवी के हाथों में आ गिरा व गले से 3 धाराएं निकलीं। वह 2 धाराओं को अपनी सहेलियों की ओर प्रवाहित करने लगीं। तभी से ये छिन्नमस्तिके कही जाने लगीं। माँ छिन्नमस्ता के रूप व स्वभाव को देखते हुए इनकी पूजा तांत्रिकों द्वारा तंत्र व शक्ति विद्या अर्जित करने व अपने शत्रुओं का नाश करने के उद्देश्य से की जाती है। आम भक्तों को केवल इनकी उपासना करने की सलाह दी जाती है ना की विशेष रूप से पूजा या साधना की।

प्रियंवदा 🇮🇳🚩

11,167 Aufrufe • vor 1 Jahr

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी को जनसेवा के ऐतिहासिक 25वें वर्ष में प्रवेश करने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन! यह तिथि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के उच्च मूल्यों को स्थापित करते हुए आपके ढाई दशक के अखंड सेवा-यज्ञ की स्वर्णिम यात्रा का प्रतीक है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री के रूप में आपके नेतृत्व में जनसेवा, पारदर्शिता और विकास की दिशा में एक नई शुरुआत हुई, जिसने वह मजबूत नींव रखी, जिस पर आज सशक्त भारत का भव्य भवन खड़ा है। आपके अथक परिश्रम और दूरदर्शी नेतृत्व ने सुशासन का एक नया मानक स्थापित किया है। प्रधानमंत्री के रूप में आपकी नीतियों ने 'अंत्योदय' के संकल्प को साकार करते हुए समाज के सबसे वंचित वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाई। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' और अब 'सबका प्रयास' इन मंत्रों ने भारत को एकजुट करते हुए समावेशी प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया। आज भारत आपके नेतृत्व में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से बढ़ते हुए, वैश्विक मंच पर एक मजबूत, विश्वसनीय और सम्मानित राष्ट्र के रूप में उभर चुका है। आपकी लोकप्रियता देशवासियों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। दिल्ली की जनता की ओर से, हम आपके राष्ट्र प्रथम की भावना से प्रेरित नेतृत्व और 'विकसित भारत' के स्वप्न को साकार करने की आपकी दृढ़ संकल्प का भी अभिनंदन करते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और अनंत यश प्रदान करे, ताकि आपकी सेवा-यात्रा यूं ही निरंतर देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती रहे।

Rekha Gupta

11,901 Aufrufe • vor 9 Monaten

वाल्मीकि जयंती के इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए आइए देखते हैं कि कैसे पीएम मोदी ने महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा दिखाई है और वाल्मीकि समुदाय के उत्थान के लिए कैसे कार्य किए है। पीएम मोदी की महर्षि वाल्मीकि के प्रति हमेशा से ही गहरी श्रद्धा रही है और यही वजह है कि उन्होंने अयोध्या हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा। राम मंदिर के लिए वर्षों से चली आ रही प्रतीक्षा की पराकाष्ठा ही महर्षि वाल्मीकि को सच्ची श्रद्धांजलि है। राम मंदिर के निर्माण के दौरान, पीएम मोदी ने विशेष रूप से इस परिसर के भीतर महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एक मंदिर शामिल करने का सुझाव दिया था। श्री राम जन्म भूमि के महासचिव चंपत राय बताते हैं, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के ट्रस्टियों को भगवान राम के जीवन में सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया और मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि का उचित स्थान का रचना करने का सुझाव दिया।" पीएम मोदी ने हमेशा से ही वाल्मीकि समुदाय के उत्थान के लिए गहरी चिंता दिखाई है। आरएसएस प्रचारक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कार्यकर्ताओं से वाल्मीकि बस्तियों में संपर्क करने, इस समुदाय के विकास के लिए कार्य करने और उनकी सामाजिक प्रगति में मदद करने का आग्रह किया। गुजरात आरएसएस कार्यकर्ता सूर्यकांत सागर अपने संस्मरण में साझा करते हैं की ''नरेंद्र मोदी कहा करते थे कि संघ ने 1925 में समाज को एकजुट करने का जो मिशन शुरू किया था, वह तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक हम वाल्मीकि समुदायों की समान भागीदारी सुनिश्चित नहीं करते।" प्रधानमंत्री मोदी आज भी यह मानते हैं कि देश की प्रगति सभी समुदायों के समान योगदान पर निर्भर करती है। यही कारण है कि 2014 में पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू करने के लिए दिल्ली के पंचकुइयां रोड स्थित वाल्मीकि मंदिर को चुना था। इस कार्यक्रम ने स्वच्छता कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को बढ़ाया, जिन्हें पीएम मोदी ने "स्वच्छाग्रही" कहकर संबोधित किया। वाल्मीकि मंदिर के मुख्य महंत कृष्ण शाह विद्यार्थी बताते हैं "2 अक्टूबर 2014 को पीएम मोदी महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करने के लिए दिल्ली के पंचकुइयां रोड स्थित वाल्मीकि मंदिर आए। मोदी ने स्वयं सफाई करके 140 करोड़ जनता को यह संदेश दिया की स्वच्छता केवल वाल्मीकि समाज की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे देश की है।" पीएम मोदी ने भारत में मैला ढोने (manual scavenging) की प्रथा को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं और हमेशा ही सफाई कर्मचारियों की गरिमा पर जोर दिया है। 2019 कुंभ मेले में, उन्होंने सफाई कर्मचारियों के पैर धोए और उन्हें कर्म योगी कह कर संबोधित किया। अनुच्छेद 370 को निरस्त करना एक और महत्वपूर्ण कदम था जिसने जम्मू-कश्मीर के वाल्मीकि समुदाय को मुख्यधारा में ला दिया। पीएम मोदी ने 2019 में सफाई कर्मचारी कॉर्पस फंड में अपनी व्यक्तिगत बचत से ₹21 लाख का दान भी दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, उन्होंने सफाई कामगार विकास निगम की स्थापना की और वाल्मीकि समुदाय के कल्याण के लिए कई ठोस कदम उठाए। अहमदाबाद में स्वच्छता कार्यकर्ताओं के लिए एक सत्र के दौरान, मोदी ने प्रसिद्ध रूप से कहा, "जो लोग इस शहर को साफ करते हैं वे सफाई कर्मचारी नहीं हैं, वे शहर के पुजारी हैं।" नरेंद्र मोदी गुजरात में भाजपा के संगठन मंत्री के रूप में रहे हों या अलग-अलग प्रदेशों के बीजेपी प्रभारी के रूप में, उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि चुनाव लड़ने के लिए वाल्मीकि समुदाय के सदस्यों को पार्टी का टिकट दिया जाए और पार्टी संगठन में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिले। मोदी सरकार ने विभिन्न पहलों के माध्यम से, वाल्मीकि समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया है, विशेष रूप से शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय में – पीएम मोदी के लिए यह एक मिशन है जो उन्होंने अपने प्रचारक दिनों के दौरान शुरू किया था और आज भी जारी रखा है। #ValmikiJayanti2024 #ModiStory

Modi Story

26,493 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का कृत्य किया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है, उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं, ये उनके व्यवहार में साफ दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध अपनी मर्यादा की सीमाओं को लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है। हम लगातार कहते आए हैं कि राहुल गांधी आज रचनात्मक विपक्ष की बजाय अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय लोकतंत्र में कुछ पद ऐसे होते हैं, जो किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे देश की जनता की आस्था, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। आज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है। हमने भी वर्षों तक विपक्ष में रहकर अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। जिन मुद्दों को लेकर हमारे छात्र विषय रख रहे हैं, सरकार उस पर चर्चा करना चाहती है। राहुल गांधी ने स्वयं जो शर्तें रखीं, सरकार ने उन्हें भी स्वीकार किया। लेकिन जब संवाद और समाधान का अवसर आया, तो वे अपनी ही शर्तों और अपने ही रुख से पीछे हट गए। यह उनके राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। - श्री Nitin Nabin

BJP

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आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का कृत्य किया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है, उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं, ये उनके व्यवहार में साफ दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध अपनी मर्यादा की सीमाओं को लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है। हम लगातार कहते आए हैं कि राहुल गांधी आज रचनात्मक विपक्ष की बजाय अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय लोकतंत्र में कुछ पद ऐसे होते हैं, जो किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे देश की जनता की आस्था, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। आज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है। हमने भी वर्षों तक विपक्ष में रहकर अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। जिन मुद्दों को लेकर हमारे छात्र विषय रख रहे हैं, सरकार उस पर चर्चा करना चाहती है। राहुल गांधी ने स्वयं जो शर्तें रखीं, सरकार ने उन्हें भी स्वीकार किया। लेकिन जब संवाद और समाधान का अवसर आया, तो वे अपनी ही शर्तों और अपने ही रुख से पीछे हट गए। यह उनके राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री Nitin Nabin जी

Sambit Patra

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सर्वप्रथम तो मैं आज 14 नवंबर है। और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का आज जन्म दिवस है। और जिसे हम बचपन से बाल दिवस के रूप में मनाते रहे हैं। और सवेरे सवेरे नीतीश कुमार जी के ट्वीट पर बहुत से लोगों ने अपनी हसरतों का महल सवेरे की किरण के साथ बनाना शुरू किया था शाम होते होते वह नाकामी के मजार में तब्दील होता चला गया। और मैं बाल दिवस की विशेष रूप से शुभकामना दूंगा पूरे देश को कांग्रेस पार्टी को और अत्यंत विशेष रूप से श्री राहुल गांधी जी को भी और तेजस्वी जी को भी। और मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूं, दर्शक अपने स्वविवेक से निर्णय लें। इस चुनाव ने बाल दिवस के दिन दिखाया है कि ‘बाल बुद्धि’ की ‘उच्छंखलता’और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और नीतीश कुमार जी के शासन की ‘परिपक्वता’ दोनों के बीच का अंतर बिहार की जनता भली-भांति समझती है। परंतु कई बातें इस चुनाव में ऐसी हुईं हैं जो भविष्य के लिए चिंता भी उत्पन्न करते हैं। प्रधानमंत्री जी की माता जी को गाली देने से लेकर सेना तक में जाति का विषय लाना, सारे परिवारों को एक सरकारी नौकरी देना तो कही Gen Zee के नाम पर अराजकता का आह्वान करना।कुर्सी के लिये कहाँ तक विपक्ष चला गया यह विचार का विषय है। परंतु बिहार की वह धरती जो माता सीता जी की धरती और भगवान बुद्ध की धरती है, बुद्ध की धरती को बुद्धू बनाने का जो प्रयास किया गया, मुझे लगता है उसका मुंह तोड़ जवाब जनता ने दिया है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

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वीडियो में दिखाई दे रही महिला शशि सिंह हैं, जो एक फौजी की पत्नी हैं। उन्नाव रेप केस के दौरान देश की मीडिया ने उनके साथ गंभीर अन्याय किया। पहले उन्हें गलत तरीके से पुरुष बताया गया और बाद में महिला होने की पुष्टि होने पर उन्हें दलाल की संज्ञा दे दी गई। इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर के साथ शशि सिंह, उनकी बेटी निधि सिंह और उनके पुत्र शुभम सिंह को भी आरोपी बनाया गया था। बाद में अदालत ने शशि सिंह को बाइज्जत बरी कर दिया और उनके पुत्र शुभम सिंह को भी निर्दोष पाया गया क्योंकि वे घटना के समय बीटेक की पढ़ाई के कारण क्षेत्र से बाहर थे। इसके बावजूद मीडिया ट्रायल के जरिए शशि सिंह और उनके पूरे परिवार का चरित्र हनन किया गया। शशि सिंह एक मां, पत्नी और बेटी हैं, लेकिन उन्हें ऐसे अपराध के लिए बदनाम किया गया जो कभी हुआ ही नहीं था। एक सैनिक की पत्नी होने के बावजूद उनके पति को भी दलाल बताकर अपमानित किया गया और उनके बच्चों को सामाजिक कलंक के साथ जीने के लिए मजबूर किया गया। सीबीआई जांच से उन्हें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन चार्जशीट में भी सच्चाई को नजरअंदाज किया गया। जेल में रहते हुए उन्हें यह तक सुनने को मिला कि न्याय से ज्यादा जरूरी राजनीति और चुनाव हैं। लंबे समय तक चले इस झूठे आरोप और मीडिया ट्रायल ने उनका आत्मसम्मान, पारिवारिक जीवन और बच्चों का भविष्य बुरी तरह प्रभावित किया। अंत में जब अदालत से न्याय मिला, तब भी सवाल यह रह गया कि क्या उनका खोया हुआ सम्मान, उनके बेटे की छूटी पढ़ाई और उनके सैनिक पति की गरिमा उन्हें वापस मिल पाएगी। यह पूरा मामला दिखाता है कि किस तरह नारी सम्मान की बात करने वाला समाज और मीडिया कभी-कभी एक निर्दोष महिला को ही सबसे बड़ा शिकार बना देता है।

The Thakur Force

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एक बार एक फौजी की पत्नी के साथ कुछ मनचलों ने छेड़खानी कर दी थी। फौजियों ने उनको पकड़ा और अंडरवियर में सबके सामने उनकी परेड करवाकर माफी मंगवाई। ये मनचला पंजाब के तत्कालीन ताकतवर मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो का बेटा था। आज कांवड़ियों के भेष में कुछ गुंडों ने एक सीआरपीएफ जवान के साथ मारपीट की लेकिन अभी तक DG की एक बयान देने की भी हिम्मत नहीं हुई। 1959,अमृतसर भारतीय सेना के कुछ अधिकारी और उनकी पत्नियाँ अपने एक सहकर्मी को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन गए। कुछ मनचलों ने महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी की और उनके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की. सेना के अधिकारियों ने उन गुंडों का पीछा किया जो पास के सिनेमा थिएटर में शरण लिए हुए थे। मामले की सूचना कमांडिंग ऑफिसर कर्नल ज्योति मोहन सेन को दी गई थी। घटना के बारे में जानने पर, कर्नल ने सिनेमा हॉल को सैनिकों से घेरने का आदेश दिया। सभी गुंडों को घसीट कर बाहर निकाला गया और गुंडों का सरदार इतना मदमस्त और सत्ता के नशे में चूर था; जो कोई और नहीं बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के करीबी सहयोगी और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के बेटे थे।_ सभी गुंडों को उनके अंडरवियर उतारकर अमृतसर की सड़कों पर घुमाया गया और बाद में छावनी में नजरबंद कर दिया गया। अगले दिन, मुख्यमंत्री क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने बेटे को भारतीय सेना की कैद से छुड़ाने की कोशिश की।_ तुम्हें पता है क्या हुआ? उनके वाहन को वीआईपी वाहन के रूप में छावनी में जाने की अनुमति नहीं दी गई, उन्हें कर्नल से मिलने के लिए पूरे रास्ते पैदल चलने के लिए मजबूर किया गया। क्रोधित मुख्यमंत्री कैरों ने पूरे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से की।_ वे दिन अलग थे, लोकतंत्र नवजात अवस्था में था, शक्तिशाली होते हुए भी नेताओं में कुछ संकोच और नैतिकता थी। हैरान, तथाकथित भारत रत्न प्रधान मंत्री नेहरू ने अपने विश्वासपात्र प्रताप सिंह कैरों से सवाल करने के बजाय, अपने अधिकारियों के आचरण के लिए सेना प्रमुख जनरल थिमैया से स्पष्टीकरण मांगा। आपको पता है क्या उत्तर दिया? "यदि हम अपनी मां,बहनों के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते, तो आप हमसे अपने देश के सम्मान की रक्षा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?" नेहरू अवाक रह गये। वह एक बहादुर सैनिक की कहानी थी जिसने अपनी सेना के लिए प्रधान मंत्री को चुनौती दी थी।

Ravindra Singh Sheoran

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दो महीने बाद राहुल गांधी ने बिहार चुनाव प्रचार की शुरुआत लोक आस्था के महापर्व छठी मैया के अपमान से की है। पहले पुरानी तस्वीरों के माध्यम से छठ महापर्व को नीचा दिखाया गया, और अब राहुल गांधी ने बिहार की धरती पर आकर यहाँ के लोकपर्व, करोड़ों लोगों की श्रद्धा और छठ व्रतियों की आस्था पर सुनियोजित तरीके से प्रहार किया है — यह निंदनीय है। इसके विपरीत, दिल्ली में भाजपा की सरकार आने के बाद जिस भव्यता, दिव्यता और अटूट आस्था के साथ छठ पूजा का आयोजन हुआ, वह अभूतपूर्व था। पिछली सरकारों के दौरान हमारे बिहार के छठ व्रतियों को यमुना की जहरीली झाग में पूजा करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। लेकिन इस बार दिल्ली में भाजपा सरकार ने छठ घाटों पर बेहतर व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कीं, जिससे लोगों ने पूरे उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ छठ मनाया। यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी सनातन धर्म के विरोधी हैं, लोकपर्वों के विरोधी हैं और बिहार के विरोधी हैं। उन्हें यह उत्सवी आस्था रास नहीं आई। यही कारण है कि जो कटुता उनके मन में थी, वही भड़ास उनकी जुबान पर आ गई, और उन्होंने बिहार के पर्व एवं लोक संस्कृति को जानबूझकर अपमानित किया। इस घृणित और बिहार-विरोधी बयान के लिए तेजस्वी यादव और महागठबंधन के सभी नेताओं को राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग करनी चाहिए। राहुल गांधी को बिहार की धरती छोड़ने से पहले सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। उनके यह घृणित शब्द केवल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति नहीं, बल्कि बिहार और बिहार की लोक आस्थाओं के प्रति उनके मन में भरी गहरी कटुता का परिचायक हैं।

Amit Malviya

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📍नागपुर 21 से 24 नवंबर 2025 तक नागपुर में आयोजित मध्य भारत की सबसे बड़ी कृषि प्रदर्शनी 'Agrovision' के 16वें संस्करण का आज देश के कृषि मंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan जी, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री श्री Dattatray Bharane जी, कृषि राज्यमंत्री श्री Adv.Ashish jaiswal जी, सहकार राज्यमंत्री श्री Pankaj Rajesh Bhoyar जी, मदर डेअरी के चेयरमन श्री मीनेश शाह जी, श्री पाशा पटेल जी, विधायक श्री चरण सिंह ठाकुर जी, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के कुलगुरू प्रा डॉ श्री गडाख जी, डॉ. श्री पाटील जी, श्रीमती डॉ. खोडे जी, श्रीमती कोमल शाह जी, श्री विजय जाधव जी, Agrovision के पदाधिकारी श्री गिरीश गांधी जी, डॉ श्री सी डी माई जी तथा सांसदों, विधायकों, सहयोगी संस्थाओं के अधिकारी, Agrovision आयोजन के अन्य पदाधिकारी और गणमान्यों की उपस्थिति में उद्घाटन किया। विदर्भ के किसानों को कृषि क्षेत्र की नई तकनीक और व्यवसाय अवगत हो, उनकी आय में वृद्धि हो, किसान कृषि की नई तकनीक से जुड़ें, खेती लाभदायक हो और किसान सुखी, संपन्न और समृद्ध हो इस उद्देश्य से हर वर्ष नागपुर में 'Agrovision' का आयोजन किया जाता है। मध्य भारत की यह एकमात्र भव्य कृषि प्रदर्शनी इस वर्ष अपने 16वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। किसान, कृषि तज्ज्ञ और कृषि प्रेमी जन बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल होते है। इस चार दिन के आयोजन में विभिन्न विषयों पर कार्यशाला, राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी, सेमिनार एवं अनेक महत्वपूर्ण सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 'Agrovision' की अवधारणा 'तंत्रज्ञान के साथ कृषि का विकास' है। इस वर्ष राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी में लघु उद्योगों से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक, बचत समूहों से लेकर केंद्रीय मंत्रालयों तक, अनुसंधान संस्थानों से लेकर कृषि विश्वविद्यालयों तक, 450 से अधिक संगठन सहभागी होंगे। किसान आधुनिक कृषि उत्पादों और सेवाओं के साथ-साथ स्टार्टअप के नवीन उत्पादों को भी देख सकेंगे। सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे सरकारी विभागों से प्राप्त की जा सकती है। निःशुल्क कार्यशालाओं में विभिन्न विषयों पर लगभग 30 कार्यशालाएँ होंगी। इसमें डेयरी फार्मिंग, चारा प्रबंधन, नई तकनीक और प्रसंस्करण उद्योग, कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप्स, गन्ना उत्पादन प्रबंधन और आधुनिक तकनीक, किसान उत्पादक संगठन और कृषि में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग इन कार्यशालाओं के साथ-साथ मधुमक्खी पालन विषय पर राष्ट्र स्तरीय चर्चासत्र और निंबू वर्ग के फल उत्पादन और प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग जैसे विषयों पर परिषद का आयोजन किया गया है। प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और व्यापार पर आधारित भविष्य की समृद्ध कृषि पर विचार करते हुए इस क्षेत्र में अनुसंधान के माध्यम से एकीकृत प्रौद्योगिकियों के विकास पर व्यापक चर्चा करना 'Agrovision' का मुख्य उद्देश्य है। कृषि क्षेत्र की बड़ी और छोटी कंपनियों, राज्य के कोने-कोने से आने वाले लोग और कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त महत्वपूर्ण ज्ञान के कारण 'Agrovision' किसानों के लिए एक विशेष और महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में प्रस्थापित हो रहा है। #Agrovision2025

Nitin Gadkari

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बाड़मेर जिले से धोरीमन्ना एवं गुड़ामालानी उपखंडों को नवगठित बालोतरा जिले में शामिल किए जाने के सरकार के निर्णय के विरोध में आयोजित “जन आक्रोश रैली” में सहभागिता कर क्षेत्र की जनता की न्यायसंगत मांगों का पुरजोर समर्थन किया। पूर्व मंत्री आदरणीय श्री Hemaram Choudhary जी लगातार इस निर्णय को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसे क्षेत्र की जनता की भावनाओं, पहचान और सम्मान के साथ किया गया अन्याय करार दे रहे हैं। वे जनहित में निरंतर संघर्षरत हैं। क्षेत्र की जनता अपने अधिकारों, स्वाभिमान और ऐतिहासिक पहचान के साथ किसी भी प्रकार के अन्याय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रही है। इस जन आक्रोश रैली में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं जनप्रिय नेता आदरणीय श्री Sachin Pilot जी, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री Govind Singh Dotasra जी, नेता प्रतिपक्ष श्री Tika Ram Jully जी, मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी एवं विधायक श्री Harish Chaudhary जी, बाड़मेर–जैसलमेर सांसद श्री Ummeda Ram Beniwal जी, जोधपुर लोकसभा प्रत्याशी श्री Karan Singh Uchiyarda जी ,बाडमेर ज़िलाध्यक्ष लक्ष्मण गोदारा जी,बालोतरा ज़िलाध्यक्ष प्रियंका मेघवाल जी सहित अनेक वरिष्ठ कांग्रेस नेता, जनप्रतिनिधि एवं पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की और स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी क्षेत्र की जनता के हितों, अधिकारों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।

VINOD JAKHAR

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Environment Warriors: The Guardians of the Green' के तत्वाधान में आज मुस्तफाबाद फॉरेस्ट गेस्ट हाउस, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नौवें चरण में साइकिल एवं स्कूल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में तैनात 25 वॉचर्स को साइकिलें प्रदान की गईं। इसका उद्देश्य उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना और गश्त के दौरान उन्हें सुगम आवागमन की सुविधा देना है। Herbivores Species की संख्या बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि जंगल का स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र बेहतर हो रहा है। विभिन्न प्रजातियों के हिरणों के झुंड भी बढ़ गए हैं, जैसा कि 1980 के शुरुआती दशक में हुआ करता था। इस मौके पर वन एवं वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे जिला वन अधिकारी श्री मनीष सिंह जी एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री सहेंद्र यादव जी उपस्थित रहे। इसी क्रम में सीएसआर फंड्स के माध्यम से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए अतिरिक्त वाटर पंप उपलब्ध कराए जाने की घोषणा की गई तथा एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सहयोग के लिए पीताम्बरा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया गया। प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी की कक्षा 5 उत्तीर्ण कर चुकी 10 मेधावी छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं, ताकि वे आगे की शिक्षा के लिए दूरी की बाधा को पार कर सकें, साथ ही नवीन प्रवेश लेने वाले छोटे बच्चों का उत्साहवर्धन करने के लिए उन्हें 'वेलकम किट' (स्कूल बैग, स्टेशनरी और कैप) भेंट की गई। पूर्व में विद्यालय में एक स्मार्ट क्लास की भी स्थापना कराई गई थी! बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी के प्रधानाध्यापक श्री मुनीश पाठक जी भी उपस्थित रहे। इसके साथ ही एक सहज (स्पॉन्टेनियस) क्विज़ का आयोजन भी हुआ, जहाँ जिज्ञासा ने सवालों का रूप लिया और पाँच प्रश्नों ने ज्ञान की लौ को और प्रज्वलित किया। इसी क्रम में एक छात्र ने भावपूर्ण कविता से मन को छू लिया, तो दूसरे ने मधुर गीत से वातावरण को सुरमयी बना दिया। ऐसे अनमोल क्षण ही इस कार्यक्रम की आत्मा बन जाते हैं, युवा छात्र ही देश का भविष्य हैं, और उनकी ऊर्जा में एक उज्ज्वल कल की झलक साफ दिखाई देती है। इन्हीं नन्हे सपनों में कल का सशक्त भारत आकार ले रहा है। इसके उपरांत उपस्थित ग्रामीणों और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। संस्था के सदस्यों ने 'ग्रीन गार्जियंस' की भूमिका निभाते हुए सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और वन्यजीवों की रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इन टाइगर रिजर्वों में अबतक 6 कार्यक्रम किए गए। इनमें अबतक वन रक्षकों को 250 साइकिलें, पार्क ड्राइवरों व गाइडों को 2000 जैकेट्स तथा निगरानी एवं वन्यजीव अवलोकन के लिए 100 निकॉन दूरबीन प्रदान किए गए हैं, साथ ही दो विद्यालयों में 2 स्मार्ट क्लास की स्थापना कराई गई है तथा महिलाओं के स्वावलंबन के लिए 20 सिलाई मशीनें प्रदान कर 2 तारा शक्ति सिलाई केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, तथा वनजीवन के लिए पानी की सरल उपलब्धता हेतु सोलर संचालित वाटर पम्प भी स्थापित कराए गए हैं। यह कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे! उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के जंगल और नेशनल पार्क सुरक्षित रखना इसलिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये केवल जैव विविधता के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और आपदा नियंत्रण की प्राकृतिक ढाल हैं। ये वन गंगा बेसिन के जलस्तर को बनाए रखते हैं, बाढ़ को नियंत्रित करते हैं, हजारों वन्यजीवों—विशेषकर बाघ, हिरण और हाथियों—का आवास हैं, और स्थानीय समुदायों की आजीविका से भी जुड़े हैं। तराई के जंगलों का संरक्षण दरअसल पर्यावरण सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। पर्यावरण संरक्षण की इस अनूठी पहल के अंतर्गत युवा सहभागिता को बढ़ावा देने के समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लखनऊ में प्रख्यात फिल्म अभिनेता संजय दत्त के साथ Net Zero @ Sarojininagar कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें रैली निकाल कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। इसी क्रम में सरोजनी नगर में 200 रुद्राक्ष के पौधे लगाए जा चुके हैं। पर्यावरण के साथ-साथ नारी सशक्तिकरण और शैक्षणिक उन्नति की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान श्री अम्बिका मिश्रा जी, श्री अजय गुप्ता जी, सिद्धार्थ हरीश जी भी उपस्थित रहे। Environment Warriors

Rajeshwar Singh

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