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𝐍𝐂𝐄𝐑𝐓 𝐩𝐫𝐞𝐬𝐞𝐧𝐭𝐬 𝐫𝐚𝐝𝐢𝐨 𝐩𝐫𝐨𝐠𝐫𝐚𝐦 "𝐔𝐦𝐚𝐧𝐠"! कार्यक्रम का नाम - पानी रे पानी – जल चक्र की कहानी कक्षा ७ की हिन्दी की पाठ्यपुस्तक के एक पाठ पर आधारित इस कार्यक्रम में पारंपरिक भारतीय नट और नटी के तुकांत नाट्य प्रारूप में जल चक्र की कहानी को कविता और ताल...

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𝐍𝐂𝐄𝐑𝐓 𝐩𝐫𝐞𝐬𝐞𝐧𝐭𝐬 𝐫𝐚𝐝𝐢𝐨 𝐩𝐫𝐨𝐠𝐫𝐚𝐦 "𝐔𝐦𝐚𝐧𝐠"! कार्यक्रम का नाम - वीर कुंवर सिंह ये कार्यक्रम महान स्वतंत्रता सेनानी और कार्न्तिकारी देशभक्त राजा वीर कुंवर सिंह के जीवन और भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में उनकी वीरता की गाथा प्रस्तुत करता है. कार्यक्रम में बताया गया है कि किस प्रकार उन्होनें बिहार के शाहाबाद में गंगा नदी के तट पर अंग्रेजों से लोहा लिया. Link - "सुनते रहिए और सबको सुनाते रहिये उमंग" Click here for the i-Radio Programme- Click here for the DIKSHA Portal – Scan the QR code to listen to the Radio Programme. Programs aired respectively from 132 stations of All India across the country and 257 stations of Community Radio as well as NCERT Internet Radio. 𝐍𝐨𝐭𝐞: 𝐓𝐡𝐞 𝐛𝐫𝐨𝐚𝐝𝐜𝐚𝐬𝐭 𝐭𝐢𝐦𝐢𝐧𝐠𝐬 𝐨𝐟 𝐀𝐥𝐥 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐑𝐚𝐝𝐢𝐨 𝐛𝐫𝐨𝐚𝐝𝐜𝐚𝐬𝐭 𝐝𝐨 𝐝𝐢𝐟𝐟𝐞𝐫 𝐢𝐧 𝐚𝐜𝐜𝐨𝐫𝐝𝐚𝐧𝐜𝐞 𝐰𝐢𝐭𝐡 𝐭𝐡𝐞 𝐚𝐫𝐞𝐚 𝐚𝐧𝐝 𝐫𝐞𝐠𝐢𝐨𝐧 𝐚𝐬 𝐩𝐞𝐫 𝐭𝐡𝐞𝐢𝐫 𝐜𝐨𝐧𝐯𝐞𝐧𝐢𝐞𝐧𝐜𝐞𝐬. #ncert #radio #audioprogram #ciet #digitaleducation

NCERT

11,842 次观看 • 1 个月前

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी ने जल संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाते हुए देशवासियों से वर्षा की हर बूंद को सहेजने का आह्वान किया है। इसी संकल्प को धरातल पर साकार करता बगदाना धाम का यह प्रयास अत्यंत प्रेरणादायी है। आश्रम की विशाल छतों और पूरे परिसर में सुव्यवस्थित पाइप नेटवर्क के माध्यम से वर्षा जल को सीधे बोरवेल और कुओं तक पहुंचाकर भूजल पुनर्भरण किया जा रहा है। वर्षा का पानी व्यर्थ न बहे, बल्कि धरती की कोख में संचित हो—यह व्यवस्था जल संरक्षण का अनुकरणीय उदाहरण है। पूज्य बापा की पावन भूमि से प्रकृति संरक्षण का यह संदेश प्रधानमंत्री श्री के ‘जल संचय–जन भागीदारी’ के संकल्प को और अधिक सशक्त करता है। बापा सीताराम।

C R Paatil

17,242 次观看 • 1 个月前

राजस्थान किसी की दया का पात्र नहीं है... अपने हक़ और हिस्से का पानी मांग रहा है। "प्यासे को पानी उपलब्ध कराना" ऐसा बताया जा रहा है कि मानो हरियाणा अपनी मर्जी से पानी दे रहा हो। हरियाणा के साथ किए गए यमुना जल समझौते (MoA) में राजस्थान के हितों की हत्या हुई है। एक तो हितों का समर्पण और ऊपर से हरियाणा की कृपा बताना शर्मनाक है। मुख्यमंत्री भजनलाल जी के द्वारा हरियाणा के सामने किए गए समपर्ण से पूरा राजस्थान शर्मिंदा है। भजनलाल जी को ज्ञात होना चाहिए कि राजस्थान को मिलने वाला पानी किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि 1994 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में हुए समझौते के तहत उसका हक़ है। जिसको हरियाणा के सामने गिरवी रखकर भाजपा सरकार ने समझौता किया है। अगर 1994 के यमुना जल समझौते के आधार पर ही नया MoA किया गया है, तो फिर राजस्थान के हिस्से के पानी पर नई शर्तें क्यों लगाई गईं? - राजस्थान को सिर्फ जुलाई से अक्टूबर (बारिश के समय) की अवधि में केवल 4 महीने ही पानी मिलेगा। यानि नवंबर से जून की अवधि में राजस्थान को कोई जल आवंटित नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - MoA में राजस्थान सिर्फ 580 MCM पानी मिलने का जिक्र है, जबकि 1994 के मूल समझौते में 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलना था। यानी 1994 के समझौते के अनुरूप जल आवंटन नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - यमुना नहर की पूरी क्षमता के उपयोग के बाद बारिश के समय अतिरिक्त पानी होने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा, जबकि 1994 के मूल समझौते ये शर्त नहीं थी। ये समर्पण क्यों? - राजस्थान जाने वाली पाइप लाइन से हरियाणा भिवानी, फतेहाबाद और उन गांवों में पहले पानी लेगा जहां से पाइप लाइन गुजरेगी, जो 1994 के मूल समझौते की भावना के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - हरियाणा द्वारा पहले 13,000 क्यूसेक पानी, फिर 18,000 क्यूसेक पानी, बाद में 24 000 क्यूसेक पानी, और अब पूरे जल समझौते पर अपनी मनमर्जी करना 1994 के मूल समझौते के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - 1994 के मूल समझौते के अनुसार सभी राज्यों को Pro Rata Basis यानी पानी की उपलब्धता के अनुपात में पानी मिलना था। लेकिन अब पहले हरियाणा को पानी मिलेगा और फिर अधिशेष जल रहने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा। ये समर्पण क्यों? - जल पर नियंत्रण केंद्रीय जल आयोग का होता है, फिर समझौते में कैसे हरियाणा ने अपनी मर्जी से एकतरफा पानी तय किया? ये समर्पण क्यों? - राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने यमुना जल के लिए MoU का प्रपत्र भेजकर राजस्थान के हितों को आगे रखा लेकिन लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार ने अटकाए रखा। बाद में हाईकोर्ट की फटकार पर हरियाणा पानी देने के लिए विवश हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने इवेंटबाजी और वाहवाही के चक्कर में प्रदेश के हितों को गिरवी रख दिया। ये समर्पण क्यों? - मुख्यमंत्री जी ने ढाई साल MoU और MoA में निकाल दिए। इनसे पूर्व भी यमुना जल पर कई समझौते हुए हैं.. लेकिन हितों का समर्पण नहीं हुआ। क्यों? - MoA के हिसाब से अगर राजस्थान को सिर्फ पेयजल का ही पानी मिलेगा। फिर शेखावाटी की 1.05 लाख हेक्टेयर ज़मीन सिंचाई का झूठा भ्रम क्यों फैलाया गया? मुख्यमंत्री जी, राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि जिस परियोजना के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ, डीपीआर बनी, अदालतों तक लड़ाई लड़ी गई.. उसका परिणाम "अधिकार है या समर्पण"? यमुना जल समझौते (MoA) की पूरी प्रति तत्काल सार्वजनिक करें.. जल आवंटन, वित्तीय ज़िम्मेदारी, लागत-बंटवारे, पानी छोड़ने के नियमों और सभी शर्तों को जनता के सामने रखें।

Govind Singh Dotasra

66,114 次观看 • 2 个月前

करौली जिले के पांचना बांध से सिंचाई और जल प्रबंधन को नई गति मिली है। जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री सुरेश रावत और गृह राज्य मंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने बटन दबाकर बांध के तीन गेट खोलकर पानी की निकासी की शुरुआत की। इसके साथ ही गंभीर नदी में जल प्रवाह शुरू हुआ और गुड़ला पांचना लिफ्ट परियोजना से भी किसानों के लिए पानी छोड़ा गया। कार्यक्रम के दौरान दो नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और गुड़ला लिफ्ट परियोजना के पीडीएन सिस्टम रिमॉडलिंग का भी शिलान्यास किया गया। इन विकास कार्यों पर करीब 61 लाख रुपये की लागत आएगी। समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मजबूत होगी और कृषि विकास को नई दिशा मिलेगी।

Ashok Shera

29,899 次观看 • 2 个月前

जल जीवन मिशन की टंकी "फटी" नहीं थी, फाड़ी गई थी! बस्ती के राजपुर भैरवा गांव में जल जीवन मिशन की टंकी से पानी गिरने का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। शुरुआती तौर पर जिस घटना को निर्माण की खामी और टंकी फटने से जोड़कर प्रचारित किया गया, जांच में उसकी कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस और विभागीय जांच के अनुसार, पूर्व पंप ऑपरेटर प्रमोद शुक्ला पर आरोप है कि उसने अपने बेटे के साथ मिलकर टंकी के अंदर लगे पीवीसी लाइनर को धारदार हथियार से काट दिया। नतीजा यह हुआ कि पानी भरते ही टंकी से तेज़ी से पानी गिरने लगा और उसी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। बताया जा रहा है कि पंप ऑपरेटर के पद से हटाए जाने की नाराजगी में यह पूरी साजिश रची गई थी, ताकि ग्राम प्रधान और परियोजना को बदनाम किया जा सके। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। यह घटना एक बड़ा सवाल भी छोड़ती है—क्या राजनीतिक या व्यक्तिगत रंजिश में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना और करोड़ों रुपये की योजनाओं को बदनाम करना उचित है? सच्चाई सामने आ गई है। अब दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है, ताकि जनता की सुविधाओं से खिलवाड़ करने वालों को स्पष्ट संदेश मिल सके।

MANISH PANDEY

14,175 次观看 • 2 个月前