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"𝐒𝐌𝐎𝐎𝐓𝐇 𝐂𝐑𝐈𝐌𝐈𝐍𝐀𝐋" 𝐕𝐄𝐑𝐒𝐈𝐎𝐍 🎼🎸🎷🥁🕺 𝐁𝐡𝐚𝐢𝐲𝐨 𝐁𝐞𝐡𝐚𝐧𝐨 ~ 𝐕𝐢𝐝𝐞𝐬𝐡𝐨 𝐒𝐞 𝐊𝐚𝐥𝐚 𝐃𝐡𝐚𝐧 𝐖𝐚𝐚𝐩𝐢𝐬 𝐀𝐚𝐧𝐚 𝐂𝐡𝐚𝐚𝐡𝐢𝐲𝐞 𝐊𝐢 𝐍𝐚𝐡𝐢 𝐀𝐚𝐧𝐚 𝐂𝐡𝐚𝐡𝐢𝐲𝐞 ❓❓❓ आप ही बताइए ~ 22000 करोड़ के लोन को 6 करोड़ में सेटल करना चाहिए की नहीं करना चाहिए वैसे ये विदेशों से काला धन लाने वाले थे ~ #पनामा_पेपर...

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आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की : आप सांसदों के भाजपा में विलय करने संबंधी मुद्दे पर प्रतिक्रिया : बीजेपी वाले अपनी हरकतों से बाज आएंगे नहीं। ये देश में लगातार डेमोक्रेसी की हत्या कर रहे हैं। सबके सामने डेमोक्रेसी कमजोर हो रही है ये मानना पड़ेगा। सब एजेंसियां इनके काबू में हैं, मित्तल जो मेंबर ऑफ पार्लियामेंट हैं, उनके छापे पड़े अभी। पहले राघव चड्ढा को भी तंग किया था बीजेपी ने और बाकी भी जो इनके जो है नाम आप ले रहे हो इन सबके नाम इन्होंने डाल रखे थे लिकर वाले मामले में, तो ये इनकी जो पॉलिसी है, ये बड़े खुश हो रहे होंगे। पर पूरा देश देख रहा है कि क्या हो रहा है और मोदी जी को, अमित शाह जी को भ्रम है। अब इनका भ्रम टूटेगा । पूरे मुल्क में लोग समझ गए हैं कि ये हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करते हैं। हिंदुत्व को मजबूत करने क्या काम किया ? खाली भड़काने के अलावा क्या काम किया ? और अब देखिए आज ये घटना हुई है, कम घटना है क्या? वाशिंग मशीन लगी हुई है, सब बिल्कुल ठीक हो जाएंगे। किसी खिलाफ में कोई केस रहेगा ही नहीं। ये वाशिंग मशीन जो पकड़ रखी इन्होंने , कांग्रेस के लोगों को तोड़ा इन्होंने महाराष्ट्र में, कर्नाटक में, मध्य प्रदेश में, यहां पर भी कमी नहीं रखी। ये बार बार भजनलाल जी और मदन राठौड़ जी बोलते हैं हमारे ऊपर, वो चाहते हैं कि सचिन पायलट का नाम लूं कि लोग मानेसर गए थे। वो चाहते हैं कि नाम ले तो इनकी लड़ाई हो जाए शुरू। मैं इनको दोष देता हूं। तुमने हॉर्स ट्रेडिंग कितने लोगों के साथ की बताओ। आपने छोड़ा क्या राजस्थान वालों को? हम तो एकजुट हैं। इनको पूछो आपने कोई कमी रखी क्या राजस्थान के अंदर 34 दिन होटल में रहे हम लोग इनके कुकर्मों से, कुकृत्यों से। बीजेपी के जो नेता लोग थे तो जनता समझ नहीं रही है क्या? ठीक है, चुनाव में हम लोग कामयाब नहीं पाए। खूब झूठ बोले थे प्राइम मिनिस्टर मोदी जी ने और अमित शाह जी ने। झूठा आरोप लगाया हमारे ऊपर 5 लाख, 50 लाख वाला भी। चुनाव जीतना अलग बात है, पर जो तमाशा कर रहे हैं लोग, कहां कहां नहीं हो रहा है। वेस्ट बंगाल में क्या हो रहा है सब देख रहे हैं। इनका विश्वास नहीं है डेमोक्रेसी में, और अगर अभी नई पीढ़ी देश की नहीं समझी, देश वाले नहीं समझेंगे तो सबको भुगतना पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग होने के सवाल का जवाब : हाईकोर्ट ने क्या कहा वहां कि आपने ये क्या लगा रखा है? आपने बाईक पर बैन लगा दिया इनको लताड़ रहा है हाईकोर्ट भी तो समझ नहीं आ रही इलेक्शन कमीशन के कि आप क्या कह रहे हैं। रिकॉर्ड वोटिंग तो देखो पता पड़ेगा कि किन कारणों से हुई है तो चार तारीख को मालूम पड़ेगा। पर जो सामने दिख रहा है अगर इस प्रकार की दादागिरी से, गुंडागर्दी से, SIR के माध्यम से वोट काट करके अगर खेल खेला गया है, सामने आ जाएगा। चार तारीख इंतजार करना पड़ेगा। राजस्थान विधानसभा में वापस से धमकी मिलने के सवाल का जवाब : ये मैं कई बार कह चुका हूं कि समझ में आ नहीं रहा इनके, मुख्यमंत्री जी कोई एक पार्टी के नहीं होते हैं। हम सबके मुख्यमंत्री हैं। उनको उड़ाने की धमकी दे दी। हाईकोर्ट को दे दी, कलेक्ट्रेट हैं, वहां दे दी गई और असेंबली में दूसरी बार आ गई है धमकी ,अभी तक पकड़े नहीं गए छह महीने में, तो, क्या ये राज कर रहे हैं। शासन नाम की, राज नाम की चीज है क्या राजस्थान के अंदर? ये चिंता होनी चाहिए सबको। पता नहीं ये लोग क्यों क्यों नहीं पकड़ पा रहे उनको। आजकल तो हाईटेक का जमाना है। समझ के परे है ये। बहुत दुखद बात है कि धमकी मिलना ही और मुख्यमंत्री खुद को इससे बड़ा अनफॉर्चूनेट बात क्या होगी? नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मेवाड़ पर फोकस करने से संबंधित सवाल का जवाब : राजस्थान भर के लिए कर रहे हैं भैया। मेवाड़, मारवाड़, उत्तर, पश्चिम, पूर्व सब जगह सबका ध्यान है। अच्छा है फोकस करके करेंगे, नुकसान नहीं है। मारवाड़ भी करना चाहिए, वो भी कमजोर हुआ है। हमें स्वीकार करना चाहिए। मारवाड़ में फोकस करना चाहिए। मेवाड़ में भी करना चाहिए। बाकी जो एरिया है जहां जहां हमारा विक प्वाइंट है, सब जगह फोकस करने का अवसर है।

Ashok Gehlot

21,134 views • 4 months ago

भारत के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है, लेकिन ये अधिकार घुसपैठियों को नहीं है। लेकिन आज इन्हीं घुसपैठियों का वोट सभी इंडी गठबंधन के दलों को चाहिए। जब भी हम घुसपैठिया बोलते हैं तो इंडी गठबंधन वाले इसे सीधा मुसलमानों से जोड़ देते हैं। इनकी इसी सोच के कारण देश का भी नुकसान हो रहा है और मुसलमानों का भी। रही बात घुसपैठ की, तो घुसपैठियों के आने की व्यवस्था 1983 में इंदिरा जी की सरकार के समय शुरू होती है, जब एक कानून लाया गया था IMDT एक्ट। इस एक्ट में यह प्रावधान था कि अगर आपको लगता है कि आपके आस-पास कोई बांग्लादेशी व्यक्ति रह रहा है तो उसकी जिम्मेदारी नहीं है यह साबित करना कि वह भारत का नागरिक नहीं है, बल्कि अगर आपको शिकायत है तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप साबित करें कि वह बांग्लादेश का नागरिक है। इस एक्ट के खिलाफ हमारे नेता सर्वानंद सोनोवाल सुप्रीम कोर्ट गए और 2006 में, इनकी सरकार के समय, इसे रद्द किया गया। बतौर गृह राज्य मंत्री, श्रीप्रकाश जायसवाल का 2006 का बयान है कि भारत में ढाई से तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। इसके अलावा, 2012 में मुंबई के आजाद मैदान में बांग्लादेशी घुसपैठियों का नाम आया था या नहीं? जयपुर ब्लास्ट में बांग्लादेशी घुसपैठियों का नाम आया था या नहीं? इसीलिए, जब हमारी सरकार आई और जांच की बात की, NRC लाने की बात की, तो ये लोग धरने पर बैठ गए। अब S.I.R का उद्देश्य भी सही वोटर की जांच करना है, लेकिन घुसपैठिया तो साइड इफेक्ट में अपने आप सामने आ रहा है। इसीलिए मैं कहता हूं कि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा है कि "कोई सूरत बदलना मेरा मकसद नहीं है, मेरा मकसद है हंगामा होना चाहिए।"

Dr. Sudhanshu Trivedi

29,866 views • 1 year ago

प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में मीडिया से वार्ता- आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में मीडिया से वार्ता- अंता में हुए उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की बढ़त पर पूछे सवाल का जवाब : अंता की अच्छी न्यूज़ आ रही है, राजस्थान में माहौल बन चुका था पहले से ही, उम्मीद करते हैं कि शाम तक बहुत अच्छे मार्जिन से कांग्रेस जीतेगी। बिहार के परिणाम को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में : बिहार के परिणाम जो हैं, निराशाजनक हैं इसमें कोई दो राय नहीं, क्योंकि जिस प्रकार का माहौल मैंने वहां देखा,एक तो जो महिलाओं को 10-10 हजार रुपए दिए गए, प्राइमा फेसी मैं कह सकता हूं प्रथम दृष्टया, प्रथम दृष्टया तो मुझे लगता है कि दस दस हजार रूपए दिए गए वो चुनाव कैंपेन चल रहा था तब भी बांटे जा रहे थे, ऐसा कभी होता नहीं है, कैंपेन चल रहा है, पोलिंग होने के एक दिन पहले पैसे जा रहे हैं खाते में उनके,और राजस्थान में देखिए आप, राजस्थान में हम टेलीफोन बांट रहे थे मोबाइल फोन बांट रहे थे, जिस दिन आचार संहिता लागू हुई, उसी वक्त मोबाइल फोन बंटना बंद, बल्कि जो पेंशन थी बुजुर्गों की, विधवाओं की, निशक्तजनों की बंद। बांट ही नहीं सकते आप, और बिहार में सब बंट रहे थे, पेंशन बंट रही थी पैसा बंट रहा था, दस हजार रुपए बिहार जैसे प्रदेश में महिलाओं को मिल जाएं,तो आप सोच सकते हो क्या हो सकता है, एक तो वो फैक्टर भी था। और उसी में आता है फिर इलेक्शन कमीशन, इलेक्शन कमीशन मूक दर्शक बना रहा, उसने क्यों नहीं रोका, दस दस हजार रुपए बंट रहे थे चुनाव चलते हुए, इलेक्शन कमीशन को रोकना चाहिए था उसको, रोका ही नहीं उन्होंने, राजस्थान में रोक दिया, मोबाइल फोन बंट रहे थे रोक दिया, पेंशन रोक दी, वहां कुछ नहीं कर रहे थे, इसका मतलब राहुल गांधी जी और लोग सब वोट चोरी की बात कर रहे थे, वोट चोरी क्या होता है यही तो होता है, अगर आप निष्पक्ष चुनाव नहीं करवाते हो, रिंगिंग होती है,बूथ कैप्चरिंग होती है मान लीजिए, या बेइमानी होती है, पैसा बंट रहा है, और चुनाव आयोग ने कोई तरह की कार्रवाई नहीं करी, मिलीभगत थी उनकी,उनसे जो रूलिंग पार्टी थी, और नंबर तीन, जो पैसे का धन का जो दुरूपयोग हो रहा है आजकल कोई सोच नहीं सकता, आप हम सोच नहीं सकते, कैसे पैसे बंटते हैं, महाराष्ट्र में आप पता कर लीजिए कितने करोड़ रुपए दिए गए होंगे उम्मीदवारों को, पंद्रह करोड़ बीस करोड़ पच्चीस करोड़ ,कांग्रेस के पास तो पैसा है नहीं, न आरजेडी के पास पैसा है, तो जो डेमोक्रेसी के खतरे सामने हैं, चुनाव जीतना एक बात है चुनाव जीत जाएंगे ये लोग, एनडीए गवर्नमेंट जीत जाएगी, बन जाएगी, चुनाव जीतना एक बात है, जैसे मैं कहता हूं मोदी जी प्राइम मिनिस्टर तीन बार बन गए हैं पर मेरा मानना है कि इस देश को जरूरत आज भी मानूंगा विचारधारा जो कांग्रेस की है वो देश के हित में है, देश को जरूरत कांग्रेस की है और ये लोग जो धनबल जो इक्कठा कर लिए हैं इलेक्टोरल बांड के माध्यम से, ईडी के नोटिस जाओ, पचास करोड़ आ रहे हैं सौ करोड़ आ रहे हैं तो नोटिस खत्म हो जाता है, अब जाके सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो तो असंवैधानिक है, असंवैधानिक है आपका ये इलेक्टोरल बांड बंद कर दो,अरे बंद तो कर देंगे पर जो पैसा इकट्ठा किया है करोड़ों अरबों रुपए वो पैसा हमारे खिलाफ उपयोग हो रहा है रोक क्यों नहीं रहे हो उसको आप, पैसा जमा करवाओ पीएम रिलीफ फंड में, तो कहने का मतलब कई बातें कहने को हैं, आज प्रथम दृष्टया यही कह सकते हैं कि दस दस हजार रुपए महिलाओं को बंटना, चुनाव आयोग का कोई रोक लगाना नहीं, पेंशन बंटती रही वहां पर और पैसा खूब धनबल का प्रयोग हुआ ये मैं मान सकता हूं। श्री तेजस्वी यादव को सीएम फेस डिक्लेयर करने की टाइमिंग पर पूछे सवाल का जवाब : अब देखिए वो बात तो समाप्त हो गई, सोच समझ के कोई फैसला हुआ होगा हाई कमान के बीच, सोच समझ के आपस में बातचीत तेजस्वी जी से हुई होगी, इसकी मुझे जानकारी नहीं है,पर उसका मैं समझता हूं कोई इश्यू नहीं है ,वो वेलकम हुआ उसको,फैसला हुआ वेलकम हुआ,और स्वाभाविक चॉइस तो तेजस्वी जी थे वहां पर कोई दिक्कत थी नहीं उसके अंदर, धन्यवाद।

Ashok Gehlot

62,307 views • 9 months ago

आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

32,660 views • 1 month ago

दिल्ली के कोहाट एन्क्लेव में दो दिन पहले एक वृद्ध दंपत्ति ही हत्या हो गई और उसके 2-3 दिन पहले चांदनी चौक में एक व्यापारी से 80 लाख रुपए की लूट हो गई। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्री के अंतर्गत आती है। केंद्र सरकार 11 से 12 हजार करोड़ रुपए दिल्ली पुलिस पर खर्च करती है। उसके बाद भी दिल्ली क्राइम कैपिटल बनी हुई है। मेरे पास NCRB के आंकड़े हैं- • देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 66.4% है और दिल्ली में 144% है। पूरे हिन्दुस्तान में दिल्ली नंबर 1 पर है। • बच्चों के खिलाफ अपराध की दर हिन्दुस्तान में 36% है और दिल्ली में 134% है, यहां भी दिल्ली देश में नंबर 1 पर है। • बुजुर्गों के खिलाफ अपराध में 7.5% की दर देश में है और दिल्ली में 114% है, दिल्ली की रैंक फिर से नंबर 1 है। तो वहीं, महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस 31 हजार मुंबई में, 15 हजार कोलकत्ता में, बैंगलुरू में 18 हजार, हैदराबाद में 10 हजार और दिल्ली में 77 हजार पेंडिंग हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार 2016 में 29 हजार केस पेंडिंग थे, जो कि बढ़कर 77 हजार हो गए। बच्चों के खिलाफ अपराध की बात करें तो मुंबई में 10 हजार, कोलकत्ता में 3 हजार, बैंगलुरू में 3 हजार, हैदराबाद में 1,600, और दिल्ली में 19 हजार केस पेंडिंग हैं। मेरा अनुरोध है कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को पेंडिंग केस पर मिलकर काम करने की जरूरत है। अभी किसानों का आंदोलन चल रहा है, पंजाब में किसानों हटा दिया गया। BPR&D की रिपोर्ट में पहले आंदोलनों का पूरा ब्यौरा प्रकाशित होता था कि किस राज्य में कितने आंदोलन हुए? 2017 के बाद से आंदोलन का डाटा प्रकाशित करना बंद कर दिया, इसमें कारण ये बताया गया कि NCRB की रिपोर्ट में लोक शांति के विरुद्ध श्रेणी में आंदोलन का डाटा प्रकाशित किया जा रहा है, तो इसे जारी रखा जाएगा, लेकिन BPR&D इसे प्रकाशित नहीं करेगा। तो प्रश्न ये उठता है कि 'क्या आंदोलन अपराध की श्रेणी में आते हैं?' जब वंचित शोषित लोग लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते हैं, तो क्या वो अपराध की श्रेणी में आ जाते हैं? क्या देश के किसान अपराधी हैं? BPR&D की रिपोर्ट में आंदोलन का चैप्टर फिर से शुरू करना चाहिए, उसे अपराध की श्रेणी से हटा देना चाहिए। हमारे देश की युवा आबादी सबसे अधिक है। आज हमारी युवा आबादी नशे की शिकार हो रही है। • 2010 से 2014 के बीच नशे की घटनाएं 33 हजार थीं, और 2022 के NCRB में ये घटनाएं बढ़कर 1 लाख 15 हजार हो गईं। ये आंकड़े हर साल बढ़ रहे हैं। • 2014 में प्रति लाख की आबादी पर नशे की घटनाओं की दर 2.7% थी, जो अब 2022 में बढ़कर 8.7% हो गई। • 2015 में दिल्ली में NDPS की 277 घटनाएं हुईं, 2024 में बढ़कर 1,779 घटनाएं हो गईं। मैं सिंथेटिक ड्रग्स की स्थिति बताना चाहता हूं, जो कि लैब में बनाया जाता है और बहुत खतरनाक होता है। • ATS ड्रग 2022 में 1,224 किलो पकड़ी गई, साल 2024 में 8,200 किलो ड्रग पकड़ी गई • Dopamine ड्रग्स 2022 में 3 किलो पकड़ी गई, साल 2024 में 65 किलो ड्रग पकड़ी गई • MDMA ड्रग 2022 में 63 किलो पकड़ी गई, साल 2024 में 195 किलो पकड़ी गई • LSD का आंकड़ा 2022, 2023 में शून्य था, लेकिन साल 2024 में 1 किलो ड्रग पकड़ी गई • Mephedrone ड्रग 2022 में 2,872 किलो पकड़ी गई, साल 2024 में 3,559 किलो ड्रग पकड़ी गई • Mescaline ड्रग 2022 में 2kg से बढ़कर 2024 में 25 किलो ड्रग पकड़ी गई देश में सिंथेटिक ड्रग का आंकड़ा 2 साल में 20-22 गुना तक बढ़ गया है। सभी जानते हैं कि पहले ड्रग्स आता है, फिर गैंगवॉर और फिर आतंकवाद आता है। देश में NDPS की दर 8.7 है तो वहीं पंजाब में दर 40 और केरल में 74 की दर है। पंजाब में ड्रोन से ड्रग आ रही है। पंजाब में गैंग्सटर्स जेल से ऑपरेट कर रहे हैं। पंजाब के पुलिस स्टेशन में ग्रेनेड से हमले हो रहे हैं। लोगों को टारगेट कर हत्या हो रही है। 2022 से लेकर अबतक 15 प्रमुख घटनाएं हुई हैं, जिनमें RPG रॉकेट लॉन्चर से चले ग्रेनेड, विस्फोट, बब्बर खालसा इंटरनेशनल और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स जैसे समूहों से जुड़ी हत्याएं शामिल हैं। इन मामलों में 14 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन AK47 गन, ब्लॉक पिस्टल्स और Arges grenade पाए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल हो रहा है। इन ग्रेनेड का इस्तेमाल मुंबई हमले और संसद हमले में हुआ था। सवाल है कि ये हमारे देश में कैसे आ रहे हैं और इनका इस्तेमाल पंजाब में हो रहा है? ये साजिश गहरी है और ये सीमा पार से हो रही है, इसे हमें रोकना है। सीमा की बात करें तो, बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अलग-अलग स्कीम हैं। • बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम में 2024-25 में बजट आवंटन 335 करोड़ रुपए का था, जिनमें से 110 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल हुए, 225 करोड़ रुपए यानी 67% लैप्स हो गए। • बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्टर एंड मैनेजमेंट स्कीम में 2023-24 में 10.5 लैप्स हुआ 2024-25 में 19% लैप्स हो गया। पिछले 3 साल में 3 हजार करोड़ रुपए मुश्किल से खर्च किए गए। इस साल 5,590 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। गृह मंत्रालय पिछले 7 साल में बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर और पुलिस-मॉर्डनाइजेशन पर 17,697 करोड़ रुपए खर्च ही नहीं कर पाया। Central Armed Police Forces के चौथे मॉर्डनाइजेशन प्लान में 2022-2026 में 1,523 करोड़ रुपए तय किया गया। 2025 चल रहा है, लेकिन इस बजट से केवल 287 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं। एक रिपोर्ट कहती है कि जो हमारी फ़ोर्स स्ट्रेंथ हैं, उसमें 11% पुलिस फोर्सेस में खाली पद हैं। पैरा मिलिट्री फोर्सेस में 1,10,000 की जगह खाली है। 2011 की जनगणना का काम हमने 2009 से शुरू कर दिया था और ये हमारे लिए क्यों जरूरी है, ये भी जानना जरूरी है। हमारे सारे पब्लिक वेलफेयर के प्रोग्राम जनगणना के आधार पर होते हैं। 2011 में हमारी जनसंख्या 121 करोड़ थी और अभी अनुमानित 146 करोड़ है, यानी 25% जनसंख्या बढ़ी है। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत 70% ग्रामीण और 50% शहरी लाभार्थी हो सकते हैं। यानी अगर अभी जनगणना होती है तो 15 करोड़ गरीब लोगों को NFSA का फायदा मिलेगा। जनगणना नहीं कराकर आप 15 करोड़ लोगों को वंचित रख रहे हैं। अगर हम जनगणना नहीं कराएंगे, तो हम लाभार्थी तय नहीं कर सकेंगे। हमारे सारे सर्वे गलत होंगे, इसलिए जनगणना समय पर होनी चाहिए। जनगणना का 2020-21 में 85% पैसा लैप्स हो गया, 2021-22 में 86%, 2022-23 में 85%, 2023-24 में 65% और पिछले साल 58% पैसा लैप्स हो गया। इस साल के बजट को देखकर भी नहीं लग रहा कि जनगणना कर पाएंगे और फिर इस देश की गरीब जनता योजनाओं से वंचित रह जाएगी। ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से आपदा प्रबंधन पर बजट ज्यादा होना चाहिए, क्योंकि हमारे यहां आपदाएं बढ़ रही हैं। प्राकृतिक आपदा रिलीफ के बजट में 7.5% कटौती कर दी गई है। NDRF में 23% की वैकेंसी है। जब ग्लोबल वॉर्मिग बढ़ रही है, तो हम कैसे आपदा प्रबंधन के बजट में कटौती कर सकते हैं। : राज्य सभा में Ajay Maken जी

Congress

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बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन के मैनिफेस्टो तथा श्री राहुल गाँधी जी द्वारा जातिगत जनगणना के लिए किए प्रयासों पर मीडिया से बातचीत : तेजस्वी जी, दोनों मिल के कर रहे हैं, कल भी शायद जाएंगे वो कल भी है, इस प्रकार से अभियान शुरू हो चुका है, वैसे जब हम ने तेजस्वी का नाम घोषित किया था, तमाम राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर के जो महागठबंधन में हैं और तब से ही एक प्रकार से अभियान शुरू हो गया था उस दिन से, और तेजस्वी जी भी बराबर दौरे कर रहे हैं, हमारी पार्टी के जो नेता लोग हैं तमाम लगे हुए हैं, ऑब्जर्वर भी अच्छा काम कर रहे हैं और दूसरा जो है राहुल गांधी जी की जो यात्रा शुरू हुई थी 16 दिन की उसके बाद में जो टेंपो बना, एक नैरेटिव क्रिएट हो गया कि भई इस प्रकार का 20 साल हो गए उनको सरकार में बीस साल हो गए और नीतीश कुमार जी ने कई पार्टियां बदलते गए, एलायंस करते गए, बनते बिगड़ते गए, उससे उनकी छवि भी अच्छी नहीं रही खराब, कहां तो वो प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे और कहां आज उनको बीजेपी वाले भी नहीं पूछ रहे हैं पूरी तरह से, बीजेपी चाहे वो अमित शाह जी हो चाहे कोई नेता हो कई तरह की बातें करते हैं कि हम तो चुनाव के बाद में देखेंगे कौन मुख्यमंत्री बनेगा,तो कहां तो पीएम बन रहे थे और कहां मुख्यमंत्री बनेंगे कि नहीं बनेंगे ये स्थिति बन गई, ठीक है न, उन स्थितियों में चुनाव हो रहा है, एक बात है कि इस बार धनबल का बहुत बड़ा खजाना इक्कठा हो गया है, लूट लिया है इन लोगों ने, इलेक्टोरल बांड के माध्यम से भी, वैसे भी, कोई कमी नहीं है पैसे की, वो प्रयोग देखा हम ने इनका महाराष्ट्र के अंदर, कोई कल्पना नहीं कर सकता जो पैसा बंटा वहां पर और चुनाव कैसे जीत गए एकतरफा ये पूरे देश को आश्चर्य हुआ, हार जीत की अलग बात है, पार्लियामेंट में हम लोग जीते थे और तीन चार महीने बाद में जो वहां पर सफाया हुआ सब पार्टियों का ये तो पूरे देश के लोगों को विश्वास नहीं हुआ, पूरे देश के लोगों को, हरियाणा के अंदर माइक्रो मैनेजमेंट कर लिया हम लोगों ने , चलो भई मान लेते हैं कुछ किया होगा,बराबरी पर आ गए लगभग प्वाइंटों में फर्क था पर महाराष्ट्र की तो हार जीत एक अजीबा है, मतलब एक प्रकार से रहस्य बना हुआ है तो ये जो राहुल जी का अभियान शुरू पहले ही हो गया टाइमली और मैं समझता हूं कि बिहार लोग पॉलिटिकली बहुत समझदार होते हैं, शुरू से ही मान्यता पूरे देश के लोगों की है कि बिहार में पॉलिटिकल सोच होती है अलग उनकी, उम्मीद करते हैं कि वहां बैकवर्ड भी हैं EBC वाले भी हैं, EBC का घोषणा पत्र एक प्रकार से राहुल जी ने वहां पर जारी करवाया है और जो कुछ जातिगत जनगणना की बात पहले बिहार ने करी थी, राहुल गांधी जी ने दबाव दिया सरकार पर पूरे देश के अंदर लागू होनी चाहिए, मना करते गए बीजेपी वाले पर आखिर में उनको मानना पड़ा, कैबिनेट का निर्णय हुआ दिल्ली के अंदर हम जातिगत जनगणना कराएंगे,ये राहुल जी की बहुत बड़ी विजय है। ये भी बिहारवासियों को मालूम है कि राहुल गांधी के कारण से पूरे मुल्क में जातिगत जनगणना अब प्रॉपर होगी, क्योंकि उनकी जातिगत जनगणना हुई थी बिहार की,उसको तो चैलेंज कर दिया सुप्रीम कोर्ट के अंदर, निर्णय हाईकोर्ट के सुप्रीम कोर्ट के आते गए वो लागू नहीं कर पा रहे थे और सरकार डबल इंजन की है तब भी ये सब चलता रहा, अब तो राहुल जी के दबाव से जो मोदी जी की गवर्नमेंट ने जो फैसला किया कि हम करवाएंगे बहुत बड़ी विजय उनकी है, सब जातियां उम्मीद कर रही थीं कि एक बार 1931 में हुई थी ये, 31 के बाद में कभी नहीं हुई, अब कम से कम एक आ गया मामला, मालूम पड़ेगा भई कौन जाति के कितने लोग हैं, तो जो स्कीमें बनेगी भारत सरकार की विभागों की या राज्यों की, तो एक साइंटिफिक वे से बन पाएगी तो एक अच्छा फैसला हो गया। ये तमाम बातें आपको मैं इसलिए बोल रहा हूं कि बिहार के चुनाव में एजेंडा के अंदर नैरेटिव के लिए ये काम आ रही हैं, लोगों में ये डिस्कशन होता है गांव गांव में और कस्बों के अंदर शहरों के अंदर। मैनिफेस्टो आया परसों, 28 को,कल ही , मैनिफेस्टो भी जो है पच्चीस लाख का बीमा उन्होंने कर दिया जो अपने यहां पर था, सबसे पॉपुलर स्कीम राजस्थान की ये रही है कि हर घर में इलाज फ्री हो गया, दवाइयां फ्री टेस्ट फ्री और ऑपरेशन फ्री ये बहुत बड़ा निर्णय किया बिहार के मैनिफेस्टो में महागठबंधन ने किया है, तो मैं समझता हूं कि एक मैसेज गया है, फिर जो और भी जो बिजली को लेकर पानी को लेके नौकरी को लेके, जो वादे किए गए मैनिफेस्टो में एक 35 साल का नौजवान जो है जिस प्रकार राहुल गांधी जी के साथ में दौरे किए वहां पर और अब जो है राहुल जी के दौरे के बाद में उसने जिस प्रकार से मैनिफेस्टो में अपनी भागीदारी निभाई भी है, राहुल गांधी की जो भावना थी पब्लिक क्या सोचती है उसके अकॉर्डिंग टू आप ये मैनिफेस्टो बनाओ, पब्लिक को पूछ के बनाओ, वो स्थिति बन चुकी है उसी में ये मैनिफेस्टो वहां पर बना है और उसका बड़ा इंपैक्ट रहेगा, तमाम स्कीमों का और तेजस्वी जी का मैंने कल सुना मैनिफेस्टो के बारे में भी डिस्कशन में देखा मैंने कि उनको पूरी, दो बार डिप्टी सीएम रहे हैं ,पूरी नॉलेज है उनको स्टेट की तमाम आंकड़े उनके सामने हैं साथ में हैं और वो मैं समझता हूं कि मजबूती के साथ में ये चुनाव जो है दंगल क्योंकि किसी ने ठीक कहा है कि ये तो चुनाव होता है लोकतंत्र के अंदर और ये युद्ध होता है तो चुनाव में लोकतंत्र में नॉन वॉयलेंस होता है, डेमोक्रेसी है कोई जीतो कोई हारो, और जो दंगल होता है संघर्ष होता है वहां क्या होता है वॉयलेंस होती है। युद्ध किधर लड़ रहे हैं, क्योंकि इनका विश्वास है ही नहीं डेमोक्रेसी के अंदर। युद्ध की तरह येन केन प्रकारेण साम दाम दंड भेद उसके माध्यम से चुनाव कहीं जीते हैं, ये उनकी थ्योरी है पूरे देश के अंदर, धर्म के नाम पर और कर दिया, हिंदू धर्म हिंदू धर्म, क्या बाकी लोग हिंदू धर्म के लोग नहीं हैं क्या ? आंकड़े बताते हैं कि कोई एक, ये जो इनकी पर्सेंटेज आ रही है वोटों की, चालीस से नीचे आ रही है, सौ वोट पड़ते हैं पोलिंग,उसका एक बार इकतीस परसेंट आ गया, एक बार छत्तीस परसेंट आ गया एक बार सैंतीस परसेंट आ गया, ऐसे ही तो आ रहे हैं, इसका मतलब सत्तर परसेंट लगभग तो लोग खिलाफ वोट दे रहे हैं इनके, पर किस बात का घमंड कर रहे हैं ये लोग ? ये चाहिए डेमोक्रेसी, संविधान की जो मूल भावना है उसके अनुसार चलें और जो हालात बन गए हैं देश में अहम् घमंड के कारण से, लोग बहुत चिंतित हैं, लोग जेलों में जा रहे हैं बिचारे , आलोचना करना तो देशद्रोही हो गया है यहां पर देश के अंदर, जबकि डेमोक्रेसी का तो मुख्य भाग है नॉन वॉयलेंस और सबको साथ में लेकर चलने वाली बात है, आलोचना को सुनने का माद्दा होना चाहिए, वो इनमें नहीं है। ये तमाम बातें जो हैं ये बिहार चुनाव में नैरेटिव बनेगा हमारा ये मैं कह सकता हूं। महागठबंधन को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में : मैंने कहा न आपको कि इस बार चुनाव जीतना हमारे लिए बहुत जरूरी नहीं है, देश के लिए जरूरी है और ये चुनाव खाली बिहार का नहीं हो रहा है एक प्रकार से देश में मैसेज देने का चुनाव है कि हरियाणा के अंदर क्या हुआ, दिल्ली के क्या हुआ और महाराष्ट्र में क्या हुआ और इनको घमंड आ गया तो घमंड अगर रहता है, अहम् घमंड रहता है तो डेमोक्रेसी के अंदर वो उचित नहीं है, मैं मानता हूं अब इनको बीस साल के बाद में बदलाव चाहिए बिहार को, बदलाव होना चाहिए और पूरी ताकत लगाएगी महागठबंधन, तमाम हमारे महागठबंधन के पार्टनर हैं सब एकजुट हैं, लगे हुए हैं और हम लोग कामयाब हो जाएंगे। फसल खराबे का मुआवजा न मिलने के मुद्दे पर प्रश्न का उत्तर : क्या करें इनका, मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिए, बार बार याद दिला रहे हैं इन लोगों को हम लोग, 22- 23 का मुआवजा नहीं मिला है भरतपुर के लोग भी आते हैं, जोधपुर डिविजन के लोग आते हैं कि वहां भी 23 का मुआवजा नहीं मिल रहा है किसानों को,आज 25 चल रहा है तो आप कल्पना कीजिए कि, अब फिर बरसात हो गई है तो नुकसान क्यों हो रहा है इनको, अर्जेंटली गिरदावरी करा के, आउट ऑफ वे बात करके, आउट ऑफ बॉक्स बात करके इनको चाहिए कि मुआवजे का प्रबंधन करें और मुआवजा फसलों का दें, किसान अगली फसल कैसे बोएगा ? उनके पास तो इतने ही साधन होते हैं, क्योंकि जो मोदी जी ने कहा था डबल इनकम कर देंगे वो तो अब नाम ले नहीं रहे हैं, न डबल इनकम हुई है, डबल इनकम हुई नहीं है तो ये बेचारे परेशान हैं लोग, उनको चाहिए कि ये किस प्रकार से टाइमली मुआवजा दें ये मेरी मांग है।

Ashok Gehlot

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राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार समेत अन्य राज्यों में सरकार गिराने की भाजपा की साजिश के संबंध में मीडिया से बातचीत : वो षड्यंत्र भी इन्होंने किया है, वो षड्यंत्र नरेंद्र मोदी जी की सरकार के वक्त में अमित शाह जी ने किया, उस वक्त में धमेंद्र प्रधान ने किया, गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया ठीक है। इन सबने मिलके ये षड्यंत्र किया था , जिसको हम ने फेल कर दिया, हिंदुस्तान में एक मात्र सरकार राजस्थान की रही , इन्होंने मध्यप्रदेश सरकार बदल दी, कर्नाटक की बदल दी, महाराष्ट्र की बदल दी, राजस्थान की बदल नहीं पाए। ये तमाम जो षड्यंत्रकारी थे यही लोग थे जिन्होंने रिवोल्ट करवाया हमारी पार्टी के अंदर, पैसे बांटें, पैसे बांटें हैं ये प्रूफ है मेरे पास और क्या क्या बताएं आप को क्या क्या नहीं हुआ है। तो जिस प्रकार के हालात बनाए इन्होंने ये संविधान के माफिक है क्या , आज संविधान दिवस मना रहे हैं क्या मना रहे हैं पता नहीं क्या नाम रखा है ,इनको पूछो तुम सरकार जो गिरा रहे थे हॉर्स ट्रेडिंग से महाराष्ट्र में, कर्नाटक में और मध्यप्रदेश में कितना पैसा बांटा होगा कल्पना नहीं कर सकते आप लोग,कोई पच्चीस करोड़ कह रहा है कोई पैंतीस करोड़ कह रहा है कोई पचास करोड़ कह रहा है महाराष्ट्र के लिए कोई सोच नहीं सकता है कहां जा रहा है मुल्क, डेमोक्रेसी रहेगी ऐसे ? डेमोक्रेसी कैसे बचेगी बताइए ? हर नागरिक का कर्तव्य है, हमारे बोलने से काम नहीं चलेगा। खाली हिंदू हिंदू की बात करके राजनीति करोगे तो देश बर्बाद हो जाएगा। आज सवाल ये है कि आपकी डेमोक्रेसी खत्म हो गई, तो क्या होगा देश के अंदर ? ये हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं सब जगह, हॉर्स ट्रेडिंग करके सरकारें गिरा रहे हैं डेमोक्रेसी कैसे बचेगी ? और ये दिवस मना रहे हैं वो , इमरजेंसी लगाई कुछ गलतियां हुईं माफी मांग ली कांग्रेस ने, सजा मिल गई हम लोगों को, हमारी पार्टी सरकार नहीं बना पाई हार गई इंदिरा जी खुद चुनाव हार गई, दो साल में उनकी आंधी चली वापस कुछ तो कारण होगा। कुछ कारण होगा कि इंदिरा गांधी की आंधी कैसे चली दो साल के अंदर, जो आदमी बुरी तरह हरवा दिया उत्तर भारत के अंदर, दक्षिण भारत में हम जीत गए थे उत्तर भारत में हम हार गए बुरी तरह से इंदिरा गांधी जी खुद हार गई चुनाव, मैं भी चुनाव लड़ा था मैं भी हार गया 77 के अंदर, ठीक है, आंधी चलना दो साल के अंदर इतनी भयंकर कि भारी मेजॉरिटी से हम जीत कर वापस आए, मैं भी एमपी बना उस के बाद में, पचास साल हो गए , आप मुझे बताइए आंधी क्यों चली वापस, इमरजेंसी की गलती हुई , सॉरी फील कर लिया, खेद प्रकट कर लिया, कुछ गलती हुई होगी, पर उसमें लोग तारीफ भी करते हैं इतना अनुशासन आ गया टाइम पर लोग ऑफिस जाते थे, मिलावटखोरी बंद हो गई, करप्शन बंद हो गया, आप खुद पता कर लीजिए सोशल मीडिया में या आपके सीनियर जर्नलिस्ट को, कि उस वक्त में जो जो पेड़ लगाओ अभियान चल गए पांच सूत्री कार्यक्रम हो गए संजय गांधी के, इंदिरा गांधी का ट्वेंटी फाइव प्रोग्राम आ गया, लोग उनकी तारीफ भी करते हैं पर फिर भी क्योंकि इमरजेंसी लग गई थी उस वक्त तो घोषित इमरजेंसी थी, अब अघोषित इमरजेंसी है अभी। अभी पत्रकारों को साहित्यकारों को लेखकों को, कितने लोग तो जेल में बंद हैं आपको हमको मालूम ही नहीं है, ये तो आंकड़े छिपाते हैं, अभी जब आपका इलाहाबाद के अंदर कुंभ के अंदर जो है लोग मारे गए पैंतीस के आंकड़े दिए। बीबीसी ने 85 के आंकड़े दे दिए हैं विद प्रूफ। जो सरकार मृतकों के आंकड़े छिपा सकती है उससे हम क्या उम्मीद करें ? और ये संविधान बचाओ का दिवस मना रहे हैं इनको शर्म आनी चाहिए। कार्यपालिका की कार्यशैली को लेकर पूछे गए सवाल पर : सब जगह हो रहा है, दुखी है पब्लिक बहुत दुखी है ये मुख्यमंत्री समझ नहीं पा रहे हैं। पब्लिक बहुत दुखी है, उनको कंट्रोल करना चाहिए पूरे अपने जो ऑथोरिटी है मुख्यमंत्री की, उसको उनको पूरी तरह पकड़ करनी चाहिए जिससे की ये जो नीचे हो रहा है वो बंद हो जाए, पब्लिक को राहत मिले, पब्लिक को राहत नहीं मिल रही है पब्लिक इतनी दुखी है कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, तहसीलदार हो या कोई दूसरा अधिकारी हो, ऐसे जवाब देते हैं जाइए कह दीजिए, ट्रांसफर करवा दीजिए हमारा , आपके एमएलए की स्थिति ये है, एमएलए को अधिकारी ने कह दिया ऐसे चलेगा आप मेरी ट्रांसफर करवा दीजिए ,इतनी हिम्मत होना बहुत बड़ी बात है, पहले क्या था इतना भय था अधिकारियों में, अगर ढंग से बात नहीं करी, तो ये रात को ट्रेन में बैठेगा, जाएगा 8 सिविल लाइन्स और मेरी शिकायत कर देगा ये भय था , अब किसके पास जाए ? जयपुर में तो दरवाजे बंद हैं सबके, मुख्यमंत्री की बात छोड़ो, मंत्री तक नहीं मिलते हैं, स्थितियां बहुत नाजुक हो गईं मैं मानता हूं।

Ashok Gehlot

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पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के स्पष्टीकरण देने और उनको लेकर श्री मदन राठौड़ द्वारा की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया : देखिए, मेरी दृष्टि में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। पहली बात तो यह है कि मैं उनकी पार्टी के मामलों में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता। लेकिन जो हालात हैं, जिस प्रकार से बीजेपी के अध्यक्ष बोलते हैं, उनकी एक अलग ही एप्रोच है ,बोलने में भी और व्यवहार में भी। व्यक्तिगत रूप से वे अच्छे और व्यवहारिक व्यक्ति हैं, हमारे उनसे अच्छे संबंध हैं। लेकिन जब पार्टी का दबाव होता है तो पता नहीं वे क्या बोल जाएं,ऐसी स्थिति बन जाती है। चाहे टिप्पणी हमारे बारे में हो या वसुंधरा जी के बारे में ,क्या कोई पीसीसी अध्यक्ष या बीजेपी अध्यक्ष इस तरह कहता है कि वसुंधरा जी बार-बार मुख्यमंत्री बनेंगी क्या? ऐसी टिप्पणी कम से कम मोदी जी के लिए छोड़नी चाहिए थी, या फिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को करनी चाहिए थी। खैर, यह उनकी पार्टी का मामला है, हम क्या कर सकते हैं। वसुंधरा जी को जवाब देने या सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि लोग समझते हैं कि उनकी भावना क्या थी और उन्होंने किस संदर्भ में बात कही थी। अनावश्यक टिप्पणियां की गईं। हालांकि, यह उनकी अपनी मर्जी है। वसुंधरा जी कुछ कह रही हैं, मदन राठौड़ कुछ और कह रहे हैं यह उनकी पार्टी की स्थिति है। ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस में झगड़े हैं, लेकिन वास्तविक दुर्गति तो इनकी हो रही है। आप खुद देख रहे हैं कि कौन क्या बोल रहा है। इनकी स्थिति सड़कों पर आ गई है। हम सब एक हैं। राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और उसी तरह आगे बढ़ रही है। यहां पर परंपरा रही है कि सरकारें वन बाय वन बदलती हैं। जूली साहब यहां खड़े हैं, हमारे नेता प्रतिपक्ष हैं। वे भी मेरी बात का समर्थन करेंगे कि अगली बार कांग्रेस ही आएगी। मीडिया द्वारा श्री मदन राठौड़ की उस बयानबाजी पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर, जिसमें मेरे द्वारा पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता संबंधी प्रतिक्रिया का जिक्र किया गया: देखिए, लोग संदर्भ को पढ़ते नहीं हैं। मैंने कहा था कि हमने दुनिया के सामने एक अवसर गंवा दिया। मध्यस्थता करने का काम हिंदुस्तान को करना चाहिए था। दुनिया में भारत का एक अलग ही आभामंडल (औरा) है। हमारा देश शांति, भाईचारे और अहिंसा की बात करने वाला देश है। दुनिया के कई देश उम्मीद कर रहे थे कि भारत आगे आकर अपील करेगा और मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास करेगा। लेकिन उसके बजाय पाकिस्तान जैसे देश की चर्चा होने लगी, जिसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और जिस पर वर्षों से ऐसी छवि बनी हुई है। जब वही देश शांति स्थापित करने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से भारतीयों को दुख होता है। मैंने वही दुख प्रकट किया था। यदि मदन राठौड़ मेरे इस भाव को नहीं समझ पा रहे हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप बताइए, पाकिस्तान की क्या स्थिति है? इंदिरा गांधी जी के समय उसके दो टुकड़े हो गए थे। क्या वह कुछ कर पाया? फिर भी आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है। आज जब इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति से पूरी दुनिया प्रभावित और चिंतित है, तो जो भी देश शांति की बात करेगा, लोग उसकी ओर देखेंगे। इस समय दुनिया के कई देश इस्लामाबाद की ओर देख रहे हैं कि वहां क्या निर्णय होगा। मेरी बात केवल इतनी थी कि वह स्थिति भारत की होनी चाहिए थी। मेरा मतलब ये था।

Ashok Gehlot

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राजस्थान में हुए अंता उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, प्रधानमंत्री जी द्वारा कांग्रेस पार्टी पर दिए बयान एवं बिहार चुनाव के नतीजों को लेकर ITV मीडिया नेटवर्क से बातचीत : राजस्थान में अंता में हुए उप चुनाव में कांग्रेस की जीत को लेकर प्रश्न : देखिए, राजस्थान की स्थिति बिल्कुल अलग है। आप वहां किसी से बात करोगे, पूरे प्रदेश के अंदर, किसी से भी, गांव के अंदर कहीं पर भी, एक ही बात मिलेगी, पिछली गवर्नमेंट के जो काम थे, सोशल सिक्योरिटी के थे, या हेल्थ के थे, एजुकेशन के थे, सब में हमने कीर्तिमान स्थापित किया और अब जो सरकार आई है उसने कई योजनाएं बंद कर दी हमारी या कमजोर कर दी, तो विजिबल लोगों को दिखता है भई ये क्या हो गया? विजिबल दिखता है लोगों को, और गवर्नेंस कुछ हो नहीं पा रही, लोगों में गुस्सा भी है नई गवर्नमेंट के प्रति। तमाम कारण ऐसे रहे जिसके कारण हम लोग वहां पंद्रह हजार से अधिक वोट से जीते हैं। मीडिया द्वारा प्रधानमंत्री जी के कांग्रेस को लेकर दिए बयानों पर मेरा जवाब : देखिए, बिल्कुल ही बकवास है, मोदी जी को कांग्रेस के बारे में यह बोलने का कोई हक नहीं है। मोदी जी को राइट ही नहीं है कि वह कांग्रेस की टूट के बारे में बात करें कि वहां दो टुकड़े हो जाएंगे या जो भी बोले वो, वो मैं उचित नहीं मानता। उनको अपना घर संभालना चाहिए। आज वो दो साल हो गए लगभग, बीजेपी का अध्यक्ष नहीं बना पाए, नड्डा साहब बैठे हुए हैं अभी, आरएसएस और बीजेपी पीछे पता नहीं क्या बात होती रहती है, डेढ़ दो साल से जो पार्टी अपना अध्यक्ष नहीं चुन पाए तो फूट उनमें है या फिर कांग्रेस में? अगर फूट उनमें है, तो वो अपना अध्यक्ष नहीं बना पा रहे हैं। हमारे यहां तो खड़गे साहब अध्यक्ष हैं यहां तो। तो बिल्कुल ही एक ऐसा उन्होंने एक कॉमेंट किया है जिसको कोई स्वीकार नहीं कर सकते हमारी पार्टी में। हमारी पार्टी एकजुट है खड़गे साहब के नेतृत्व में, राहुल गांधी जी के नेतृत्व में और सोनिया जी का सम्मान सभी एकजुट होकर करते हैं हम लोग। तो हमारी पार्टी में कोई ऐसी स्थिति कभी बनी नहीं, न चर्चा हुई है। चर्चा मोदी जी ने ही प्रारंभ की है क्योंकि ध्यान भटकाने के लिए कि वह अपना अध्यक्ष नहीं बना पा रहे हैं। हमारा तो यह कहना है। राष्ट्रवादी और सब बातें, वो नामदारी उनके जुमले हैं, कोई दम नहीं है, मोदी जी ऐसे जुमले बोलते रहते हैं और उन जुमलों का मैं जवाब नहीं देना चाहता। बिहार चुनाव के नतीजों को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब : देखिए, बाकी तो कई कारण होंगे पर यह कारण तो स्पष्ट है कि राजस्थान में हमारी गवर्नमेंट थी तो हमारी 2022 की स्कीम थी बजट की, कि मोबाइल फोन देने हैं हम लोगों को, महिलाओं को, एक करोड़ पैंतीस लाख या बीस लाख महिलाओं को देने थे। चुनाव डिक्लेयर होते ही वो स्कीम बंद करवा दी, चुनाव आयोग ने नहीं बांट सके, चालीस लाख बांट पाए हम। लगभग एक करोड़ महिलाएं वंचित रह गई। पेंशन रोक दी गई। वैसे स्कीम थी हमारी करोड़ों के लिए, गरीबों के लिए, अन्नपूर्णा योजना रोक दी गई। हमने ऑब्जेक्शन भी नहीं किया, क्योंकि भई चुनाव आयोग का निर्देश है निष्पक्ष चुनाव होना चाहिए, हमने साथ दिया। यहां नंगा नाच हुआ है बिहार के अंदर, चुनाव चल रहे हैं। पोलिंग हो रही है फर्स्ट फेज की, सेकंड फेज चुनाव की पोलिंग आ रही है, उसके अंदर आप जो है, मतलब बताइए दस हजार रुपये किसे कहते हैं? वो बंट रहे हैं महिलाओं को, एक महिला के तो बात चलती है कि महिलाओं ने वोट दे दिया उनको, मैं कहना चाहूंगा खाली महिला ने नहीं दिए, महिला के लगभग पूरे परिवार ने वोट दिए उनको। दस हजार रुपये आ गए उनके परिवार के अंदर। पेंशन वहां मिलती थी बुजुर्गों को या अन्य लोगों को, चार सौ रुपये थी बीस साल से, अचानक कर दी, एक हजार एक सौ कर दी, ग्यारह सौ कर दी, वो पेंशन भी बंटती रही, चुनाव के पोलिंग एक दिन पहले तक बंटती रही, तो आप बताइए इसको क्या कहोगे? जो पैसा जो है और भी अनेकों बातें होंगी, पैसा खुले रूप में आप जो पैसा बंटता है, कहते सुनते हैं इलेक्शन के अंदर कैश बंटता है, आपने ऑफिशियली कैश डाल दिया उनके खाते में दस हजार रुपए डाल दिए, तो ये हरकतें जो हुई है न, यह भी एक कारण है वहां पर कि इस प्रकार के परिणाम आए।

Ashok Gehlot

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नीट पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द होने पर मीडिया से बातचीत की : देखिए मैंने कल ही मीडिया को भी कहा था कि यह समझ के परे है कि जब तीन तारीख को एग्जाम हुआ था और छात्रों ने, अभ्यर्थियों ने, तीन और चार तारीख को ही पुलिस को रिपोर्ट कर दी तो पुलिस ने कोई परवाह नहीं करी। फिर उन छात्रों ने NTA को लिखा। NTA को लिखा तब जाके उन्होंने डीजी पुलिस को मैंने सुना है कि इत्तला करी कि भाई ये शिकायत हमारे राजस्थान से आ रही है। तब केस एसओजी को दिया गया, उन्होंने 20-30 लोगों को अरेस्ट कर लिया। पर ये समझ के परे है क्या कारण था कि FIR तक दर्ज नहीं कर रहे थे। मैंने कल ही मांग करी आप FIR दर्ज क्यों नहीं कर रहे हो? आपने बैठा रखा उनको, आप अरेस्ट करें, कार्रवाई शुरू करें, जांच शुरू करें। पूरे राजस्थान की बदनामी हो रही थी, पर यह समझ नहीं आ रहा कि स्टेट गवर्नमेंट ने क्यों ऐसे इंस्ट्रक्शन दिए होंगे, एसओजी संस्था जो है उनके अधिकारियों में असमंजस पैदा हो गई कि हम कार्रवाई आगे बढ़ाएं नहीं बढ़ाएं। ये खबरें भी आ रही थी एसओजी से भी। यह बहुत ही अनफोर्चूनेट बात थी। अब सवाल यह कि 2024 में पेपर आउट हुआ, 25 में हुआ और 26 में हो रहा है। तीन साल लगातार एनटीए से पेपर आउट हो रहे हैं। जब तक आप तह में नहीं जाएंगे तो यह आगे भी ऐसी स्थिति बनती जाएगी। पहले भी जो एग्जाम होते हैं राज्यों में, वहां पर भी राजस्थान सहित मैं जहां तक समझता हूं, राज्य उसमें यूपी भी है, गुजरात भी है, हो सकता है एकाध स्टेट मैं गलत बोल रहा हूँ। मतलब देहरादून की भी रिपोर्ट आई थी, बिहार से भी आई थी। कई राज्यों से आती रहती है। तो यह जो पेपर लीक के जो गैंग बन गए हैं अलग-अलग राज्यों में और राष्ट्रव्यापी, इससे हमारे जो नौजवान पीढ़ी बहुत दुखी है। तैयारी करते हैं, एग्जाम होते हैं, फिर एग्जाम रद्द करने पड़ते हैं। हमें भी राजस्थान में एक पेपर आउट हो गया, रद्द करना पड़ा था। तो यह बहुत बड़ी एक समस्या चुनौती के रूप में हमारे सामने है। भारत सरकार को चाहिए, मैंने पहले ही अपील की थी, यह जो राष्ट्रीय स्तर पर जो यह ऑर्गेनाइज्ड वे में काम हो रहा है, ऑर्गेनाइज्ड वे में गैंग बनी हुई है, यह पता लगाना चाहिए यह इस समस्या के समाधान के लिए। अब आप आश्चर्य करोगे अभी यह राजस्थान में SOG जांच कर रही है वो पेपर जो राजस्थान के आउट हो गए जयपुर या सीकर से जो हम सुन रहे हैं, उसमें FIR लॉज तो आज भी नहीं करी है, आज की होगी और बताइए NTA ने बिना FIR दर्ज करे ही पेपर को कैंसिल कर दिया, रद्द कर दिया। इसका मतलब उनके पास जो खबरें गई है ना छात्रों से जिन्होंने एग्जाम दिया है, डॉक्यूमेंट्स उन्हें भेजे हैं, उनसे कन्विंस होकर उन्होंने इतना बड़ा एग्जाम 22 लाख छात्र बैठे उसके अंदर और उन्होंने उसको रद्द कर दिया। इसका मतलब कितना ठोस प्रूफ उनके पास पहुंचे होंगे जो उनके पास पहुंच सकते हैं, एनटीए जैसी नेशनल एजेंसी के पास पहुंच सकते हैं तो राजस्थान गवर्नमेंट के पास SOG के पास नहीं पहुंचे क्या? तो पता नहीं ये क्या है बदनामी के डर से क्योंकि हमें बदनाम कर रहे हैं दो साल से, पेपर आउट, पेपर आउट, हम तो स्वीकार करते हैं पर यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे वक्त में केस दर्ज होते थे। हमारे वक्त में ही पेपर रद्द होते थे, वापस एग्जाम करवाते थे। पर यह जो इनकी जो अप्रोच है ना, वो नेगेटिव एप्रोच है। पूरे देश की बदनामी, राजस्थान की बदनामी हो रही है। SOG की बदनामी हो रही है कि राजस्थान के SOG ने क्यों नहीं FIR दर्ज करी? क्यों नहीं उन्होंने रिपोर्ट भेजी? रिपोर्ट भेजी हो, बताएं पब्लिक को कि हमने रिपोर्ट भेजी थी, तो ये सब रहस्य बने हुए हैं। बहुत ही दुखद घटना है ये जिसमें NTA को यह पेपर रद्द करना पड़ा, सीबीएसई को जांच लेनी पड़ी। मैं उम्मीद करता हूं अब भी समय है लॉजिकल कन्क्लूजन तक पहुंचे CBI भी। पता लगाएं कि और जहां-जहां पेपर आउट हुआ, आर्मी में हो जाते हैं, ज्यूडिशियरी में हो जाते हैं, सब संस्थाओं में पेपर आउट हो रहे हैं तो यह वंस फॉर ऑल, हमेशा के लिए प्रॉब्लम हल होनी चाहिए मेरा मानना है। मेरी रुचि उसके अंदर है कि सरकार किसी पार्टी की हो, पेपर आउट होना बहुत बड़ी घटना होती है तो मैं समझता हूं कि उसके लिए किस प्रकार से हमेशा के लिए बीमारी समाप्त हो, बेरोजगारी बहुत ज्यादा है लोग कहते हैं, बेरोजगार लोग क्या करें ये धंधा पकड़ लिया। धंधा शुरू कर दिया इन लोगों ने, बड़े-बड़े नेता उसमें कई बार शामिल होते हैं। ऐसे नाम भी आते हैं तो मैं समझता हूं इन बातों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए सरकार को। अब सरकार, भारत सरकार तो क्या है चुनाव जीतने का उनका एजेंडा है खाली बस। चुनाव जीते कैसे? साम, दाम, दंड, भेद काम ले ओ।

Ashok Gehlot

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आज जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की : राज्य सरकार द्वारा जोधपुर की उपेक्षा किए जाने पर मेरी प्रतिक्रिया : देखिए सबसे बड़ी बात है कि 12 साल पूरे हो गए तो अलग बात है कि 12 साल में कोई उपलब्धि नहीं रही है। धर्म के नाम पर राजनीति हुई और उसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे। अब नतीजे क्या निकलेंगे आने वाले फ्यूचर के अंदर वक्त बताएगा, अभी उस पर कहने की आवश्यकता नहीं है। पर धर्म के नाम पर राजनीति करना एक अलग बात है और पब्लिक समस्याओं से रूबरू होना दूसरी बात है। आज हर क्षेत्र में, जोधपुर की बात करें, तो पीने के पानी का संकट पैदा हो गया जोधपुर में, जिसके लिए हमने 20 साल मेहनत करी होगी जब इंदिरा गांधी कैनाल का पानी लिफ्ट करके 50 दौरे मैंने किए होंगे नहर पर तब पानी आया और तीसरा फेस जो है अभी वो 1500 करोड़ लगभग हम लोग विदेश से ऋण ले रहे थे। देरी हो रही थी तो मैंने स्टेट बजट से 1400 करोड़ रुपए मैंने मंजूर कर दिए कि जोधपुर और आसपास के गांव प्यासे नहीं रहने चाहिए। वो काम भी धीमे चल रहा है। सरकार चली गई तो मॉनीटरिंग करने का कोई हिसाब ही नहीं है यहां पर तो। मुख्यमंत्री को पता ही नहीं पड़ता कि जोधपुर लिफ्ट थर्ड बला क्या है। अब जिस मुख्यमंत्री को नहीं पता था हो तब वो कैसे उसकी मॉनिटरिंग करेंगे, वो इंटरेस्ट ले ही नहीं रहे हैं। अभी मैंने उनसे बात करी, मेरी बर्थडे पर उनका फोन आया था तो मैंने कहा जो प्रोजेक्ट जोधपुर में बन रहे हैं या बन गए हैं, सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी बन गई। स्पोर्ट्स का कॉम्प्लेक्स बन गया, 90 करोड़ रुपए की लागत से, और जो काम हो गए हैं, मेडिकल यूनिवर्सिटी बन रही है। लंबी लिस्ट है मेरे पास। आप बताइए नई सड़क पार्किंग का ये हो गया और चार जगह शानदार बिल्डिंग खड़ी हैं, प्रताप नगर, मंडोर हॉस्पिटल , दिगाडी के अंदर, चौपांकी, शानदार बिल्डिंग हैं बाहर के लोग देख के आश्चर्य होता है कि इतनी शानदार बिल्डिंग है। पड़ी पड़ी खराब हो जाएगी। ना इक्विप्मेंट है ना डॉक्टर है। इस सरकार को क्या करें? पूरे राजस्थान में हाहाकार मचा हुआ है। मेरा दावा है , मीडिया वालों मैंने कहा था जयपुर में मेरा दावा कोई मीडिया वाला हम खर्चा देंगे, आप जहां चाहो राजस्थान के किसी गांव में किसी भी गांव में जाओ,आप सरकार की हकीकत से रुबरु हो जाओगे। सरकार नाम की चीज है क्या? हमारे वक्त की योजनाओं को आज लोग याद कर रहे हैं, कोई थैला लेकर चल रहा है, कोई पेंशन नहीं मिल रही पाँच छह महीने से, वो सरकार को कोस रहा है, दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं, RGHS भी लगभग बंद हो गया, प्राइवेट अस्पताल वाले पैसे वसूल करने लग गए हैं, कागजों में चिरंजीवी योजना लागू है तब भी प्राइवेट वालों ने हड़ताल कर दी, 40 दिन हो गए, मैने सुना कल परसों खोल रहे हैं उसको, तो 40 दिन तक इलाज नहीं हुआ और जेब से पैसा देना पड़ा। क्या सरकार भरपाई करेगी ? वादा भी किया लोगों से कि अभी देना पड़ेगा आपको, पैसा मिल जाएगा तो हम आपको वापस दे देंगे। तो सरकार सुनिश्चित करें ऐसे मेकेनिजम डेवलप करे जिससे कि पैसा दिलाए उन लोगों को सरकार, वो पैसे उनको वापस मिले तब जाकर ही हमारी जो स्कीम बनाई थी चिरंजीवी योजना वो लागू मानी जाएगी, ये मेरा मानना है। तो कहने को बातें बहुत सारी है। मैंने बताया कि लिफ्ट कैनाल की कोई लापरवाही हो रही है। अब क्लोजर होता है, हर साल होता है पंजाब से, हमारे वक्त में भी हुआ था, पर हमने एडवांस में मैनेजमेंट किया, वहां की सरकार से बातचीत करी, चीफ सेक्रेटरी से बातचीत करी और ये नौबत नहीं आने दी कि कोई संकट ही पैदा हो जाए, आज देखिए क्या हो रहा है। पीने के पानी के लिए जो राजस्थान में हिंदुस्तान के अंदर नंबर वन होना चाहिए था जोधपुर, इतना पानी आ चुका है कायलाना के अंदर भरा पड़ा है सारा पानी। अब पानी आगे सेआएगा नहीं तो ये क्या करेंगे? तो मेरा कहने का मतलब यह सरकार की लापरवाही आपके सामने है, जोधपुर की उपेक्षा हो रही है, मुख्यमंत्री जी पाँच बार दस बार आ चुके, पता नहीं कितनी बार आए होंगे मुझे पता नहीं, आपको ज्यादा मालूम है। ( मीडिया पांच साल जल मंत्री के जोधपुर आने पर मीडिया के जिक्र पर) कितनी बार आए हैं वो? पता नहीं कितनी बार आए हो, गिनती नहीं है मतलब। तो आप बताइए उसके बाद में ये मैंने कहा मुख्यमंत्री को जो मैंने पाँच छह नाम गिनाए, बिल्डिंग बन चुकी है, फिनटेक इंस्टीट्यूट हिंदुस्तान में एक मात्र ऐसा होगा जो अलग से टेक्निकल है वो, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर के इंस्टीट्यूट बन रहा है,इस प्रकार की जगह बहुत कम बनी होगी, दुनिया की मैं नहीं कह सकता पर हिंदुस्तान में बहुत कम बने होंगे वो हमने बनाया है। 1/2.

Ashok Gehlot

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*श्री संजय गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर पीसीसी में श्रद्धांजलि के बाद मीडिया से बातचीत* : *श्री संजय गांधी के योगदान तथा वर्तमान हालातों में विदेश नीति पर मेरे विचार* : देखिए संजय गांधी का अपना उस वक्त में जब इंदिरा जी थीं उस जमाने के अंदर उन्होंने पांच प्वाइंट प्रोग्राम दिए थे , फाइव प्वाइंट प्रोग्राम। आज भी लोग उन प्रोग्राम को याद करते हैं चाहे वो दहेज प्रथा का था, लिटरेसी का था या जातिवाद खत्म करो का था, दहेज प्रथा का था या परिवार नियोजन का था हालांकि परिवार नियोजन का उस जमाने में जो अभियान चला , इमरजेंसी थी उस वक्त तो उसमें हम लोग कांग्रेस के ऊपर आरोप लगे, जबरदस्ती करवा दी गई, और चुनाव हारना पड़ा कांग्रेस को उस जमाने के अंदर पर वो प्रोग्राम इतने क्रांतिकारी थे, आज एक सौ चालीस की आबादी है एक सौ चालीस करोड़ की आबादी है, अगर वो प्रोग्राम नहीं होते तो हो सकता है अभी लगभग एक सौ अस्सी करोड़ की आबादी होती, एक एग्जांपल दे रहा हूं कि प्रोग्राम बहुत शानदार था , परिवार नियोजन आवश्यक होता है सब जानते हैं , उस अभियान का फायदा ये रहा क्योंकि चाइना में भी बहुत आबादी बढ़ रही थी बाद में उनको भी कंट्रोल करना पड़ा , उस प्रोग्राम का ये फायदा रहा कि कम से कम लोगों में इतनी जागरूकता आ गई कि बाद में लोग खुद ही परिवार नियोजन करने लग गए। एक बच्चे दो बच्चे तक सीमित रहे। पहले सीमित नहीं थे, पांच, सात, आठ बच्चे भी होते थे तो बहुत बड़ा फर्क पड़ा उन प्रोग्राम से। दहेज़ प्रथा का था मान लीजिए, लिटरेसी का आप जानते हो राजस्थान गवर्नमेंट में हमनें तो बहुत बड़ा स्टेप उठाया आज बहुत बड़ी परसेंटेज बढ़ गई है हमारी, वृक्षारोपण की बात उन्होंने करी वो बहुत बड़ा प्रोग्राम था पर्यावरण की दृष्टि से। राजस्थान का सौभाग्य है कि हमनें पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, वृक्ष लगाओ, तो कई प्रोग्राम हमनें लिए हैं जो उस वक्त प्रोग्राम चलते थे तो ये जो उनका जो सोच थी उसको आज भी कोई इनकार नहीं कर सकता। दहेज़ प्रथा आज भी है, लोग आप देखते हो कितनी हत्याएं होती हैं कितना महिलाओं पर जुल्म होता है, तो ये तमाम बातें मैं समझता हूं कि आज के दिन हमें याद करना चाहिए उन पांच प्वाइंट प्रोग्राम के कारण से इस देश को एक सोशल रिफॉर्म में भागीदारी मिली, जैसे राहुल गांधी जी आज सोशल रिफॉर्मिस्ट बन रहे हैं ,वो जिस प्रकार से समाज को बदलने की बात कर रहे हैं, जातिगत जनगणना का एक क्रांतिकारी कदम उन्होंने उठाया है ये आने वाला ज़माना याद रखेगा, कि एक बार कम से कम 1931 में जातिगत जनगणना हुई थी उससे आप साइंटिफिक तरीके से आप वैज्ञानिक तरीके से आप बाद में योजना बना सकते हैं, एससी हो, एसटी हो ,ओबीसी हो, या जो जनरल कास्ट भी है उसमें जो गरीब तबका है EWS वाले, तो बहुत बड़ा काम राहुल गांधी कर रहे हैं और ये कांग्रेस की सोच है क्यों ये बात मैं इसलिए कहना चाहता हूं आपको इस मौके पर कि कांग्रेस की सोच है वो हमेशा रिफॉर्म करने की तरफ ध्यान दिया, हमेशा उन्होंने कोई वक्त हो, पंडित नेहरू का वक्त हो या इंदिरा जी हो या राजीव गांधी हो, अब राजीव गांधी ने ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी की बात करी, पंचायत का , स्थानीय निकायों का,73, 74 अमेंडमेंट किए, सब क्रांतिकारी बाते हैं लंबी फेहरिस्त है 18 साल के मतदान का अधिकार दे दिया नौजवानों को। तो जो राजीव गांधी ने महिलाओं के लिए या जो शैडयूल्ड कास्ट के लिए या जो उन्होंने कदम उठाए ट्वेंटी फर्स्ट की बात करी, आज मोबाइल इंटरनेट की सेवाएं कैसे आ गई देश के अंदर तो ये तमाम बातें मैं इसलिए बोलना चाह रहा हूं इस मौके पर कि कांग्रेस ने हमेशा आजादी के पहले भी क्रांतिकारी कदम उठाए जब आजादी मिली चाहे गांधी जी थे चाहे पंडित नेहरू थे या मौलाना आजाद थे या सरदार पटेल थे और आजादी के बाद में भी बड़े क्रांतिकारी कदम उठाए। सोच ली देश को आज दुनिया में क्या हो रहा है , नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट खड़ा कर दिया, आज देखिए क्या तकलीफ हो रही है दुनिया के अंदर , इजरायल और ईरान का युद्ध हो रहा है , अमरीका का प्रेसिडेंट कह रहा है कि पंद्रह दिन बाद बताऊंगा मुझे क्या करना है और रात को ही वो आ जाते हैं मैदान के अंदर, अटैक कर देते हैं। ये जो कुछ हो रहा है और इंडिया कुछ बोल नहीं पा रहा है, क्यों नहीं बोल पा रहा है ? इंदिरा गांधी के जमाने में नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट चला था, निर्गुट राष्ट्र सम्मेलन, हिंदुस्तान उनका नेता था दुनिया का, दुनिया में जो तीसरी दुनिया है राष्ट्रों की, उसका नेता कौन था मुख्य रूप से , और भी कई मुल्क होंगे लेकिन इंडिया मुख्य रूप से था, तो हमारी पहचान थी कि भई निर्गुट हैं हम लोग, किसी गुट के साथ में न रशिया न अमेरिका हम निर्गुट हैं।

Ashok Gehlot

11,350 views • 1 year ago

सवाल : सर जनता जवाब देगी समय आने पर जिस प्रकार की स्थितियां हैं ? जवाब : जनता तो जवाब देने के लिए अभी तैयार बैठी है। उपचुनाव भी देख लीजिए,इनकी हालत पतली हो गई है बिहार में भी। मध्य प्रदेश में हम जीत गए, तो ये इनकी हालत खराब हो रही है। पर जनता राजस्थान में तो आप समझ लो कि बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, चुनाव कब आ जाए, इतने दुखी हो गए। गवर्नेंस नाम की चीज नहीं है। शासन तो हो भाई, कम ज्यादा हो अलग बात है पर यह तो स्थिति बन गई है कि शासन नाम की चीज नहीं है। करप्शन अलग हो रहे हैं, भ्रष्टाचार की तो सीमा टूट गई है। कोई काम की सुनवाई होती नहीं। लोग जाएं कहां मिलने के लिए ? मंत्री लोग मिलते नहीं जयपुर के अंदर, सबके दरवाजे बंद है। सिविल लाइंस में मंत्रियों के दरवाजे बंद हैं। जनता कहां जाकर घुसे बता दीजिए, मुख्यमंत्री आप खुद बताइए उनको कहां जाना चाहिए? सीएम हाउस में व्यवस्था कर दो, सब लोग वहां आ जाएं, मंत्री भी वहां आ जाएं, वहां आ के बैठ जाएं आपकी देखरेख के अंदर, कुछ तो हो ,जो जनसुनवाई हो, कुछ भी नहीं हो रही है। बहुत ही स्थिति खराब है। सवाल : यूजीसी रेगुलेशन को लेकर क्या कहेंगे? जवाब : सुप्रीम कोर्ट में अभी तो रुक गया है। बाकी तो जो डेमोक्रेसी में कोई अपनी बात बोल सकता है, कौन किसको रोक सकता है। सवाल : पंचायत और निकाय चुनाव हैं। जवाब : आप ठीक कह रहे हैं, पंचायत के हैं या निकायों के चुनाव हैं, उसमें तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी तैयारी कर रही है, लगी हुई है उसके अंदर। मैं समझता हूं कि कांग्रेस की विजय होगी शानदार तरीके से। गांव में भी और शहरों में भी यही माहौल है। सवाल : बैठक में सर गुटबाजी के नजारे नजर आ रहे हैं कहीं न कहीं। जवाब : बीजेपी में ? अगर बीजेपी में गुटबाजी है तो उसका जिम्मेदार मैं थोड़ी हूँ भई। सवाल : सर लोहावट में एक महिला की निर्मम हत्या कर दी गई। जवाब : मेरे पास कल रात को किसनाराम जी Ex.MLA साहब आए थे , एक बिश्नोई परिवार है उनके रात को सोए हुए थे। उनका हस्बैंड ड्राइवर है , बाहर गया था नौकरी पर, पीछे पत्नी की हत्या कर दी, दो बच्चियों को घायल कर दिया और अभी तक पता नहीं लगा। ऐसी घटनाएं हो रही हैं। ब्लाइंड मर्डर हो रहे हैं और सरकार कुछ नहीं कर पा रही। ये तो एक घटना हुई है। राजस्थान भर में किसी ज्वेलर को मार देते हैं, किसी के यहाँ डकैती कर देते हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट हो गई है। क्या क्या इस सरकार के बारे में बोले? यह स्थिति है। विपक्षी पार्टियां भी किस किस पॉइंट को बोलें ? कोई लगता ही नहीं कि सरकार है। विपक्षी पार्टी छोड़ो, जितनी आलोचना बीजेपी वाले खुद करते होंगे, आरएसएस वाले करते होंगे, वह हमसे ज्यादा करते होंगे। इतना ही फर्क है कि हम बोल देते हैं, वो बोल नहीं पा रहे। सवाल : पूर्व मंत्री धारीवाल जी ने स्टेटमेंट दिया उस पर क्या कहेंगे ? जवाब : अरे आप छोड़ो, कांग्रेस एकजुट है। आप कितनी ही कोशिश कर लो मीडिया वालों ,कुछ नहीं होने वाला है। कांग्रेस एकजुट रहेगी। चुनाव में कांग्रेस का भारी बहुमत से आना निश्चित है, कोई रोक नहीं सकता और यह नेताओं के बारे में छोड़ो, ये तो राजनीति में चाहे पूरे देश में बीजेपी हो या कोई और पार्टी हो, सब जगह कोई न कोई बात को लेकर आप सवाल पूछ सकते हो आपका हक है मीडिया वालों का। हमारी पार्टी में दिल से कोई मतभेद नहीं है, मनभेद नहीं है और कोई छोटी मोटी घटना होती है तो वह शांत हो जाती है। हमारे यहां कोई झगड़ा नहीं है, न होने वाला है। चुनाव तक कोई झगड़ा नहीं होने वाला। सब एक रहेंगे। सवाल : चंदा चोरी को लेकर आपका क्या कहना है ? जवाब : चंदा चोरी में तो पोल खुल गई है। बीस- तीस साल तक लाखों गांव ने चंदा दिया बेचारों ने। ये मांगते रहे। आज तक हिसाब नहीं। मैंने कल भी आपको कहा कि चंदा इकट्ठा किया तब, जमीनें खरीदी तब,पत्थर खरीदे तब, निर्माण किया तब और बाद में चढावा चढ़ा तब, कब -कब क्या क्या घोटाले हो गए हैं, यह देश के सामने आना चाहिए। यह मेरा मानना है।

Ashok Gehlot

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जोधपुर में पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण संबंधी प्रश्न के जवाब में : मैं कह चुका हूं, बगैर अशोक गहलोत की मौजूदगी के अंदर प्रोग्राम की गरिमा घटा दी। जिस व्यक्ति ने जब कभी बीमार पड़े हैं, उनको कैंसर हो गया था। मुंबई हो, दिल्ली हो या सिविल लाइंस हो, जितनी बार मैं मिला हूं, कोई नहीं मिला उनसे, और अंतिम जो है उनसे मिलने वाला व्यक्ति था वो मैं भी। जब वो उनका स्वर्गवास हुआ एसएमएस में उनसे मिलने वाला अंतिम व्यक्ति मैं था और मिल के मैं घर पहुंचा, इत्तला आई वो तो समाप्त हो गए, उनकी डेथ हो गई है तो मेरा रिश्ता इस प्रकार का उनसे था और जो हमने रिस्पेक्ट दिया उनको जब वो उपराष्ट्रपति बने मैं एक सौ छप्पन पर आ गया था वो बत्तीस पर आ गए थे, जब मुख्यमंत्री हटे, तब भी मैं उनके घर गया, शपथ लेते ही उनसे मैंने कहा आराम से आप रखिएगा, जल्दबाजी नहीं कीजिए खाली करने की। पूरी सिक्योरिटी आपकी कायम रहेगी, डॉक्टर पूरे आपके ध्यान रखेंगे, कोई तकलीफ आपको आए, आप मुझे फौरन इत्तला करना। तीन बातें मैं उनको कह के आया था और उसके बाद लगातार हम लोग ऐसे रिश्ते रहे। वो भी कहीं जाना होता आराम से मुझे वो इत्तला करते कि मैं भी आपके साथ चल रहा हूं, प्लेन के अंदर हम साथ जाते थे। सरकार बदलने के बाद मेरे तमाम मंत्री थे, जो सीनियर थे मोहनलाल सुखाड़िया जी के वक्त के चंदनमल जी बेड, खेत सिंह जी राठोड़ , प्रद्युमन सिंह जी, गुलाबी सिंह शक्तावत जी तमाम उनके यहां जाते रहते थे, हम कभी एतराज ही नहीं करते थे। आज जमाना बदल गया, मंत्री तो छोड़ दीजिए, MLA भी आ जाए कहीं हम लोगों के यहां पर तो पचास तरह का शक् होने लग जाते हैं उसके ऊपर। हमारे वक्त में, मैं जाता था होली दिवाली वो आते थे मेरे यहां पर। वो रिश्ते रखे हमने और डेथ हुई तो हमने चला करके उनके लिए स्मारक बनाया। वो तो पूरे राजस्थान जानता है कि अगर ये बीजेपी वाले होते ना तो उपराष्ट्रपति बनने पर इनको कोई सम्मान किया, बता दीजिए किया हो तो, मैं तो ऑफिशियली कह रहा हूं ना मैं खुद आरोप लगा रहा हूं, बीजेपी का एक इतना बड़ा पुराना नेता सन बावन से चुनाव जीतता आ रहा है, वो उपराष्ट्रपति बने तो क्या बीजेपी वालों को शानदार स्वागत नहीं करना चाहिए था? किया क्या ? मैंने किया मुख्यमंत्री निवास में बुलाकर के। संपर्क मैंने रखा उसके बाद में भी, और डेथ हुई तो हम लोगों ने स्मारक बनाया उनके लिए। सब दुनिया जानती है। पूरे राजस्थान में यह चर्चा आज भी है उस वक्त भी थी कि अगर बीजेपी वाले होते शायद वो भी ऐसा स्मारक बनाने की बात या जमीन देने की बात नहीं सोच सकते थे। कोई सम्मान नहीं दिया गया ये स्थिति है। इसलिए मैंने कल कहा कि भाई मेरा तो क्षेत्र है वो मेरे क्षेत्र में प्रोग्राम हो रहा है। सरकारी प्रोग्राम नहीं होता तो मैं नहीं करता, यह प्रोग्राम JDA का था अगर मान लीजिए प्रोग्राम प्राइवेट कोई करता तो फिर भी मैं कोई कमेंट नहीं करता। यह प्रोग्राम सरकारी था। रक्षा मंत्री को बुलाया गया और आप लोकल MLA को नहीं बुलाओ, छोड़िए पूर्व मुख्यमंत्री की बात, छोड़िए मेरे क्या रिश्ते थे तब, यह इनकी एप्रोच है। ये तो इस देश में डेमोक्रेसी खत्म कर ही रहेंगे यह इनका संकल्प है। उसी रूप में तमाम बंगाल हो या बिहार हो, चाहे असम हो, देश में राजनीति चल रही बहुत खतरनाक चल रही है।

Ashok Gehlot

26,489 views • 3 months ago

“हम तो कुर्सी छोड़ना चाहते हैं, मगर कुर्सी हमें नहीं छोड़ रही" इस दौर में नरेश मीणा की बेबाक क्रांतियां क्या परिणाम दे पाएगी? नरेश मीणा राजनीति में एक अलग ही रेखा खींचने की कोशिश कर रहे हैं। वे लगातार अपने बेबाक बयानों के कारण मीडिया में सुर्खियाँ तो बटोर रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सुर्खियाँ उनके लिए रास्ता बनाएँगी या फिर यही सुर्खियाँ अड़चन बनकर उनके मार्ग को रोक देंगी। हाल ही में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में दिए गए नरेश मीणा के बयान सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हो रहे हैं। एक सभा में उन्होंने कहा कि “मैं कहता हूँ, MLA का टिकट तो मुझे भजनलाल जी अभी दे रहे थे। मैं भारतीय जनता पार्टी से बेलवाड़ भगवान के मंदिर में शपथ लेकर, अपने बच्चे की सौगंध खाकर कह रहा हूँ मेरे आदिवासी भाइयों, जब मैं टोंक जेल में था, तभी मुझे ऑफर आ गया था कि BJP में सबसे पहले अगर किसी को टिकट देंगे तो मुझे देंगे। लेकिन मैंने कह दिया कि मैं MLA का भूखा नहीं हूँ। मैंने बड़े सपने देख रखे हैं, बड़े ख़्वाब देख रखे हैं। नरेश मीणा MLA बनकर केवल एक विधानसभा में एक SDM या तहसीलदार को आदेश दे सकता है, लेकिन नरेश मीणा ऐसा बनना चाहता है कि अगर राजस्थान में 50 जिले हैं, तो मैं ऐसा बनूँ कि 50 जिलों के कलेक्टर और SP को आदेश दे सकूँ।” इस बयान का सीधा अर्थ यही निकलता है कि नरेश मीणा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ बहुत बड़ी हैं और वे स्वयं को भविष्य में मुख्यमंत्री के रूप में देखने लगे हैं। राजनीति की अपनी कूटनीति और धूर्तताएँ होती हैं। यहाँ कुर्सी की चाह रखने वाले अति-महत्वाकांक्षी लोग अक्सर यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि “हम तो कुर्सी छोड़ना चाहते हैं, मगर कुर्सी हमें नहीं छोड़ रही।" ऐसे दौर में अपने बड़े सपनों को इस तरह सार्वजनिक मंचों पर व्यक्त करना, और जिस दल से टिकट मिलने की संभावना हो उसी दल के नेताओं को खुलेआम गालियाँ देना, उन्हें कमजोर बताना यह सब करते हुए उसी पार्टी के भीतर रहकर अपने सपनों को पूरा करना व्यवहारिक रूप से बेहद कठिन है। दूसरी ओर, एक अन्य सभा में नरेश मीणा भाजपा को सिरे से नकारते हुए और कांग्रेस से टकराव की भाषा में बोलते नज़र आए। उन्होंने कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का उदाहरण देते हुए 2028 और टिकट बंटवारे तक के बड़े सपनों की बात कही। उन्होंने कहा कि “जीते जी भारतीय जनता पार्टी में नहीं जाऊँगा। लेकिन कांग्रेस में लड़ाई सम्मान की है। अब तुम्हारा बेटा नरेश मीणा MLA बनने के लिए किसी के दरवाज़े पर नहीं जाएगा।अगर तुम्हारा आशीर्वाद रहा, समाज ने साथ दिया, तो तुम्हारा बेटा भी 2028 में वैसी ही चर्चा चाहता है जैसी आज राजस्थान की राजनीति में बड़े-बड़े नेताओं की होती है। सचिन पायलट की चर्चा होती है, गोविंद डोटासरा की चर्चा होती है, अशोक गहलोत की चर्चा होती है, भँवर जितेंद्र सिंह की चर्चा होती है। मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ जब तुम्हारी ताकत इतनी है, संख्या इतनी है, तो फिर तुम्हारी भी चर्चा बराबर की क्यों नहीं होनी चाहिए? तुम्हें भी बराबर की भागीदारी क्यों नहीं मिलनी चाहिए?” राजनीतिक जीवन विरोधाभासों से भरा हो सकता है, लेकिन ये विरोधाभास आमतौर पर सार्वजनिक मंचों पर नहीं दिखाए जाते। राजनीति का एक अलिखित नियम है यदि आप किसी की राजनीतिक हत्या करना चाहते हैं और यह बात सबको पता चल जाती है, तो अक्सर वही व्यक्ति राजनीतिक रूप से और मज़बूत होकर उभरता है। यहाँ नरेश मीणा राजनीतिक दलों में अपनी जगह बनाने के लिए अपने राजनीतिक शत्रुओं से लड़ाई को खुलेआम सार्वजनिक कर रहे हैं, जबकि ऐसी लड़ाइयाँ कई बार सामने वाले को मजबूत और स्वयं को कमजोर कर देती हैं। आप क्रांतिकारी बनना चाहते हैं, लेकिन क्रांति के भी कुछ नियम होते हैं। यदि राजनीतिक दलों में आंतरिक बदलाव लाना है, यदि कुछ लोगों के चंगुल में फँसी व्यवस्था को जनता के हित में मोड़ना है, अच्छे लोगों को टिकट दिलवाना है तो यह सब सीधे टकराव और खुली क्रांति से संभव नहीं होता। यह बदलाव तभी आता है जब आप पहले व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं, उसमें स्वयं को मज़बूती से स्थापित करते हैं, और फिर उसी व्यवस्था पर हावी होकर उसे बदलते हैं। अन्यथा जिसे आज ‘क्रांति’ कहा जा रहा है, वह कल एक तमाशा बनकर रह जाने का ख़तरा रखती है।

Dinesh Bohra

24,210 views • 6 months ago

प्रदेशवासियों के हित में राइट टू हेल्थ के नियम बनाने को लेकर वर्तमान सरकार की उदासीनता और आज विधानसभा में सरकार के कमेंट पर प्रेस के साथियों से बातचीत: देखिए, जब से यह सरकार आई है, तब से इसकी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य शामिल ही नहीं है। ये लोग चिरंजीवी योजना को भी नहीं समझ पाए, फ्री मेडिसिन को नहीं समझ पाए। आज स्वास्थ्य की चिंता हर घर और हर गांव में होती है। यह समझ से परे है कि फ्री मेडिसिन, फ्री जांच, फ्री इलाज और फ्री ऑपरेशन जैसी योजनाएं ,25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा , हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में नहीं है, और शायद दुनिया में भी नहीं होगा। फ्री और कैशलेस इलाज की जो योजना हमने शुरू की, वह पूरे देश में लोकप्रिय हुई। कई राज्यों ने किसी न किसी रूप में इसे अपनाया, किसी ने 20 लाख रुपये तक का बीमा कर दिया, जैसे पंजाब ने। तो सवाल यह है कि ये लोग इसे समझ क्यों नहीं पा रहे हैं? हमने ‘राइट टू हेल्थ’ जैसा अधिकार आम जनता को दिया और कहा कि किसी सिफारिश की जरूरत नहीं है, यह आपका अधिकार है , सरकार आपकी सेहत की जिम्मेदारी लेगी। इतना बड़ा क्रांतिकारी फैसला हमने किया। इसके बारे में यदि मंत्री जी या सरकार ने जो कमेंट किए वो दुर्भाग्यपूर्ण हैं, मैं उसको कंडेम करता हूं। इसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया जाना चाहिए था। राइट टू हेल्थ के नियम-कानून बनाकर अब तक इसे लागू कर देना चाहिए था और स्ट्रांग करना चाहिए था। अगर ऐसा करते, तो आपका नाम पूरे देश में होता। आज राजस्थान की योजनाओं की चर्चा हर राज्य में हो रही है, लेकिन यहां न जाने किस प्रकार से बिहेव कर रहे हैं। जब से सरकार आई है, दो साल हो चुके हैं। जो भी मुझसे मिलने आता है, उनमें से कई लोग किस्से बताते हैं कि किसी का हार्ट ऑपरेशन हुआ, किसी के घुटने बदले गए, किसी का टीबी का इलाज हुआ, किसी का कैंसर का इलाज फ्री में हुआ। 80 हजार रुपये तक के इंजेक्शन मुफ्त मिले, पूरे ऑपरेशन मुफ्त हुए। इसलिए समझ से परे है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चीजों को सरकार को लॉन्गटर्म के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में भी हमने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोले, लेकिन उन्हें भी कमजोर कर दिया गया। इनकी प्राथमिकता में शिक्षा भी नहीं है। हम हिंदी के पक्षधर हैं, लेकिन आज दुनिया अंग्रेजी से जुड़कर आगे बढ़ी है। मोबाइल फोन, आईटी और कंप्यूटर का युग है। बच्चों का भविष्य बनाना है तो अंग्रेजी शिक्षा भी जरूरी है। लेकिन सरकार की प्राथमिकताओं में न सिंचाई है, न पानी, न बिजली, न शिक्षा, न स्वास्थ्य और न सड़कें। हमारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। अन्नपूर्णा योजना एक अच्छी योजना थी। उस पर मुख्यमंत्री के रूप में मेरी फोटो लगी थी, आप उसे हटा देते और भजनलाल जी की फोटो लगा देते, लेकिन योजना बंद क्यों कर दी? हर शहर और गांव में इंदिरा रसोई चल रही थी। मजदूर, छात्र, आम नागरिक और गरीब लोग वहां भोजन करते थे। अब वह योजना कमजोर होकर ठप पड़ी है। ऐसी कई योजनाएं हैं जो बंद पड़ी हैं। जयपुर में ट्रैफिक जाम की स्थिति है, और हमने जो तकरीबन 100 करोड़ रुपए लगा कर कोचिंग हब बनाया था, वह भी पड़े पड़े खराब हो रहा है। सरकार दो साल बनाम पांच साल की बातें करती है। किसी ने मुख्यमंत्री जी को पर्ची पकड़ा दी या ब्रीफ कर दिया कि दो साल की तुलना पांच साल से करें। हमारे डेढ़ साल तो कोविड में निकल गए। उसके बावजूद हमने योजनाएं बनाई और काम किया। हमारी सरकार किन परिस्थितियों से गुजरी, आप जानते हैं। सरकार गिरते-गिरते बची, वह भी एक इतिहास बना। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा में सरकारें चली गईं, लेकिन हमने राजस्थान में प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया। 34 दिन होटल में रहे, एक भी एमएलए हमें छोड़कर नहीं गया। उन्हें कितने ऑफर दिए गए, आप कल्पना नहीं कर सकते। कहने का अर्थ यह है कि इस सरकार के दो साल प्रदेश के लिए नुकसानदायक रहे हैं। हर गांव में स्थिति खराब हो रही है। गवर्नेंस नाम की कोई चीज नजर नहीं आती। मैं मुख्यमंत्री जी से राजनीति से हटकर कहना चाहता हूं कि आप अपनी टीम गांवों में भेजिए और वास्तविक स्थिति का आकलन कराइए। यदि आप फीडबैक लेकर सुशासन देंगे, भ्रष्टाचार रोकेंगे, तो फायदा जनता को होगा। हमें जनता की चिंता है। अगर सरकार अच्छा काम करेगी, तो लाभ जनता को ही मिलेगा। विपक्ष का कर्तव्य है कि वह जनता के हित की बात उठाए। धन्यवाद।

Ashok Gehlot

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भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया: ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब हों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे। सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है। 25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्री बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या बाद में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए। और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, शपथ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है। क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिया खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब वो भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है। एक तो जो मीडिया जो है, वो सच्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो। सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं। एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या इनकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है? हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं चाहता इशू बना रहे। हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे। लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उनको मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी। भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं। दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ने कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?

Ashok Gehlot

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भारतीय लोकतंत्र का आधार निष्पक्ष चुनाव है। डॉ अंबेडकर ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कहा था कि -- “Franchise is a most fundamental things in a democracy. No person who is entitled to be brought into the electoral rolls….should be excluded merely as a result of prejudice….” परन्तु अब सत्ताधारी दल कुर्सी पर बने रहने के लिए अनैतिकता की हद तक जाने को तैयार है। बड़े पैमाने पर चुनाव में गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं। Special Intensive Revision (SIR) के नाम पर खुले आम विरोधी पक्ष के वोटों को काटा जा रहा है। जो जीवित हैं उन्हें मृत बना दिया गया। केंद्रीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता इस बात से समझी जा सकती है कि वो यह बताने को तैयार नहीं थे कि किन लोगों के और किस आधार पर वोट काटे जा रहे हैं। हम Supreme Court के आभारी है, जो उन्होंने लोगों की आवाज़ सुनी और चुनाव आयोग को Voter List सार्वजनिक करने को कहा। सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि सत्ताधारी दल को 65 लाख लोगों के वोट कटने पर कोई आपत्ति नहीं है। इस बात से साफ़ जाहिर है कि इस Exercise का फ़ायदा किसे पहुचाने की कोशिश थी। राहुल जी ने आँकड़ों के साथ साबित कर दिया कि किस तरह से लोक सभा सीट पर गड़बड़ी कर उसे जीता गया। अब वैसे ही प्रमाण कई सीटों पर सामने आ रहे है, जहाँ सभी Assembly segment पर काँग्रेस पार्टी को बढ़त मिली परन्तु एक segment पर BJP के बढ़त ने काँग्रेस के उम्मीदवार को हराया। हमें यहीं आशंका महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर भी है। पार्टी बारीकी से ऐसे सीटों का अध्ययन कर रही है। समय आनेपर यह लोगों के सामने पेश किया जाएगा। क्योंकि ये हमारे लिए ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। मैं काँग्रेस पार्टी के देश भर में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील करता हूँ कि आप अपने बूथ की Voter List निकालिए और उसकी बारीकी से जाँच करिए। देखिए कि कितने लोगों के नाम काटे गए हैं, या उन्हें मृत बता दिया गया है, या साज़िश के तहत उन्हें दूसरे booth में shift कर दिया गया। कितने बाहरी लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं। या एक ही Voter ID Card को एक से अधिक बार कहाँ--कहाँ जोड़ा गया है। एक नई बात देखने को आई है कि चुनाव से एक दिन पहले additional list के नाम पर नई Voter List भेज दी जाती है। जिसकी जाँच समय के अभाव में candidate नहीं कर पाता। यही हमारे विरोधियों की साज़िश है। लेकिन हमें उनकी इस साज़िश का पर्दाफाश करना होगा। कांग्रेस पार्टी ने एक website बनाई है, उसपर आप सारी गड़बड़ियों की जानकारी दे सकते है। इसके अलावा, पूरे देश से लोग ऐसी जानकारी भेज रहे हैं हम उन्हें भी इकट्ठा कर रहे हैं। याद रखिए, ये चुनाव जीतने की लड़ाई नहीं है, ये भारतीय लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। यह हमारे संविधान को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। हम महात्मा गाँधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ अंबेडकर, मौलाना आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के सपनों को ऐसे बिखरने नहीं दे सकते। हमें इस लड़ाई को उसी शिद्दत से लड़ना होगा, जिस शिद्दत से हमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। इसी लड़ाई को लड़ने के लिए, राहुल जी आने वाली 17 तारीख़ से बिहार के सासाराम से “वोट अधिकार यात्रा” शुरू करने जा रहे है। आप सभी को मिलकर इसे सफल बनाना है। जय हिन्द 🇮🇳

Mallikarjun Kharge

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