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𝗔𝗿𝗿𝗮𝗻𝗴𝗲 𝗠𝗮𝗿𝗿𝗶𝗲𝗴𝗲 🤗 𝗟𝗼𝘃𝗲 𝗠𝗮𝗿𝗿𝗶𝗲𝗴𝗲 💞 𝗡𝗼 𝗠𝗮𝗿𝗿𝗶𝗲𝗴𝗲 😇 कुछ भी करलो आखिर करना तों यही है... 🥲

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हिंदू धर्म का मूलमंत्र अपने अहंकार को ख़त्म कर देना है. अपनी “मैं” को समाप्त करना. आध्यात्म भी इसी ओर ले जाता है हर आध्यात्मिक व्यक्ति समझता है कि आप लाख अहंकार कीजिए - इस ब्रह्मांड को चलाने वाली शक्ति के बिना कुछ संभव ही नहीं मेहर कहो या कृपा - जिस नाम से भी पुकारो वो सिर्फ़ ऊपर वाले की मर्ज़ी से ही संभव है श्रद्धा का यह रूप समर्पण है - यह इच्छा, हानि, लाभ, लालसा और “मैं” को ख़त्म कर देता है अध्यात्म की यही झलक विराट कोहली के वर्ल्ड कप जीतने के बाद वाले इंटरव्यू में दिखी थी - जब उन्होंने कहा था मैं कुछ कर पाने में असमर्थ हूँ जब तक ऊपर वाला ना चाहे अपने अहंकार और वजूद को ख़त्म करने की यही बात राहुल गांधी ने भी यात्रा के दौरान कही थी. जो धर्म को समझता है वो जानता राहुल जी की कही बात का मर्म जानता है यही धर्म का आधार है, यही शांति का स्रोत, इसी से कलेजा शेर का बन कर भी बेहद कोमल रहता है - क्योंकि आप अपना बेस्ट करते हैं, लेकिन अहंकार और ‘मैं’ से अछूते रहते हैं. घमंड पर विजय ही तो लक्ष्य है This is what being at peace or being one with the universe means - to annihilate the self, to rise above our ego पता नहीं नरेंद्र मोदी विराट कोहली की इस गूढ़ बात को समझ पाये या नहीं

Supriya Shrinate

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मैंने हमेशा कहा है कि मेरी पोस्ट कॉपीराइट फ्री है। जहां मर्ज़ी छाप दें, कॉपी पेस्ट करें, वीडियो बना लेंवे। और धड़ल्ले से , अपने नाम से यूज कर सकते हैं। कुछ लोगो ने किया, वीडियोज भी बनाये। ●● लेकिन इतना बढ़िया नही, जितना की आशु झा Ashu Jha ‘नक़्क़ाश’ ने बनाया है। असल मे लिखते वक़्त जो धाराप्रवाह वाक्य संरचना होती है। और गंभीर बात के बीच हास्य का टोन देकर झट से गम्भीर विषय पर लौट जाना- आशु ठीक वैसा रचते हैं, जो लिखते वक्त मेरे दिमाग मे था। इसका मतलब की अगर मैं अपने पोस्ट पढ़कर वीडियो बनाता, तो बिल्कुल यही बनाता। शायद आशु ने उससे भी बेहतर बनाया है। ●● भाई ने मेरी कुछ और भी पोस्ट पर वीडियो किये हैं। उन्हें उनके हैंडल पर जाकर देखा जाए। उन्हें चटपट फॉलो करना स्ट्रोंगली रिकमण्डित है। ❤️😊👍💕

Manish Singh

38,565 views • 2 months ago

रविंद्र सिंह ने छोटू सिंह को क्यों धमकाया? हालांकि जितना मैं रविंद्र सिंह भाटी को जानता हूं, धमकी वगैरह देने का कोई मामला कभी सामने तो नहीं आया लेकिन फिर भी अगर एक कलाकार को और वह भी अपने ही क्षेत्र के आदमी को धमकाया है तो यह गलत है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी को काफी ऊंचा रखा गया है। अगर आप सार्वजनिक जीवन में हैं तो आपको अपनी आलोचना सुनने के लिए सदैव तैयार रहना ही चाहिए। हालांकि यह पुरानी बात है। नया जमाना, जब से सोशल मीडिया आया है, अभिव्यक्ति की आजादी का दायरा भी खुल गया है। अब लोग आजादी से आगे जाकर भी कुछ कमेंट कर देते हैं लेकिन उन्हें दिल पर लेने की बजाय या तो बेहद गंभीरता से लेना चाहिए या इग्नोर करना चाहिए। यही श्रेयस्कर है। अगर गंभीरता से ले रहे हैं तो उसका उद्देश्य सुधार करना होना चाहिए। किसी के कमेंट से गुस्सा होकर धमकी देना कमजोरी को भी दर्शाता है और आपको बड़ा आदमी बनने से रोकता भी है। सोशल मीडिया से स्टार बनने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह घटनाक्रम एक सबक की तरह होना चाहिए।

Arvind Chotia

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