
Aalok Shrivastav
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A Passionate Poet & Lyricist. TV Journalist By Profession. Worked With @AajTak. Authored Books Aameen & Aasaan. MP Sahitya Academy Awardee. @TEDx Speaker.
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इस पूरी फ़िल्म का कथानक ही दक्षता से हैंडल नहीं हुआ. सैफ़ के काम में सफ़ाई, ज़रूर नज़र आई. प्रिय सौरभ द्विवेदी की तो ख़ैर अभिनय क्षेत्र में यह पहली तबा’ आज़माई है, फिर भी फ़िल्मी पर्दे पर एक पत्रकार के विस्तार को देख कर व्यक्तिगत सुख मिला, जिसके लिए प्रिय Saurabh Dwivedi को ख़ूब बधाई व साधुवाद.
Aalok Shrivastav136,510 views • 5 months ago

कहीं कबीर सूर की, कहीं नज़ीर की परम्परा से धन्य ये ग़ज़ल का छात्र है #विश्वहिन्दीदिवस 💐
Aalok Shrivastav196,796 views • 3 years ago

मेरे मन का आधा साहस आधा डर थे बाबूजी… #AalokNama 😇 #FathersDay
Aalok Shrivastav104,591 views • 2 years ago

वे शेष हैं, अशेष हैं, प्रशेष हैं, विशेष हैं जो उनको जैसा धार ले, वे उसके जैसा वेश हैं वे नेत्र सूर्य देवता का, चंद्रमा का भाल हैं विलय भी वे, प्रलय भी वे, अकाल महाकाल हैं उसी के नाथ हो लिए, जो उनके साथ हो लिया वहीं के हो गए हैं वे, जहाँ सुना शिवः शिवम् हर हर महादेव ❤️🙏 #सावनसोमवार
Aalok Shrivastav57,686 views • 3 years ago

“You can remain relevant only when…” Javed Akhtar Sir ❤️🙏
Aalok Shrivastav13,510 views • 6 months ago

विवाह की 25वीं वर्षगाँठ : जीवन में सफलता की जितनी भी यात्राएँ होती हैं उनमें वे दुआएँ भी शामिल होती हैं जो हमारे साथ न हों, तो जीवन सहज व आलोकित ही न हो. विवाह की 25वीं वर्षगाँठ पर जो आत्मीय-परिजन व मित्र साथ रहे, उनकी प्रणम्य उपस्थित को पुनः प्रणाम व जिनकी दुआएँ साथ रहीं, उनका भी दिल से शुक्रिया. इस प्रार्थना के साथ कि यह साथ यूँ ही बना रहे… 😇🙏
Aalok Shrivastav46,909 views • 2 years ago

बड़ा व्यक्ति वह नहीं होता जो स्वयं को बड़ा बताने का कोई अवसर न छोड़े. बड़ा व्यक्ति वह होता है जो अपने से छोटों को भी बड़ा बनाने का कोई अवसर न छोड़े. बड़ा व्यक्ति वह नहीं होता जो लोकप्रियता की लालसा व उसकी चकाचौंध में अपनों को ही भूल जाए, बड़ा व्यक्ति वह होता है जो अपनी लोकप्रियता के आलोक से अपने छोटों को भी आलोकित कर दे. हाल में, वायरल हुई इस क्लिप में यदि एक अत्यंत लोकप्रिय कलाकार व प्रतिष्ठित साहित्यकार, अपने से बहुत छोटे रचनाकार का नाम न भी लेते तो क्या फ़र्क़ पड़ना था ? पर उन्होंने, उस रचनाकार की अनुपस्थिति में भी, जिस आत्मीयता व आदर से उसका ज़िक्र किया, वह उस रचनाकार को नहीं, बल्कि स्वयं उन्हें और बड़ा बनाता है. Moral Of The Story : हमारे व्यक्तिगत संबंध कितनी ही प्रगाढ़ता या बेतकल्लुफ़ी से भरे क्यों न हों, पर हम किसी सार्वजनिक मंच पर दूसरों से किस भाव, भावना, भाषा व तहज़ीब से पेश आते हैं, यही बात हमको सही अर्थों में बड़ा और सुसंस्कृत बनाती है. हर हर महादेव. ❤️🙏
Aalok Shrivastav14,818 views • 7 months ago