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Arshad Madani

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President Jamiat Ulama-i-Hind | Principal Darul Uloom Deoband | Vice President All India Muslim Personal Law Board

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छात्र-छात्राओं से हार्दिक अपील: जौहर यूनिवर्सिटी और तालीमी इदारों को बचाने के लिए आगे आएं देश के शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदा स्थिति, खासतौर पर मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर चिंता बढ़ रही है। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को राजनीति से दूर रखना और तालीमी इदारों की मजबूती के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। देश के युवाओं और छात्र-छात्राओं से अपील है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर तालीमी इदारों की हिफाज़त के लिए आगे आएं और ऐसे संस्थानों में बढ़-चढ़कर दाख़िला लें, ताकि उनकी शैक्षणिक और सामाजिक प्रासंगिकता बनी रहे। किसी भी संस्थान में कमी होने की स्थिति में उसे बातचीत और प्रशासनिक तरीकों से दूर किया जा सकता है। लेकिन किसी संस्थान को कमजोर करने की कोशिशों का असर छात्रों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। युवाओं की सक्रिय भागीदारी और बेहतर शिक्षा के माध्यम से देश की शैक्षणिक बुनियाद को मजबूत किया जा सकता है। स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के देश के प्रति योगदान को याद रखते हुए शिक्षा के बुनियादी ढांचे की हिफाज़त आज की महत्वपूर्ण जरूरत है। मजबूत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना देश की वास्तविक तरक्की संभव नहीं। #ArshadMadani #SaveEducation #StudentsForEducation #JauharUniversity

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47,259 просмотров • 22 дней назад

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जो बातें सत्तर वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि बीस करोड़ मुसलमानों की “घर वापसी” कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी माँ का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं। जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज़ जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती। आज देश के भीतर नफ़रत की आग भड़काई जा रही है, हत्या-हिंसा का माहौल बना हुआ है, दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएँ हो रही हैं, गाय के नाम पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है, और सरकार खामोशी बनाये हुए है। इसके बावजूद कुछ लोग यह ऐलान करते फिर रहे हैं कि इस देश में वही रहेगा जो उनके विचारधारा पर चलेगा। यह सोच न केवल भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है बल्कि देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी बेहद खतरनाक है। जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सांप्रदायिक और नफ़रत फैलाने वाली सोच की कड़ी विरोधी रही है और जब तक जिंदा रहेगी, इसका विरोध करती रहेगी। मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे; मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा। और इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है। याद रखिए धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, इसलिए जो लोग धर्म का उपयोग नफ़रत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। हमें हर स्तर पर ऐसे लोगों की निंदा और विरोध करना चाहिए। [Old Video Posted By Admin] #ArshadMadani | #GharWapasi | #घर_वापसी

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108,514 просмотров • 7 месяцев назад

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि “नफ़रत की राजनीति ने देश को आग के ढेर पर ला खड़ा किया है। सत्ता के नशे में सांप्रदायिक ताक़तें संविधान बदलने और देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं, जो देश को तबाही की ओर ले जाने के समान है। नफ़रत की राजनीति दरअसल देश से वफ़ादारी नहीं, बल्कि उसके अमन और चैन से ग़द्दारी है। जो लोग धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाते हैं, वे कभी धर्म के प्रतिनिधि नहीं हो सकते हैं, क्योंकि धर्म हमेशा अमन, मोहब्बत और आपसी सम्मान का पैग़ाम देता है। आज हर व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है कि वह सांप्रदायिकता के मुक़ाबले प्यार, एकता और भाईचारे को बढ़ावा दे, क्योंकि अगर आज ख़ामोशी इख़्तियार की गई तो कल देश की शांति को ख़तरा हो सकता।” [Posted By Admin] #OldVideo #ArshadMadani

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32,655 просмотров • 8 месяцев назад

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सांप्रदायिक शक्तियाँ क्या जानें कि मुसलमानों ने इस देश की आज़ादी के लिए कितनी महान कुर्बानियाँ दी हैं। यदि उनसे कहा जाए कि वे अपने पूर्वजों के नाम बताएं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में कोई बलिदान दिया हो, तो वे असफल हो जाएँगे, इतिहास प्रस्तुत करना तो दूर की बात है। दुर्भाग्य की बात यह है कि आज वही मदरसे, जहाँ से आज़ादी की आंदोलन की चिंगारी उठी थी, और वही उलेमा, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जानें कुर्बान की थीं, उन्हें आतंकवाद का अड्डा बताया जा रहा है और यह कहा जाता है कि वहाँ आतंकवाद की तालीम दी जाती है। यही सोच वास्तव में देश के विनाश की मूल वजह है। हमारी स्वतंत्रता संग्राम की तारीख डेढ़ सौ वर्षों से अधिक उज्ज्वल रही है, जबकि सांप्रदायिक शक्तियाँ अपनी कोई ठोस इतिहास प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं। आज मुसलमानों की इस गौरवशाली इतिहास को मिटाने की कोशिश की जा रही है, जो न केवल मुसलमानों के साथ बल्कि पूरे देश और उसके इतिहास के साथ भी खुला अन्याय है। #ArshadMadani | #Republicday | #IndianMuslims

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