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Govind Singh Dotasra

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President @INCRajasthan । Ex-Minister for School Education(I.C.),Tourism & Devsthan, GOR। Member of 13, 14, 15 & 16 Legislative Assembly, Laxmangarh, Sikar, Raj

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संसद पर ताला, सड़कों पर वार "कांपते तानाशाह" का यही हथियार धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो

संसद पर ताला, सड़कों पर वार "कांपते तानाशाह" का यही हथियार धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो

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न बिकेगा भविष्य, न झुकेगा नौजवान अब हर गली में गूंजेगा छात्रों का अभियान छात्रों की गूंज - पेपर लीक बंद करो

न बिकेगा भविष्य, न झुकेगा नौजवान अब हर गली में गूंजेगा छात्रों का अभियान छात्रों की गूंज - पेपर लीक बंद करो

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मुख्यमंत्री भजनलाल जी, आपका एफिडेविट बता रहा है कि आपके नाम कृषि भूमि का केवल 350 वर्ग मीटर का प्लाट है, यानि 1 बीघा जमीन भी नहीं। फिर आप कहां के किसान हो? और किसानों का मज़ाक बनाकर उनका अपमान कर रहे हों। माननीय मुख्यमंत्री मेहरबानी करके खुद को किसान बताना और AC कमरों में बैठकर खेती-किसानी का हिसाब लगाना छोड़ दीजिए। एक मुख्यमंत्री का ये कहना कि "किसान सिर्फ साल में 25-30 दिन खेत में काम करता है" न सिर्फ अन्नदाता का अनादर व हास्यास्पद है, बल्कि खेती पर आपकी समझ एवं संवेदनहीनता को दर्शाता है। सालभर हर मौसम की मार झेलने वाला किसान खेत में कड़ी मेहनत, खून-पसीना और जज़्बात झोंकता है, उसके संघर्ष को 25-30 दिन से तोलना और अहंकार में मज़ाक बनाना शर्मनाक है। आपको अपने बयान के लिए किसानों से माफ़ी मांगनी चाहिए। #Farmers

मुख्यमंत्री भजनलाल जी, आपका एफिडेविट बता रहा है कि आपके नाम कृषि भूमि का केवल 350 वर्ग मीटर का प्लाट है, यानि 1 बीघा जमीन भी नहीं। फिर आप कहां के किसान हो? और किसानों का मज़ाक बनाकर उनका अपमान कर रहे हों। माननीय मुख्यमंत्री मेहरबानी करके खुद को किसान बताना और AC कमरों में बैठकर खेती-किसानी का हिसाब लगाना छोड़ दीजिए। एक मुख्यमंत्री का ये कहना कि "किसान सिर्फ साल में 25-30 दिन खेत में काम करता है" न सिर्फ अन्नदाता का अनादर व हास्यास्पद है, बल्कि खेती पर आपकी समझ एवं संवेदनहीनता को दर्शाता है। सालभर हर मौसम की मार झेलने वाला किसान खेत में कड़ी मेहनत, खून-पसीना और जज़्बात झोंकता है, उसके संघर्ष को 25-30 दिन से तोलना और अहंकार में मज़ाक बनाना शर्मनाक है। आपको अपने बयान के लिए किसानों से माफ़ी मांगनी चाहिए। #Farmers

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"बड़े लोगों को बचाया जा रहा है" NEET पेपर लीक में गिरफ्तार आरोपी BJP नेता ने CBI हिरासत में जो कहा, वो ध्यान से सुनिए.. आखिर कौन हैं BJP के वो बड़े लोग? मोहरे नहीं, असली चेहरे सामने आने चाहिए! #NEETPaperLeak

"बड़े लोगों को बचाया जा रहा है" NEET पेपर लीक में गिरफ्तार आरोपी BJP नेता ने CBI हिरासत में जो कहा, वो ध्यान से सुनिए.. आखिर कौन हैं BJP के वो बड़े लोग? मोहरे नहीं, असली चेहरे सामने आने चाहिए! #NEETPaperLeak

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सवाल- सबसे पसंदीदा एक्टर कौन हैं? जवाब- नरेंद्र मोदी ये तो हम कब से कह रहे हैं.. कि मोदी जी नेता नहीं, अभिनेता हैं। देर से ही सही..भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भी कहने लगे कि हैं कि मोदी जी जननेता नहीं अभिनेता हैं। कैमरे की कलाकारी, टेलीप्रॉम्प्टर, वेशभूषा और लछेदार भाषणों में माहिर हैं।

सवाल- सबसे पसंदीदा एक्टर कौन हैं? जवाब- नरेंद्र मोदी ये तो हम कब से कह रहे हैं.. कि मोदी जी नेता नहीं, अभिनेता हैं। देर से ही सही..भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भी कहने लगे कि हैं कि मोदी जी जननेता नहीं अभिनेता हैं। कैमरे की कलाकारी, टेलीप्रॉम्प्टर, वेशभूषा और लछेदार भाषणों में माहिर हैं।

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150 करोड़ के खेलो इंडिया गेम्स के बाद... प्रवासी राजस्थान समारोह का "फ्लॉप शो" मंच पर मुख्यमंत्री, खाली पड़ी सीटें, निवेशक नदारद..आखिर क्यों?

150 करोड़ के खेलो इंडिया गेम्स के बाद... प्रवासी राजस्थान समारोह का "फ्लॉप शो" मंच पर मुख्यमंत्री, खाली पड़ी सीटें, निवेशक नदारद..आखिर क्यों?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी का गुलाबी नगरी जयपुर में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी का गुलाबी नगरी जयपुर में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।

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जय तेजाजी महाराज 🙏

जय तेजाजी महाराज 🙏

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टोंक में ये ख़ाली पड़ी कुर्सियां और जनाधार का सन्नाटा BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा का हैं। ये सिर्फ खाली कुर्सियां नहीं, प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ जनता का बढ़ता अविश्वास है। मुख्यमंत्री जी, पर्ची सरकार और भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा में प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अमला, पुलिस मशीनरी और पूरा संगठन झोंक देने के बाद भी मुश्किल से 2000 लोग जुट नहीं पाए। ऊपर से प्रभारी के भाषण का ऐसा निम्न स्तर कि मुद्दों से ज्यादा हताशा झलक रही थी। माननीय इतनी भीड़ तो सामान्यतः कांग्रेस की जिला बैठकों में दिख जाती है। अभी भी समय है, जनता की सुध लीजिए, अहंकार छोड़िए, वरना जनता के बीच जाना मुश्किल हो जाएगा। जनता चुप है, मगर सब देख रही है। टोंक की ये खाली कुर्सियां संकेत दे रही हैं कि अब #पर्ची बदलने का समय नज़दीक है। दुर्भाग्य से पचपदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का कार्यक्रम निरस्त हो गया, नहीं तो अब तक आपकी पोल खुल जाती और पर्ची भी बदल जाती।

टोंक में ये ख़ाली पड़ी कुर्सियां और जनाधार का सन्नाटा BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा का हैं। ये सिर्फ खाली कुर्सियां नहीं, प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ जनता का बढ़ता अविश्वास है। मुख्यमंत्री जी, पर्ची सरकार और भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा में प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अमला, पुलिस मशीनरी और पूरा संगठन झोंक देने के बाद भी मुश्किल से 2000 लोग जुट नहीं पाए। ऊपर से प्रभारी के भाषण का ऐसा निम्न स्तर कि मुद्दों से ज्यादा हताशा झलक रही थी। माननीय इतनी भीड़ तो सामान्यतः कांग्रेस की जिला बैठकों में दिख जाती है। अभी भी समय है, जनता की सुध लीजिए, अहंकार छोड़िए, वरना जनता के बीच जाना मुश्किल हो जाएगा। जनता चुप है, मगर सब देख रही है। टोंक की ये खाली कुर्सियां संकेत दे रही हैं कि अब #पर्ची बदलने का समय नज़दीक है। दुर्भाग्य से पचपदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का कार्यक्रम निरस्त हो गया, नहीं तो अब तक आपकी पोल खुल जाती और पर्ची भी बदल जाती।

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भाजपा सरकार के मंत्री ठीक ही तो कह रहे हैं.. "ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चलाएगा तो विभाग क्या करेगा?" इस सरकार में मंत्री तो केवल माला पहनने और उलजलूल बयान देने के लिए हैं। संवेदना, कानून, जिम्मेदारी, जवाबदेही, नियंत्रण सब शायद छुट्टी पर हैं! जयपुर में अनियंत्रित डंपर ने 14 परिवार उजाड़ दिए, राज्य में आए दिन हादसों में मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त है।

भाजपा सरकार के मंत्री ठीक ही तो कह रहे हैं.. "ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चलाएगा तो विभाग क्या करेगा?" इस सरकार में मंत्री तो केवल माला पहनने और उलजलूल बयान देने के लिए हैं। संवेदना, कानून, जिम्मेदारी, जवाबदेही, नियंत्रण सब शायद छुट्टी पर हैं! जयपुर में अनियंत्रित डंपर ने 14 परिवार उजाड़ दिए, राज्य में आए दिन हादसों में मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त है।

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अब तो खुद सरकार के मंत्री कह रहे हैं... कि भाजपा सरकार #पर्ची से चलती है। #पर्ची_सरकार

अब तो खुद सरकार के मंत्री कह रहे हैं... कि भाजपा सरकार #पर्ची से चलती है। #पर्ची_सरकार

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राजस्थान असुरक्षा, अन्याय और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है, भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था ने जनता का चैन और सुकून दोनों छीन रखे हैं। कुचामन सिटी में व्यापारी रमेश रुलानिया जी की गोली मारकर की गई निर्मम हत्या की घटना अत्यंत निंदनीय है। "नहीं सहेगा राजस्थान” का नारा देने वाली भाजपा सरकार में आज न व्यापारी सुरक्षित हैं, न महिलाएं सुरक्षित हैं, और न ही जनता। अपराधियों का दुस्साहस इतना बढ़ चुका है कि खुलेआम हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने से भी नहीं डरते। CMO Rajasthan सरकार हत्याकांड में शामिल दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सज़ा दिलवाए। शोकाकुल परिवारजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।

राजस्थान असुरक्षा, अन्याय और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है, भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था ने जनता का चैन और सुकून दोनों छीन रखे हैं। कुचामन सिटी में व्यापारी रमेश रुलानिया जी की गोली मारकर की गई निर्मम हत्या की घटना अत्यंत निंदनीय है। "नहीं सहेगा राजस्थान” का नारा देने वाली भाजपा सरकार में आज न व्यापारी सुरक्षित हैं, न महिलाएं सुरक्षित हैं, और न ही जनता। अपराधियों का दुस्साहस इतना बढ़ चुका है कि खुलेआम हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने से भी नहीं डरते। CMO Rajasthan सरकार हत्याकांड में शामिल दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सज़ा दिलवाए। शोकाकुल परिवारजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।

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झूठ का नकाब कितना भी घना हो अंतरात्मा सच बताती है लाख छुपा लो तुम चाहे... दिल की बात जुबां पर आ ही जाती है मुख्यमंत्री भजनलाल जी का शुक्रिया.. जो खुले मन से स्वीकार कर रहे हैं कि "कांग्रेस के नेतृत्व में हम देशवासियों ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी" देश की आज़ादी से लेकर सशक्त भारत निर्माण में कांग्रेस के महान नेताओं ने अपना लहू बहाया है। कांग्रेस का इतिहास और विरासत अमर है, जो सदियों तक देश को दिशा देती रहेगी। कांग्रेस के संघर्ष और बलिदान की गूंज सदैव सुनाई देगी। भजनलाल जी और भाजपा के नेता जानते हैं कि उनके राजनीतिक पूर्वजों ने सिर्फ अंग्रेजों की मुखबिरी और स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया था। भाजपा का कटु सत्य यही है।

झूठ का नकाब कितना भी घना हो अंतरात्मा सच बताती है लाख छुपा लो तुम चाहे... दिल की बात जुबां पर आ ही जाती है मुख्यमंत्री भजनलाल जी का शुक्रिया.. जो खुले मन से स्वीकार कर रहे हैं कि "कांग्रेस के नेतृत्व में हम देशवासियों ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी" देश की आज़ादी से लेकर सशक्त भारत निर्माण में कांग्रेस के महान नेताओं ने अपना लहू बहाया है। कांग्रेस का इतिहास और विरासत अमर है, जो सदियों तक देश को दिशा देती रहेगी। कांग्रेस के संघर्ष और बलिदान की गूंज सदैव सुनाई देगी। भजनलाल जी और भाजपा के नेता जानते हैं कि उनके राजनीतिक पूर्वजों ने सिर्फ अंग्रेजों की मुखबिरी और स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया था। भाजपा का कटु सत्य यही है।

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मंत्री जी.. भय, भ्रमण, भ्रमित, भूमाफिया और भ्रष्टाचार क्यों 'भूल' गए? भाजपा, भजनलाल और भाग्य के साथ ये भी तो जुड़े हुए हैं।

मंत्री जी.. भय, भ्रमण, भ्रमित, भूमाफिया और भ्रष्टाचार क्यों 'भूल' गए? भाजपा, भजनलाल और भाग्य के साथ ये भी तो जुड़े हुए हैं।

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तेजा जी महाराज की जय🙏🏻 महाराजा सूरजमल की जय🙏🏻 #Jatmahakumbh

तेजा जी महाराज की जय🙏🏻 महाराजा सूरजमल की जय🙏🏻 #Jatmahakumbh

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किसान आंदोलन के लिए करौली पहुंचे।

किसान आंदोलन के लिए करौली पहुंचे।

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नरेंद्र मोदी जी.. देश के युवा 'भाड़े के टट्टू और पत्थरबाज' नहीं, भारत का भविष्य हैं। सत्ता के नशे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जी जिन्हें 'भाड़े के टट्टू' और पत्थरबाज बता रहे हैं.. यह वही युवाशक्ति है, जिसने आपको प्रधानमंत्री बनाया। ये वही युवा हैं.. जिन्होंने भाजपा को गद्दी पर बैठाया। ये वही युवा हैं.. जिन्हें 2 करोड़ नौकरियों के झांसे देकर छला गया ये वही युवा हैं जो 12 साल से ठगे गए, और पेपर लीक में जिनका भविष्य बर्बाद हुआ। प्रधानमंत्री जी.. जिन्हें भाजपा आज 'भाड़े के टट्टू' बता रही है, यही देश का युवा 2029 में भाजपाई सत्ता की अर्थी निकालेंगे और इसे तिलांजलि देंगे! मदन राठौड़ जी को अपने बयान पर शर्म आनी चाहिए और युवाओं से माफ़ी मांगनी चाहिए।

Govind Singh Dotasra

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देश का युवा 25 दिनों से सड़कों पर हैं, एजुकेशन सिस्टम में सुधार और धर्मेंद्र प्रधान के लिए इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर मोदी सरकार की लाठियां खा रहा है। उनकी बात सुनने के बजाय प्रधानमंत्री जी फास्ट ट्रैक गठन करने का ट्वीट कर रहे हैं, ये दुर्भाग्यपूर्ण है। मोदी जी 12 दिन से नहीं, 12 साल से देश के प्रधानमंत्री हैं। पिछले 12 सालों में एक के बाद एक 152 पेपर लीक कराकर इस निक्कमी सरकार ने देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया है। मोदी जी सिर्फ मन की बात करते हैं, 12 साल से देश को गुमराह कर रहे हैं। NEET का पेपर 2024 में भी लीक हुआ, नेता विपक्ष Rahul Gandhi जी ने संसद में चर्चा की मांग की लेकिन नहीं सुनी गई। 2025 में भी NEET का पेपर लीक हुआ, लेकिन सब दफा कर दिया। अब 2026 में भी NEET का पेपर लीक हुआ है, लेकिन कोई जवाबदेही नहीं, कोई इस्तीफा या कार्रवाई नहीं। प्रधानमंत्री जी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगने और NTA जैसी भ्रष्ट संस्था को भंग करने के बजाय छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज और झूठी FIR थोपी जा रही है। हमारी स्पष्ट मांगें है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, NTA भंग हो, युवाओं पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं, संसद में पेपर लीक पर चर्चा हो और ऐसा कड़ा कानून बने जो दोबारा किसी नकल माफिया हिम्मत न हो कि वो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर सके।

Govind Singh Dotasra

26,299 次观看 • 2 天前

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आपातकाल का ढोल पीटने वाले आज देश में अघोषित आपातकाल चला रहे हैं। धरना-प्रदर्शन का अधिकार छीन रहे हैं, बोलने की आज़ादी पर पहरा बिठा रहे हैं। और जो सरकार से सवाल पूछे, उसे एजेंसियों व पुलिस के दम पर चुप करा रहे हैं.. यही BJP का नया लोकतंत्र है। युवाओं के भविष्य और पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर 21 दिन से शांतिपूर्ण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक जी को जबरन उठाकर बता दिया कि मोदी सरकार संविधान में नहीं, सत्ता के अहंकार और तानाशाही में विश्वास करती है। ये सिर्फ़ Sonam Wangchuk जी का अपमान नहीं, संविधान के अनुच्छेद 19 और हर भारतीय के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला है। BJP की सरकारें संवाद से नहीं, पुलिस, दमन, डर और षड्यंत्र से देश चलाना चाहती हैं। उन्हें हर वो नागरिक दुश्मन दिखाई देता है जो सिस्टम से सवाल पूछता है। लेकिन इतिहास गवाह है.. सत्ता का अहंकार कभी नहीं चला। सत्याग्रहियों पर लाठी, गिरफ़्तारी और दमन से आवाज़ें नहीं दबतीं, बल्कि और बुलंद होती है। जिस तरह किसानों, खिलाड़ियों और युवाओं ने झुकने से इनकार किया, उसी तरह पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की लड़ाई भी रुकने वाली नहीं है। #NEETPaperLeak #Protest #SonamWangchuk

Govind Singh Dotasra

44,622 次观看 • 7 天前

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माननीय राज्यपाल द्वारा राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी पढ़ाने का निर्देश नीतिगत दृष्टि से उचित नहीं है। विश्वविद्यालयों और स्कूलों में कौन-सी भाषा या विषय पढ़ाए जाएंगे, ये निर्णय लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत सरकार का होना चाहिए, न कि लोकभवन का। राजस्थान में सबसे पहले राजस्थानी भाषा को पढ़ाया जाना चाहिए। हमारी प्राथमिकता राजस्थानी भाषा की शैली तैयार करने, उसके अध्ययन, संरक्षण और उसे संवैधानिक दर्जा की होनी चाहिए। राजस्थान विधानसभा पहले ही सर्वसम्मति से राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। कांग्रेस पार्टी लगातार राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग उठाती रही है। विडंबना ये है कि स्वयं को 'डबल इंजन' की सरकार बताने वाली भाजपा आज तक राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने में पूरी तरह विफल रही है।

Govind Singh Dotasra

30,787 次观看 • 9 天前

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राजस्थान किसी की दया का पात्र नहीं है... अपने हक़ और हिस्से का पानी मांग रहा है। "प्यासे को पानी उपलब्ध कराना" ऐसा बताया जा रहा है कि मानो हरियाणा अपनी मर्जी से पानी दे रहा हो। हरियाणा के साथ किए गए यमुना जल समझौते (MoA) में राजस्थान के हितों की हत्या हुई है। एक तो हितों का समर्पण और ऊपर से हरियाणा की कृपा बताना शर्मनाक है। मुख्यमंत्री भजनलाल जी के द्वारा हरियाणा के सामने किए गए समपर्ण से पूरा राजस्थान शर्मिंदा है। भजनलाल जी को ज्ञात होना चाहिए कि राजस्थान को मिलने वाला पानी किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि 1994 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में हुए समझौते के तहत उसका हक़ है। जिसको हरियाणा के सामने गिरवी रखकर भाजपा सरकार ने समझौता किया है। अगर 1994 के यमुना जल समझौते के आधार पर ही नया MoA किया गया है, तो फिर राजस्थान के हिस्से के पानी पर नई शर्तें क्यों लगाई गईं? - राजस्थान को सिर्फ जुलाई से अक्टूबर (बारिश के समय) की अवधि में केवल 4 महीने ही पानी मिलेगा। यानि नवंबर से जून की अवधि में राजस्थान को कोई जल आवंटित नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - MoA में राजस्थान सिर्फ 580 MCM पानी मिलने का जिक्र है, जबकि 1994 के मूल समझौते में 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलना था। यानी 1994 के समझौते के अनुरूप जल आवंटन नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - यमुना नहर की पूरी क्षमता के उपयोग के बाद बारिश के समय अतिरिक्त पानी होने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा, जबकि 1994 के मूल समझौते ये शर्त नहीं थी। ये समर्पण क्यों? - राजस्थान जाने वाली पाइप लाइन से हरियाणा भिवानी, फतेहाबाद और उन गांवों में पहले पानी लेगा जहां से पाइप लाइन गुजरेगी, जो 1994 के मूल समझौते की भावना के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - हरियाणा द्वारा पहले 13,000 क्यूसेक पानी, फिर 18,000 क्यूसेक पानी, बाद में 24 000 क्यूसेक पानी, और अब पूरे जल समझौते पर अपनी मनमर्जी करना 1994 के मूल समझौते के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - 1994 के मूल समझौते के अनुसार सभी राज्यों को Pro Rata Basis यानी पानी की उपलब्धता के अनुपात में पानी मिलना था। लेकिन अब पहले हरियाणा को पानी मिलेगा और फिर अधिशेष जल रहने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा। ये समर्पण क्यों? - जल पर नियंत्रण केंद्रीय जल आयोग का होता है, फिर समझौते में कैसे हरियाणा ने अपनी मर्जी से एकतरफा पानी तय किया? ये समर्पण क्यों? - राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने यमुना जल के लिए MoU का प्रपत्र भेजकर राजस्थान के हितों को आगे रखा लेकिन लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार ने अटकाए रखा। बाद में हाईकोर्ट की फटकार पर हरियाणा पानी देने के लिए विवश हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने इवेंटबाजी और वाहवाही के चक्कर में प्रदेश के हितों को गिरवी रख दिया। ये समर्पण क्यों? - मुख्यमंत्री जी ने ढाई साल MoU और MoA में निकाल दिए। इनसे पूर्व भी यमुना जल पर कई समझौते हुए हैं.. लेकिन हितों का समर्पण नहीं हुआ। क्यों? - MoA के हिसाब से अगर राजस्थान को सिर्फ पेयजल का ही पानी मिलेगा। फिर शेखावाटी की 1.05 लाख हेक्टेयर ज़मीन सिंचाई का झूठा भ्रम क्यों फैलाया गया? मुख्यमंत्री जी, राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि जिस परियोजना के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ, डीपीआर बनी, अदालतों तक लड़ाई लड़ी गई.. उसका परिणाम "अधिकार है या समर्पण"? यमुना जल समझौते (MoA) की पूरी प्रति तत्काल सार्वजनिक करें.. जल आवंटन, वित्तीय ज़िम्मेदारी, लागत-बंटवारे, पानी छोड़ने के नियमों और सभी शर्तों को जनता के सामने रखें।

Govind Singh Dotasra

66,014 次观看 • 26 天前

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गरीब को गरीब बनाए रखने के आरएसएस के एजेंडे को राजस्थान के वर्तमान शिक्षा मंत्री पूरी निष्ठा से लागू करने में लगे हुए दिखाई देते हैं। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर करने वाले फैसले इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं। कभी छोटे-छोटे बच्चों को भ्रमण के नाम पर आरएसएस की शाखाओं में भेजने का मामला सामने आता है, तो कभी महात्मा गांधी अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालयों को बंद किया जाता है। जिन स्कूलों में गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारने का सपना देख रहे थे, आज उन्हीं भवनों में आरएसएस की गतिविधियाँ संचालित होने की खबरें सामने आ रही हैं। अब स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद मेरे विधानसभा क्षेत्र की स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। लगभग हर सरकारी विद्यालय में व्याख्याता, प्रधानाचार्य और विषय अध्यापकों के पद खाली हैं। पूरे विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। यह लड़ाई केवल मेरी या मेरी पार्टी की नहीं है। यह हर उस माता-पिता की लड़ाई है जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। यह हर उस जिम्मेदार नागरिक की लड़ाई है जो अपने गांव के सरकारी विद्यालय को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानांतरण के माध्यम से अनेक विद्यालयों को जानबूझकर शिक्षकों से खाली कर दिया गया है। यदि स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो स्वाभाविक रूप से बच्चों की संख्या घटेगी और फिर इन्हीं विद्यालयों को बंद करने का आधार बनाया जाएगा। यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की बेहद चिंताजनक दिशा है। सरकारी विद्यालय केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव हैं। इन्हें बंद या कमजोर करने के बजाय पर्याप्त शिक्षक, संसाधन और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है, और इस अधिकार की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। #RSSAgenda

Govind Singh Dotasra

28,739 次观看 • 13 天前

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किरोड़ी लाल जी के द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह फर्जी एवं निराधार साबित हो चुके हैं। फिर भी अगर सरकार को लगता है कि किसी ने भी गलत प्रमाणपत्र से नौकरी प्राप्त की है, तो पुन: निष्पक्ष जांच कराए, मुझे किसी जांच से कोई आपत्ति नहीं है। 1999 से आज तक OBC के वही नियम लागू हैं, जो सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। जिस 2019 के परिपत्र का हवाला देकर भ्रम फैलाया गया, वो कोई परिपत्र नहीं था बल्कि एक गलत चिट्ठी थी, जिसका 2021 में सरकार द्वारा स्पष्टीकरण देकर RPSC को अवगत करा दिया गया। लेकिन सवाल ये है कि क्या किरोड़ी जी ने फर्जी आरोप इसलिए लगाए क्योंकि मैं कृषि मंत्री के नाम पर हुई करोड़ों की वसूली का मुद्दा उठा रहा हूं? क्या कृषि विभाग में हुए घोटाले के जवाब में ये फर्जी आरोप मढ़े गए हैं? कृषि विभाग में मंत्री जी के नाम पर चल रहे वसूली के खेल में ACB ने 2.43 करोड़ की बरामदगी की है। मंत्री जी के करीबी पकड़े गए हैं, 1200 छापों की पूरी जांच और इस्तीफा की बात नहीं करते। आरोप लगाने का अधिकार उसी को है, जो खुद जांच से भागे नहीं। राजनीति की शुचिता तभी बचेगी, जब हर आरोप का जवाब तथ्यों और निष्पक्ष जांच से दिया जाएगा, न कि ध्यान भटकाने के लिए पुराने कागजों की धूल झाड़कर फर्जी आरोप लगाए जाएंगे।

Govind Singh Dotasra

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भाजपा की घबराहट साफ बता रही है कि वो पंचायती राज एवं निकाय चुनावों में अपनी ज़मीन खो चुकी हैं, इसलिए सरकार ने शुरुआत ही से चुनाव टालने की मंशा से काम किया है। सरकार बनने के बाद भी लंबे समय तक ओबीसी आयोग का गठन नहीं किया, जबकि 9 मई 2025 को आयोग गठित होने के बाद उसे 3 महीने के भीतर सर्वे रिपोर्ट देनी थी। आज 14-15 महीने बीतने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। हाईकोर्ट लगातार सरकार से चुनाव कराने और ओबीसी सर्वे की प्रगति पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार हर बार बहानेबाजी करके चुनाव टालने में लगी रहती है। अनुच्छेद 243E एवं 243U में स्पष्ट प्रावधान है कि चुनाव 5 वर्ष की अवधि पूरी होने पर समय पर कराना संवैधानिक दायित्व है। लेकिन सत्ता में बैठी बीजेपी लोकतांत्रिक व्यवस्था को पंगु बनाकर ओबीसी समाज को धोखा देने का काम कर रही है। सरकार ने 'राजधारा' ऐप के माध्यम से ओबीसी सर्वे का नया तरीका अपनाया है, जिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐप में सरकारी प्रगणक या अधिकारी वाला विकल्प निष्क्रिय कर दिया गया, जबकि Citizen Option खोल दिया गया, जिससे कोई भी व्यक्ति OTP के आधार पर जानकारी दर्ज कर सकता है। अगर सर्वे का डेटा अधिकृत सरकारी प्रगणक की आईडी से प्रमाणित नहीं होगा, तो उसकी विश्वसनीयता और वैधानिकता कैसी तय होगी? राजधारा ऐप में भरे गए ओबीसी डेटा का प्रमाणीकरण कौन करेगा? हमारी मांग है कि सरकार ओबीसी सर्वे पूरी पारदर्शिता, सरकारी सत्यापन और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप जल्द से जल्द करवाकर रिपोर्ट दें।

Govind Singh Dotasra

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माननीय मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma जी...अब सवाल केवल भ्रष्टाचार के आरोपों का नहीं, बल्कि एक मंत्री और संस्था के प्रमुख की जवाबदेही का भी है। हिंदुस्तान स्काउट गाइड राजस्थान संस्था के जिला ऑर्गेनाइजर अजय कुमावत जी ने सबूतों के साथ करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर किया है। क्या इस भारी भ्रष्टाचार में संस्था प्रमुख से लेकर नीचे तक हर अधिकारी की संलिप्तता की जांच नहीं होनी चाहिए? और अगर सब सही है, तो फिर भाजपा सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करवाने से डरना नहीं चाहिए। - अधिकारी कहते हैं नियम बने हुए हैं और दिलावर जी कहते हैं कि "सेवा नियम नहीं बने, भर्ती हुई ही नहीं" तो फिर 2024-25 के बजट में 4 करोड़ की बजट घोषणा कैसे हुई? 1.5 करोड़ रुपए कैसे जारी हुए? अगर सेवा नियम नहीं बने, तो संस्था का खुद का खाता और ऑडिट नहीं होती। राजस्थान विधानसभा के प्रगति प्रतिवेदन के पेज 129, 130 और 131 में इस संस्था का महिमामंडन कैसे किया गया? अगर नियम नहीं बने, तो पैसा कैसे लिया गया? और अगर नियम बने हुए हैं, तो संस्था के अध्यक्ष दिलावर जी सच क्यों छुपा रहे हैं? - अगर नियम नहीं बने तो D.El.Ed के करीब 13 हजार छात्रों से 39 लाख रुपए, कैंपों का वार्षिक शुल्क और भर्ती के नाम पर अवैध वसूली कैसे की गई? आखिर ये संस्था है या "कलेक्शन सेंटर"? - आखिर संस्था का पैसा निजी खातों में क्यों गया? अगर सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो संस्था के अधिकृत खाते में पैसा क्यों नहीं जमा हुआ? - सबसे बड़ा सवाल.. मदन दिलावर जी के PA बंसीवाल हर कैंप में क्या करने जाते थे? अगर उनका इस संस्था से कोई संबंध नहीं था, तो वो हर कैंप में क्यों मौजूद रहते थे? क्या मंत्री जी बताएंगे कि उनका PA किस अधिकार से कैंपों की निगरानी करता था? - भ्रष्टाचार का ये मामला केवल एक जिले का है, पूरे राजस्थान में करोड़ों रुपए के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। - जब अजय कुमावत जी ने 9 अप्रैल को भ्रष्टाचार की शिकायत दी थी, तो फिर अब तक जांच क्यों नहीं हुई? क्या SOG, ACB, ED या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं करवाई जा सकती? - अगर सब कुछ "दूध का धुला" हुआ है तो फिर जांच से डर किस बात का? राजस्थान की जनता और कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि भ्रष्टाचार पर भाषण देने वाली भाजपा इस घोटाले की निष्पक्ष जांच कराए और जनता के सामने सच्चाई लाए।

Govind Singh Dotasra

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