
Hansraj Meena
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Environmental & Socio- Political Activist with Principle of secularism, Equality, Humanity & Justice. A Tribal, Son Of Farmer. Founder of @TribalArmy.
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के बीच विनोद जाखड़ और विजय शंकर मीणा को लेकर सामने आई कथित ऑडियो बेहद गंभीर और चिंताजनक है। ऑडियो में ABVP से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज, धमकी और जातिगत रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाना शर्मनाक है। छात्र राजनीति में वैचारिक मतभेद और चुनावी प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति को निशाना बनाकर अपमानित करना, गाली देना या धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। खासकर जब विश्वविद्यालय युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, समानता और संवैधानिक अधिकारों की समझ देने का केंद्र होना चाहिए, तब इस तरह की भाषा छात्र राजनीति की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मैं जातिगत अपमान, गाली-गलौज और धमकी की ऐसी भाषा की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
Hansraj Meena47,793 просмотров • 1 день назад

उज्जैन जैसे पवित्र धार्मिक नगर में श्मशान घाट पर जलती चिता से मानव मांस निकालकर खाने का वायरल वीडियो बेहद घृणित, अमानवीय और शर्मनाक है। आस्था, धर्म या तंत्र-मंत्र के नाम पर ऐसी वीभत्स हरकत किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। मृतक की गरिमा और परिजनों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों पर तत्काल निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
Hansraj Meena300,147 просмотров • 16 дней назад
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यहां तक पहुंचने में मुझे कई वर्ष लगे, संघर्ष भी कम नहीं था। लेकिन अंत में मेरे अपने लोगों ने मुझे निराश नहीं किया। आपका विश्वास, प्यार और साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आदिवासी हूं और ऊपर से अम्बेडकरवादी, इतनी आसानी से जीत थोड़ी ही हासिल करने देंगे! इसलिए और बड़ा संघर्ष जारी है।
Hansraj Meena21,661 просмотров • 3 дней назад

ये तस्वीर दिल्ली की नहीं, कोलकाता की है। देश में नई क्रांति आ चुकी है !
Hansraj Meena293,211 просмотров • 1 месяц назад

आज के दौर में 100 में से IIT करने वाले युवाओं में सिर्फ़ 1% ही सफल हो रहे हैं, जबकि बाबा बनने वाले लोगों में 99% सफल हो रहे हैं।
Hansraj Meena297,795 просмотров • 2 месяцев назад
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मध्यप्रदेश के कटनी में दलित परिवार के 15 साल के बच्चे और उसकी मां के साथ थाना प्रभारी और पुलिस स्टॉफ की क्रूरता मानवता को झकझोर कर रख देने वाली है। यह घटना ना सिर्फ मप्र पुलिस की क्रूरता को दर्शाती है, बल्कि समाज में व्याप्त दलितों के प्रति हिंसा की मानसिकता को भी उजागर करती हैं।
Hansraj Meena2,159,685 просмотров • 2 лет назад

अंबुजा सीमेंट की पुरुँगा कोयला खदान परियोजना आदिवासियों पर विकास नहीं, विनाश थोप रही है। 2.25 मिलियन टन कोयला निकालने के नाम पर जंगल, नदी, संस्कृति और घर छीनने की साज़िश जारी है। कॉरपोरेट मुनाफ़े के लिए आदिवासियों का अस्तित्व कुचला जा रहा है। 1. अगर यह परियोजना विकास है, तो सबसे पहले उसी ज़मीन पर रहने वाले आदिवासियों को ही बेघर क्यों किया जा रहा है? विकास किसका? मुनाफ़े का या इंसानों का? 2. जब संविधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति को सर्वोच्च अधिकार देता है, तो आदिवासियों की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद खनन कंपनियों को अनुमति किस अधिकार से दी जा रही है? लोकतंत्र कहाँ है? 3. जंगल, नदी, जलस्त्रोत और पर्यावरण नष्ट होने की कीमत पर 2.25 मिलियन टन कोयला निकाला जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी का बिल कौन भरेगा? सरकार, कंपनी या फिर वही आदिवासी जिनकी कोई गलती नहीं?
Hansraj Meena807,169 просмотров • 9 месяцев назад

आदिवासी बच्चों के पास आज भी स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्के रास्ते नहीं हैं। ये बच्चे कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए शिक्षा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर इन्हीं भील बच्चों और आदिवासी समाज के संवैधानिक आरक्षण को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं।
Hansraj Meena67,086 просмотров • 22 дней назад

बीजेपी का अंत नजदीक आ गया है, यह स्वयं बाबा रामदेव को भी समझ आ गया है !
Hansraj Meena100,333 просмотров • 1 месяц назад

नेता विपक्ष राहुल गांधी के नाक पर आई चोट बेहद चिंताजनक और निंदनीय है। लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने वाले नेता और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ऐसी बर्बरता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। ऐसा दुस्साहस बिना सत्ता के संरक्षण और हौसले के संभव नहीं है।
Hansraj Meena163,278 просмотров • 1 месяц назад

गंगापुर सिटी में सफाई व्यवस्था की बदहाली पर सवाल उठाने वाले पत्रकार राजेश मीणा जी को ही अतिरिक्त जिला कलेक्टर द्वारा धमकाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। प्रशासन को पत्रकार को डराने-धमकाने के बजाय नालों में अटी गंदगी और सफाई व्यवस्था की बदहाली पर जवाब देना चाहिए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।
Hansraj Meena43,403 просмотров • 17 дней назад
