
Hansraj Meena
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Environmental & Socio- Political Activist with Principle of secularism, Equality, Humanity & Justice. A Tribal, Son Of Farmer. Founder of @TribalArmy.
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उज्जैन जैसे पवित्र धार्मिक नगर में श्मशान घाट पर जलती चिता से मानव मांस निकालकर खाने का वायरल वीडियो बेहद घृणित, अमानवीय और शर्मनाक है। आस्था, धर्म या तंत्र-मंत्र के नाम पर ऐसी वीभत्स हरकत किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। मृतक की गरिमा और परिजनों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों पर तत्काल निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
Hansraj Meena96,041 views • 15 hours ago

गंगापुर सिटी में सफाई व्यवस्था की बदहाली पर सवाल उठाने वाले पत्रकार राजेश मीणा जी को ही अतिरिक्त जिला कलेक्टर द्वारा धमकाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। प्रशासन को पत्रकार को डराने-धमकाने के बजाय नालों में अटी गंदगी और सफाई व्यवस्था की बदहाली पर जवाब देना चाहिए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।
Hansraj Meena15,152 views • 17 hours ago

आदिवासी बच्चों के पास आज भी स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्के रास्ते नहीं हैं। ये बच्चे कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए शिक्षा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर इन्हीं भील बच्चों और आदिवासी समाज के संवैधानिक आरक्षण को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं।
Hansraj Meena66,195 views • 5 days ago

ये तस्वीर दिल्ली की नहीं, कोलकाता की है। देश में नई क्रांति आ चुकी है !
Hansraj Meena293,081 views • 1 month ago

बीजेपी का अंत नजदीक आ गया है, यह स्वयं बाबा रामदेव को भी समझ आ गया है !
Hansraj Meena100,049 views • 17 days ago

आजकल धीरेंद्र शास्त्री जैसे तथाकथित कथावाचक कहते हैं कि वे विदेशों में कथा करने गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि इन कथाओं का कोई लाइव प्रसारण क्यों नहीं दिखता? विदेश यात्रा, घूमना और ऐश करना हो तो उसे कथा का नाम क्यों दिया जाता है? आस्था के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है और अफसोस कि लोग इस पर विश्वास भी कर रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री जैसे कथावाचक प्रवचनों में लोगों से कहते हैं कि विदेशों में कुछ नहीं रखा, भगवान तो यहीं हैं। लेकिन खुद विदेशों में घूमकर आनंद लेते हैं। यह दोहरा चरित्र आखिर कब तक? धीरेंद्र शास्त्री जैसे तथाकथित कथावाचक धर्म और आस्था के नाम पर भारी पैसा कमाकर विदेशों में घूम रहे हैं, जबकि देश के गरीब, आदिवासी और वंचित लोग आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
Hansraj Meena27,838 views • 8 days ago

अंबुजा सीमेंट की पुरुँगा कोयला खदान परियोजना आदिवासियों पर विकास नहीं, विनाश थोप रही है। 2.25 मिलियन टन कोयला निकालने के नाम पर जंगल, नदी, संस्कृति और घर छीनने की साज़िश जारी है। कॉरपोरेट मुनाफ़े के लिए आदिवासियों का अस्तित्व कुचला जा रहा है। 1. अगर यह परियोजना विकास है, तो सबसे पहले उसी ज़मीन पर रहने वाले आदिवासियों को ही बेघर क्यों किया जा रहा है? विकास किसका? मुनाफ़े का या इंसानों का? 2. जब संविधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति को सर्वोच्च अधिकार देता है, तो आदिवासियों की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद खनन कंपनियों को अनुमति किस अधिकार से दी जा रही है? लोकतंत्र कहाँ है? 3. जंगल, नदी, जलस्त्रोत और पर्यावरण नष्ट होने की कीमत पर 2.25 मिलियन टन कोयला निकाला जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी का बिल कौन भरेगा? सरकार, कंपनी या फिर वही आदिवासी जिनकी कोई गलती नहीं?
Hansraj Meena807,169 views • 8 months ago
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मध्यप्रदेश के कटनी में दलित परिवार के 15 साल के बच्चे और उसकी मां के साथ थाना प्रभारी और पुलिस स्टॉफ की क्रूरता मानवता को झकझोर कर रख देने वाली है। यह घटना ना सिर्फ मप्र पुलिस की क्रूरता को दर्शाती है, बल्कि समाज में व्याप्त दलितों के प्रति हिंसा की मानसिकता को भी उजागर करती हैं।
Hansraj Meena2,159,494 views • 2 years ago

मध्यप्रदेश के बड़वानी की आदिवासी बच्चियाँ अपनी समस्याएँ लेकर जिला कलेक्टर से मिलने के लिए 15 किलोमीटर पैदल चलकर पहुँचीं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने के लिए 6 घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा। यह सिर्फ प्रशासनिक संवेदनहीनता नहीं, बल्कि उन बच्चियों की मेहनत, उम्मीद और अधिकारों का अपमान है।
Hansraj Meena27,631 views • 8 days ago
