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Hansraj Meena

@HansrajMeena764,476 subscribers

Environmental & Socio- Political Activist with Principle of secularism, Equality, Humanity & Justice. A Tribal, Son Of Farmer. Founder of @TribalArmy.

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मोदी है तो मुमकिन है !

मोदी है तो मुमकिन है !

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7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों का ढोल पीटने से देश के गरीब की थाली नहीं भर जाती !

7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों का ढोल पीटने से देश के गरीब की थाली नहीं भर जाती !

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मोदी है तो मुमकिन है !

मोदी है तो मुमकिन है !

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मध्यप्रदेश में 30 आदिवासी बच्चों की कुपोषण और भुखमरी से हुई मौत पर जब न्याय की मांग लेकर सड़क पर उतरे, तो सरकार ने संवेदना दिखाने के बजाय तानाशाही रवैया अपनाया।

मध्यप्रदेश में 30 आदिवासी बच्चों की कुपोषण और भुखमरी से हुई मौत पर जब न्याय की मांग लेकर सड़क पर उतरे, तो सरकार ने संवेदना दिखाने के बजाय तानाशाही रवैया अपनाया।

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सोशल मीडिया पर ‘एलियन स्टार’ के नाम से मशहूर इस 13 वर्षीय लड़के का नाम मोतीलाल मेघवाल है। कभी अपने अलग लुक की वजह से मजाक का सामना करने वाले मोतीलाल ने उसी चीज़ को अपनी ताकत बना लिया। इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक और यूट्यूब पर अपने हुनर से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाने वाला मोतीलाल इस बात की मिसाल है कि दलित समाज के बच्चे भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बना रहे हैं। भीख मांगकर नहीं, मेहनत करके नाम कमाया है।

सोशल मीडिया पर ‘एलियन स्टार’ के नाम से मशहूर इस 13 वर्षीय लड़के का नाम मोतीलाल मेघवाल है। कभी अपने अलग लुक की वजह से मजाक का सामना करने वाले मोतीलाल ने उसी चीज़ को अपनी ताकत बना लिया। इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक और यूट्यूब पर अपने हुनर से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाने वाला मोतीलाल इस बात की मिसाल है कि दलित समाज के बच्चे भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बना रहे हैं। भीख मांगकर नहीं, मेहनत करके नाम कमाया है।

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बीजेपी का अंत नजदीक आ चुका है !

बीजेपी का अंत नजदीक आ चुका है !

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मजबुरी होगी नहीं तो इतना रिस्क कोई नहीं लेता हैं।

मजबुरी होगी नहीं तो इतना रिस्क कोई नहीं लेता हैं।

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दिल्ली के जंतर मंतर के बाद अब छतरपुर में भी आंदोलन को कुचल दिया गया। आंदोलन कर रहे आदिवासियों को पुलिस ने जबरन उठाकर हिरासत में ले लिया। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज़ दबाना किसी भी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। क्या शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना भी अब अपराध बन गया है?

दिल्ली के जंतर मंतर के बाद अब छतरपुर में भी आंदोलन को कुचल दिया गया। आंदोलन कर रहे आदिवासियों को पुलिस ने जबरन उठाकर हिरासत में ले लिया। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज़ दबाना किसी भी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। क्या शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना भी अब अपराध बन गया है?

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आखिरकार मंदिर के चढ़ावे का पैसा दिख ही गया !

आखिरकार मंदिर के चढ़ावे का पैसा दिख ही गया !

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भाजपा सरकार यमुना नदी को कितने दिनों में पीने लायक स्वच्छ बनाएगी? यह सवाल मैं हर दिन पूछूंगा, जब तक जवाब और समाधान नहीं मिलता!

भाजपा सरकार यमुना नदी को कितने दिनों में पीने लायक स्वच्छ बनाएगी? यह सवाल मैं हर दिन पूछूंगा, जब तक जवाब और समाधान नहीं मिलता!

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"मंदिर में फोटो खींचना मना है !" अब समझ आया है कि मंदिरों में यह क्यों लिखा रहता है !

"मंदिर में फोटो खींचना मना है !" अब समझ आया है कि मंदिरों में यह क्यों लिखा रहता है !

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मुंबई अंधेरी रेलवे स्टेशन पर एक यात्री की जान बचाने वाले सतर्क RPF जवान को सलाम! उनकी बहादुरी और तत्परता ने बड़ा हादसा होने से रोक दिया। ऐसे जांबाज सुरक्षाकर्मी ही असली हीरो हैं! RPF INDIA कृपया इन्हें उचित सम्मान दें।

मुंबई अंधेरी रेलवे स्टेशन पर एक यात्री की जान बचाने वाले सतर्क RPF जवान को सलाम! उनकी बहादुरी और तत्परता ने बड़ा हादसा होने से रोक दिया। ऐसे जांबाज सुरक्षाकर्मी ही असली हीरो हैं! RPF INDIA कृपया इन्हें उचित सम्मान दें।

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अच्छा, झूठ बोलो और जोर लगाकर झूठ बोलो दम लगाकर झूठ बोलो !

अच्छा, झूठ बोलो और जोर लगाकर झूठ बोलो दम लगाकर झूठ बोलो !

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कृषि के बाद, पाखण्ड हमारे युग का सबसे बड़ा उद्योग है !

कृषि के बाद, पाखण्ड हमारे युग का सबसे बड़ा उद्योग है !

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सरेंडर होने से अच्छा है देश के लिए युद्ध में लड़ते-लड़ते शहीद हो जाना ! #Khamenei

सरेंडर होने से अच्छा है देश के लिए युद्ध में लड़ते-लड़ते शहीद हो जाना ! #Khamenei

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"किसान आंदोलन में कंगना रनौत ने धरने पर बैठने वाली महिलाओं को यह बोला था कि 100-100 रु के लिए धरने पर बैठती है, तब मेरी मां भी वहां बैठी थी।" CISF महिला जवान कुलविंदर कौर का गुस्सा बाजिव है। मैं बतौर एक किसान का बेटा होने के नाते उनके स्वाभिमान के साथ खड़ा हूं। #KanganaRanaut

"किसान आंदोलन में कंगना रनौत ने धरने पर बैठने वाली महिलाओं को यह बोला था कि 100-100 रु के लिए धरने पर बैठती है, तब मेरी मां भी वहां बैठी थी।" CISF महिला जवान कुलविंदर कौर का गुस्सा बाजिव है। मैं बतौर एक किसान का बेटा होने के नाते उनके स्वाभिमान के साथ खड़ा हूं। #KanganaRanaut

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बस यही देखना बाकी था !

बस यही देखना बाकी था !

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मोदी है तो मुमकिन है !

मोदी है तो मुमकिन है !

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मध्यप्रदेश में गरीब आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले भाजपा के युवा नेता प्रवेश शुक्ला की यह शरारत और उद्दंडता असहनीय है। आदिवासियों के प्रति बीजेपी का यह असली चेहरा है। मप्र प्रशासन प्रवेश शुक्ला के विरूद्ध एससी एसटी एक्ट के तहत कड़ी कार्यवाही करें। #ArrestPraveshShukla

मध्यप्रदेश में गरीब आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले भाजपा के युवा नेता प्रवेश शुक्ला की यह शरारत और उद्दंडता असहनीय है। आदिवासियों के प्रति बीजेपी का यह असली चेहरा है। मप्र प्रशासन प्रवेश शुक्ला के विरूद्ध एससी एसटी एक्ट के तहत कड़ी कार्यवाही करें। #ArrestPraveshShukla

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पुल बनाने से नहीं, मंदिर बनाने से वोट मिलता है !

पुल बनाने से नहीं, मंदिर बनाने से वोट मिलता है !

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के बीच विनोद जाखड़ और विजय शंकर मीणा को लेकर सामने आई कथित ऑडियो बेहद गंभीर और चिंताजनक है। ऑडियो में ABVP से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज, धमकी और जातिगत रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाना शर्मनाक है। छात्र राजनीति में वैचारिक मतभेद और चुनावी प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति को निशाना बनाकर अपमानित करना, गाली देना या धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। खासकर जब विश्वविद्यालय युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, समानता और संवैधानिक अधिकारों की समझ देने का केंद्र होना चाहिए, तब इस तरह की भाषा छात्र राजनीति की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मैं जातिगत अपमान, गाली-गलौज और धमकी की ऐसी भाषा की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

Hansraj Meena

47,793 görüntüleme • 1 gün önce

क्या अब न्यायालय अथवा जेलों की आवश्यकता नहीं बची ?
0:29

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अंबुजा सीमेंट की पुरुँगा कोयला खदान परियोजना आदिवासियों पर विकास नहीं, विनाश थोप रही है। 2.25 मिलियन टन कोयला निकालने के नाम पर जंगल, नदी, संस्कृति और घर छीनने की साज़िश जारी है। कॉरपोरेट मुनाफ़े के लिए आदिवासियों का अस्तित्व कुचला जा रहा है। 1. अगर यह परियोजना विकास है, तो सबसे पहले उसी ज़मीन पर रहने वाले आदिवासियों को ही बेघर क्यों किया जा रहा है? विकास किसका? मुनाफ़े का या इंसानों का? 2. जब संविधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति को सर्वोच्च अधिकार देता है, तो आदिवासियों की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद खनन कंपनियों को अनुमति किस अधिकार से दी जा रही है? लोकतंत्र कहाँ है? 3. जंगल, नदी, जलस्त्रोत और पर्यावरण नष्ट होने की कीमत पर 2.25 मिलियन टन कोयला निकाला जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी का बिल कौन भरेगा? सरकार, कंपनी या फिर वही आदिवासी जिनकी कोई गलती नहीं?

Hansraj Meena

807,169 görüntüleme • 9 ay önce