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हिन्दी पंक्तियाँ

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इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है। सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है। ~ अर्जुन सिंह चांद

इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है। सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है। ~ अर्जुन सिंह चांद

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ये पंक्तियाँ आप किसे समर्पित करना चाहेंगे?

ये पंक्तियाँ आप किसे समर्पित करना चाहेंगे?

371,861 Aufrufe

झारखंड में भी बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए छात्रों का प्रोटेस्ट देखते हुए अदम गोंडवी जी पंक्तियाँ याद आती हैं: "जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिज़ाज उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए।" Video: thelallantop

झारखंड में भी बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए छात्रों का प्रोटेस्ट देखते हुए अदम गोंडवी जी पंक्तियाँ याद आती हैं: "जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिज़ाज उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए।" Video: thelallantop

18,332 Aufrufe

वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए रो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए - रियाज़ मजीद

वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए रो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए - रियाज़ मजीद

296,076 Aufrufe

अकेलेपन और एकांत में क्या अंतर है?

अकेलेपन और एकांत में क्या अंतर है?

286,310 Aufrufe

सबको गिला है - बहुत कम मिला है...

सबको गिला है - बहुत कम मिला है...

275,930 Aufrufe

निर्धन गिरे पहाड़ से कोई न पूछे हाल धनी को कांटा लगे पूछे लोग हज़ार।

निर्धन गिरे पहाड़ से कोई न पूछे हाल धनी को कांटा लगे पूछे लोग हज़ार।

225,090 Aufrufe

लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या कहा लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या किया लेकिन लोग ये कभी नहीं भूलेंगे कि तुमने उन्हें कैसा महसूस करवाया। माया एंजेलो 🌻

लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या कहा लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या किया लेकिन लोग ये कभी नहीं भूलेंगे कि तुमने उन्हें कैसा महसूस करवाया। माया एंजेलो 🌻

240,412 Aufrufe

शोक में सिर्फ़ रहा जा सकता है, उसे कहा नहीं जा सकता। - पंकज चतुर्वेदी

शोक में सिर्फ़ रहा जा सकता है, उसे कहा नहीं जा सकता। - पंकज चतुर्वेदी

187,219 Aufrufe

सबको गिला है - बहुत कम मिला है ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है उतना कितनो को मिला है। - अज्ञात

सबको गिला है - बहुत कम मिला है ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है उतना कितनो को मिला है। - अज्ञात

200,360 Aufrufe

पहाड़ और नदी...

पहाड़ और नदी...

118,387 Aufrufe

पंक्तियाँ : सोनू जाॅनसन

पंक्तियाँ : सोनू जाॅनसन

187,859 Aufrufe

इस भारतीय टीम ने सब कुछ ऐसे नॉर्मल कर दिया, जैसा सदियों से वास्तव में होना चाहिए था।

इस भारतीय टीम ने सब कुछ ऐसे नॉर्मल कर दिया, जैसा सदियों से वास्तव में होना चाहिए था।

124,846 Aufrufe

सबको गिला है, बहुत कम मिला है। ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है, उतना कितनों को मिला है।

सबको गिला है, बहुत कम मिला है। ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है, उतना कितनों को मिला है।

180,560 Aufrufe

वो प्रेम है.. 👌❤

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175,323 Aufrufe

ये सुनिए 👌👌

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152,001 Aufrufe

माता-पिता ❤❤

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145,834 Aufrufe

UPSC topper Shakti Dubey.

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69,868 Aufrufe

अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास कुछ दिन रहना इस घर में जो उतना ही तुम्हारा भी है तुम्हें देखने की प्यास है गहरी तुम्हें सुनने की कुछ दिन रहना जैसे तुम गई नहीं कहीं मेरे पास समय कम होता जा रहा है मेरी प्यारी दोस्त घनी आबादी का देश मेरा कितनी औरतें लौटती हैं शाम होते ही अपने-अपने घर कई बार सचमुच लगता है तुम उनमें ही कहीं आ रही हो वही दुबली देह बारीक़ चारख़ाने की सूती साड़ी कंधे से झूलता झालर वाला झोला और पैरों में चप्पलें मैं कहता जूते पहनो खिलाड़ियों वाले भाग-दौड़ में भरोसे के लायक़ तुम्हें भी अपने काम में ज़्यादा मन लगेगा मुझसे फिर एक बार मिलकर लौटने पर दु:ख-सुख तो आते-जाते रहेंगे सब कुछ पार्थिव है यहाँ लेकिन मुलाक़ातें नहीं हैं पार्थिव इनकी ताज़गी रहेगी यहाँ हवा में! इनसे बनती हैं नई जगहें एक बार और मिलने के बाद भी एक बार और मिलने की इच्छा पृथ्वी पर कभी ख़त्म नहीं होगी पंक्तियाँ : आलोक धन्वा

अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास कुछ दिन रहना इस घर में जो उतना ही तुम्हारा भी है तुम्हें देखने की प्यास है गहरी तुम्हें सुनने की कुछ दिन रहना जैसे तुम गई नहीं कहीं मेरे पास समय कम होता जा रहा है मेरी प्यारी दोस्त घनी आबादी का देश मेरा कितनी औरतें लौटती हैं शाम होते ही अपने-अपने घर कई बार सचमुच लगता है तुम उनमें ही कहीं आ रही हो वही दुबली देह बारीक़ चारख़ाने की सूती साड़ी कंधे से झूलता झालर वाला झोला और पैरों में चप्पलें मैं कहता जूते पहनो खिलाड़ियों वाले भाग-दौड़ में भरोसे के लायक़ तुम्हें भी अपने काम में ज़्यादा मन लगेगा मुझसे फिर एक बार मिलकर लौटने पर दु:ख-सुख तो आते-जाते रहेंगे सब कुछ पार्थिव है यहाँ लेकिन मुलाक़ातें नहीं हैं पार्थिव इनकी ताज़गी रहेगी यहाँ हवा में! इनसे बनती हैं नई जगहें एक बार और मिलने के बाद भी एक बार और मिलने की इच्छा पृथ्वी पर कभी ख़त्म नहीं होगी पंक्तियाँ : आलोक धन्वा

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पीड़ाएं केवल दुःख नहीं देती, साहस भी देती हैं। - स्मृति प्रशा

पीड़ाएं केवल दुःख नहीं देती, साहस भी देती हैं। - स्मृति प्रशा

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