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Naveen Sharma Sikandrabad

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किसान पुत्र❤️ पिता-श्री वाचस्पति शर्मा सिकंदराबाद ,बुलंदशहर,उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी🚲

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अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd

अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd

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कल जंतर-मंतर पर युवाओं के न्याय की बात क्या की, आज मुझे 'हाउस अरेस्ट' (नज़रबंद) कर दिया गया है। लेकिन सरकार यह भूल रही है कि वह एक व्यक्ति को चार दीवारों में कैद कर सकती हैं, करोड़ों युवाओं के इंकलाब को नहीं। लाला लाजपत राय जी ने कहा था कि उनके सिर पर पड़ी एक-एक लाठी अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील बनेगी। आज मैं कहता हूँ— जंतर-मंतर पर मासूम छात्रों पर चलायी गई लाठियां और यह पुलिसिया कार्रवाई, इस अहंकारी व्यवस्था के पतन की शुरुआत है। जो सरकार करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, वह हमें डराने का यह "पुलिसिया शॉर्टकट" अपना रही है। हम गांधी के रास्ते पर शांति से अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन सत्ता यह न भूले कि इसी देश के युवाओं के भीतर भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद भी बसते हैं। युवाओं की जान और उनका भविष्य किसी मंत्री के पद से बहुत बड़ा है। साथियों, हमारी लड़ाई जारी है। मेरी नज़रबंदी से हमारा हौसला नहीं टूटेगा, बल्कि और मजबूत होगा। आप सब डटे रहना! #JantarMantarprotests #Youth

कल जंतर-मंतर पर युवाओं के न्याय की बात क्या की, आज मुझे 'हाउस अरेस्ट' (नज़रबंद) कर दिया गया है। लेकिन सरकार यह भूल रही है कि वह एक व्यक्ति को चार दीवारों में कैद कर सकती हैं, करोड़ों युवाओं के इंकलाब को नहीं। लाला लाजपत राय जी ने कहा था कि उनके सिर पर पड़ी एक-एक लाठी अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील बनेगी। आज मैं कहता हूँ— जंतर-मंतर पर मासूम छात्रों पर चलायी गई लाठियां और यह पुलिसिया कार्रवाई, इस अहंकारी व्यवस्था के पतन की शुरुआत है। जो सरकार करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, वह हमें डराने का यह "पुलिसिया शॉर्टकट" अपना रही है। हम गांधी के रास्ते पर शांति से अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन सत्ता यह न भूले कि इसी देश के युवाओं के भीतर भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद भी बसते हैं। युवाओं की जान और उनका भविष्य किसी मंत्री के पद से बहुत बड़ा है। साथियों, हमारी लड़ाई जारी है। मेरी नज़रबंदी से हमारा हौसला नहीं टूटेगा, बल्कि और मजबूत होगा। आप सब डटे रहना! #JantarMantarprotests #Youth

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जब किराए में 50% की छूट देनी ही नहीं थी, तो युवा साथियों को ऐसी उम्मीद भी नहीं दिलानी चाहिए थी। ज़रा उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसका कुल किराया 1000 रुपये पड़ने वाला था, लेकिन वह घर से सिर्फ 700 रुपये यह सोचकर लेकर निकला कि 50% छूट मिलने पर आने-जाने का काम 500 में हो जाएगा और बचे हुए पैसों से खाने-पीने तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे कर लेगा। साहब, विद्यार्थी जीवन बहुत संघर्षों से भरा होता है। घरवालों से 1000-500 रुपये मांगने के लिए भी एक विद्यार्थी को कितनी बार सोचना पड़ता है, कितना साहस जुटाना पड़ता है, इस बात को परीक्षाओं कि तैयारी करने वाला एक युवा ही समझ सकता है। घोषणाएं करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि उन पर भरोसा करके लाखों विद्यार्थी अपनी योजनाएं बनाते हैं। #uppoliceexam #students

जब किराए में 50% की छूट देनी ही नहीं थी, तो युवा साथियों को ऐसी उम्मीद भी नहीं दिलानी चाहिए थी। ज़रा उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसका कुल किराया 1000 रुपये पड़ने वाला था, लेकिन वह घर से सिर्फ 700 रुपये यह सोचकर लेकर निकला कि 50% छूट मिलने पर आने-जाने का काम 500 में हो जाएगा और बचे हुए पैसों से खाने-पीने तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे कर लेगा। साहब, विद्यार्थी जीवन बहुत संघर्षों से भरा होता है। घरवालों से 1000-500 रुपये मांगने के लिए भी एक विद्यार्थी को कितनी बार सोचना पड़ता है, कितना साहस जुटाना पड़ता है, इस बात को परीक्षाओं कि तैयारी करने वाला एक युवा ही समझ सकता है। घोषणाएं करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि उन पर भरोसा करके लाखों विद्यार्थी अपनी योजनाएं बनाते हैं। #uppoliceexam #students

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सरकार और SSC आखिरकार छात्रों से चाहती क्या है लाखों छात्र 45 से 50 डिग्री तापमान की भरी दुपहरी में SSC-GD की परीक्षा देने के लिए सैकड़ो किलोमीटर से 1000-1500 खर्च करके सेंट्ररो पर पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि 25 मई की दूसरे और तीसरे शिफ्ट कि परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है छात्रों ने जब कारण पूछा तो उन्हें साफ तौर पर कोई भी कारण नहीं बताया, कुछ एक सेंटर पर यह बताकर पेपर कैंसिल कर दिया गया कि उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह दूसरे और तीसरे शिफ्ट के बच्चों की परीक्षा कर पाएं लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर बिहार ऐसे तमाम सेंटरो से वीडियोस और तस्वीरें आ रहे हैं जहां पर SSC-GD के परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है जिस वजह से छात्र हंगामा कर रहे हैं और सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं अभी कुछ दिन पहले ही यह भी खबर आ रही थी कि 13-13 लाख, 6-6 लाख में SSC-GD के पेपर आउट कराए जा रहे थे, नोएडा में भी अभी सात लोगों को इसी मामले में पकड़ा गया था, सरकार ढंग से एक पेपर भी नहीं करा सकती और विश्व गुरु बनने का खोखला दावा करती है, #SSC_GD_PAPER_CANCEL #SSC #SSC_GD

सरकार और SSC आखिरकार छात्रों से चाहती क्या है लाखों छात्र 45 से 50 डिग्री तापमान की भरी दुपहरी में SSC-GD की परीक्षा देने के लिए सैकड़ो किलोमीटर से 1000-1500 खर्च करके सेंट्ररो पर पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि 25 मई की दूसरे और तीसरे शिफ्ट कि परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है छात्रों ने जब कारण पूछा तो उन्हें साफ तौर पर कोई भी कारण नहीं बताया, कुछ एक सेंटर पर यह बताकर पेपर कैंसिल कर दिया गया कि उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह दूसरे और तीसरे शिफ्ट के बच्चों की परीक्षा कर पाएं लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर बिहार ऐसे तमाम सेंटरो से वीडियोस और तस्वीरें आ रहे हैं जहां पर SSC-GD के परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है जिस वजह से छात्र हंगामा कर रहे हैं और सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं अभी कुछ दिन पहले ही यह भी खबर आ रही थी कि 13-13 लाख, 6-6 लाख में SSC-GD के पेपर आउट कराए जा रहे थे, नोएडा में भी अभी सात लोगों को इसी मामले में पकड़ा गया था, सरकार ढंग से एक पेपर भी नहीं करा सकती और विश्व गुरु बनने का खोखला दावा करती है, #SSC_GD_PAPER_CANCEL #SSC #SSC_GD

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बेरोजगार युवाओं और गरीब-मजदूर माता-पिता के बच्चों की जिंदगी से खेलना इस देश में बहुत ही आसान हो गया फिर चाहे वह सरकारी नौकरी, डॉक्टर बनने, शिक्षक बनने या CBSE बोर्ड की परीक्षाएं हो, हर एक एग्जाम में आपको धांधली, पेपर लीक या खुलेआम मोबाइल से चीटिंग करते हुए कुछ न कुछ नजारा देखने को मिल जाएगा, भारत के शिक्षा व्यवस्था को सिस्टम और सरकार ने इतना अव्यवस्थित और नाकाम बना दिया है की हर दिन बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खेला जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से पीड़ा पहुंचाई जा रही है, आप जरा सोच कर देखिए कि जब इन वीडियोस को 10वीं 12वीं में पढ़ने वाले छात्र देखते होंगे तो वह क्या सोचते होंगे कि कल हम भी जब इन परीक्षाओं की तैयारी करेंगे तो हमारे साथ भी सिस्टम और सरकार ऐसे ही खिलवाड़ करेगी ।

बेरोजगार युवाओं और गरीब-मजदूर माता-पिता के बच्चों की जिंदगी से खेलना इस देश में बहुत ही आसान हो गया फिर चाहे वह सरकारी नौकरी, डॉक्टर बनने, शिक्षक बनने या CBSE बोर्ड की परीक्षाएं हो, हर एक एग्जाम में आपको धांधली, पेपर लीक या खुलेआम मोबाइल से चीटिंग करते हुए कुछ न कुछ नजारा देखने को मिल जाएगा, भारत के शिक्षा व्यवस्था को सिस्टम और सरकार ने इतना अव्यवस्थित और नाकाम बना दिया है की हर दिन बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खेला जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से पीड़ा पहुंचाई जा रही है, आप जरा सोच कर देखिए कि जब इन वीडियोस को 10वीं 12वीं में पढ़ने वाले छात्र देखते होंगे तो वह क्या सोचते होंगे कि कल हम भी जब इन परीक्षाओं की तैयारी करेंगे तो हमारे साथ भी सिस्टम और सरकार ऐसे ही खिलवाड़ करेगी ।

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बिहार में मद्य निषेध सिपाही कि 4200 से ज्यादा पदों की भर्ती परीक्षा के दौरान पाटलीपुत्र स्टेशन पर जो अव्यवस्था और हाहाकार देखने को मिला, वह बेहद शर्मनाक है। जब सरकार और प्रशासन को पहले से पता होता है कि लाखों अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा है तो लॉजिस्टिक्स और पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था किए बिना, जब आप अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों को उनके गृह जनपदो से सैकड़ों किलोमीटर दूर (38 जिलों में) फेंकेंगे, तो स्टेशनों पर ऐसा जनसैलाब और अराजकता होना लाज़मी है। ट्रेनों की लेटलतीफ़ी और इस कुप्रबंधन के कारण हज़ारों विद्यार्थियों की परीक्षा लेट हो गई या पूरी तरह से छूट गई। उनके सालों की मेहनत और पैसों की बर्बादी का ज़िम्मेदार आखिर कौन है, लाखों युवाओं को उनके नसीब पर छोड़कर, ट्रेनों के इंजनों पर चढ़ने को मजबूर कर के क्या हम ऐसे 'विश्व गुरु' बनेंगे साहब? परीक्षा कराने का मतलब सिर्फ टेंडर निकालना नहीं, बच्चों को सुरक्षित सेंटर तक पहुँचाने की जवाबदेही लेना भी होता है। #BiharPoliceExam #SystemFailure #PatnaRailwayStation

बिहार में मद्य निषेध सिपाही कि 4200 से ज्यादा पदों की भर्ती परीक्षा के दौरान पाटलीपुत्र स्टेशन पर जो अव्यवस्था और हाहाकार देखने को मिला, वह बेहद शर्मनाक है। जब सरकार और प्रशासन को पहले से पता होता है कि लाखों अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा है तो लॉजिस्टिक्स और पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था किए बिना, जब आप अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों को उनके गृह जनपदो से सैकड़ों किलोमीटर दूर (38 जिलों में) फेंकेंगे, तो स्टेशनों पर ऐसा जनसैलाब और अराजकता होना लाज़मी है। ट्रेनों की लेटलतीफ़ी और इस कुप्रबंधन के कारण हज़ारों विद्यार्थियों की परीक्षा लेट हो गई या पूरी तरह से छूट गई। उनके सालों की मेहनत और पैसों की बर्बादी का ज़िम्मेदार आखिर कौन है, लाखों युवाओं को उनके नसीब पर छोड़कर, ट्रेनों के इंजनों पर चढ़ने को मजबूर कर के क्या हम ऐसे 'विश्व गुरु' बनेंगे साहब? परीक्षा कराने का मतलब सिर्फ टेंडर निकालना नहीं, बच्चों को सुरक्षित सेंटर तक पहुँचाने की जवाबदेही लेना भी होता है। #BiharPoliceExam #SystemFailure #PatnaRailwayStation

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मध्य प्रदेश के भोपाल में सड़कों पर उतरी इन नर्सिंग छात्राओं का दर्द और आक्रोश, प्रदेश की खस्ताहाल चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है। बालाघाट से 12 घंटे का सफर तय करके आई एक छात्रा के आंसू गवाही दे रहे हैं कि 4 साल की नर्सिंग डिग्री के लिए 6 साल बर्बाद हो चुके हैं। सोचिए, गरीब परिवारों की ये बेटियां, जिनके मां-बाप ने ज़मीनें बेचकर इन्हें पढ़ाया, वो आज सड़क पर क्यों रो रही है। छात्रा खुद कह रही है कि तीन साल में एक बार फर्स्ट ईयर का एग्जाम हुआ है, वो भी कई बार टलने के बाद। परिवार शादी के लिए दबाव बना रहा है पर सरकार को इनके भविष्य की कोई परवाह नहीं! इन छात्राओं की मांग है रुके हुए रिज़ल्ट तुरंत घोषित किए जाएं। सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के बीच भेदभाव खत्म हो और दोनों के रिज़ल्ट साथ आएं। नर्सिंग की परीक्षाओं को नियमित किया जाए ताकि 4 साल की डिग्री 4 साल में ही पूरी हो। जब ये छात्राएं कमिश्नर ऑफिस या स्वास्थ्य मंत्री के पास गुहार लगाती हैं, तो उन्हें अनसुना कर दिया जाता है। एक छात्रा का यह सवाल बहुत वाजिब है कि अगर हम अपना हक़ मांगते हैं, तो पुलिस लड़कियों को धक्का मारती है... जब बिना नर्सों के अस्पताल नहीं चल सकते, तो फिर नर्सों को उनके हक़ क्यों नहीं दिए जाते। सरकार को इन बेटियों की आवाज़ सुननी चाहिए। ये वो बेटियां हैं जो कल को हमारे अस्पतालों में दिन-रात सेवा करेंगी। इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ तुरंत बंद हो! Chief Minister, MP Public Health & Medical Education Department, MP #Bhopal #NursingStudentsProtest #JusticeForNursingStudents #SaveFuture

Naveen Sharma Sikandrabad

16,074 görüntüleme • 11 gün önce

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उत्तर प्रदेश में मिशन रोजगार के विज्ञापनों की चमक अगर आंखों से उतर गई हो तो लखनऊ के पिकअप भवन UPSSSC दफ्तर के बाहर खड़े इन नौजवानों की बेबसी देख लीजिए। ​बैनर पर लिखी लाइन— सचिव जी दया करो और हमसे अब यह प्रताड़ना नहीं झेली जाएगी, चीख-चीख कर बता रही है कि इस सिस्टम की लेटलतीफी ने होनहार युवाओं को किस कदर तोड़ कर रख दिया है। अपने ही हक़ के लिए नौजवानों को इस तरह सड़कों पर गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर करना बेहद शर्मनाक है। ​PET 2022 के आधार पर 'जूनियर असिस्टेंट' (5512 पद) की यह भर्ती निकाली गई थी। आज लगभग तीन साल का लंबा वक्त बीतने को है, लेकिन परिणाम के नाम पर अभ्यर्थियों के हाथ सिर्फ मायूसी, तारीखें और अंतहीन इंतज़ार लगा है अभ्यर्थी कई बार आयोग के दफ्तर के सामने रिजल्ट जारी करने के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं उपमुख्यमंत्री के घर के बाहर भी प्रदर्शन कर चुके हैं और जनता दरबार में जाकर मुख्यमंत्री जी से भी मिल चुके हैं पर फिर भी रिजल्ट जारी नहीं किया गया है अब तक। क्या उत्तर प्रदेश में कोई भी चयन प्रक्रिया बिना सड़क पर उतरे, बिना धूप-बारिश सहे और बिना धरना-प्रदर्शन किए पूरी नहीं हो सकती। ​आयोग की फाइलों में धूल फांक रहे नौजवानों के भविष्य को अब और मत लटकाइए। हमारी सरकार से स्पष्ट मांग है कि इस मानसिक प्रताड़ना पर तुरंत रोक लगे और जूनियर असिस्टेंट का परिणाम तत्काल प्रभाव से जारी कर युवाओं को न्याय दिया जाए! ​Yogi Adityanath Government of UP @upssscofficial #JuniorAssistant5512 #UPSSSC_Result_Do #LucknowProtest #JusticeForUPStudents

Naveen Sharma Sikandrabad

12,465 görüntüleme • 13 gün önce

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अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd

Naveen Sharma Sikandrabad

54,199 görüntüleme • 3 ay önce

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सीएम को बुलाया जाए... सीएम को बुलाया जाए! राजधानी लखनऊ की सड़कों पर बारिश में भीगती और रोती इन मासूम बेटियों की यह चीख, सत्ता के उन तमाम खोखले दावों की हवा निकाल रही है जो सिर्फ होर्डिंग्स और अखबारों के विज्ञापनों में चमकते हैं। यह पूरा मामला समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय का है। गरीब, वंचित और ग्रामीण परिवेश के बच्चों के उत्थान के लिए बने इन स्कूलों में 'कल्याण' के नाम पर बेटियों के भविष्य को सरेआम बर्बाद किया जा रहा है। लचर प्रबंधन और वार्डन की तानाशाही से परेशान होकर इन 300 से ज़्यादा बच्चियों को सड़क पर उतरना पड़ा। 400 से अधिक संख्या वाले इस स्कूल में पिछले 6 महीनों से विज्ञान, गणित और बायोलॉजी जैसे अहम विषयों का कोई शिक्षक ही नहीं है। मात्र 4 महीने बाद बोर्ड एग्जाम हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। बिना शिक्षकों के क्या ये बेटियां कोई चमत्कार करके परीक्षा पास करेंगी‌। सबसे शर्मनाक पहलू तो यह है कि जब इन बच्चियों ने अपने बुनियादी हक़ के लिए सड़क पर आवाज़ उठाई, तो प्रशासन ने उनकी सुनने के बजाय पुलिस भेजकर इन बेटियों पर बल प्रयोग करवाया, उनके साथ धक्का-मुक्की और सरेआम अभद्रता की गई। यह उत्तर प्रदेश के शिक्षा मॉडल का सबसे वीभत्स सच है। कैसी विडंबना है कि एक तरफ लाखों योग्य युवा पिछले 8 सालों से नई शिक्षक भर्ती के इंतज़ार में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, और दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षक मांगने पर इन मासूम बच्चों को भी पुलिस की बदसलूकी झेलनी पड़ रही है। रोज़गार मांगने पर युवाओं पर लाठी और शिक्षक मांगने पर बच्चों के साथ अभद्रता... क्या यही सुशासन है। हुक्मरान अपनी कागज़ी दुनिया और विज्ञापनों की चकाचौंध से बाहर निकलें। शिक्षा के नाम पर हो रहे इस क्रूर मज़ाक पर तुरंत रोक लगे, इन छात्राओं को अविलंब शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं और प्रदेश के युवाओं का वनवास खत्म करते हुए नई शिक्षक भर्ती का जल्द ऐलान हो। Yogi Adityanath Government of UP Social Welfare Department UP Basic Education UP #Lucknow #TeacherShortage #SarvodayaVidyalaya #EducationSystem #JusticeForStudents

Naveen Sharma Sikandrabad

10,129 görüntüleme • 14 gün önce

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पहले NEET हुआ, फिर री-NEET हुआ और अब रिजल्ट के नाम पर छात्रों के साथ यह कैसा अन्याय हो रहा है। आख़िर सिस्टम और सरकार देश के होनहार युवाओं के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं। एक तरफ़ छात्र OMR शीट के मिलान में 638 और 660 नंबर पाकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे, लेकिन रिजल्ट आया तो उन्हें महज़ 38 और 116 नंबर देकर क्वालिफ़ाइंग लिस्ट से ही बाहर कर दिया गया! 600-600 अंकों का यह अंतर कोई मामूली बात नहीं है। सोनीपत में एक ही छात्र के तो दो अलग-अलग रिजल्ट सामने आ रहे हैं—एक दिन स्कोरकार्ड पर 605 अंक दिखते हैं और अगले ही दिन उसे घटाकर सीधे 60 अंक कर दिया जाता है! आंसर-की आने के महज़ 3-4 घंटे के भीतर ऐसा कौन सा जादुई रिजल्ट तैयार किया गया जिसने कई बच्चों के सालों की तपस्या को एक झटके में शून्य कर दिया यह सीधा-सीधा छात्रों के मानसिक शोषण और उनके अधिकारों पर डाका है। सरकार और सिस्टम को अपनी आँखों से धृतराष्ट्र की पट्टी हटानी होगी। और इस पूरे मामले की बिना किसी लीपापोती के उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करनी होगी। और एक-एक छात्र की ओएमआर और रिजल्ट की विसंगति को सुधारा जाना चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए ।

Naveen Sharma Sikandrabad

24,697 görüntüleme • 1 ay önce

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जब किराए में 50% की छूट देनी ही नहीं थी, तो युवा साथियों को ऐसी उम्मीद भी नहीं दिलानी चाहिए थी। ज़रा उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसका कुल किराया 1000 रुपये पड़ने वाला था, लेकिन वह घर से सिर्फ 700 रुपये यह सोचकर लेकर निकला कि 50% छूट मिलने पर आने-जाने का काम 500 में हो जाएगा और बचे हुए पैसों से खाने-पीने तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे कर लेगा। साहब, विद्यार्थी जीवन बहुत संघर्षों से भरा होता है। घरवालों से 1000-500 रुपये मांगने के लिए भी एक विद्यार्थी को कितनी बार सोचना पड़ता है, कितना साहस जुटाना पड़ता है, इस बात को परीक्षाओं कि तैयारी करने वाला एक युवा ही समझ सकता है। घोषणाएं करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि उन पर भरोसा करके लाखों विद्यार्थी अपनी योजनाएं बनाते हैं। #uppoliceexam #students

Naveen Sharma Sikandrabad

37,119 görüntüleme • 2 ay önce

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विश्व गुरु बनने के लिए शायद देश और प्रदेश को शिक्षकों की जरूरत ही नहीं है, इसलिए नई भर्तियां नहीं निकाली जा रहीं। यह बात बेरोजगार युवाओं को अब समझ लेनी चाहिए। फिलहाल तो सिर्फ यह कहा जा रहा है कि ब्यौरा भेज दिया गया है। PR चल रहा है कि 60,000 पदों पर भर्ती आने वाली है। अब अगले 4-5 महीने आयोग ब्यौरा ही पूरा करेगा। फिर लेटलतीफी करते-करते चुनाव आ जाएंगे, आचार संहिता लग जाएगी, जिसमें न नई भर्तियां निकलेंगी और न ही परीक्षाएं कराई जाएंगी। उसके बाद चुनाव खत्म होंगे तो संभव है ग्राम पंचायत चुनाव आ जाएं, और फिर वही देरी, वही इंतजार। तब तक न जाने कितने बेरोजगार युवा ओवरएज हो जाएंगे। लेकिन इन सब बातों से सरकार को क्या फर्क पड़ता है? वैसे भी शिक्षक भर्ती निकले हुए 8 साल हो चुके हैं। अगर डेढ़-दो साल और भर्ती नहीं निकली तो क्या ही फर्क पड़ेगा। PR तो लगातार चल ही रहा है कि 60,000 वैकेंसी आने वाली है, बस यह कोई नहीं बता रहा कि कब आने वाली है। हजारों स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं। हो सकता है कुछ और स्कूल बंद करके 60,000 वैकेंसी का आंकड़ा भी और कम कर दिया जाए। आखिर जब 92,000 से 60,000 पर आया जा सकता है, तो 60,000 से नीचे भी तो जाया जा सकता है। शायद यही वजह है कि 8 सालों से सिर्फ ब्यौरा ही भेजा जा रहा है। लेकिन आयोग से मेरा कहना है कि, यह डिजिटल इंडिया है, AI का जमाना है। अगर आपको ब्यौरा भेजा जा चुका है, तो आधुनिक तकनीक का उपयोग करके जल्द से जल्द डेटा इकट्ठा करके भर्ती का विज्ञापन जारी कीजिए और बिना अनावश्यक लेटलतीफी के 6 महीने से 1 साल के भीतर पूरी भर्ती प्रक्रिया संपन्न कीजिए अगर आपके बस की हो तो। #UPESSC #ShikshakBharti #UPGov #TeacherRecruitment

Naveen Sharma Sikandrabad

28,210 görüntüleme • 2 ay önce

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सरकार और SSC आखिरकार छात्रों से चाहती क्या है लाखों छात्र 45 से 50 डिग्री तापमान की भरी दुपहरी में SSC-GD की परीक्षा देने के लिए सैकड़ो किलोमीटर से 1000-1500 खर्च करके सेंट्ररो पर पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि 25 मई की दूसरे और तीसरे शिफ्ट कि परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है छात्रों ने जब कारण पूछा तो उन्हें साफ तौर पर कोई भी कारण नहीं बताया, कुछ एक सेंटर पर यह बताकर पेपर कैंसिल कर दिया गया कि उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह दूसरे और तीसरे शिफ्ट के बच्चों की परीक्षा कर पाएं लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर बिहार ऐसे तमाम सेंटरो से वीडियोस और तस्वीरें आ रहे हैं जहां पर SSC-GD के परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है जिस वजह से छात्र हंगामा कर रहे हैं और सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं अभी कुछ दिन पहले ही यह भी खबर आ रही थी कि 13-13 लाख, 6-6 लाख में SSC-GD के पेपर आउट कराए जा रहे थे, नोएडा में भी अभी सात लोगों को इसी मामले में पकड़ा गया था, सरकार ढंग से एक पेपर भी नहीं करा सकती और विश्व गुरु बनने का खोखला दावा करती है, #SSC_GD_PAPER_CANCEL #SSC #SSC_GD

Naveen Sharma Sikandrabad

34,891 görüntüleme • 3 ay önce