
Raksha Yatharth
@Rak_sha_2018 • 15,389 subscribers
I don't take revenge, I delete people.
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बेटियां बोझ नहीं, बहादुरी की मिसाल हैं। उन्हें शेरनी बनाओ, क्योंकि उड़ान सिर्फ बेटों की नहीं होती✍️
Raksha Yatharth6,435,283 views • 10 months ago
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इंसानियत शर्मसार, लालच बेनकाब एक मासूम बच्ची काफी समय पहले ही दम तोड़ चुकी थी... लेकिन आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर सच बताने के बजाय इलाज और दवाइयों के नाम पर पैसे बनाते रहे। आखिर कब तक इंसानियत को कारोबार बनाया जाएगा? कब तक गरीब परिवार उम्मीद और दर्द के बीच लुटते रहेंगे? यह सिर्फ एक खबर नहीं, पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है।
Raksha Yatharth148,959 views • 1 month ago
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महिला सशक्तिकरण इस तरह टैटू बनाकर सशक्त हो रही है सेल्फ रिस्पेक्ट, रेप जैसी तमाम वारदात जहां हो रही वहां किसी पराये पुरुष के समक्ष इस तरह ओपेन बैठकर टैटू बनवाने वाली महिलाओं की सुरक्षा कौन सी सरकार करेगी ? इन जैसी कुछ महिलाओं की वजह से लाखों महिलाओं के रियल्टी रेप व छेड़छाड़ के केस पेंडिंग हैं।
Raksha Yatharth128,334 views • 1 month ago

हल्का गाऊन , सिंपल सी स्लीपर र लाइट मेकअप में मैडम धमाल मचा रही 😂
Raksha Yatharth84,885 views • 27 days ago

कपूर खानदान की शान, करोड़ों दिलों की धड़कन और बॉलीवुड की असली “बेबो” — Kareena Kapoor Khan ने साल 2000 में रिफ्यूजी से शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जब वी मेट की गीत हो, कभी खुशी कभी ग़म की पूजा, या 3 इडियट्स की पिया… हर किरदार में करीना ने अपनी अलग पहचान छोड़ी। स्टाइल ऐसा कि ट्रेंड बन जाए, एटीट्यूड ऐसा कि लोग कॉपी करें, और एक्टिंग ऐसी कि हर दौर में टॉप पर रहें। आज भी “पू” का स्वैग और “गीत” की दीवानगी लोगों के दिलों में ज़िंदा है… क्योंकि बेबो सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, एक आइकॉन हैं।
Raksha Yatharth48,140 views • 1 month ago

अस्पताल परिसर में डॉक्टर का मरीज पर गुस्सा दिखाना और बच्चे का इलाज करने से मना करना कई सवाल खड़े करता है। डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, ऐसे में मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार की उम्मीद की जाती है। गुस्सा या तनाव अपनी जगह हो सकता है, लेकिन इलाज से इनकार करना मानवता और जिम्मेदारी दोनों पर सवाल खड़ा करता है। आखिर मरीज जाए तो जाए कहाँ?
Raksha Yatharth28,479 views • 1 month ago

यह भारत की रेल व्यवस्था की सच्चाई है… जहां इंसानों को सफर नहीं, खुद को ठूंसना पड़ रहा है। टिकट के पूरे पैसे वसूले जाते हैं, लेकिन बदले में ना सीट मिलती है, ना सुरक्षा और ना सम्मान। हर साल करोड़ों यात्री वेटिंग और भीड़ का शिकार हो रहे हैं, फिर भी व्यवस्था सिर्फ दावों और विज्ञापनों में चमक रही है। देश की ‘लाइफलाइन’ कही जाने वाली रेलवे आज आम आदमी के धैर्य की परीक्षा बन चुकी है।
Raksha Yatharth19,723 views • 24 days ago
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