
Shama Parveen
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जंतर-मंतर से स्वरा भास्कर का सरकार पर निशाना। स्वरा भास्कर ने कहा, "सरकारी कुर्सी किसी सरकार की जागीर नहीं है आपकी तनख्वाह से लेकर सरकारी बंगले तक सब जनता के टैक्स से चलते हैं। इसलिए वफादारी किसी सत्ता से नहीं, संविधान और देश के नागरिकों से होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता जनता की सेवक होती है, मालिक नहीं।
Shama Parveen65,318 Aufrufe • vor 1 Tag

15 दिन से सोनम वांगचुक इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन सत्ता के दरवाज़े बंद हैं। क्या अहंकार इतना बड़ा हो गया कि देश के एक वैज्ञानिक और शिक्षाविद से दो मिनट बात करना भी मंज़ूर नहीं। अंग्रेज़ों पर इतिहास में कई मौकों पर आंदोलनकारियों से बातचीत करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज सवाल यह है कि लोकतांत्रिक सरकार संवाद से क्यों बच रही है। जनता ने सरकार चुनी थी, ख़ामोशी नहीं।
Shama Parveen192,099 Aufrufe • vor 3 Tagen

"कॉकरोच जनता पार्टी" को समर्थन देना है या नहीं, ये आपकी मर्ज़ी है। लेकिन अगर आज भी सोनम वांगचुक जैसे इंसान के संघर्ष पर चुप हो, तो कल अपने हक़ के लिए किसी और से लड़ने की उम्मीद मत रखना। जो सत्ता के डर से खामोश हैं, इतिहास उन्हें नहीं, संघर्ष करने वालों को याद रखता है।
Shama Parveen115,953 Aufrufe • vor 3 Tagen

इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, उसका सिर्फ़ एक नाम होता है मोहब्बत। सहारनपुर की सुनीता अरोड़ा 180 किलोमीटर का सफर तय करके जंतर-मंतर सिर्फ़ इसलिए पहुँचीं क्योंकि उन्होंने रोज़ एक नौजवान, मोहम्मद जुनैद, को बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते देखा था। मुलाकात होते ही सुनीता जी की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा "बेटा, तेरी माँ तुझसे मिलने सहारनपुर से आई है ऐसे ही हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत की मिसाल बनकर लोगों की सेवा करते रहना" यह दृश्य बता गया कि नफ़रत की दीवारें चाहे जितनी ऊँची हों, इंसानियत और मोहब्बत उन्हें हमेशा पार कर जाती है। यही है भारत की असली पहचान प्यार, भाईचारा और इंसानियत।
Shama Parveen793,895 Aufrufe • vor 17 Tagen

अन्ना हज़ारे ने 11 दिन बाद अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त किया था उस समय कांग्रेस सरकार को बातचीत की मेज़ पर आना पड़ा था। वहीं, सोनम वांगचुक 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई औपचारिक बातचीत या पहल नज़र नहीं आई लगता है, सोनम जी ने अनशन के लिए ऐसी सरकार चुन ली है जहाँ इस्तीफ़े नहीं बस तबादले होते हैं।
Shama Parveen36,076 Aufrufe • vor 1 Tag

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलन में एक मुस्लिम युवती बुर्क़ा पहनकर पहुंची वह अभिजीत दिपके को ढूंढ रही थी, क्योंकि वह उनके लिए अपने हाथों से बनाया हुआ खाना लेकर आई थी। यह सिर्फ एक टिफिन नहीं था, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक था जो देश के युवा इस आंदोलन से जोड़ रहे हैं कोई फल लेकर आ रहा है, कोई खाना, कोई पानी क्योंकि लोगों को लगता है कि ये लड़ाई किसी धर्म या जाति की नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की है। जब सरकारें युवाओं की आवाज़ सुनने से इंकार करती हैं, तब आम लोग आगे आकर अपना समर्थन देते हैं। यह तस्वीर बताती है कि देश का युवा नफ़रत नहीं, अपने बेहतर भविष्य के लिए एकजुट होकर खड़ा है।
Shama Parveen144,448 Aufrufe • vor 21 Tagen

“मोदी के बाप का देश नहीं है, हमारा देश है यह किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी ने मिलकर इस देश को बनाया है और सबने अपनी कुर्बानियाँ दी हैं। अगर इनका बस चले तो मुसलमानों को गायब कर दें, दलितों को गायब कर दें और सिर्फ अपने भक्तों को रखें इनके लिए सिर्फ वही सही है जो बीजेपी के साथ है जो इनके खिलाफ बोले, उसे दबाने, डराने या खरीदने की कोशिश होती है अगर पैसों से नहीं बिकोगे तो छापे पड़वा देंगे यही इनकी राजनीति का तरीका बन गया है।”
Shama Parveen139,898 Aufrufe • vor 21 Tagen

जंतर-मंतर का यह दृश्य उन तमाम लोगों के चेहरे पर करारा जवाब है, जो हर दिन हिंदू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत की दुकान सजाते हैं। एक मुस्लिम चाचा ने अभिजीत दीपके को गले लगाया, उनके सिर को मोहब्बत से चूमा याद रखिए, सत्ता नफ़रत से मिल सकती है, लेकिन देश मोहब्बत और इंसानियत से चलता है। नफ़रत बाँटती है, मोहब्बत जोड़ती है। यही हिंदुस्तान की पहचान है।
Shama Parveen78,940 Aufrufe • vor 16 Tagen

जंतर-मंतर से मोहम्मद कैफ की दो टूक अपील। मोहम्मद कैफ ने कहा, "हमने अपना ज्ञापन सौंप दिया है अगर नाज़िया इलाही के मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई नहीं हुई, तो हम दोबारा जंतर-मंतर लौटेंगे संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे।" उन्होंने सभी साथियों से फिलहाल शांतिपूर्वक वापस लौटने की अपील करते हुए कहा कि न्याय मिलने तक संवैधानिक संघर्ष जारी रहेगा।
Shama Parveen66,365 Aufrufe • vor 15 Tagen

जंतर-मंतर पर अब "कॉकरोच" लेबल वाली पानी की बोतलें प्रदर्शनकारियों के बीच मुफ़्त में बांटी जा रही हैं। "कॉकरोच" अब सिर्फ़ एक नारा नहीं, बल्कि विरोध का प्रतीक बन चुका है जो शब्द सत्ता के समर्थकों की ओर से तंज़ के तौर पर इस्तेमाल हुआ, प्रदर्शनकारियों ने उसे अपनी पहचान में बदल दिया।
Shama Parveen36,698 Aufrufe • vor 9 Tagen

हम भी हिंदू हैं, हिंदू की बेटी हैं लेकिन कब तक देश को सिर्फ़ हिंदू-मुस्लिम की बहस में उलझाया जाएगा युवा नौकरी मांग रहे हैं, किसान राहत मांग रहे हैं, महंगाई कम करने की मांग हो रही है MBA करने के बाद भी 10 हज़ार की नौकरी नहीं मिल रही, और सरकार बहस का मुद्दा कुछ और बना रही है। देश को नफ़रत नहीं, शिक्षा, रोज़गार और जवाब चाहिए।
Shama Parveen55,010 Aufrufe • vor 15 Tagen