
Dr. Sudhanshu Trivedi
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Member of Rajya Sabha (Upper House of Indian Parliament), National Spokesperson of Bharatiya Janata Party, B.J.P.( By education PhD in Mechanical Engineering )
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आपने इसे गंभीर कहा है, लेकिन मैं एक कदम आगे जाकर कहूँगा, यह केवल गंभीर नहीं बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था पर गहरा आघात करने वाली अत्यंत पीड़ादायक घटना है। एक रामभक्त कारसेवक के रूप में, अप्रैल 1987 की अयोध्या मंदिर निर्माण संकल्प रैली का बालक के रूप में सहभागी होने के नाते यह पीड़ा मैं भी महसूस करता हूँ। इस विषय के दो पक्ष हैं तकनीकी और राजनीतिक। तकनीकी पक्ष- यह है कि ट्रस्ट से जुड़े मामलों में पहले क़ानून यह है कि ट्रस्ट अपनी प्रक्रिया अपनाता है, उसके बाद सरकारी जांच होती है। इसके बावजूद सरकार ने सीधे तत्काल एसआईटी गठित की। एफआईआर भी तभी दर्ज होती है जब प्रथमदृष्टया साक्ष्य उपलब्ध हों, ताकि मामला न्यायालय में टिक सके। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलते ही ट्रस्ट ने एफआईआर दर्ज कराई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अंतिम रिपोर्ट अभी आनी शेष है। इससे स्पष्ट है कि सरकार संवेदनशील, सतर्क और कानूनसम्मत कार्रवाई कर रही है। जो लोग बिना SIT Report के प्राथमिक साक्ष्य के तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, ये वही लोग है जो धर्मांतरण के लिये सैकड़ों करोड़ पाने वाली संस्थाओं से FCRA उल्लंघन पर कहते हैं कि सरकार को तो किसी भी ट्रस्ट या संस्था से कोई सवाल ही नहीं पूछना चाहिए । यह दोहरा मापदंड जनता देख रही है। राजनीतिक पक्ष - में प्रश्न केवल यह नहीं कि क्या कहा जा रहा है, बल्कि यह भी कि कौन कह रहा है। जिन्होंने अयोध्या के अपमानित, आतंकित, कलंकित और रक्तरंजित किया वो आज चिंतित होने की बात कह रहे है। वास्तविकता में तो वो चिंतित नहीं अंदर से आनंदित है कि Eradication of Sanatan Dharma के लिये कैसे इस अवसर को प्रयोग किया जाय। परंतु भगवान राम के नाम पर श्री राम के पवित्र धाम पर जिस किसी ने अपराध किया है, तो उसे इस लोक में राजदंड हमारी सरकार सुनिश्चित करेगी और परलोक में धर्मदंड और कर्म दंड भगवान सुनिश्चित करेंगे।
Dr. Sudhanshu Trivedi94,238 просмотров • 4 дней назад

अंजना जी, आज वास्तविकता यह है कि यदि किसी विचारधारा के आदर्श बचे हैं तो वे भारतीय जनता पार्टी में बचे हैं। लोहिया जी को लेकर कास्ट कार्ड खेलना गलत है, यह जाति नहीं बल्कि विचार का प्रश्न है। 1967 में दीनदयाल जी ने भी लोहिया जी को राष्ट्रवादी समाजवादी कहा था। वे राम, कृष्ण और शिव की बात करते थे तथा अयोध्या में रामायण मेले की शुरुआत भी उन्होंने की थी। इसी के चलते 1969 में संयुक्त विधायक दल की सरकार बनी। समाजवाद का पतन आज नहीं, 30-40 साल पहले ही शुरू हो गया था। बिहार के गोरख पांडे और यूपी के अदम गोंडवी ने उस दौर के समाजवाद की वास्तविकता बहुत पहले लिख दी थी। आज लोहिया जी की विचारधारा की दावेदारी के जातिवाद, व्यक्तिगत स्वार्थ, अपराधीकरण और तुष्टीकरण में बिखर गई है। जबकि उज्ज्वला, प्रधानमंत्री आवास, जनधन और गरीबों के सशक्तिकरण जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी ने वास्तविक समाजवाद को धरातल पर उतारा है। यथार्थ की दृष्टि से देखेंगे तो इसमें कोई अचरज नहीं दिखाई देगा, लेकिन राजनीतिक चश्मा लगाकर देखेंगे तो हर बात में सिर्फ राजनीति ही नज़र आएगी।
Dr. Sudhanshu Trivedi38,559 просмотров • 2 дней назад

26 जून केवल आपातकाल के काले अध्याय का स्मरण ही नहीं कराता, बल्कि कांग्रेस की ‘सरेंडर राजनीति’ का भी एक दुखद दिन है। 26 जून 1974 को कच्चातीवू श्रीलंका को सौंपने के निर्णय का खामियाजा आज भी तमिलनाडु के मछुआरे भुगत रहे हैं। आज कांग्रेस से एक और सवाल है केरल में शराब पर टैक्स 251% से घटाकर 121% क्यों किया गया? क्या युवाओं को सस्ती शराब के नशे में धकेलकर शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाना ही आपकी नीति है? जब राज्य पहले से नशे और ड्रग्स की गंभीर चुनौती झेल रहा है, तब यह फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस को याद रखना चाहिए- “मुझको यारों माफ करना, मैं नशे में हूँ; बोतल में मय और मैं नशे में हूँ।” लेकिन केरल की जनता नशे में नहीं है। वह सब देख रही है और उचित समय पर इसका जवाब भी देगी।
Dr. Sudhanshu Trivedi25,549 просмотров • 5 дней назад

एग्ज़िट पोल जिस प्रकार के संकेत दे रहे हैं। अंतिम परिणाम के बाद हमें विश्वास है कि यह और अधिक निर्णायक रूप से भाजपा के पक्ष में होंगे। परंतु एक निष्कर्ष बोहोत साफ़ दिख रहा है कि अब INDI गठबंधन पूरी तरह से तितर बितर हो रहा है चुनावों में इंडी गठबंधन के घटक दलों ने भी कहीं राहुल गांधी के नेतृत्व या उनके कार्यक्रम की मॉंग नहीं की। यदि यही संकेत परिणामों में बदलते हैं तो जैसे UPA का पूरी तरीक़े से विसर्जन हो गया था वैसे ही ऐसा स्पष्ट लगता है की INDI गठबंधन को अब जनता ने तिलांजलि और श्रद्धांजलि देने का मन बना लिया है।
Dr. Sudhanshu Trivedi68,006 просмотров • 2 месяцев назад

आज राज्यसभा के सांसद श्री संदीप पाठक जी Dr. Sandeep Pathak के आवास पर पंजाब पुलिस ने जाकर रेड करने का प्रयास किया। हम यह सवाल पूछना चाहते हैं पंजाब सरकार से जहां कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी लचर है कि आपकी पुलिस ड्रग वालों को पकड़ नहीं पा रही है, जहां पवित्र हरमंदिर साहिब जी के गेट के ऊपर भी गोली चल जाती है, जहां पुलिस अधिकारियों के कार्यालय पर हमला हो जाता है वहां पर नियंत्रण न करके आज जिस प्रकार से पाठक जी के आवास पर पंजाब पुलिस ने धावा बोला है। मेरा सवाल केजरीवाल जी से है कि इस तथाकथित नई राजनीति के अलंबरदार यह बताएं कि आपके राज्य में जहां कानून व्यवस्था सर्वाधिक ध्वस्त है और कल ही एक गंभीर आरोप पंजाब विधानसभा में विपक्ष के द्वारा लगाया गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान जी के ऊपर वो नशे में हैं। तो मैं आम आदमी पार्टी, पंजाब सरकार और विशेषकर केजरीवाल जी को यह स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं “कागज का है लिबास चिरागों का शहर है, चलना संभल संभल के क्योंकि तुम नशे में हो।”
Dr. Sudhanshu Trivedi65,353 просмотров • 2 месяцев назад

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन जी के विरुद्ध तेलंगाना के न्यायालय में केस संख्या SR No.4472/2025 लंबित था। माननीय न्यायालय ने उन्हें प्रतिवादी क्रमांक-4 मानते हुए 17 सितंबर 2025 को समन जारी किया था, जिस पर उन्होंने 24 अक्टूबर 2025 को अपना पक्ष भी प्रस्तुत किया। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ: 1. क्या ऐसा प्रकरण था या नहीं? यदि था, तो न्यायालय में पक्ष रखने के बावजूद उसका उल्लेख नामांकन पत्र में क्यों नहीं किया गया? 2. तेलंगाना में आपकी सरकार है, फिर इस मामले पर सीधा स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया गया? 3. बैकअप प्रत्याशी क्यों नहीं खड़ा किया गया? 4. क्या नामांकन पत्र की जांच करने वाले कांग्रेस नेताओं ने जानबूझकर यह चूक होने दी ? ताकि उन्हें संभावित हार से बचने और भाजपा पर तोहमत लगाने के दोनों उद्देश्य पूरे हो सकें ? कांग्रेस जवाब दे “बड़ी अजीब है आदत इनकी, सच छुपाना इनकी फ़ितरत है। और जब सच सामने आ जाए, तो तोहमत औरों पर लगाने की भी हिम्मत है।”
Dr. Sudhanshu Trivedi24,630 просмотров • 21 дней назад

राहुल गांधी ने नासमझी में S.I.R. का केस इतना स्ट्रॉन्ग कर दिया है कि वो खुद कह रहे हैं कि अगर कोई गड़बड़ दिखाई दे रही है तो इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। अब तो उनके हिसाब से सिर्फ S.I.R. नहीं, NRC भी होना चाहिए। जब किसी का वोट बनता है, तो उसमें एक लाइन होती है कि मैं शपथपूर्वक कहता हूं कि मेरे सारे तथ्य सही हैं, अन्यथा सारी जिम्मेदारी मेरी होगी। बस इतना ही तो चुनाव आयोग भी कह रहा है कि जो आप कह रहे हैं, वही आप शपथ पत्र में लिख दीजिए। लेकिन राहुल गांधी के मुताबिक, मैं तो शहंशाह-ए-आलम, वली अहदे सल्तनत, फरजंद-ए-अंजुमन हूं। मैं थोड़ी न लिख के दूंगा। मैंने तो कह दिया, बस उतना ही काफी होगा। मैं तो चुनाव आयोग को कोई औपचारिक और आधिकारिक दृष्टि से लिख कर नहीं दूँगा मैं सिर्फ़ मीडिया में बयान दूँगा। परंतु मुझे चुनाव आयोग से औपचारिक और आधिकारिक रूप से जवाब चाहिए So he is saying that I will not communicate to election commission officially, but I want an official reaction from election commission.
Dr. Sudhanshu Trivedi258,155 просмотров • 10 месяцев назад

वारिस पठान जी ने बात कही, वो बहुत गंभीर है। उन्होंने बहुत ठोंक कर कहा कि 19% मुसलमान हैं । मगर कोई नहीं कहता कि मुसलमानों के अंदर कौन शेख है, कौन सैयद है, कौन पठान है, कौन गद्दी है, कौन घोसी है, कौन मिरासी है, कौन जुलाहा है, कोई अंसारी है, ना कोई नहीं बोलता और मजे की बात यह है, कोई यह भी नहीं पूछता कि मुफ्ती मुकर्रम बारी, हाफिज, मुल्ला, मौलवी में कितने जो हैं वो जुलाहा, अंसारी, बेहना हैं। मजे की बात कोई नहीं पूछता उनसे कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कितने हैं। यह होती है एकजुटता, 20% ठोस है, 80 पे जात की चोट है। 20% अपना है 80 में टुकड़े करना है। दिखाया भी जाता है 19% मुसलमान और हिंदुओं में अभी देखिए क्या-क्या दिखाया जा रहा था, इतने ब्राह्मण, इतने भूमिहार, इतने यादव, कुर्मी, इतने सैनी, इतने शाक्य, इतने ये इतने वो। ये बहुत गंभीर बात कही है वारिस पठान जी ने और मैं कहूंगा जो आपके लाखों करोड़ों लोग देख रहे हो बिहार के या देश के, उन्हें इनसे समझना चाहिए। जो एकजुट रहता है, उसकी बात पे झुकना पड़ता है। लालू प्रसाद यादव जी जिस समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं वो हिंदू समाज में माता मानी जाने वाली गौमाता का गोपालक समाज है। वो इन वारिस पठान के लोगों को गोपाष्टमी के दिन भी गाय खाने से रोक नहीं पाए, इन लोगों ने मुहर्रम के ताजिये के आगे लालू जी के पूरे परिवार को झुकवा दिया और इमारत-ए-शरीया के कार्यक्रम में तेजस्वी यादव से अपने पक्ष में बुलवा दिया। ये होती है ताकत। जो वारिस पठान जी ने कहा जरा गंभीरता व गहराई से सोचिए।
Dr. Sudhanshu Trivedi182,427 просмотров • 8 месяцев назад

BBC डॉक्यूमेंट्री,हिडनबर्ग व अब जार्ज सोरोस कह रहा है मैं भारत में पैसे भी ख़र्च करूँगा, पुराना गाना था ‘रुख़ से जरा नकाब हटा दो मेरे हुजूर, चेहरा फिर एक बार दिखा दो मेरे हुज़ूर’ जो नक़ाब था वो हट गया कि विदेशी शक्तियाँ तन-मन-धन से Narendra Modi जी के विरुध्द लगीं है ।
Dr. Sudhanshu Trivedi716,208 просмотров • 3 лет назад

जहां तक डीबेट का सवाल है तो राहुल गांधी न तो नेता प्रतिपक्ष हैं न कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं और न ही इंडी गठबंधन के चेयरमैन, वो मात्र एक सांसद है, तो वे प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी से तुलना कैसे कर रहे हैं। ये कोई कांग्रेस पार्टी नहीं है जहां अध्यक्ष भले ही खड़गे जी हैं मगर बयान से लेकर यात्रा तक राहुल गांधी ही निकालते है। वैसे राहुल गांधी जी का किसी भी विषय पर बहस करने का स्तर कितना है ये देश जानता है। राहुल गांधी का एक हाल ही का वीडियो है जिसमें वो बता रहे हैं कि IIT में इंजीनियरिंग के सवालों और उसके उत्तर इंजीनियरिंग के सिद्धांतों पर नहीं बल्कि इस आधार पर दिखाई पड़ते हैं कि प्रश्न पूछने वाला और उत्तर देने वाला किसी जाति का है । जिसको महाभारत में GST Demonetisation क्यों नहीं हुआ यह दिखाई पड़ता हो वो क्या किसी से भी बहस के योग्य हैं।
Dr. Sudhanshu Trivedi476,495 просмотров • 2 лет назад

कांग्रेस कहती है कि इतिहास में वो अंग्रेज़ सरकार से लड़े थे,पर वर्तमान में PM श्री Narendra Modi जी के विरूद्ध पैसे खर्च करने तक का एलान करने वाले जार्ज सोरोस से हिंडनबर्ग व BBC तक जुगलबंदी का सच ये दिखा रह है कि आज ये अंग्रेजों की तरफ़ से भारत सरकार से लड़ते दिख रहे हैं
Dr. Sudhanshu Trivedi700,290 просмотров • 3 лет назад

बद्रीनाथ व केदारनाथ के कपाट सूर्य की गति के अनुसार खुलते बंद होते है।दुनिया में ऐसी कौन सी संस्कृति है जिसे हज़ारों साल से यह एस्ट्रोनॉमिकल कैलकुलेशन पता थी? शताब्दियों से जो कहते हैं कि धरती स्थिर चपटी है वो हमें समझाते है की हिंदू धर्म में वैज्ञानिकता नही अंधविश्वास व नफ़रत है
Dr. Sudhanshu Trivedi632,299 просмотров • 3 лет назад

विषय नमाज़ या किसी अन्य धार्मिक कार्यक्रम में सड़क पर आयोजन करने की नहीं है।विषय अनुमति लेकर आयोजन करने का है।यदि कानूनी रूप से अनुमति लेकर आयोजन किया जाए तो कोई समस्या नहीं है। समस्या तब होती है जब कानून से ऊपर अपने को समझ कर या कानून को ताक पर रखकर बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थल का प्रयोग किया जाए। अतः यह विषय हिंदू मुस्लिम का नहीं यह कानून के पालन का विषय है । उसके भी परे जा कर यदि सोचें तो एक दूसरा पक्ष सहसा दिमाग़ में आता है। बक़रीद मुस्लिम समाज के लिये मज़हबी अक़ीदत का सबब है। यानि धार्मिक आस्था का विषय। अतः मेरा सवाल मुस्लिम समाज से नहीं है। वो तो अपनी आस्था के अनुसार चल रहे हैं। सवाल स्वघोषित पशु प्रेमियों से है। बक़रीद के मौके पर धार्मिक आस्था के आधार पर करोड़ों बकरे काटे जाते हैं, परंतु किसी पशु प्रेमी के हृदय में कोई पीड़ा ही नहीं होती।पर उन्हीं लोगों का ह्रदय त्रिपुरा में मां त्रिपुर सुंदरी के मंदिर में साल में एक आध बार होने वाली पशु बलि से इतना द्रवित हो जाता था कि वो सर्वोच्च न्यायालय तक जा कर लड़ते थे। परंतु बक़रीद के मौक़े पर धार्मिक आस्था के आधार पर होने वाली करोड़ों कुर्बानियों पर किसी Animal Lover के दिल में लवरई जागती ही नहीं, शायद वो क्रूड आयल लेने स्ट्रेट ऑफ़ हरमूज चली आती है
Dr. Sudhanshu Trivedi32,322 просмотров • 1 месяц назад

दुनिया का इकलौता देश जिसमें सारे धर्म पाये जाते है वो सिर्फ़ भारत है, पारसी जो ज़मीन से मिट गये वो भारत में फल-फूल रहे है, एक देश जहां यहूदियों के साथ कोई अत्याचार नहीं हुआ वो सिर्फ़ भारत देश है, इस्लाम के सारे फिरके पाये जाते हैं वो सिर्फ़ भारत देश है, भारत ही ऐसा देश हैं जहां मस्जिदों में धमाके नहीं होते।ये सिर्फ़ इसलिए क्योंकि ये भारत एक हिंदू बाहुल्य देश है जहां का मूल तत्व हिन्दुत्व है। इस उदारता के तत्व को विपक्ष साम्प्रदायकिता सिद्ध करने में लगा हुआ है।
Dr. Sudhanshu Trivedi507,702 просмотров • 3 лет назад

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पर आपत्ति के लिए 1 अगस्त से लेकर 1 सितंबर तक का समय दिया है। आज 13 अगस्त है, यानी आज 13 दिन पूरे हो गए हैं। 65 लाख वोट संदिग्ध में आए हैं। ज़रा 65 को 13 से डिवाइड करिए तो कितना आएगा 5। इंडी गठबंधन यानी 5 लाख। इंडी गठबंधन के सारे दलों को मिलाकर 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट हैं। अब 5 लाख को 1.6 से डिवाइड करिए, कितना आएगा 3.1। यानी इनके गठबंधन के जो बूथ लेवल एजेंट हैं, अगर वो एक दिन में 3 परिवारों का कन्फर्मेशन किए होते यानी ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर खा के भी किए होते तो अब तक पूरी रिपोर्ट सबमिट कर दी होती। अगर यह कह रहे हैं, तो क्यों नहीं अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते। फिर भी नहीं है तो अभी 18 दिन बाकी हैं। केवल 2 वोट एक दिन में इनका एक वोटर चेक करेगा यानी लंच और डिनर कर के भी फिर भी बहुत आराम से हो जाएगा। मगर उद्देश्य सच्चाई के लिए काम करने की बजाय झूठ का प्रचार करने का है।
Dr. Sudhanshu Trivedi174,158 просмотров • 10 месяцев назад