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Dr. Sudhanshu Trivedi

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Member of Rajya Sabha (Upper House of Indian Parliament), National Spokesperson of Bharatiya Janata Party, B.J.P.( By education PhD in Mechanical Engineering )

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कांग्रेस की लूट की, उजागर होती कहानी। जो बरबस ही आ गयी थी, प्रियंका जी की जुबानी! #CorruptionKiDukan #CongressWithCorruption

कांग्रेस की लूट की, उजागर होती कहानी। जो बरबस ही आ गयी थी, प्रियंका जी की जुबानी! #CorruptionKiDukan #CongressWithCorruption

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The Tiranga embodies our national pride and the strength of our unity. Joined the #HarGharTiranga movement by hoisting the national flag. I urge everyone to hoist the Tiranga at home and upload your selfie on to celebrate our patriotism.

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मैं कांग्रेस पार्टी से विनम्रता और चुनौती के साथ एक सवाल पूछना चाहता हूँ। उपचुनावों के परिणाम परसों आए हैं। मात्र एक दिन पूर्व संपन्न उपचुनावों में - आपके बूथ लेवल एजेंट्स ने मतदाता सूची की जाँच कर हस्ताक्षर किए थे या नहीं? - पोलिंग एजेंट्स ने चुनावी प्रक्रिया की जाँच कर उसे प्रमाणित किया था या नहीं? - 45 दिन की समय-सीमा पर हल्ला मचाने वालों के पास अभी 44 दिन बाकी हैं। बताइए, क्या सीसीटीवी फुटेज माँगेंगे या नहीं? सिलचर नगर निगम में तो बैलेट बॉक्स के ज़रिए भी चुनाव हो गया और उसमें बैलेट डब्बे में भी आपका डिब्बा बज गया। 42 में से 34 सीटें भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को मिल गईं। ये मात्र दो साल पहले कहते थे कि EVM Managed है। कोई भी सामान्य सहज बुद्धि से यह समझ सकता है कि यदि EVM Manage करने का आरोप सही हो तो मतदाता सूची मैनेज करने की किसी को ज़रूरत ही क्यों होगी। दोनों आरोप एक साथ लगाने वाला वही हो सकता है जिसमे Bare minimum common sense भी ना हो या ‘बाल बुद्धि’ हो या ‘दिमाग़ी नक्सल ‘ हो । अतः में कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ की कांग्रेस तब EVM पर सच बोल नहीं थी या आज SIR पर सच बोल रही है इसलिए मैं कहना चाहूँगा कि राहुल गांधी न तब सच बोल रहे थे, न आज। तब भी झूठ बोल रहे थे और आज भी झूठ बोल रहे हैं।

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70,260 次观看 • 16 小时前

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आज महामहिम राष्ट्रपति महोदया ने INDI गठबंधन के नेताओं को मिलने का समय दिया था। राहुल गांधी और उनके नेतृत्व में INDI गठबंधन के नेता पिछले कई दिनों से अनर्गल आरोप और निराधार प्रदर्शन कर रहे हैं। महामहिम राष्ट्रपति महोदया के बारे में यह कहना कि उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को स्वीकार कर लिया है, विचित्र है और इसमें सच से अधिक सियासत की गंध आती है। राहुल गांधी लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं को अपनी राजनीति का शिकार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने सारी सीमाएँ पार कर दी हैं। जब उन्होंने देश के सर्वोच्च राजनीतिक संस्था राष्ट्रपति, राष्ट्रपति कोई व्यक्ति नहीं बल्कि देश की सर्वोच्च राजनीतिक संस्था है उनसे मुलाक़ात को भी अपनी राजनीति एक उपकरण बनाने के प्रयास किया। वास्तव में मुलाकात के दौरान क्या बात हुई, यह तो वहाँ मौजूद व्यक्ति ही बता सकता है। लेकिन जिस समय राहुल गांधी यह बयान दे रहे थे, उनके साथ खड़े नेताओं की भाव-भंगिमाएँ और चेहरे के भाव स्पष्ट संकेत दे रहे थे कि कही जा रही बातों का संभवतः सच्चाई से कोई सरोकार नहीं था। इससे पूर्व भी राहुल गांधी सर्वोच्च न्यायालय के वक्तव्य तो अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ कर चौकीदार चोर है का प्रमाण बता कर माफ़ी माँग चुके हैं। अतः सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग और अब राष्ट्रपति जैसे पद को भी अपनी राजनीति का शिकार बना रहे हैं। पूरा वीडियो देखें:

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42,528 次观看 • 2 天前

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अब मैं चुनाव आयोग का जवाब देता हूं। देखिए, मैं यह कहना चाहता हूं कि जो कामचोर हैं, वे वोट चोरी का इल्जाम लगा रहे हैं। बंगाल का चुनाव हुआ। अमित शाह जी ने कहा था, गृह मंत्री जी ने, कि मैं 25 दिन बंगाल में रहूंगा। और 12-13 दिन की रैलियां पंजाब में हो चुकी हैं। मैं पूछना चाहता हूं, जब से राहुल गांधी राजनीति में आए, 2004 से, अभय जी, एक विधानसभा चुनाव बना दें जिसमें राहुल गांधी 25 दिन रहे हों। 25 दिन बहुत बड़ी बात है। 13 दिन रहे हों किसी राज्य विधानसभा चुनाव में, यह बता दें। और कोई ऐसे 25 हफ्ते बता दें, जो संसद का सत्र समाप्त होने के बाद छुट्टी मनाने विदेश में चले गए हों, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 25 साल में 25 दिन भी छुट्टी नहीं ली है। इसीलिए मैं कह रहा हूं, कामचोर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। अब मैं तथ्य भी सामने रखना चाहता हूं। फिर मैं टेक्निकल भी जवाब दूंगा। बंगाल के चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत कितना? 2.99%। 2026 में। उससे पहले 2021 में कितना था? 2.94%। सीट थी, शून्य। शून्य सीट वाला कह रहा है, 2.94% वाला कह रहा है, मेरा वोट चोरी हो गया। जरा दर्शकों के संज्ञान में यह बात ला दें कि आपके पास था क्या, जो चोरी हो गया? हां, हम बताते हैं। हमने यानि BJP and BJP West Bengal - 2014 के लोकसभा चुनाव में 17% वोट पाया बंगाल मे। - जो घटकर 2016 में 10% पर आया, तीन सीटें रह गईं। - 2019 के लोकसभा चुनाव में 41% वोट पाया, 18 सीटें जीतीं। - 2021 में हम 38.5% पर आए, 77 सीटें जीतीं। - 2026 में हमने 45% वोट के साथ 200 सीटें जीतीं। दिखाई पड़ रहा है कि कैसे मेहनत करके, काम करके, 12 साल संघर्ष करके, 326 कार्यकर्ताओं की जान की कीमत चुकाकर, हजारों कार्यकर्ताओं के घायल होने के बाद, हजारों महिला कार्यकर्ताओं की यातना सहकर उस मुकाम तक पहुंचे हैं। और ये कामचोर लोग वो हैं, जो अपने कार्यकर्ताओं की हत्या का विषय भी नहीं उठाते। 2019 का लोकसभा चुनाव याद करिए। जब तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने कहा था मैंने कहा था कि कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी मारे गए हैं, मगर ये लोग बोले नहीं थे। अपने कार्यकर्ताओं की लाशों पर पैर रखकर ममता बनर्जी का स्वागत करते थे। जब अधीर रंजन चौधरी कहते थे, “There is no democracy in Bengal.” ममता कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की हत्याएं करवा रही हैं। उस समय ये so called Save democracy में उनका स्वागत करते थे। ऐसे लोग आकर चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कर रहे हैं। दर्शकों को आंख खोलकर, कान खोलकर इसको सुनना और समझना चाहिए।

Dr. Sudhanshu Trivedi

96,886 次观看 • 9 天前

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लाखों दर्शकों से कहता हूँ, जाकर कोई फैक्ट-चेक करे। 1896 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम् गाया गया, जिसकी अध्यक्षता मुस्लिम नेता रहमतुल्लाह अहमद सयानी ने की। वहाँ से लेकर 1923 तक कभी कोई आपत्ति नहीं हुई। 1923 के अधिवेशन में तो उस समय मोहम्मद अली जौहर ने उसकी अध्यक्षता की थी उन्होंने आपत्ति की फिर भी पूरा गाया। झूठ बोलते हैं ये लोग। मैं पूछना चाहता हूँ, 1896 से 1937 तक हर बार कांग्रेस पूरा गा रही थी, तो 1937 में क्या हुआ जो काट दिया? मुस्लिम लीग और जिन्ना ने कहा कि आपको यह वंदे मातरम् काटना पड़ेगा, आप एक के बाद एक सरेंडर कर रहे थे। 1905 में बंग-भंग के बाद उस समय सारे हिंदू-मुसलमान एक होकर वंदे मातरम् गाते थे, मगर ये कट्टरपंथियों के आगे झुक गए। 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र माँग लिया। फिर उनकी हिम्मत और बढ़ी। फिर 1920 में इन्होंने कहा, टर्की का खलीफा हट गया है, तो अब हम टर्की के खलीफा के लिए आंदोलन करेंगे और महात्मा गांधी ने अली का समर्थन किया। उनकी हिम्मत और बढ़ गई। उसके बाद जिन्ना ने कहा, मैं महात्मा गांधी को महात्मा नहीं बोलूँगा। इसलिए हर फिल्म में मिस्टर गांधी बोलता है। फिर उसने कहा, मैं वंदे मातरम् नहीं गाऊँगा और मैं इनको बताना चाहता हूँ, कोई दर्शक जाकर चेक करे। 6 अप्रैल 1938 को नेहरू को जिन्ना ने एक लेटर लिखा और Selected Works of Jawaharlal Nehru, Series One, Volume 22, Page Number 230 से 239 में लिखा है। क्या शर्मनाक लेटर लिखा है। लिखते हैं, हमने वंदे मातरम् हटा दिया है। पॉइंट नंबर नौ पर। फिर उसके बाद लिखते हैं, पॉइंट नंबर 12 पर, अगर आपको तिरंगे से आपत्ति है, तो हम मुस्लिम लीग के भी झंडे को बराबर सम्मान देने को तैयार हैं। और पॉइंट नंबर सात पर लिखते हैं, मुसलमानों को सरेआम गोहत्या करने का अधिकार होगा। क्या गजब का सरेंडर किया नेहरू ने।

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410,377 次观看 • 1 个月前

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सर्वप्रथम जैसे आपने कहा कि एक बहुत अच्छी खबर है कि हमारी महिला हॉकी टीम ने जापान में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। और आपने कहा कि 44 साल बाद, तो इसका मतलब इससे पहले 1982 में नई दिल्ली में हुए नाइंथ एशियन गेम्स में जीता था। मगर एक और एक और खबर भी है, भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने जो विस्मित करने वाला अदम्य साहस दिखाया है, उससे हर भारतीय गौरवान्वित है। मगर लज्जित करने वाली बात यह है कि राहुल गांधी जी ने अभी तक उनको बधाई नहीं दी है। मैं दर्शकों से सिर्फ एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। सोच रहा हूं, क्यों बधाई नहीं दी है? कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हें लगे कि अगर उन्होंने कैप्टन स्मित की प्रशंसा में कुछ बोला, तो उस वजह से उनके ऊपर ख़ूनी वार करने वाले व्यक्ति के ऊपर नेगेटिव कमेंट चला जाएगा और ‘जय फिलिस्तीन’ वाले किसी वोट बैंक पर असर तो नहीं पड़ जाएगा? यह तो उन्हें साफ करना पड़ेगा, क्योंकि इतना समय हो गया है, अभी तक उनका कोई ट्वीट नहीं आया है। तो सोचिए कि ऐसी सोच रखने वाले लोग जब देश की चुनावी प्रक्रिया पर राजनीति करते होंगे तो उनकी असली सोच क्या होती होगी।

Dr. Sudhanshu Trivedi

66,716 次观看 • 9 天前

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मैं राजनीतिक और मनुस्मृति, दोनों की बात बताता हूं। राहुल गांधी सरासर झूठ बोलते हैं। हकीकत ये है। ये ‘Dismantling Global Hindutva’ के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं राहुल गांधी से ये पितृसत्तात्मक संस्कृति जैसा संस्कृतनिष्ठ शब्द कहाँ से आया ? पर कभी मर्दुम अजीम रवायत सुनी है? चार बीवी क्या है ? तलाक का अधिकार सिर्फ पुरुष को। चुप। हलाला से महिला पवित्र हो जाती है। चुप। मेहरम पता है क्या होता है? हमारी सरकार आने से पहले मेहरम वो होता था कि इस्लामी मान्यता के अनुसार घर से बाहर अगर महिला निकले तो किसी पुरुष की छत्रछाया में होना चाहिए। मेहरम हमने खत्म किया। मेहरम चुप। इस व्यक्ति की हकीकत देखो। जो कहता है हिजाब होना बहुत अच्छा है, मगर हिंदू धर्म में महिलाओं को समानता नहीं है। मैं चैलेंज करके कहता हूं, दुनिया में जितने भी धर्म और मजहब हैं, उनमें भगवान सबको कुछ न कुछ इंट्यूशन देते हैं, भगवान की कृपा होती है। ये पुरुष पर ही क्यों होती है, महिला पर क्यों नहीं? सिर्फ भारतीय संस्कृति ऐसी है, जहां वेदों में 22 ऋषिकाएं हैं अपाला, लोपामुद्रा, मैत्रेयी, संध्या। फैक्ट: मनु स्मृति पर महात्मा गांधी, नेहरू, डा। अंबेडकर ने क्या कहा और इंदिरा गांधी जी के जमाने में क्या छपा। ये आदमी अपने पिता को, दादी को, नेहरू को, गांधी जी को गलत साबित करने में लगा है। ये लोग समाज के अंदर भारत के विरुध्द वैश्विक षड्यंत्र ‘Dismantling Global Hindutva’, जो 2021 में अमेरिकन यूनिवर्सिटी में बना था, इसके बाद जब इन्होंने कास्ट पर लड़ाने का विषय शुरू किया, हेनरी लूसी फाउंडेशन, मार्च 2021, फिर उसके बाद 2022!से तमिलनाडु में कॉन्फ्रेंस शुरू हुई ‘Eradication of Sanatan Dharma’। अब महिलाओं की बात आई है। अगर 4 करोड़ आवास मिले हैं प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में तो 3 करोड़ गरीब महिलाएं उसमें खुद मालिक बनकर बैठी हैं। 55 करोड़ जनधन अकाउंट में 60% महिलाएं हैं। ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, कैबिनेट मंत्रिमंडल में महिलाएं और एयरफोर्स व डिफेंस सर्विसेज में परमानेंट कमीशन मिला है तो हमारे जमाने में मिला है। आज तक जवाब दे दें। मैं चैलेंज करके कहता हूं राहुल गांधी कहो गांधी गलत थे, नेहरू गलत थे, डा अंबेडकर गलत थे, मेरी दादी गलत थी, सब गलत बोल रहे थे। मेरा आविर्भाव हुआ है अपने पूर्वजों व परिवार की बेइज़्ज़ती करे व भारत में अराजकता उत्पन्न करने के लिए।

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335,034 次观看 • 1 个月前

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दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस के प्रथम परिवार का आचरण निहायत ही दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। इससे स्पष्ट है कि उन्हें संवैधानिकता से नहीं, केवल अराजकता से मतलब है। संवैधानिक अधिकार नहीं, खानदानी अहंकार बोल रहा है। जनाधारविहीन कांग्रेस ने अपने आचरण से साबित कर दिया है कि अराजकता ही उसका एकमात्र सहारा रह गया है। कांग्रेस पार्टी से मैं कहना चाहता हूं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी आपको 50 सीटों के लायक समझती है, जबकि आप 50 घंटे से अधिक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फुटेज खा चुके हैं। यानी मीडिया में फ़ुटेज खाने की चाहत में जितने घंटे की फुटेज मिली है उतनी सीटों के लायक भी आपका सहयोगी आपको उत्तर प्रदेश में देने नहीं समझता। यह मीडिया में हल्ला और ज़मीनी हकीकत और आसमानी अहंकार का अंतर है।

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30,596 次观看 • 4 天前

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कांग्रेस की असली हकीकत अब खुलकर सामने आ गई है मुद्दा कोई भी हो, विगत 12 वर्षों में भारत की किसी न किसी संस्था LIC, HAL, SBI, SEBI, Army, Airforce और Vaccine तथा संसद, न्यायपालिका व चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था, इन सब पर आरोप तो सिर्फ़ बहाना है अंततः प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी निशाना हैं। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि संबंधित बूथ पर चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त Booth Level Officer से यदि समस्या लग रही थी तो BLO की सहायता व उन पर निगरानी के लिये उनका अपनी पार्टियों द्वार नियुक्त अपने Booth Level Agent (BLA) ने आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई? चुनाव आयोग के अनुसार राजनीतिक दलों के BLA मतदाता सूची में विसंगतियों को चिन्हित कर सकते हैं। यदि आदरणीय लाल कृष्ण आडवाणी जी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, विदेश मंत्री जय शंकर जी, पूर्व सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी जी, नई दिल्ली की लोकसभा संसद बाँसुरी स्वराज्य जी और स्वयं चुनाव आयुक्त संधु जी के परिवार को भी यदि SIR के नोटिस मिले है। यह स्पष्ट करता है की बग़ैर किसी भेदभाव के यह काम किया गया है यह पूर्णतः प्रोफेशनल्स कंप्यूटर ऑपरेटड सिस्टम से संचालित है क्योंकि यदि कोई व्यक्ति इसमें हस्तक्षेप कर रहा होता तो कम से कम दिल्ली की मुख्यमंत्री भारत के विदेश मंत्री और चुनाव आयुक्त को तो नाम नहीं हो सकता था यह इस बात को प्रमाण है की प्रक्रिया पूरी तरीक़े से निष्पक्ष और पारदर्शी रही है अगर आरोप गंभीर हैं, तो कागजात और प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं कि इन राजनीतिक दलों के द्वारा चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त BLO पर नज़र रखने के लिए पार्टियों द्वार जो BLA नियुक्त किए गए थे उन्होंने एक भी शिकायत या आपत्ति उस समय क्यों दर्ज नहीं की। यह दर्शाता है की यह सब कुछ बाद में सोचे समझे षड्यंत्र के तहत केवल बयानबाजी से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर संदेह पैदा करने का निंदनीय प्रयास है।

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55,393 次观看 • 12 天前

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अभी जो ईरान और अमेरिका के बीच जो संघर्ष हो रहा है, उसमें हमारे विपक्षी दल उछाल उछाल कर चाहते हैं कि देखिए, पाकिस्तान उसमें Mediation कर रहा है और भारत नहीं है। सच यह है कि जब 1979 में ईरान में अमेरिका दूतावास के तमाम कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया था। उस Crisis के बाद, 1980 से अमेरिका और ईरान में कोई राजनीतिक संबंध नहीं थे। न अमेरिका की कोई Embassy ईरान में थी, न ईरान की कोई Embassy अमेरिका में। दोनों ही देशों को इके आवश्यकता भी सामान्य महसूस नहीं होती थी। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद जब अमेरिका centre of Unipolar World हो गया, तब ईरान को जरूरत हुई कि अब अमेरिका से कोई न कोई Communication तो करना होगा। So, from 1992 onwards, Pakistan mediator बना between America and Iran. तो जो ईरान की Embassy पाकिस्तान में थी, वो पाकिस्तान की Embassy के through अमेरिका से communicate करती थी। यानी पाकिस्तान 1981 से गाहे बगाहे और 1992 से विधिवत अमेरिका और ईरान के बीच में communicate कर रहा है। And on the lighter side, पाकिस्तान का काम इधर की चिट्ठी उधर और उधर की इधर ले जाकर देना था। इसलिए पाकिस्तान दशकों से “मैंने प्यार किया” फ़िल्म का चिट्टी ले जाने वाला कबूतर मात्र है। पर हमारे विरोधी दल उसे सलमान ख़ान साबित करने में लगे रहते हैं। ये उनकी problem है, क्योंकि उनको इस विषय का पूरा सच पता नहीं है।

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अपने अदम्य साहस से पूरे देश और विश्व को विस्मित करने वाले कैप्टन स्मित मच्छार पर देश को गर्व है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी उनसे बात कर चुके हैं और इजराइल एवं अमेरिका के राष्ट्रपति भी उनकी बहादुरी की प्रशंसा कर चुके हैं। आज मीडिया में यह भी खबर आई कि आरोपी पायलट इमाम अल हम्मामी को अलकायदा ने समर्थन और प्रशंसा दी है। लेकिन इस गौरव के अवसर पर कांग्रेस के प्रथम परिवार की चुप्पी लज्जित करने वाली है। न एक शब्द, न एक पोस्ट, न कोई प्रेस वक्तव्य। कांग्रेस के प्रथम परिवार की राजमाता, राजकुमारी और एक बिगड़ा दिल शहजादा जो गाजा पर बेहद ग़मज़दा था कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस पर वोट बैंक के डर से इस कदर ख़ौफ़ज़दा है कि मुँह से एक लफ़्ज़ नहीं निकल रहा है। पूरे देश को कांग्रेस के सर्वोच्च नेतृत्व के इस आचरण को गंभीरता से देखना चाहिए।

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राहुल गांधी ने कहा कि anti-incumbency इस देश का established truth है और यह भाजपा के आने के बाद हुआ है। मुझे लगता है कि राजनीतिक दृष्टि से राहुल गांधी विवेक-शून्य और ज्ञान-शून्य हैं। उन्हें देश का राजनीतिक इतिहास ही नहीं पता। हाँ कांग्रेस के लिये ऐतिहासिक Anti incumbency रही है। - 1967 के बाद से तमिलनाडु में कांग्रेस कभी सत्ता में वापस नहीं लौटी। तब भारतीय जनता पार्टी का नाम तक नहीं था। - बंगाल में 1977 के बाद से कांग्रेस सत्ता में वापस नहीं लौटी, और 1977 से 2011 तक 34 वर्षों तक कम्युनिस्टों की सरकार रही, लेकिन राहुल गांधी को यह समझ में ही नहीं आता, दिखाई ही नहीं पड़ता। - बिहार में 1990 के बाद से कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं रही। तीन बार लगातार लालू यादव की सरकार रही, लेकिन राहुल गांधी को इसका भी ज्ञान नहीं है। - 1989 के बाद से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं रही, लेकिन उन्हें इसका भी पता नहीं है। - 1999 के बाद से ओडिशा में कांग्रेस की सरकार नहीं रही, लेकिन यह भी उन्हें पता नहीं है। -त्रिपुरा में लगातार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार रही है, लेकिन उन्हें पता ही नहीं है। यही नहीं, एक जमाने में जब बूथ कैप्चरिंग होती थी, बैलेट बॉक्स लुटते थे, चुनावी हिंसा में लोग मारे जाते थे, तब कांग्रेस की भी लंबे समय तक सरकार रही है, लेकिन उन्हें इसका भी पता नहीं है। पूरा वीडियो देखें:

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आज का विषय सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्र की पहचान, एकता, धर्म और संस्कृति से जुड़ा है। 2014 में ईश्वर के नाम पर शपथ लेने वाले राहुल गांधी ने 2024 में “Solemnly affirm” कहकर शपथ ली।यानि राहुल गांधी का विश्वास ईश्वर पर से हट चुका है और वो नास्तिक हो चुके हैं और हिंदू धर्म पर अनर्गल बातें करते हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी जी जो जुबली हिल हैदराबाद के उप चुनाव में यह कह चुके हैं कांग्रेस मतलब मुसलमान मुसलमान मतलब कांग्रेस। कांग्रेस की ताकत मुसलमान मुसलमान की ताकत कांग्रेस। कांग्रेस अपना ताक़त मुस्लिम को मजबूत करने के लिये हिंदू समाज को बांटने के लिये उत्तर-दक्षिण, आर्य-द्रविड़, बिहार-तेलंगाना, भाषा और जाति, स्त्री पुरुष आदि तरीक़ों से हिंदू समाज को बाँटने की राजनीति हो रही है। अब हिंदू भगवानों को भी विभाजित करने की सीमा तक राजनीति पहुँच गई है। British had the moto ‘divide and rule’, but Congress is having a different moto “divide the Hindus for Muslim rule”

Dr. Sudhanshu Trivedi

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राहुल गांधी ने आज ट्वीट किया कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी निपटा रही है। कांग्रेसियों के लिए आदरणीय और अभिनंदनीय एवं देश के लिए निंदनीय राहुल गांधी जी, आप अपने ही X पोस्ट को इतना भी नहीं पढ़ पाते कि जिनका नाम लेकर आप भाजपा को निपटाने की बात कर रहे हैं उन्हें में कांग्रेस ने ही निपटाया है। NCP का फुलफॉर्म है Nationalist Congress Party, जो कांग्रेस से टूटी हुई है, TMC तृणमूल कांग्रेस के नाम में भी कांग्रेस है। NCP के शरद पवार जी 1999 में विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग हुए थे। लेकिन विदेशी मूल के वारिस राहुल गांधी को अपनी पार्टी का ही मूल नहीं पता। 1997 में ममता बनर्जी जी कांग्रेस के अंदर की परिस्थितियों से दुखी होकर अलग हुई थी और तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। बाद में उन्होंने तृण और मूल से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को ध्वस्त कर दिया था। ऐसो तो नेताओं के बारे में माना जाता है की जो वो भाषण देखते हैं वो कोई और लिखता है। और राहुल गांधी संभवता आज आपने इस पोस्ट के द्वार यह साबित कर गए जो स्वयं लिखते हैं वो स्वयं पढ़ते भी नहीं हैं । पूरा वीडियो देखें:

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मैं कर्नाटक की सरकार से यही पूछना चाहता हूँ। कर्नाटक का स्टेट ऑफिशियल सॉन्ग है: Jaya Bharata Jananiya Tanujate Jaya He Karnataka Mate चुनौतियों में नम्रता से पूछता हूँ। आपका आधिकारिक राजकीय गीत भी भारत के लिए जननी कहता है और कर्नाटक को भी माता कहता है, तब आपकी धार्मिक भावनाएँ नहीं प्रभावित हो रही हैं? और तमिलनाडु का ऑफिशियल सॉन्ग कहता है तमिल थाई यानी तमिल माता। समझ में नहीं आ रहा है कि कर्नाटक माता कहने में समस्या नहीं है, भारत माता के आगे ही प्रणाम करने में सारी धार्मिक भावनाएँ आहत हो जा रही हैं। इसका मतलब इसका किसी भी प्रकार के सामाजिक, सांप्रदायिक, सामाजिक सद्भाव से कोई लेना-देना नहीं है। यह सीधे-सीधे कट्टरपंथी ताकतों के आगे और मुस्लिम लीग के आगे झुकाव ही नहीं, मुस्लिम लीग के आगे पूरी तरह सिजदा करने की कांग्रेस की नीति का यह प्रमाण है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

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वंदे मातरम् के संपूर्ण गायन को लेकर संसद द्वारा पारित नियम के बावजूद कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने X पर जो आपत्ति की है उसने उसका असली चेहरा सामने ला दिया है। कांग्रेस के सहयोगी दलों, यहाँ तक कि NCP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता भी संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन में सम्मिलित हो रहे हैं, मगर कांग्रेस को आपत्ति है।अर्थात् कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी भी उसके साथ नहीं हैं केवल मुस्लिम लीग को छोड़कर। के.सी. वेणुगोपाल जी महात्मा गांधी, सरदार पटेल और राजेंद्र बाबू का नाम लेते हैं, लेकिन केरल में, जहाँ से राहुल गांधी सांसद रह चुके हैं और प्रियंका गांधी सांसद हैं, जहाँ कांग्रेस का मुख्य मंत्री है वहाँ कांग्रेस के नेता प्रथम दो छंद भी नहीं बोल रहे।यानि अपने ही पूर्वजों का अपमान कर रहे हैं। अब कोई संदेह नहीं, कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग बन चुकी है। सेकुलरिज्म का नकाब उतर चुका है और कांग्रेस ने कट्टरपंथी ताकतों के आगे पूर्ण रूपेण आत्मसमर्पण कर अपने को नई मुस्लिम लीग बना रही है।

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