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चन्द्रशेखर आजाद अमेरिका में 12 करोड़ की रोल्स-रॉयस कार से घूम रहे हैं। खास बात यह है कि यह रोल्स-रॉयस किराए की नहीं है।

चन्द्रशेखर आजाद अमेरिका में 12 करोड़ की रोल्स-रॉयस कार से घूम रहे हैं। खास बात यह है कि यह रोल्स-रॉयस किराए की नहीं है।

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मोहम्मद दीपक पर उंगली भी उठी, तो बहुत लोगों को दिक्कत हो जाएगी - चंद्रशेखर आजाद

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Phule फिल्म को देखने वाले भी हम, प्रमोट करने वाले भी हम, लेकिन अफ़सोस की बात है कि फिल्म डायरेक्टर ANANTH N MAHADEVAN ने हममें से किसी को भी फिल्म देखने का निमंत्रण नहीं भेजा।

Phule फिल्म को देखने वाले भी हम, प्रमोट करने वाले भी हम, लेकिन अफ़सोस की बात है कि फिल्म डायरेक्टर ANANTH N MAHADEVAN ने हममें से किसी को भी फिल्म देखने का निमंत्रण नहीं भेजा।

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मैं रात को ग्वालियर हाईकोर्ट के मेन गेट के बाहर खड़ा था, वीडियो शूट कर रहा था। तभी एक पुलिसवाले ने बड़े ही रूखे अंदाज़ में मुझे आवाज लगाई। मैंने उसे बताया कि मैं मीडिया से हूं और परमिशन लेकर शूट कर रहा हूं। ये सुनकर वो थोड़ा नरम पड़ा और मैं आगे बढ़ने लगा। लेकिन तभी पीछे खड़ा एक और पुलिसवाला पहले वाले से कुछ फुसफुसाया, और फिर उसी ने मुझे दोबारा आवाज लगाई — ‘वीडियो डिलीट करो।’ मैंने साफ मना कर दिया। फिर उसने पूछा — ‘नाम क्या है?’ मैंने कहा — ‘अंजुल।’ बोला — ‘पूरा नाम बताओ।’ मैंने कहा — ‘अंजुल बम्हरोलिया।’ इतना सुनते ही वो चुप हो गया और मुझे जाने दिया। असल में उसे ये जानना था कि कहीं मैं अंजुल जाटव या वाल्मीकि तो नहीं हूं। पत्रकार हूं, ये बात तो समझ आ गई थी… लेकिन उसकी असली चिंता मेरी जाति को लेकर थी। कहीं अंबेडकरवादी तो नहीं हूं, क्योंकि पोल खोलने वाले ज़्यादातर वही लोग हैं।

मैं रात को ग्वालियर हाईकोर्ट के मेन गेट के बाहर खड़ा था, वीडियो शूट कर रहा था। तभी एक पुलिसवाले ने बड़े ही रूखे अंदाज़ में मुझे आवाज लगाई। मैंने उसे बताया कि मैं मीडिया से हूं और परमिशन लेकर शूट कर रहा हूं। ये सुनकर वो थोड़ा नरम पड़ा और मैं आगे बढ़ने लगा। लेकिन तभी पीछे खड़ा एक और पुलिसवाला पहले वाले से कुछ फुसफुसाया, और फिर उसी ने मुझे दोबारा आवाज लगाई — ‘वीडियो डिलीट करो।’ मैंने साफ मना कर दिया। फिर उसने पूछा — ‘नाम क्या है?’ मैंने कहा — ‘अंजुल।’ बोला — ‘पूरा नाम बताओ।’ मैंने कहा — ‘अंजुल बम्हरोलिया।’ इतना सुनते ही वो चुप हो गया और मुझे जाने दिया। असल में उसे ये जानना था कि कहीं मैं अंजुल जाटव या वाल्मीकि तो नहीं हूं। पत्रकार हूं, ये बात तो समझ आ गई थी… लेकिन उसकी असली चिंता मेरी जाति को लेकर थी। कहीं अंबेडकरवादी तो नहीं हूं, क्योंकि पोल खोलने वाले ज़्यादातर वही लोग हैं।

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हर किसी को Phule फिल्म पसंद आई, फिर भी पता नहीं क्यों फिल्म फ्लॉप हो रही है ?

हर किसी को Phule फिल्म पसंद आई, फिर भी पता नहीं क्यों फिल्म फ्लॉप हो रही है ?

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एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया में लोग यह फिल्म देखना चाहते हैं, लेकिन वहां भी फिल्म नहीं लगी। इससे पहले उन्होंने जयंती फिल्म की भी प्राइवेट स्क्रीनिंग करवाई थी ANANTH N MAHADEVAN पहली बार देखा है लोग फिल्म देखना चाहते हैं लेकिन देख नहीं पा रहे हैं।

एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया में लोग यह फिल्म देखना चाहते हैं, लेकिन वहां भी फिल्म नहीं लगी। इससे पहले उन्होंने जयंती फिल्म की भी प्राइवेट स्क्रीनिंग करवाई थी ANANTH N MAHADEVAN पहली बार देखा है लोग फिल्म देखना चाहते हैं लेकिन देख नहीं पा रहे हैं।

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ग्वालियर हाईकोर्ट में जहां डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लगाई जानी थी, वहां की आज की ताजा स्थिति यह है पीछे कई पेड़ नजर आ रहे हैं, बीच में एक फव्वारा है और उसके ठीक सामने एक बेस (आधार) दिखाई दे रहा है। इसी बेस पर उस दिन डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लगाई जानी थी, लेकिन उसे रोक दिया गया। अगर नियमों की अनदेखी की जा रही थी, तो हाईकोर्ट परिसर में यह छोटा सा स्ट्रक्चर कैसे बन पाया ? रेत और सीमेंट से भरी गाड़ियां हाईकोर्ट के अंदर तक किस आधार पर आईं ?

ग्वालियर हाईकोर्ट में जहां डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लगाई जानी थी, वहां की आज की ताजा स्थिति यह है पीछे कई पेड़ नजर आ रहे हैं, बीच में एक फव्वारा है और उसके ठीक सामने एक बेस (आधार) दिखाई दे रहा है। इसी बेस पर उस दिन डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लगाई जानी थी, लेकिन उसे रोक दिया गया। अगर नियमों की अनदेखी की जा रही थी, तो हाईकोर्ट परिसर में यह छोटा सा स्ट्रक्चर कैसे बन पाया ? रेत और सीमेंट से भरी गाड़ियां हाईकोर्ट के अंदर तक किस आधार पर आईं ?

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NEET के एग्जाम पर हम एक बहुत बड़ा आंदोलन देश भर के स्तर पर करेंगे हम बच्चों के साथ खड़े हैं - चंद्रशेखर आजाद

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करोड़ों साल बाद शिवानी कुमारी 🔥 ने खाने पर बुलाया। इस मौके पर छोटी बहन को भारत का संविधान तोहफे में दिया। बिग बॉस से आने के बाद अब मैं उससे मिलने गया क्योंकि मैं कोरपस को भी साथ ले जाना चाहता था। कोरपस मेरा पूरा परिवार संभालती है, और इसी कारण हम दोनों साथ में कहीं भी घूमने नहीं जा पाते। इसलिए मैंने सोच रखा था कि जब भी शिवानी कुमारी से मिलने जाऊंगा, कोरपस को साथ लेकर जाऊंगा। इस वजह से मिलने में देरी हो गई।

करोड़ों साल बाद शिवानी कुमारी 🔥 ने खाने पर बुलाया। इस मौके पर छोटी बहन को भारत का संविधान तोहफे में दिया। बिग बॉस से आने के बाद अब मैं उससे मिलने गया क्योंकि मैं कोरपस को भी साथ ले जाना चाहता था। कोरपस मेरा पूरा परिवार संभालती है, और इसी कारण हम दोनों साथ में कहीं भी घूमने नहीं जा पाते। इसलिए मैंने सोच रखा था कि जब भी शिवानी कुमारी से मिलने जाऊंगा, कोरपस को साथ लेकर जाऊंगा। इस वजह से मिलने में देरी हो गई।

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झूठ ऐसा कब हुआ ? की 4% परसेंट वाला कलेक्टर बन गया और 99% परसेंट वाले ने जूते की दुकान खोली ?

झूठ ऐसा कब हुआ ? की 4% परसेंट वाला कलेक्टर बन गया और 99% परसेंट वाले ने जूते की दुकान खोली ?

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लोग हंसते थे, मजाक उड़ाते थे।अब चुप हैं चंद्रशेखर आजाद का नाम इतिहास में लिखा जाएगा जैसे साहब कांशीराम का लिखा गया था

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मनीषा और रानी दोनों बहनों को तोहफे में भारत का संविधान दिया

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ग्वालियर हाईकोर्ट के मामले में आज 11 तारीख को भीम आर्मी का बड़ा प्रोग्राम है, चारों तरफ पुलिस ही पुलिस है

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कंगना तुम अपने नाम और काम के बल पर तो जीत भी नहीं पाओगी #Boycott_Casteist_Kangana

कंगना तुम अपने नाम और काम के बल पर तो जीत भी नहीं पाओगी #Boycott_Casteist_Kangana

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मूर्ति वहीं लगेगी 🔥 अब पूरे भारत के लोग बोल रहे हैं

मूर्ति वहीं लगेगी 🔥 अब पूरे भारत के लोग बोल रहे हैं

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बहुत बुरा हुआ है 😡 सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर 🔥 बहनजी ने कहा।

बहुत बुरा हुआ है 😡 सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर 🔥 बहनजी ने कहा।

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फैशन नहीं, बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें जीना सिखाया है, इसलिए हम उनका नाम लेते हैं।

फैशन नहीं, बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें जीना सिखाया है, इसलिए हम उनका नाम लेते हैं।

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खुशखबरी! बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लग गई है। वह भी पूरे मान-सम्मान से 💙

खुशखबरी! बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लग गई है। वह भी पूरे मान-सम्मान से 💙

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डॉ बाबासाहेब आंबेडकर जी के जन्म दिवस, 14 अप्रैल पर, महू जन्मभूमि से आप सभी को बहुत-बहुत मंगलकामनाएँ।

डॉ बाबासाहेब आंबेडकर जी के जन्म दिवस, 14 अप्रैल पर, महू जन्मभूमि से आप सभी को बहुत-बहुत मंगलकामनाएँ।

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इसी वजह से स्टैंडिंग ओवेशन मिला 👏 अवा डूवर्ने ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल में अपनी फिल्म 'Origin' के प्रदर्शन से इतिहास बना दिया है। उन्होंने यहाँ पर पहली बार एक अफ्रीकी-अमेरिकी महिला के रूप में फिल्म प्रस्तुत की है। 'Origin' फिल्म इजाबेल विल्करसन की पुलिट्जर पुरस्कार विजेता पुस्तक 'Caste: The Origins of Our Discontents' पर आधारित है और यह जातिवाद और गहरे भेदभाव के मुद्दों को छूने का प्रयास करती है। फिल्म में भारत की दलित "अछूत" जाति, नाजी जर्मनी, और दक्षिणी अमेरिका के जिम क्रो विभाजन के बारे में भी बताया गया है। इसने दिखाया है कैसे निम्न जाति के लोगों को इतिहास में अपमानित किया गया है। खास बात यह है surajyengde भाई ने इस फिल्म में अहम रोल निभाया है Congratulation Bro 😎

Anjul Bamhrolia

377,709 görüntüleme • 2 yıl önce