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Arshad Madani

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President Jamiat Ulama-i-Hind | Principal Darul Uloom Deoband | Vice President All India Muslim Personal Law Board

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जो बातें सत्तर वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि बीस करोड़ मुसलमानों की “घर वापसी” कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी माँ का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं। जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज़ जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती। आज देश के भीतर नफ़रत की आग भड़काई जा रही है, हत्या-हिंसा का माहौल बना हुआ है, दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएँ हो रही हैं, गाय के नाम पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है, और सरकार खामोशी बनाये हुए है। इसके बावजूद कुछ लोग यह ऐलान करते फिर रहे हैं कि इस देश में वही रहेगा जो उनके विचारधारा पर चलेगा। यह सोच न केवल भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है बल्कि देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी बेहद खतरनाक है। जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सांप्रदायिक और नफ़रत फैलाने वाली सोच की कड़ी विरोधी रही है और जब तक जिंदा रहेगी, इसका विरोध करती रहेगी। मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे; मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा। और इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है। याद रखिए धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, इसलिए जो लोग धर्म का उपयोग नफ़रत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। हमें हर स्तर पर ऐसे लोगों की निंदा और विरोध करना चाहिए। [Old Video Posted By Admin] #ArshadMadani | #GharWapasi | #घर_वापसी

Arshad Madani

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि “नफ़रत की राजनीति ने देश को आग के ढेर पर ला खड़ा किया है। सत्ता के नशे में सांप्रदायिक ताक़तें संविधान बदलने और देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं, जो देश को तबाही की ओर ले जाने के समान है। नफ़रत की राजनीति दरअसल देश से वफ़ादारी नहीं, बल्कि उसके अमन और चैन से ग़द्दारी है। जो लोग धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाते हैं, वे कभी धर्म के प्रतिनिधि नहीं हो सकते हैं, क्योंकि धर्म हमेशा अमन, मोहब्बत और आपसी सम्मान का पैग़ाम देता है। आज हर व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है कि वह सांप्रदायिकता के मुक़ाबले प्यार, एकता और भाईचारे को बढ़ावा दे, क्योंकि अगर आज ख़ामोशी इख़्तियार की गई तो कल देश की शांति को ख़तरा हो सकता।” [Posted By Admin] #OldVideo #ArshadMadani

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सांप्रदायिक शक्तियाँ क्या जानें कि मुसलमानों ने इस देश की आज़ादी के लिए कितनी महान कुर्बानियाँ दी हैं। यदि उनसे कहा जाए कि वे अपने पूर्वजों के नाम बताएं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में कोई बलिदान दिया हो, तो वे असफल हो जाएँगे, इतिहास प्रस्तुत करना तो दूर की बात है। दुर्भाग्य की बात यह है कि आज वही मदरसे, जहाँ से आज़ादी की आंदोलन की चिंगारी उठी थी, और वही उलेमा, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपनी जानें कुर्बान की थीं, उन्हें आतंकवाद का अड्डा बताया जा रहा है और यह कहा जाता है कि वहाँ आतंकवाद की तालीम दी जाती है। यही सोच वास्तव में देश के विनाश की मूल वजह है। हमारी स्वतंत्रता संग्राम की तारीख डेढ़ सौ वर्षों से अधिक उज्ज्वल रही है, जबकि सांप्रदायिक शक्तियाँ अपनी कोई ठोस इतिहास प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं। आज मुसलमानों की इस गौरवशाली इतिहास को मिटाने की कोशिश की जा रही है, जो न केवल मुसलमानों के साथ बल्कि पूरे देश और उसके इतिहास के साथ भी खुला अन्याय है। #ArshadMadani | #Republicday | #IndianMuslims

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आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि : 1857 का स्वतंत्रता संग्राम अंग्रेज़ों के विरुद्ध भारत की सबसे बड़ी संगठित लड़ाई थी, जो कई कारणों से असफल हो गई। इस संघर्ष का दोष ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश सरकार ने मुसलमानों और विशेष रूप से उलेमा पर मढ़ दिया और उन पर भयंकर अत्याचार किए। इतिहास के अनुसार इस युद्ध में लगभग दो लाख मुसलमान शहीद हुए, जिनमें इक्यावन हज़ार उलेमा शामिल थे। अंग्रेज़ों की दुश्मनी इस कदर बढ़ गई थी कि दाढ़ी और सफ़ेद कपड़े देखकर ही लोगों को फाँसी दे दी जाती थी। और दिल्ली की जामा मस्जिद से चाँदनी चौक तक पेड़ों पर उनकी लाशें लटकी हुई थीं। आज इस त्याग और बलिदान से भरे इतिहास को भुलाया जा रहा है और उसे तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। जबकि हम इस देश से सच्ची मोहब्बत करते हैं। यह देश हमारा है, हमारे पूर्वज सदियों से यहाँ रहते आए हैं, और हमने हमेशा शांति, भाईचारे और आपसी प्रेम के साथ रहना पसंद किया है। हमारा विश्वास है कि जब तक देश में मोहब्बत और आपसी सौहार्द बना रहेगा, तब तक यह देश आगे बढ़ता और तरक्की करता रहेगा। #RepublicDay2026 #ArshadMadani

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