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Ashok Gehlot

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Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura.

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AICC महासचिव श्री Sachin Pilot ने आवास पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. श्री राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मैं और राजेश पायलट जी 1980 में पहली बार एक साथ ही लोकसभा पहुंचे एवं लगभग 18 साल तक साथ में सांसद रहे। उनके आकस्मिक निधन का दुख हमें आज भी बना हुआ है। उनके जाने से पार्टी को भी गहरा आघात लगा।

AICC महासचिव श्री Sachin Pilot ने आवास पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. श्री राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मैं और राजेश पायलट जी 1980 में पहली बार एक साथ ही लोकसभा पहुंचे एवं लगभग 18 साल तक साथ में सांसद रहे। उनके आकस्मिक निधन का दुख हमें आज भी बना हुआ है। उनके जाने से पार्टी को भी गहरा आघात लगा।

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आ रहा है... इंतजारशास्त्र। सवा दो साल से चल रहा राजस्थान की जनता का इंतजार‌‌। आज शाम 6 बजे।

आ रहा है... इंतजारशास्त्र। सवा दो साल से चल रहा राजस्थान की जनता का इंतजार‌‌। आज शाम 6 बजे।

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वन के नए मेहमान स्वागत करे राजस्थान रणथंभौर के वन से बाघ के 3 नए शावकों के जन्म का सुखद समाचार प्राप्त हुआ। जंगल का ये खूबसूरत वीडियो हमारी बाघ व वन्य जीव संरक्षण की प्रतिबद्धता की पुष्टि कर रहा है। राजस्थान बाघ अभ्यारण टीम को हार्दिक बधाई व शाबाशी।

वन के नए मेहमान स्वागत करे राजस्थान रणथंभौर के वन से बाघ के 3 नए शावकों के जन्म का सुखद समाचार प्राप्त हुआ। जंगल का ये खूबसूरत वीडियो हमारी बाघ व वन्य जीव संरक्षण की प्रतिबद्धता की पुष्टि कर रहा है। राजस्थान बाघ अभ्यारण टीम को हार्दिक बधाई व शाबाशी।

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कल रात 11 बजे कोटा रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्वागत के लिए पधारे सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार।

कल रात 11 बजे कोटा रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्वागत के लिए पधारे सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार।

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास जी के आवास पहुंचकर उनके पार्थिव देह को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया एवं सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे एवं नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास जी के आवास पहुंचकर उनके पार्थिव देह को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया एवं सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे एवं नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की।

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उदयपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

उदयपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

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पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक के पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक के पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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जायडस अस्पताल, अहमदाबाद में पूर्व स्पीकर श्री Dr. C.P. Joshi, गुजरात कांग्रेस के नेता श्री Gaurav Pandya के साथ वहां भर्ती डॉ. गिरिजा व्यास के परिजनों से मुलाकात कर उनकी हिम्मत बढ़ाई।

जायडस अस्पताल, अहमदाबाद में पूर्व स्पीकर श्री Dr. C.P. Joshi, गुजरात कांग्रेस के नेता श्री Gaurav Pandya के साथ वहां भर्ती डॉ. गिरिजा व्यास के परिजनों से मुलाकात कर उनकी हिम्मत बढ़ाई।

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आप सभी प्रदेशवासियों को नवरात्रा स्थापना पर हार्दिक शुभकामनाएं। मातारानी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

आप सभी प्रदेशवासियों को नवरात्रा स्थापना पर हार्दिक शुभकामनाएं। मातारानी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

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भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया: ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब हों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे। सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है। 25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्री बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या बाद में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए। और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, शपथ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है। क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिया खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब वो भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है। एक तो जो मीडिया जो है, वो सच्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो। सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं। एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या इनकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है? हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं चाहता इशू बना रहे। हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे। लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उनको मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी। भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं। दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ने कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?

Ashok Gehlot

88,627 görüntüleme • 10 saat önce

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सवाल - डीके शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. जवाब - जिस रूप में ये पूरा जो सत्ता का फैसला हुआ परिवर्तन करने का मुख्यमंत्री को यह, ये मानता हूं पूरे देश के अंदर लोग मानते हैं कि राहुल गांधी जी ने बहुत ही तरीके से सबसे बात करके सबको विश्वास में लेकर के ये परिवर्तन का फैसला किया और क्यूंकि सिद्धारमैया जी बहुत अनुभवी थे लंबे समय तक राजनीति की उन्होंने अच्छा काम किया उन्होंने भी। पर क्योंकि राजनीति में कई बार फैसले होते हैं अब डीके शिवकुमार जी भी काबिल हैं कर्मठ हैं समर्पित हैं पार्टी के लिए भी अपने प्रदेश के लिए भी और देश के लिए भी, और समय-समय पर देखा हमने जब भी बीजेपी की सरकार ने एनडीए गवर्नमेंट ने और बीजेपी ने विशेष रूप से सरकारें गिराने का काम किया मध्य प्रदेश के अंदर चाहे वो कर्नाटक में हो चाहे महाराष्ट्र में हो चाहे राजस्थान में हो उसे वक्त हमेशा डीके शिवकुमार जी खड़े रहे पार्टी के साथ में, जो भी उनको काम उनको ज़िम्मेदारी दी गई उन्होंने निभाई। बल्कि आपको याद होगा जब हिमाचल में भी बीजेपी ने हॉर्स ट्रेडिंग की थी 5 MLAs को तोड़ लिया हमारा उम्मीदवार अभिषेक मनुसिंघवी हार गया तब भी डीके शिवकुमार जी गए थे वहां पर और जाकर उन्होंने समझाइश करी और सरकार बचा ली। तो वो एक अलग ढंग के व्यक्तित्व के धनी हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके बनने के बाद में एक नए उत्साह के साथ में वो आगे बढ़ेंगे और कामयाब मुख्यमंत्री के रूप में काम करेंगे। मेरी बहुत-बहुत बधाइयां हैं और मेरी उनसे बात भी हुई मैंने उनको बधाई दे दी है और शुभकामनाएं दे दी हैं।

Ashok Gehlot

80,307 görüntüleme • 7 gün önce

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पत्रकार - कल राहुल गांधी जी भी आएंगे कार्यक्रम में आप भी वहां पहुंच रहे हैं किस तरह देखते हैं जवाब - देखिए एक नया प्रयोग उन्होंने एक नई पॉलिसी बनाई है कि हर जिले के अंदर, पहले पर्यवेक्षक जिले में जाएंगे इंडिपेंडेंट, वो कोई कागज असेप्ट न करें, वो खुद असेसमेंट करके नाम देकर आए पांच नाम उनमें से सिलेक्शन करें तो उसमें पूरे मुल्क में सिलेक्शन हो रहे हैं अधिकांश जगह हो भी गए हैं। उसके साथ में प्रशिक्षण शिविर लग रहा है 10 दिन का, अब 10 दिन में उनका फैकल्टी वाले भी आते हैं और मैंने सुना सब तरह से उनको ऐसी ग्रूमिंग की जा रही है जिससे कि आने वाले वक्त में वो अपने जिले में सबको साथ लेकर चल सकें। जब यह कह दिया गया कि अगर मान लीजिए इन्होंने अच्छे काम किया तो हम इनको CEC जो होती है टिकट डिस्ट्रीब्यूशन कमेटी उसमें इनको चांस देने बैठने का बोलने का आपका असेसमेंट क्या है जिले के अंदर विधायक के लिए एमपी के लिए, तो बहुत बड़ा निर्णय है। अब पूरा खेल डिपेंड करेगा जो बने हैं हर राज्य में जिला अध्यक्ष बने हैं वह राहुल गांधी जी की भावना को कितना आत्मसात करते हैं किस रूप में अपने आप को समर्पित करते हैं, किस रूप में घर-घर कॉन्टैक्ट करते हैं। गांव हो ढांडी हो या हर परिवार हो उनके टिप पर होना चाहिए पूरा जिला जो उनको दिया गया है तब जाकर वह प्रभावित कर पाएंगे वहां के लोगों को भी और जो राहुल जी का संदेश है खड़गे साहब का है वो पहुंचाने में भी कामयाब होंगे और जो समस्याएं हैं चाहे बेरोजगारी की है महंगाई की है लॉ एंड ऑर्डर की है जो भी समस्या है उनको भी जनता तक पहुंचने में कामयाब होंगे। हमारे लोगों ने काम करना अच्छा शुरू किया है जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं राजस्थान के अंदर भी धरने भी हो रहे हैं एक ऐसी शुरुआत हुई है। इन कैंप के बाद में मैं समझता हूं और ज्यादा मजबूती से काम होगा।

Ashok Gehlot

36,659 görüntüleme • 7 gün önce

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सवाल - सर अभिषेक बनर्जी है सांसद बंगाल में उनके साथ मारपीट हुई है कल? जवाब - देखिए पूरा मैंने पहले ही कह दिया आपको कि अगर बीजेपी जीत गई बंगाल में मैंने कलकत्ता जाकर यह बात कही वहाँ पर मीडिया को भी अगर बीजेपी की एंट्री हो गई पूरा देश निराश होगा यह मैंने सोच समझकर कहा था क्योंकि बीजेपी की एंट्री जो बंगाल में अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है उनकी, उनका त्याग उनका बलिदान अलग ढंग का है सुभाष चंद्र बोस से लगाकर रविंद्र नाथ टैगोर तक के अलग-अलग वहां पर औरा बने हुए हैं उसे राज्य में अगर बीजेपी घुसती है और वो देखा आपने किस रूप में घुसी है, घुसी नहीं है इलेक्शन कमीशन ने घुसाई है जबरदस्ती ढाई लाख लोग लगा दिए वहां पर, अरे मैंने सुना तीन लाख लोग तो पूरे देश में लगते हैं चुनाव होते हैं जब और एक राज्य में ढाई लाख लोग ठूस दिए। यूपी के आईपीएस अफसर गए आपने देखा गालियों मोहल्ले में जाकर धमका रहे हैं लोगों को उनका काम है ही नहीं आईपीएस का वह तो खाली ऑब्जर्व करते हैं वहां पर चाहे आईएएस हो चाहे आईपीएस हो और वहां पर स्थित यह बन गई तो चुनाव जिस प्रकार SIR किया 27 लाख वोट मैं बार-बार कहता हूं चुनाव पोस्टपोन होने चाहिए थे और मैं नहीं कहता हूं मैं देखता हूं अच्छे-अच्छे पत्रकार आपके जो इंटेलेक्चुअल हैं जो बोलते हैं सोशल मीडिया पर वो खुद कहते हैं 27 लाख लोगों को वोट से आप कैसे वंचित कर सकते हो उनका फैसला नहीं होता तब तक 3 महीने 4 महीने 6 महीने पोस्टपोन कर दो चुनाव पर चुनाव हो गई 27 लाख के बगैर भी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कमेंट भी आ गया उनका कोई वकील लोग समझ नहीं पाए होंगे कि इस बार नहीं तो अगली बार वोट दे देंगे ऐसा कभी होता है क्या जो आदमी का वोट देने का अधिकार है वो एक वोट भी वंचित नहीं रहना चाहिए। तो आज जो बनर्जी के साथ में घटना आप कह रहे हो यह तो घटना क्योंकि वो नेता हैं वहां टीएमसी के इसलिए प्रकाश में आ गई है वहां जब से चुनाव टीएमसी हारी है तब से वहां गुंडागर्दी जो यह अपने आप को आरएसएस बीजेपी के कहते हैं हम तो चाल चरित्र और चेहरे वाले लोग हैं ये पूरी तरह एक्सपोज हैं वहां पर गली गली में गुंडागर्दी हो रही है, उनके ऑफिसेज पर हमले हो रहे हैं, ऑफिसेज खाली करवाए जा रहे हैं, क्या नहीं हो रहा है बंगाल के अंदर? पूरा देश देख रहा है तो ये और इलेक्शन कमीशन भी चुप है पुलिस सरकार बदलते ही खुद बदल जाती है सब जानते हैं,उनकी मजबूरी होती है कि जो मुख्यमंत्री है उनकी बात माननी होती है। ऐसे हालत में देश चले गया है, भारत सरकार तो क्योंकि डबल इंजन है तो वो इंजन भी उनके पक्ष में हो गया, डबल मार पड़ रही है वहां पर डबल इंजन की मार पड़ रही है। जो मोदी जी कहते हैं डबल इंजन की सरकार बनेगी डबल इंजन ऐसा काम आता है गुंडागर्दी में काम आ रहा है, बहुत ही ऐसे हालात हैं जो पूरे देश को युवा पीढ़ी को समझना चाहिए कि देश किस दिशा में जा रहा है क्या विचारधारा होनी चाहिए। जो संविधान बाबा साहब अंबेडकर ने कहा गांधी जी ने कहा उस भावना के आधार पर देश चल रहा है क्या? तमाम ऐसी बातें जो है हमारे जेहन में होनी चाहिए और अगर युवा पीढ़ी भी आगे नहीं आएगी तो कौन आएगा उनको विचारधारा की राजनीति में उतरना चाहिए,जो छात्र हैं या युवा हैं उनका राजनीति में प्रवेश करने का वक्त आ गया है। ऐसे हालात है देश के अंदर मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं आज जमाना जो है हमारी युवा पीढ़ी और छात्र राजनीति करने वाले लोग सबको विचारधारा के आधार पर चिंतन मनन करना चाहिए, वह किस पार्टी में जाएं उनके ऊपर है पर कम से कम विचारधारा क्या है देश की क्या होनी चाहिए उसपर उनका अपना एक विचार होना चाहिए

Ashok Gehlot

25,246 görüntüleme • 7 gün önce

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महंगाई राहत शिविरों के अवलोकन व जनता से बात करने पर फीडबैक आया कि बिजली बिलों में मिलने वाली स्लैबवार छूट में थोड़ा बदलाव किया जाए. - मई महीने में बिजली बिलों में आए फ्यूल सरचार्ज को लेकर भी जनता से फीडबैक मिला जिसके आधार पर बड़ा फैसला किया है. - - 100 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली उपभोग वालों का बिजली बिल शून्य होगा. उन्हें पूर्ववत कोई बिल नहीं देना होगा. - 100 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा उपभोग करने वाले वर्ग के परिवारों को भी पहले 100 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी यानी कितना भी बिल क्यों ना आए, पहले 100 यूनिट का कोई भी विद्युत शुल्क नहीं देना होगा. - खासकर मध्यम वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए 200 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को पहले 100 यूनिट बिजली फ्री के साथ 200 यूनिट तक के स्थायी शुल्क, फ्यूल सरचार्ज एवं तमाम अन्य शुल्क माफ होंगे एवं इनका भुगतान राज्य सरकार करेगी.

Ashok Gehlot

1,794,477 görüntüleme • 3 yıl önce

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स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब : जोधपुर की बात छोड़ो, मेरे संबंध उनसे अच्छे हो गए थे। वो बत्तीस पर आ गए, मैं 156 पर आ गया। तब भी हमारा उस वक्त से ही संबंध अच्छे रहे। सीधा मैं शपथ लेकर उनके घर गया। वो लंबी कहानी छोड़ दो। मैं कह चुका हूं। मीडिया द्वारा पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को डिले करने को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब: आज फिर खबर पढ़ी मैंने कि OBC का जो रिकमेंडेशन है उसके लिए तो अपने हिसाब से करेंगे। नीयत खराब है, हाईकोर्ट दो बार कह चुका, इस सरकार को भंग करने लायक सरकार है ये। मैंने पहले भी कहा, ऐसी सरकार जो संविधान की पालना नहीं कर रही है। हमने प्रयास किया, नहीं माना स्ट्राइक के वक्त में हमें चुनाव करवाने पड़े। हम भी कोई बहाना ढूंढ लेते। आज ये चुनाव नहीं कराने के बहाने ढूंढते हैं। इतनी घबराई हुई है कि साफ हो जाएंगे हम नगर निकायों में, पंचायतों में। को-ऑपरेटिव में चुनाव नहीं करवा रहे। कल आए को-ऑपरेटिव वाले मेरे पास में। राजस्थान के अंदर स्थिति बड़ी गंभीर है, हर वर्ग असंतुष्ट है। ऐसी सरकार आजादी के बाद में कभी आई नहीं होगी, यह मैं कह सकता हूं। ये मंत्री जी हैं न आपके जो इनको मैं कहना चाहूंगा अगर आप ये दस साल में मेरे साथ दो-तीन बार चाय पी लेते तो इनको कम से कम मैं सुझाव देता काम कैसे कराए जाते हैं। ब्रॉड गेज आ गई जोधपुर के अंदर, दो ट्रेन चलती थी, अब पचास चलती होंगी। हिंदुस्तान भर में जुड़ गए हम लोग, पानी लेकर हम आ गए। क्या-क्या काम उस वक्त नहीं हुआ बताइए आप। एयरपोर्ट भी उस वक्त बना था। सब कुछ हमारे वक्त में काम हुए और काम भी इस प्रकार से हो गए जो लोग कल्पना नहीं करते थे। लोग मांग नहीं करते थे, उसके पहले काम हो जाते थे। यह हमारी अप्रोच थी। अब यह पता नहीं अपने को तीस मार खां समझते होंगे कि सब अक्ल मेरे में ही है इसलिए किसी को सलाह करते नहीं हैं। अरे हम भी यहां के एमपी रहे हुए हैं। हमसे बातचीत करते, बैठ के बातचीत करते, चाय पर बुलाते, चाय पर आते, कुछ करते तो हम भी अपने जो अनुभव थे, शेयर करते हम लोग। हो सकता है राजस्थान का या जोधपुर का भला ज्यादा होता। ये अपनी भूमिका पूरे राजस्थान में निभा सकते थे। पर ये तो ये तो यही हैं। बड़ी-बड़ी मीठी बातें करते रहते हैं और काम पास कर रहे हैं। तो भाई इनको समझाओ कम से कम जोधपुर में आपकी बारह साल में क्या उपलब्धि है। बारह साल हो गए मोदी जी को, बारह साल इनको हो गए। इनको बताओ एक उपलब्धि, बताएं कि मेरे वक्त में उपलब्धि हो गई। ये ओवर ब्रिज बन रहा है, पता नहीं कब बनेगा, वो भी मैंने गडकरी जी को कह करके इसको सेंक्शन करवाया। ठीक है वो केंद्रीय मंत्री हैं तो मुझे एतराज नहीं है। पर मेरा सुझाव था क्योंकि मैंने कहा स्टेट गवर्नमेंट से एक हज़ार करोड़ के मैंने सेंक्शन कर दिए इसके लिए, तो मुझे पता था कि ये जो आपका एरिया है, क्या बिल्डिंग का नाम क्या है, हैदर बिल्डिंग, यहां हमें तकलीफ आएगी क्योंकि अंडर ब्रिज बन सकता है ओवर ब्रिज भी हो सकता है, तो मैंने कहा ये काम, ये एक्सपर्टाइज़ करते हैं गडकरी जी और इनका डिपार्टमेंट। वो बनाएं इस बात को लेकर, डीपीआर करवा दी और मेरे ख्याल से मोदी जी ने शिलान्यास भी कर दिया, मैंने सुना है। पता नहीं आगे काम कितना बढ़ रहा है।

Ashok Gehlot

21,460 görüntüleme • 12 gün önce

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आज दौसा के मानपुर में सिलिकोसिस पीड़ितों एवं उनके परिवारों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात की: हमारी कांग्रेस सरकार ने 2013 में 4 लाख की सहायता राशि शुरू की, 2019 में देश की पहली सिलिकोसिस पॉलिसी बनाई जिसमें 5 लाख रुपए सहायता + निशुल्क इलाज + ₹1500 मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया। 2019 से 2023 के बीच में 35,000 मरीजों को ₹911 करोड़ की सीधी मदद दी गई। लेकिन आज BJP सरकार की संवेदनहीनता के कारण नए कार्ड नहीं बन रहे, पुराने कार्ड अकारण ब्लॉक हैं एवं अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी पॉलिसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सैकड़ों विधवाएं, हजारों बीमार परन्तु सरकार मौन है। सहायता राशि के अभाव में मजदूर दम तोड़ रहे हैं। यह अमानवीय है। मैं मांग करता हूं कि सरकार तत्काल सिलिकोसिस पीड़ितों के कार्ड बनाए, ब्लॉक कार्ड खोले और पॉलिसी का पूर्ण लाभ दे।

Ashok Gehlot

85,815 görüntüleme • 1 ay önce

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आज जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की : राज्य सरकार द्वारा जोधपुर की उपेक्षा किए जाने पर मेरी प्रतिक्रिया : देखिए सबसे बड़ी बात है कि 12 साल पूरे हो गए तो अलग बात है कि 12 साल में कोई उपलब्धि नहीं रही है। धर्म के नाम पर राजनीति हुई और उसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे। अब नतीजे क्या निकलेंगे आने वाले फ्यूचर के अंदर वक्त बताएगा, अभी उस पर कहने की आवश्यकता नहीं है। पर धर्म के नाम पर राजनीति करना एक अलग बात है और पब्लिक समस्याओं से रूबरू होना दूसरी बात है। आज हर क्षेत्र में, जोधपुर की बात करें, तो पीने के पानी का संकट पैदा हो गया जोधपुर में, जिसके लिए हमने 20 साल मेहनत करी होगी जब इंदिरा गांधी कैनाल का पानी लिफ्ट करके 50 दौरे मैंने किए होंगे नहर पर तब पानी आया और तीसरा फेस जो है अभी वो 1500 करोड़ लगभग हम लोग विदेश से ऋण ले रहे थे। देरी हो रही थी तो मैंने स्टेट बजट से 1400 करोड़ रुपए मैंने मंजूर कर दिए कि जोधपुर और आसपास के गांव प्यासे नहीं रहने चाहिए। वो काम भी धीमे चल रहा है। सरकार चली गई तो मॉनीटरिंग करने का कोई हिसाब ही नहीं है यहां पर तो। मुख्यमंत्री को पता ही नहीं पड़ता कि जोधपुर लिफ्ट थर्ड बला क्या है। अब जिस मुख्यमंत्री को नहीं पता था हो तब वो कैसे उसकी मॉनिटरिंग करेंगे, वो इंटरेस्ट ले ही नहीं रहे हैं। अभी मैंने उनसे बात करी, मेरी बर्थडे पर उनका फोन आया था तो मैंने कहा जो प्रोजेक्ट जोधपुर में बन रहे हैं या बन गए हैं, सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी बन गई। स्पोर्ट्स का कॉम्प्लेक्स बन गया, 90 करोड़ रुपए की लागत से, और जो काम हो गए हैं, मेडिकल यूनिवर्सिटी बन रही है। लंबी लिस्ट है मेरे पास। आप बताइए नई सड़क पार्किंग का ये हो गया और चार जगह शानदार बिल्डिंग खड़ी हैं, प्रताप नगर, मंडोर हॉस्पिटल , दिगाडी के अंदर, चौपांकी, शानदार बिल्डिंग हैं बाहर के लोग देख के आश्चर्य होता है कि इतनी शानदार बिल्डिंग है। पड़ी पड़ी खराब हो जाएगी। ना इक्विप्मेंट है ना डॉक्टर है। इस सरकार को क्या करें? पूरे राजस्थान में हाहाकार मचा हुआ है। मेरा दावा है , मीडिया वालों मैंने कहा था जयपुर में मेरा दावा कोई मीडिया वाला हम खर्चा देंगे, आप जहां चाहो राजस्थान के किसी गांव में किसी भी गांव में जाओ,आप सरकार की हकीकत से रुबरु हो जाओगे। सरकार नाम की चीज है क्या? हमारे वक्त की योजनाओं को आज लोग याद कर रहे हैं, कोई थैला लेकर चल रहा है, कोई पेंशन नहीं मिल रही पाँच छह महीने से, वो सरकार को कोस रहा है, दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं, RGHS भी लगभग बंद हो गया, प्राइवेट अस्पताल वाले पैसे वसूल करने लग गए हैं, कागजों में चिरंजीवी योजना लागू है तब भी प्राइवेट वालों ने हड़ताल कर दी, 40 दिन हो गए, मैने सुना कल परसों खोल रहे हैं उसको, तो 40 दिन तक इलाज नहीं हुआ और जेब से पैसा देना पड़ा। क्या सरकार भरपाई करेगी ? वादा भी किया लोगों से कि अभी देना पड़ेगा आपको, पैसा मिल जाएगा तो हम आपको वापस दे देंगे। तो सरकार सुनिश्चित करें ऐसे मेकेनिजम डेवलप करे जिससे कि पैसा दिलाए उन लोगों को सरकार, वो पैसे उनको वापस मिले तब जाकर ही हमारी जो स्कीम बनाई थी चिरंजीवी योजना वो लागू मानी जाएगी, ये मेरा मानना है। तो कहने को बातें बहुत सारी है। मैंने बताया कि लिफ्ट कैनाल की कोई लापरवाही हो रही है। अब क्लोजर होता है, हर साल होता है पंजाब से, हमारे वक्त में भी हुआ था, पर हमने एडवांस में मैनेजमेंट किया, वहां की सरकार से बातचीत करी, चीफ सेक्रेटरी से बातचीत करी और ये नौबत नहीं आने दी कि कोई संकट ही पैदा हो जाए, आज देखिए क्या हो रहा है। पीने के पानी के लिए जो राजस्थान में हिंदुस्तान के अंदर नंबर वन होना चाहिए था जोधपुर, इतना पानी आ चुका है कायलाना के अंदर भरा पड़ा है सारा पानी। अब पानी आगे सेआएगा नहीं तो ये क्या करेंगे? तो मेरा कहने का मतलब यह सरकार की लापरवाही आपके सामने है, जोधपुर की उपेक्षा हो रही है, मुख्यमंत्री जी पाँच बार दस बार आ चुके, पता नहीं कितनी बार आए होंगे मुझे पता नहीं, आपको ज्यादा मालूम है। ( मीडिया पांच साल जल मंत्री के जोधपुर आने पर मीडिया के जिक्र पर) कितनी बार आए हैं वो? पता नहीं कितनी बार आए हो, गिनती नहीं है मतलब। तो आप बताइए उसके बाद में ये मैंने कहा मुख्यमंत्री को जो मैंने पाँच छह नाम गिनाए, बिल्डिंग बन चुकी है, फिनटेक इंस्टीट्यूट हिंदुस्तान में एक मात्र ऐसा होगा जो अलग से टेक्निकल है वो, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर के इंस्टीट्यूट बन रहा है,इस प्रकार की जगह बहुत कम बनी होगी, दुनिया की मैं नहीं कह सकता पर हिंदुस्तान में बहुत कम बने होंगे वो हमने बनाया है। 1/2.

Ashok Gehlot

16,524 görüntüleme • 12 gün önce

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राजस्थान में बिगड़ते हालातों पर प्रतिक्रिया : राजस्थान की स्थिति के बारे में मैं आपको बार-बार बता चुका हूँ। मैंने कोटा जाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि वहाँ एक प्रिंसिपल, जो रिटायर हो चुके थे, पार्टी से लौटते समय नाले में गिर गए और उनकी मौत हो गई। मैं सरकार को यह संदेश देने जा रहा हूँ कि पूरे राजस्थान में नालों, खाइयों और सीवरेज सिस्टम की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। जयपुर में ही 500-600 नाले हैं, लेकिन मैंने सुना है कि उनमें से मुश्किल से 100 ही ठीक किए गए हैं। यही हाल पूरे प्रदेश का है। यह घटना इसलिए सामने आ गई क्योंकि मृतक एक प्रिंसिपल थे। लेकिन न जाने कितने लोग रोज़ फ्रैक्चर का शिकार होते होंगे, कितनों को ब्रेन हैमरेज होता होगा, कितनों की हड्डियां टूटती होंगी, जिनकी किसी को खबर तक नहीं लगती। पूरे प्रदेश में सड़कें खुदी पड़ी हैं और उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। सरकार पेमेंट नहीं कर रही, इसलिए ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। कई जगह आधा-अधूरा काम बीच में ही रोक दिया गया है। क्या ये बातें मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँचतीं? हर विभाग का ठेकेदार परेशान है। उनका कहना है कि बिना पेमेंट के वे आगे काम कैसे करें। सभी ठेकेदार बड़े नहीं होते, छोटे ठेकेदार भी होते हैं। हालत यह हो गई है कि काम बंद पड़े हैं और जनता परेशान हो रही है। स्थिति बेहद गंभीर है। अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत हो गई। जो महिलाएं बच्चे को जन्म देने अस्पताल गई थीं, वे खुद ही अपनी जान गंवा बैठीं। उनके परिवारों पर क्या बीतती होगी? लेकिन सरकार में कोई संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

Ashok Gehlot

14,817 görüntüleme • 11 gün önce

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राजस्थान विश्वविद्यालय में RSS द्वारा शस्त्र पूजा का कार्यक्रम रखना ही आपत्तिजनक है। शिक्षा के स्थान को इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना कैसे उचित माना जा सकता है? जब NSUI के कार्यकताओं ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। इसके साथ ही, RSS के कार्यकर्ताओं ने कानून को अपने हाथों में लेकर NSUI के कार्यकताओं से मारपीट की। यह दिखाता है कि राजस्थान में अब कानून का राज खत्म होता जा रहा है और RSS ही एक्स्ट्रा कॅन्सिट्यूशनल अथॉरिटी बन गई है। इस घटनाक्रम की जितनी निंदा की जाए वो कम है। बड़े शर्म की बात है कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई और पुलिस इसे रोकने में असफल रही। इसका आशय है कि पुलिस RSS के दबाव में है। यदि पुलिस इसी तरह दबाव में रही तो कानून व्यवस्था कैसे संभालेगी।

Ashok Gehlot

239,817 görüntüleme • 8 ay önce