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Ashok Gehlot

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Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura.

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AICC महासचिव श्री Sachin Pilot ने आवास पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. श्री राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मैं और राजेश पायलट जी 1980 में पहली बार एक साथ ही लोकसभा पहुंचे एवं लगभग 18 साल तक साथ में सांसद रहे। उनके आकस्मिक निधन का दुख हमें आज भी बना हुआ है। उनके जाने से पार्टी को भी गहरा आघात लगा।

AICC महासचिव श्री Sachin Pilot ने आवास पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. श्री राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मैं और राजेश पायलट जी 1980 में पहली बार एक साथ ही लोकसभा पहुंचे एवं लगभग 18 साल तक साथ में सांसद रहे। उनके आकस्मिक निधन का दुख हमें आज भी बना हुआ है। उनके जाने से पार्टी को भी गहरा आघात लगा।

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वन के नए मेहमान स्वागत करे राजस्थान रणथंभौर के वन से बाघ के 3 नए शावकों के जन्म का सुखद समाचार प्राप्त हुआ। जंगल का ये खूबसूरत वीडियो हमारी बाघ व वन्य जीव संरक्षण की प्रतिबद्धता की पुष्टि कर रहा है। राजस्थान बाघ अभ्यारण टीम को हार्दिक बधाई व शाबाशी।

वन के नए मेहमान स्वागत करे राजस्थान रणथंभौर के वन से बाघ के 3 नए शावकों के जन्म का सुखद समाचार प्राप्त हुआ। जंगल का ये खूबसूरत वीडियो हमारी बाघ व वन्य जीव संरक्षण की प्रतिबद्धता की पुष्टि कर रहा है। राजस्थान बाघ अभ्यारण टीम को हार्दिक बधाई व शाबाशी।

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आ रहा है... इंतजारशास्त्र। सवा दो साल से चल रहा राजस्थान की जनता का इंतजार‌‌। आज शाम 6 बजे।

आ रहा है... इंतजारशास्त्र। सवा दो साल से चल रहा राजस्थान की जनता का इंतजार‌‌। आज शाम 6 बजे।

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कल रात 11 बजे कोटा रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्वागत के लिए पधारे सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार।

कल रात 11 बजे कोटा रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्वागत के लिए पधारे सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार।

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास जी के आवास पहुंचकर उनके पार्थिव देह को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया एवं सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे एवं नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास जी के आवास पहुंचकर उनके पार्थिव देह को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया एवं सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे एवं नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की।

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उदयपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

उदयपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

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पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक के पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक के पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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आप सभी प्रदेशवासियों को नवरात्रा स्थापना पर हार्दिक शुभकामनाएं। मातारानी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

आप सभी प्रदेशवासियों को नवरात्रा स्थापना पर हार्दिक शुभकामनाएं। मातारानी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

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श्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर मोदी सरकार की चुप्पी ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने को मजबूर होना पड़ा है। आज मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर वार्ता की : मैं बहुत लंबे अरसे से कह रहा हूँ कि यह देश किस दिशा में जा रहा है, कोई नहीं जानता किस दिशा में जाएगा, किसी को नहीं मालूम। यह जो 1 महीने के तमाशे हैं,सरकार ने इस समस्या को जिस रूप में लेना चाहिए था,लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है। NEET पेपर आउट हो गया। जो रिस्पॉन्स देना चाहिए था सरकार को,उसमें पूरी तरह फेल हो गई। आंदोलन शुरू हो गए। भूख हड़ताल पर लोग बैठ गए 15-20-20 दिन तक। और सरकार का कोई नुमाइंदा, चाहे सरकारी हो, चाहे वह मंत्री हो, कोई जा के मिले ही नहीं उनसे, बात भी नहीं करे कि आप चाहते क्या हो। राहुल गांधी लगातार जब से घटना हुई, तब से इस्तीफा मांग रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान जी से। कोई जवाब नहीं, सरकार का एक्शन भी नहीं तो यह जो हालात बने हैं आज, वह बहुत दुखद है और बहुत ही अनफॉर्चुनेट है कि नेता प्रतिपक्ष को चाहे वह लोकसभा के हैं, चाहे राज्यसभा के हैं,राहुल जी को, खड़गे साहब को, अनेकों सांसद भी हैं, प्रियंका गांधी जी भी हैं,उनको बैठना पड़े पीएम हाउस के सामने, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा? आप सोच सकते हैं कि देश-दुनिया में क्या मैसेज जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी क्लेम करते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मुल्क हमारा है। क्या-क्या क्लेम नहीं करते हैं! सब जो दावे करते हैं जाके विदेशों में घूम-घूम के,उन सब की पोल खुल चुकी है इस देश के अंदर, जिस प्रकार का व्यवहार सरकार कर रही है और हालात बहुत गंभीर हैं। जो आक्रोश फूट पड़ा है पब्लिक के अंदर,नौजवानों के अंदर, छात्रों के अंदर, वह सरकार जो सोच रही है, असेसमेंट कर रही है, उससे कई गुना अधिक है। इसको समझना पड़ेगा सरकार को। अगर सरकार का कोई लोकतंत्र में विश्वास बचा है थोड़ा बहुत भी, तो समझना पड़ेगा कि आक्रोश बहुत भयंकर है। यह जो कल दिल्ली में हजारों बच्चे इकट्ठे हो गए पूरे देश भर के,जिस प्रकार लाठीचार्ज हुआ, बेरहमी से पीटा गया लड़कियों को भी, लड़कों को भी,बच्चे छोटे बच्चे भी, छोटे उम्र के भी थे।पर जिस प्रकार पुलिस ने नादिरशाही तरीका अपना करके, जो कुछ भी पिटाई का जो तरीका अपनाया अगर आप दृश्य देखेंगे, तो आप समझ जाएंगे कि उनकी मंशा किस प्रकार की रही होगी या क्या उनका आदेश मिले होंगे सबक सिखाने के,यह समझ के परे है। आंसू गैस के गोले छोड़ दिए,पिटाई कर दी। तो कई पूरे आंदोलन में कई तरह के रहस्य भी हैं। कल मैं देख रहा था कि यह जो बैरीकेड्स लगे हुए हैं, उनको पुलिस खुद ही हटा रही है। जो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे,उनको हटाया जा रहा है। यह एक नया तरीका निकाला पुलिस ने। हटाने का कारण क्या है? जब आंदोलन चल रहा है, बैरीकेडिंग तो और स्ट्रांग करते, स्ट्रेंथन करते। हटाए क्यों गए? स्पेस बनाने के लिए बैरीकेडिंग हटाए जा रहे हैं। इतिहास में मैंने पहली बार देखा इस प्रकार का कोई जवाब मिलेगा। यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। कोई डिस्कशन में आ रहा है यह पॉइंट।पर समझ के परे है कि यह किस प्रकार से स्पेस बनाने के लिए हटाए गए। जो प्रोटेस्ट करने वाले लोग हैं, जितने प्रदर्शनकारी, उनका मानना है कि यह जानबूझकर हटाए गए। जिस प्रकार का तरीका अपनाया गया लाठीचार्ज का बदनाम करने के लिए आंदोलन को या जो मार्च निकाला उसको, कि क्योंकि पार्लियामेंट तक पहुँच गए थे, इसलिए हमने लाठीचार्ज कर दिया, आंसू गैस के गोले छोड़ दिए। यह जस्टिफाई करने के लिए तरीका हो सकता है। यह जो लोग फीडबैक दे रहे हैं, उसमें यही फीडबैक आ रहा है। अगर इस प्रकार के हथकंडे अपनाए जाएंगे, तो आप सोच सकते हो क्या होगा डेमोक्रेसी का? वैसे आक्रोश जो है,वह जो फूट के सामने आया है,जो छात्र-छात्राएं और युवा लोग जो कमेंट दे रहे हैं मीडिया के सामने, अनेकों कमेंट्स एक से मिलेंगे आपको, कि किस प्रकार के हालात देश में, लोकतंत्र नाम की चीज़ नहीं रही है,सुनवाई नहीं हो रही है, किनके पास जाके क्या शिकायत करें,कोई क्षेत्र में सुनवाई नहीं हो रही है। शिकायत भी नहीं हो पा रही,शिकायत किससे करें? यह जो हालात बने हैं पूरे कंट्री के अंदर, वह आक्रोश था, इसीलिए पूरे मुल्क के राज्यों से, दूर-दूर से कई जगह तो मां-बाप के इच्छा के विरुद्ध भी बच्चे आए और भाग लिया उन्होंने आंदोलन के अंदर। तो आज राहुल जी और खड़गे साहब और सब लोग बैठे हैं,अब जा के मंत्री बुला रहे हैं आंदोलनकारियों को, कभी जा के मिल रहे हैं,आज अचानक भेज दिया गया मंत्री जी को मिलने के लिए राहुल जी से। यह नौबत क्यों आई? यह तो सरकार को सोचना पड़ेगा। 1/2

Ashok Gehlot

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पत्रकार का सवाल: अशोक गहलोत साहब अब राजस्थान में ही राजनीति करेंगे या दिल्ली जाएँगे? मेरा जवाब: देखिए, मैंने पहले भी कहा है और आज फिर दोहराता हूँ- 'मैं थांसू दूर नहीं' (मैं आपसे दूर नहीं हूँ)। अब मैं चाहे लंदन जाऊँ, दिल्ली जाऊँ, जयपुर रहूँ, जोधपुर जाऊँ या जालौर जाऊँ, मैं राजस्थान की जनता से कभी दूर नहीं हो सकता। मैं कहीं भी रहूँ, राजस्थान वासियों की सेवा करना ही मेरा परम कर्तव्य और धर्म है। राजस्थान की जनता ने मुझे पाँच बार सांसद बनाया, छह बार विधायक बनाया, केंद्रीय मंत्री बनाया और तीन-तीन बार मुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी दी। तीन बार मुख्यमंत्री बनना कोई छोटी बात नहीं होती! श्रीमती सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी ने मुझ पर भरोसा जताकर न सिर्फ मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, बल्कि हर बार पूरे पाँच-पाँच साल तक काम करने का अवसर दिया। पूरे हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जहाँ अक्सर मुख्यमंत्री बदलते रहते हैं। मुझे इस पार्टी और जनता से सब कुछ मिला है। अब मेरा यह फ़र्ज़ बनता है कि मैं अपने लिए किसी पद की माँग न करूँ। पार्टी मुझे जो भी ज़िम्मेदारी देगी, चाहे वह जोधपुर की हो, जालौर की हो, पूरे राजस्थान की हो, या दिल्ली में संगठन के किसी पद की हो, मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूँगा, लेकिन खुद से कोई माँग नहीं करूँगा। हाईकमान जो भी फैसला करेगा, मुझे मंज़ूर है। मैं देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ (Politician) हूँ। जब मुझे पार्टी से बिना माँगे सब कुछ मिला है, मैं इंदिरा गांधी जी के समय ही केंद्रीय मंत्री बन गया था तो फिर अब मैं किसी पद की लालसा क्यों रखूँ? आज देश और पार्टी के सामने बहुत बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिन्हें हमें गहराई से समझना होगा। हमारा एकमात्र लक्ष्य पार्टी को हर स्तर पर मज़बूत करना है। राहुल गांधी जी ने स्पष्ट रूप से आह्वान किया है कि दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों (Minorities) पर कहीं भी कोई अन्याय या अत्याचार हो, तो कांग्रेस कार्यकर्ता तुरंत उनके पास पहुँचे, उनके सुख-दुख का साथी बने और ज़रूरत पड़ने पर उनके हक के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करे। राहुल जी की इस बात में हमारी भविष्य की पूरी राजनीति और सेवा का मर्म आ जाता है।

Ashok Gehlot

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर AICC में प्रेस वार्ता : *कांग्रेस सरकार द्वारा बंसी पहाड़पुर से लीगल तरीके से मंदिर निर्माण के लिए पत्थर उपलब्ध करवाया गया था* राजस्थान के लोगों का एक अलग लगाव है क्योंकि जब मंदिर बन रहा था तब वहाँ इल्लीगल माइनिंग हो रही थी। बंसी पहाड़पुर करके जगह है एक भरतपुर के अंदर, पत्थर वहीं से मंदिर बनने के लिए जा रहा था। मिस्टर चंपत राय जी मेरे से मिले थे और एक और कोई दिनेश जी या कोई नाम थे वो भी आए थे। मैंने उनको कहा, "आप पवित्र काम करने की बात करते हो राम मंदिर की, तो अवैध पत्थर मत ले जाओ। इसको आप लीगल माइनिंग का पत्थर ले जाओ।" वो जो एरिया था बंसी पहाड़पुर का, वहाँ पर इल्लीगल माइनिंग हो रही थी, तो बात फिर पीएमओ तक गई, फिर मिस्टर नृपेंद्र मिश्रा मेरे संपर्क में आए और उनको पूरी बात समझाई गई। फिर हमने रिकमेंड किया वहाँ उस एरिया को फारेस्ट से निकालने का। फिर फारेस्ट एरिया से निकाला गया। राम मंदिर का मामला था, तो स्मूथली वो काम भी हो गया वरना तो वो बरसों लग जाते हैं, निकलता नहीं है। हमें धन्यवाद भी दिया गया, वो अलग बात है। इस पवित्र काम में भी चोरी हो जाए या इतने बड़े रूप में जो आरोप लग रहे हैं और ऐसा माहौल बन जाए कि पूरे देश के अंदर हर गाँव में, हर घर में चर्चा होने लग जाए तो एक विश्वासघात वाली बात हो गई।

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पत्रकार का प्रश्न : सर जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या हुई है। जवाब : देखिए कानून को तोड़ के कोई हत्या करता है, वह तो हत्यारा होता है। चाहे जेल के अंदर हो, चाहे फील्ड में हो, चाहे कहीं हो। इसलिए मुझे इसकी जानकारी तो है नहीं, मीडिया में खबर आई है, तो यह तो इनकी लापरवाही तो है, कि जेल के अंदर कैसे तो मतलब ऐसी स्थिति बन गई और पहले बीकानेर में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। जगह-जगह घटनाएं होती हैं तो दुख होता है, कि जेल के अंदर कैसे तो हथियार पहुँच जाते हैं, कैसे हत्याएं होती हैं, कैसे मोबाइल पहुँच जाते हैं। तो यह तो जेल के जो हमारे अधिकारी हैं और सरकार है, उनको चाक-चौबंद होना चाहिए जिससे कि ऐसी घटनाएं नहीं हों। कानून अपना काम करे। कानून चाहे जगन गुर्जर हो चाहे कोई हो, अपना काम करे। परंतु इस प्रकार से अगर हत्याएं होती हैं आपस के अंदर ही, तो कल उसने मारा कल उसको और कोई मार देगा मान लीजिए। तो यह चलता रहेगा क्या सिलसिला? तो यह अच्छी बात थोड़ी है। यह कोई जाट, गुर्जर और किसी जाति की बात नहीं है। यह बात है कि आप किस प्रकार से हत्या हो जाती है जेल के अंदर, तो आपस में हत्याएं होने लग गईं। तो यह कोई सिलसिला रुकेगा ही नहीं। तो यह चिंता सरकार को होनी चाहिए। पत्रकार का प्रश्न : सर, यह कोई पैरामेडिकल जो एग्जाम्स थीं, उसको भी निरस्त करने का फैसला किया गया है, गड़बड़ी के चलते। जवाब : यह कल आए थे बच्चे मेरे पास में, बहुत तकलीफ में थे बेचारे कि साहब हमने इतनी मेहनत करी, एग्जाम का वक्त आया और पेपर लीक हो गया। अब यह किस मुँह से हमें दोष दे रहे थे? इनके वक्त में तो ओएमआर शीट भी और यह पेपर लीक हो रहे हैं और यह पूरे देश में हो रहे हैं। नीट का पेपर तो केंद्र सरकार, एनटीए की देखरेख में हो रहा था। तो यह जो है, इनके पास कोई जवाब तो है नहीं। हमें बदनाम करने का पूरा इन्होंने षड्यंत्र किया था चुनाव में, उसमें कामयाब हो गए थे। अब जनता के सामने एक्सपोज हो गए हैं, यह बोलने की स्थिति में नहीं रहे हैं।

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121,150 просмотров • 26 дней назад

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भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया: ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब हों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे। सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है। 25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्री बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या बाद में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए। और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, शपथ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है। क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिया खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब वो भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है। एक तो जो मीडिया जो है, वो सच्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो। सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं। एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या इनकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है? हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं चाहता इशू बना रहे। हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे। लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उनको मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी। भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं। दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ने कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?

Ashok Gehlot

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25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में: आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे। तीन-तीन बार मुख्यमंत्री कम नहीं होता देखो। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। अभी संकट जो मैं कह रहा हूँ देश संकट में है, तो क्यों नहीं तुम आगे आ-आकर के हम सब मिलकर देश की रक्षा करें? कांग्रेस का औरा जो राजस्थान में है, हिंदुस्तान में वो हमें महसूस है, दिल्ली में रैली होती है सबसे अधिक लोग राजस्थान से जाते हैं। हाईकमान इस बात को जानता है। 20-25 साल से मैं देख रहा हूँ। इसलिए कृपा करके सब मतभेद भूलो, सब एक हो जाओ। और इस मीडिया वालों को, मेजर क्या वो मीडिया जो मुख्य मीडिया है वो मीडिया जो आपका क्या कहलाता है, गोदी मीडिया। अब गोदी मीडिया का गोदी हटे ये उन मीडिया वालों से चाहिए कि अब गोदी हटवा दें वो अपना। वो तब हटवा पाएँगे जब ईमानदारी के साथ में सामाजिक सरोकार रखेंगे, देश हित में बात करेंगे, और सरकार के दबाव में नहीं आएँगे तो जाकर के ये तमगा गोदी मीडिया का हटेगा। और सोशल मीडिया में मैं कहना चाहूँगा कृपा करके आप सच्चाई पे चलो, और आप सचिन पायलट को नुकसान मत करो। बहुत नुकसान कर चुके हो, बहुत नुकसान कर चुके हो। इतना नुकसान कर दिया आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं बराबर सुनता रहता हूँ उनको। अब मैं कहता हूँ अब किसको जाके मैं कहूँ? किसको जाके कहूँ? कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता है और कमेंट कर देते हैं हम लोगों पर। कुछ एबीसीडी पता नहीं उनको, और रिवोल्ट हो गया, रिवोल्ट हो गया। अरे, रिवोल्ट कैसे हो गया? अगर 100 लोगों ने कहा कि हमने साथ दिया हाईकमान का, सरकार हमने बचाई है। हम में से किसी को भी बना देते मुख्यमंत्री, क्या गलत कहा उन्होंने? क्या गलत कहा उन्होंने? और उसको रिवोल्ट बता रहे हैं वो हाईकमान के खिलाफ है, पर मैंने माफी माँगी सोनिया गांधी से फिर भी, मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था। मैं नेता था विधायक दल का, मुझे तीन बार बिना माँगे हुए सोनिया गांधी ने मुझे मुख्यमंत्री पद दिया। 1998 के अंदर, 2008 में सेकंड टाइम मुख्यमंत्री बनाया मुझे सोनिया जी ने, थर्ड टाइम तो मैं 21 पे आया हुआ था। 2013 में मैं 21 पे आया हुआ था, तभी तीसरी बार राहुल गांधी जी ने, सोनिया जी ने, प्रियंका जी ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया। मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद जहाँ गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, उस कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? मैं मना करूँगा? वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया। हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा। जिस मीडिया ने बातें फैलाई थी, मैं चुप रहा, और चुप भी मैं इसलिए रहा मुझे सोनिया जी को बताना था कि चाहे ये पायलट के खिलाफ रिवोल्ट था या क्या था, मुझे मतलब नहीं है। आज मैं आया हूँ सिर्फ इसलिए कि मैंने जो है, मैं नेता था विधायक दल का। ऑब्ज़र्वर आए हुए थे एआईसीसी के, एआईसीसी ऑब्ज़र्वर के मायने होते हैं। चाहे वो खड़गे साहब थे चाहे अजय माकन जी थे, और मैं प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया। हालाँकि, मैंने रात को कहा था कि आप अभी इस मीटिंग को बंद करते हैं, कल वापस मीटिंग बुलाकर के अपन बात करेंगे। वो स्थिति बनी नहीं हमारी, इसलिए वो इसलिए जो है, वो नहीं हो पाया प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। मैंने जाके सॉरी फील किया मैडम के सामने कि मैं विधायक दल का नेता था। मुझे सब कुछ पार्टी ने दिया है, उसके बाद में भी ये स्थिति बन गई तो मैं माफ़ी चाहता हूँ। ये बात थी।

Ashok Gehlot

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कुछ दिन पहले सिविल लाइंस आवास पर आए एक एसी मैकेनिक ने गर्व से बताया कि उनकी माताजी, जो मनरेगा में मजदूरी करती हैं, कांग्रेस सरकार की 'इन्दिरा गांधी स्मार्टफोन योजना' के माध्यम से डिजिटल दुनिया से जुड़ चुकी हैं। उनके आग्रह पर वीडियो कॉल के जरिए निवाई (टोंक) निवासी श्रीमती यशोदा कुमावत और उनकी साथी महिला श्रमिकों से बातचीत हुई। बातचीत में उनकी पीड़ा और अपेक्षाएँ साफ़ झलकीं। उनका एक ही कहना था-"हमें वीबी-जी राम जी योजना नहीं, मनरेगा चाहिए।" वे चाहती हैं कि मनरेगा में काम के दिनों की संख्या बढ़े, समय पर रोजगार मिले और जनहितकारी योजनाओं को फिर से प्रभावी बनाया जाए। आज से भाजपा सरकार ने महात्मा गांधी जी के नाम पर यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना का नाम बदलकर 'वीबी-जी राम जी योजना' कर दिया है। श्रमिकों में चिंता है कि कहीं यह बदलाव केवल नाम तक सीमित न रह जाए, बल्कि उनके रोजगार के अधिकार और काम की उपलब्धता पर भी असर डाले। उनकी स्पष्ट मांग है-नाम बदलने से नहीं, काम बढ़ाने से मजदूरों का जीवन बदलेगा।

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महंगाई राहत शिविरों के अवलोकन व जनता से बात करने पर फीडबैक आया कि बिजली बिलों में मिलने वाली स्लैबवार छूट में थोड़ा बदलाव किया जाए. - मई महीने में बिजली बिलों में आए फ्यूल सरचार्ज को लेकर भी जनता से फीडबैक मिला जिसके आधार पर बड़ा फैसला किया है. - - 100 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली उपभोग वालों का बिजली बिल शून्य होगा. उन्हें पूर्ववत कोई बिल नहीं देना होगा. - 100 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा उपभोग करने वाले वर्ग के परिवारों को भी पहले 100 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी यानी कितना भी बिल क्यों ना आए, पहले 100 यूनिट का कोई भी विद्युत शुल्क नहीं देना होगा. - खासकर मध्यम वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए 200 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को पहले 100 यूनिट बिजली फ्री के साथ 200 यूनिट तक के स्थायी शुल्क, फ्यूल सरचार्ज एवं तमाम अन्य शुल्क माफ होंगे एवं इनका भुगतान राज्य सरकार करेगी.

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पत्रकार का सवाल: श्री राहुल गांधी जी के नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने करीब 24 राज्यों का दौरा किया है, कई जनसभाएं की हैं और पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। आप इन दो वर्षों के कार्यकाल को कैसे देखते हैं? मेरा जवाब: इन दो सालों में राहुल गांधी जी ने देश की राजनीति पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। जिस प्रकार उन्होंने सदन में अपनी शुरुआत की थी, तब आप सबने देखा होगा कि इतिहास में पहली बार खुद प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी और चार-पांच वरिष्ठ मंत्रियों को उनकी स्पीच के बीच में खड़े होकर अपनी बात कहनी पड़ी थी। वे लगातार किसानों, मजदूरों, गरीबों के हक और देश के समग्र विकास की बात कर रहे हैं। सरकार की जो भी नीतियां और कमियां होती हैं, उन्हें वे लगातार पुरजोर तरीके से उठाते रहते हैं। राहुल जी देश की आवाज को सदन के अंदर भी और सदन के बाहर भी मजबूती से बुलंद कर रहे हैं। संसद के बाहर भी आप देखते हैं कि 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के लोग जनता के मुद्दों पर लगातार धरने और प्रदर्शन करते हैं। विपक्ष का असली दायित्व ही यही होता है कि देश और प्रदेश की आम जनता क्या सोच रही है, उनकी क्या भावनाएं हैं, विपक्ष सत्ता पक्ष के सामने उसका प्रतिनिधित्व (Represent) करे। राहुल गांधी जी इस जिम्मेदारी को निभाने में बेहद कामयाब रहे हैं। अभी हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा के मुद्दे को लेकर भी उन्होंने पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया है। इसलिए राहुल गांधी जी की परफॉर्मेंस को लेकर मैं यही कहना चाहूंगा कि उनका यह दो साल का कार्यकाल बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा है। पत्रकार का सवाल: प्रधानमंत्री जी एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आ रहे हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? मेरा जवाब: मैंने आज ही अखबारों में पढ़ा कि वे इस बार बाड़मेर रिफाइनरी के भीतर ही बैठक करेंगे और पहले की तरह कोई बड़ी आम सभा नहीं करेंगे। मेरा मानना है कि उन्हें बाकायदा एक बड़ी आम सभा करनी चाहिए, क्योंकि यह राजस्थान के विकास से जुड़ा एक बहुत बड़ा काम हुआ है। जब वहां तेल निकल गया था, तब हमने केंद्र सरकार से बहुत अनुनय-विनय की और सालों तक लगातार प्रयास किए। आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी और श्रीमती सोनिया गांधी जी ने एचपीसीएल (HPCL) से बात करके राजस्थान सरकार के साथ मिलकर इस रिफाइनरी कंपनी का गठन करवाया था। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार की सहभागिता से बनी यह एक साझा कंपनी है। अब यह प्रधानमंत्री जी के ऊपर है कि वे इसका उद्घाटन किस प्रकार करते हैं। लेकिन मैं आज फिर एक सवाल बार-बार पूछता हूं कि आखिर भाजपा ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान इस रिफाइनरी के काम को पांच साल तक क्यों रोके रखा? इसका जवाब खुद प्रधानमंत्री जी और एनडीए सरकार को देना चाहिए। उन पांच सालों में काम रोकने की वजह से जो आर्थिक बर्बादी हुई, जिसके कारण यह ₹37,000 करोड़ का रिफाइनरी प्रोजेक्ट आज बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक का हो गया है, इसका जवाब जनता को आज तक नहीं मिला है। पत्रकार का सवाल: डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगातार जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? मेरा जवाब: देखिए, इस विषय पर मैं पहले भी अपने 'एक्स' (पहले ट्विटर) हैंडल के माध्यम से स्पष्ट कह चुका हूं। किरोड़ी लाल मीणा जी उस पार्टी के एक बहुत सीनियर नेता हैं और आरएसएस (RSS) कैडर से भी आते हैं। उन्होंने कई बार अपनी पार्टी छोड़ी और वापस जॉइन की, वह उनका व्यक्तिगत निर्णय है; लेकिन वे सरकार बनने के पहले से ही हर किसी पर बेबुनियाद आरोप लगाते आ रहे हैं। जब मैंने उनसे कहा कि यदि आपके पास कोई प्रमाण हैं तो तथ्य प्रस्तुत कीजिए, तो उनका तर्क बड़ा ही बेतुका और अजीब आया कि 'तथ्यों की जरूरत ही क्या है?' अब भला आप खुद सोचिए, यदि आप किसी पर कोई आरोप लगाते हैं, तो आपको बताना पड़ेगा कि यह आरोप किस आधार पर है और इसके पीछे क्या फैक्ट्स एंड फिगर्स (तथ्य और आंकड़े) हैं। वे कोई तथ्य नहीं बताएंगे। गोविंद सिंह डोटासरा जी हमारी पार्टी के सम्मानित प्रदेश अध्यक्ष हैं, राज्य के मंत्री रहे हैं। उन्हें इस प्रकार बिना किसी आधार के घेरना अपने आप में एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। डोटासरा जी के बहाने पूरी कांग्रेस पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का यह भाजपा का एक सुनियोजित षड्यंत्र है, और ऐसा लगता है कि इनके दिल्ली बैठे हाईकमान से लेकर नीचे तक के सभी नेताओं ने मिलकर यह तय कर रखा है। इन्हें समझना होगा कि पूरे उत्तर भारत के अंदर कांग्रेस का सबसे मजबूत और सक्रिय संगठन आज राजस्थान में है। आज भी राजस्थान के गांव-गांव और गली-गली में लोग कांग्रेस को याद करते हैं और हमारी जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हैं। बाकी, लोग इस वर्तमान सरकार के बारे में क्या टिप्पणियां कर रहे हैं, यह मैं आप मीडिया के साथियों पर ही छोड़ता हूं। मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आज तक ऐसा कभी नहीं देखा, जहां इतने कम समय के भीतर ही सरकार के कुप्रबंधन, ठप पड़े विकास कार्यों और बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता का गुस्सा इस कदर फूट पड़ा हो। अस्पताल की बिल्डिंगें खड़ी हैं, लेकिन न वहां डॉक्टर हैं और न ही जरूरी उपकरण। ऐसा कुशासन राजस्थान में पहले कभी नहीं देखा गया, जो आज धरातल पर चल रहा है। पत्रकार का सवाल: सर, कल दिल्ली में 10 जनपथ पर जो आपकी मुलाकात हुई थी, क्या वह राजस्थान कांग्रेस के संगठन से जुड़े मुद्दों को लेकर थी? उस यात्रा के क्या मायने हैं? मेरा जवाब: 10 जनपथ की उस बैठक के भीतर मीडिया के साथियों को कोई बहुत बड़ा राजनीतिक गुणा-भाग या नया राजनीतिक परिदृश्य ढूंढने की आवश्यकता नहीं है। दरअसल, 'राजीव गांधी नेशनल रिलीफ एंड वेलफेयर सोसाइटी' का जो ट्रस्ट बना हुआ है, कल उसकी एक नियमित बैठक थी जिसमें सभी ट्रस्टियों को आमंत्रित किया गया था। यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक और संस्थागत बैठक थी, इसलिए इसे किसी राजनीतिक कयासबाजी से जोड़कर देखने की कोई जरूरत नहीं है।

Ashok Gehlot

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राजस्थान समेत बीजेपी शासित अन्य राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है : चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। बीजेपी के राज्यों में जहां-जहां सरकारें इनकी है हाहाकार मचा हुआ है। ऐसी लूट कभी आज तक कभी सुनी नहीं, देखी नहीं और समझी नहीं है। हालात बड़े गंभीर हैं। एक के बाद एक घोटाले खुल रहे हैं जिसमें आपके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी आया है। जवाब इनके पास कुछ नहीं है, या तो चुप रहते हैं, प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। देते हैं तो खाली फॉर्मेलिटी करते हैं। इसलिए मैंने कहा राजस्थान में भी करप्शन की हदें खत्म हो गई हैं। गाँव से लगा कर के जयपुर तक लोग दुखी हैं। मर्डर, रेप, डकैतियां अलग हो रही हैं, तो कहाँ जाए आदमी । मुख्यमंत्री खुद को समझ लेना चाहिए हालात क्या हैं और उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए। मॉरली हम उनको सपोर्ट करेंगे। हमारी कोई दुश्मनी नहीं है मुख्यमंत्री से। हम मॉरली सपोर्ट करेंगे, विपक्ष का सहयोग लें, पर स्थिति बहुत नाजुक है, उनके हाथ से निकलती जा रही है।

Ashok Gehlot

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राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

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