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Awesh Tiwari

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Journalist, Columnist, 22 yr Exp, EX CFJ Fellow, Ex state head Swaraj Express, Rajasthan patrika, Dainik jagran, Nai Dunia, Hindustan, DNA

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यह ताकत केवल नेहरू के पास थी। नैपाल के भारी तबाही मचाने के बाद बाढ़ का पानी कोसी बैराज से अनुशासित होकर निकल रहा है तो इसके पीछे केवल नेहरू का विजन है। बात तो विश्वगुरु एक से बढ़कर एक करते हैं लेकिन उद्घाटन करते ही सड़क बैठ जाती है।

यह ताकत केवल नेहरू के पास थी। नैपाल के भारी तबाही मचाने के बाद बाढ़ का पानी कोसी बैराज से अनुशासित होकर निकल रहा है तो इसके पीछे केवल नेहरू का विजन है। बात तो विश्वगुरु एक से बढ़कर एक करते हैं लेकिन उद्घाटन करते ही सड़क बैठ जाती है।

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आधी से कम सीटों पर बात ही नहीं होगी। यूपी की यह सच्चाई है कि कांग्रेस पार्टी सपा से लीड कर रही है। यूपी में युवा, पिछड़े, अल्पसंख्यक और दलितों को पता है कि कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है। अखिलेश यादव को छोटे भाई का फर्ज निभाना चाहिए। इमरान मसूद सही कह रहे हैं।

आधी से कम सीटों पर बात ही नहीं होगी। यूपी की यह सच्चाई है कि कांग्रेस पार्टी सपा से लीड कर रही है। यूपी में युवा, पिछड़े, अल्पसंख्यक और दलितों को पता है कि कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है। अखिलेश यादव को छोटे भाई का फर्ज निभाना चाहिए। इमरान मसूद सही कह रहे हैं।

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दिल्ली, प्रयागराज, रांची, आइजॉल, कानपुर के बाद अब मोदी की संसदीय सीट बनारस में छात्र एकता हो गई है और बीएचयू के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। जुबान पर इंकलाब जिंदाबाद के नारे तो हैं ही लेकिन अब वो धर्मेंद्र प्रधान का नहीं पीएम मोदी का इस्तीफा मांग रहे हैं। मोदी जी यह है असली स्टार्टअप। अगर यह स्टार्टअप पहले शुरू हो गया होता तो देश दौड़ता।

दिल्ली, प्रयागराज, रांची, आइजॉल, कानपुर के बाद अब मोदी की संसदीय सीट बनारस में छात्र एकता हो गई है और बीएचयू के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। जुबान पर इंकलाब जिंदाबाद के नारे तो हैं ही लेकिन अब वो धर्मेंद्र प्रधान का नहीं पीएम मोदी का इस्तीफा मांग रहे हैं। मोदी जी यह है असली स्टार्टअप। अगर यह स्टार्टअप पहले शुरू हो गया होता तो देश दौड़ता।

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हां हां मौजूद है, 20 गद्दार मौजूद हैं। शानदार कल्याण बनर्जी

हां हां मौजूद है, 20 गद्दार मौजूद हैं। शानदार कल्याण बनर्जी

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काला कोट, टीके का हल्का रंग, तीन की जगह एक मोबाइल फ़ोन, चेहरे पर मुर्दानगी, आँखों में उदासी। उफ़्फ़ यह वही नरोत्तम है जो खुलेआम चौहारों सड़कों पर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ जनता का आवाहन करते थे। जिन्होंने मध्य प्रदेश को नफ़रती प्रदेश बनाने की भरपूर कोशिश की और कुछ हद तक सफल भी रहे। अब सवाल खड़ा होता है कि यह अब करेंगे क्या? भाजपा ने बहुत दिग्गजों का कैरियर खत्म किया उनके सामने तो नरोत्तम की कोई हैसियत भी नहीं है। अच्छा होगा नरोत्तम जन सेवा के लिए रियल इस्टेट का काम शुरू करें। रियल इस्टेट के काम से जनता को भी फायदा होगा ख़ुद को भी। ट्रेनिंग देने के लिए पार्टी में ही लोग मौजूद हैं। क्योंकि सिर्फ़ विधायक का टिकट नहीं कटा है कैरियर पर फुल स्टॉप लग गया है।

काला कोट, टीके का हल्का रंग, तीन की जगह एक मोबाइल फ़ोन, चेहरे पर मुर्दानगी, आँखों में उदासी। उफ़्फ़ यह वही नरोत्तम है जो खुलेआम चौहारों सड़कों पर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ जनता का आवाहन करते थे। जिन्होंने मध्य प्रदेश को नफ़रती प्रदेश बनाने की भरपूर कोशिश की और कुछ हद तक सफल भी रहे। अब सवाल खड़ा होता है कि यह अब करेंगे क्या? भाजपा ने बहुत दिग्गजों का कैरियर खत्म किया उनके सामने तो नरोत्तम की कोई हैसियत भी नहीं है। अच्छा होगा नरोत्तम जन सेवा के लिए रियल इस्टेट का काम शुरू करें। रियल इस्टेट के काम से जनता को भी फायदा होगा ख़ुद को भी। ट्रेनिंग देने के लिए पार्टी में ही लोग मौजूद हैं। क्योंकि सिर्फ़ विधायक का टिकट नहीं कटा है कैरियर पर फुल स्टॉप लग गया है।

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कर्नाटक में सिर्फ नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी नहीं होने जा रही है विपक्ष के लिए नई राजनीति का दौर भी शुरू हो रहा है। सिद्धा बंगलौर से ज्यादा दिल्ली में सत्ता पक्ष के लिए भारी साबित होंगे वहीं डी के शिवकुमार के सीएम बनने का मतलब समूचे दक्षिण में बीजेपी की लंका लगनी है। आपको लग रहा होगा कि डी के सीएम बनने के लिए सिद्धा के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले रहे हैं दरअसल वो उस माचिस के लिए धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है जो लंका दहन के लिए सिद्धा ने उनके जेब में रख दी है।

कर्नाटक में सिर्फ नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी नहीं होने जा रही है विपक्ष के लिए नई राजनीति का दौर भी शुरू हो रहा है। सिद्धा बंगलौर से ज्यादा दिल्ली में सत्ता पक्ष के लिए भारी साबित होंगे वहीं डी के शिवकुमार के सीएम बनने का मतलब समूचे दक्षिण में बीजेपी की लंका लगनी है। आपको लग रहा होगा कि डी के सीएम बनने के लिए सिद्धा के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले रहे हैं दरअसल वो उस माचिस के लिए धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है जो लंका दहन के लिए सिद्धा ने उनके जेब में रख दी है।

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NSUI बिना कोई श्रेय लिए पिछले कुछ महीनों से जिस तरह से छात्रों के लिए काम कर रहा है वह किसी छात्र संगठन के लिए सम्भव नहीं है। मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है कि ABVP के छात्र नेता सत्ता का सुख भोग रहे वाम छात्र संगठनों में नेता अपना नाम चमकाने के लिए हर प्रपंच कर रहे। एक NSUI है जो खामोशी से सिर्फ काम कर रही है। इस वीडियो में सत्य निकेतन में छात्रों को खाना खिलाया जा रहा है। आप कभी इस तरह से सेवा कार्य में लगे लड़कों का नाम नहीं जान पाएंगे लेकिन इन्हें शाबासी जरूर दिए जाने की जरूरत है।

NSUI बिना कोई श्रेय लिए पिछले कुछ महीनों से जिस तरह से छात्रों के लिए काम कर रहा है वह किसी छात्र संगठन के लिए सम्भव नहीं है। मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है कि ABVP के छात्र नेता सत्ता का सुख भोग रहे वाम छात्र संगठनों में नेता अपना नाम चमकाने के लिए हर प्रपंच कर रहे। एक NSUI है जो खामोशी से सिर्फ काम कर रही है। इस वीडियो में सत्य निकेतन में छात्रों को खाना खिलाया जा रहा है। आप कभी इस तरह से सेवा कार्य में लगे लड़कों का नाम नहीं जान पाएंगे लेकिन इन्हें शाबासी जरूर दिए जाने की जरूरत है।

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करारा जवाब दिया है ईरान ने, बेहद करारा। ईरान ने बहरीन में अमेरिका के नौसैनिक अड्डे पर तगड़ा हमला किया है। पगलेठ प्रेसिडेंट ट्रंप को यह हमला भारी पड़ेगा।

करारा जवाब दिया है ईरान ने, बेहद करारा। ईरान ने बहरीन में अमेरिका के नौसैनिक अड्डे पर तगड़ा हमला किया है। पगलेठ प्रेसिडेंट ट्रंप को यह हमला भारी पड़ेगा।

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यह आपातकाल का चरम है। संसद परिसर में भाजपा मोटे डंडे वाले पोस्टर लेकर गई है। राहुल गांधी समेत तमाम सांसदों के साथ धक्का मुक्की की गई है।आंबेडकर के अपमान से इनका पेट नहीं भरा है अब यह हिंसा पर उतारू हैं।

यह आपातकाल का चरम है। संसद परिसर में भाजपा मोटे डंडे वाले पोस्टर लेकर गई है। राहुल गांधी समेत तमाम सांसदों के साथ धक्का मुक्की की गई है।आंबेडकर के अपमान से इनका पेट नहीं भरा है अब यह हिंसा पर उतारू हैं।

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गजब की भविष्यवाणी थी भाई

गजब की भविष्यवाणी थी भाई

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छात्रों के प्रदर्शन में यह सातवीं फेल बीजेपी का गुंडा कहां से आया?

छात्रों के प्रदर्शन में यह सातवीं फेल बीजेपी का गुंडा कहां से आया?

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Gen Z तक तो ठीक था जेन अल्फा दस कदम आगे हैं। ग़ज़ब की क्रिएटिविटी है भाई।

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इजरायल के तेलअबीब में ईरान के जवाबी हमले में कई बसें जलकर खाक। ईरान की तैयारियों से अमेरिका के होश उड़े। एक साथ आठ देशों पर हमला

इजरायल के तेलअबीब में ईरान के जवाबी हमले में कई बसें जलकर खाक। ईरान की तैयारियों से अमेरिका के होश उड़े। एक साथ आठ देशों पर हमला

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यह देश अब ऐसा ही है। सनातनी, भाजपाई, संघी और कट्टर हिंदू ही होली , रामनवमी मनाएंगे अब। हमरा त्यौहार हमारी खुशियां इन नफरतियों ने हमसे छीन लिया। मोहन भागवत, योगी और मोदी की होली है यह। अलविदा होली।

यह देश अब ऐसा ही है। सनातनी, भाजपाई, संघी और कट्टर हिंदू ही होली , रामनवमी मनाएंगे अब। हमरा त्यौहार हमारी खुशियां इन नफरतियों ने हमसे छीन लिया। मोहन भागवत, योगी और मोदी की होली है यह। अलविदा होली।

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अस्पताल में मरणासन्न अंबेडकरवादी भाजपा सांसद मुकेश राजपूत का खुलासा "राहुल गांधी ने नहीं दिया था धक्का, राहुल खड़े थे मेरे आगे। पीछे खड़े भाजपा के साथियों ने कर दिया खेल।

अस्पताल में मरणासन्न अंबेडकरवादी भाजपा सांसद मुकेश राजपूत का खुलासा "राहुल गांधी ने नहीं दिया था धक्का, राहुल खड़े थे मेरे आगे। पीछे खड़े भाजपा के साथियों ने कर दिया खेल।

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नरेंद्र मोदी जिंदाबाद, बीजेपी जिंदाबाद, अश्विनी वैष्णव जिंदाबाद। हम भारतवासी मुर्दाबाद। कुछ देर पहले बिलासपुर में एक मेमू ट्रेन एक ही पटरी पर आकर मालगाड़ी पर चढ़ गई जिसमें फिलहाल 6 लोगों की मौत की खबर है यह संख्या बढ़ भी सकती है।

नरेंद्र मोदी जिंदाबाद, बीजेपी जिंदाबाद, अश्विनी वैष्णव जिंदाबाद। हम भारतवासी मुर्दाबाद। कुछ देर पहले बिलासपुर में एक मेमू ट्रेन एक ही पटरी पर आकर मालगाड़ी पर चढ़ गई जिसमें फिलहाल 6 लोगों की मौत की खबर है यह संख्या बढ़ भी सकती है।

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यह महिला ममता बनर्जी की रिश्तेदार है भवानीपुर में काउंटिंग के दौरान पहुंची थी। देखिए क्या व्यवहार किया है उसके साथ वो भी भगवान राम के नाम पर।

यह महिला ममता बनर्जी की रिश्तेदार है भवानीपुर में काउंटिंग के दौरान पहुंची थी। देखिए क्या व्यवहार किया है उसके साथ वो भी भगवान राम के नाम पर।

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सौगंध मुझे इस मिट्टी की मै देश नहीं झुकने दूंगा

सौगंध मुझे इस मिट्टी की मै देश नहीं झुकने दूंगा

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अभी थोड़ी देर पहले मैं कह रहा था कि भाजपा का सबसे बड़ा दुख है कि कोई विद्वान उनको तवज्जो नहीं देता। ले देकर यह पिछले कुछ समय से शशि थरूर को अपने खेमे की ओर आकर्षित करने में लगे हुए थे। लेकिन संघी अक्ल से ही मारे जाते हैं। आरएसएस ने बिना पूछे शशि थरूर का नाम वीर सावरकर इंटरनेशनल इंपैक्ट रिवार्ड 2026 के लिए चुन लिया। शशि भड़क गए और अब कह रहे हैं कि हम पुरस्कार नहीं लेंगे। भाई कौन माफ़ीवीर और अंग्रेजों से वजीफाधारी के नाम का पुरस्कार लेगा?

अभी थोड़ी देर पहले मैं कह रहा था कि भाजपा का सबसे बड़ा दुख है कि कोई विद्वान उनको तवज्जो नहीं देता। ले देकर यह पिछले कुछ समय से शशि थरूर को अपने खेमे की ओर आकर्षित करने में लगे हुए थे। लेकिन संघी अक्ल से ही मारे जाते हैं। आरएसएस ने बिना पूछे शशि थरूर का नाम वीर सावरकर इंटरनेशनल इंपैक्ट रिवार्ड 2026 के लिए चुन लिया। शशि भड़क गए और अब कह रहे हैं कि हम पुरस्कार नहीं लेंगे। भाई कौन माफ़ीवीर और अंग्रेजों से वजीफाधारी के नाम का पुरस्कार लेगा?

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ईरान की फुटबॉल टीम वर्ल्ड कप फुटबॉल में हिस्सा लेने मेक्सिको पहुंच गई है। राष्ट्रपति पेजेक्शियन ने सभी खिलाड़ियों को बैग में अच्छी क्वालिटी के संतरे दिए हैं। सख्त आदेश है कि जब कोई अमेरिकन दिखे, दिखाते हुए खायें।

ईरान की फुटबॉल टीम वर्ल्ड कप फुटबॉल में हिस्सा लेने मेक्सिको पहुंच गई है। राष्ट्रपति पेजेक्शियन ने सभी खिलाड़ियों को बैग में अच्छी क्वालिटी के संतरे दिए हैं। सख्त आदेश है कि जब कोई अमेरिकन दिखे, दिखाते हुए खायें।

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यह ऐतिहासिक है अविस्मरणीय है। पूरे संघी ढांचे पर अब तक की सबसे करारी चोट है। राहुल गांधी ने धज्जियां उड़ा कर रख दी है सरकार की और सरकार के हाथ, पैर, आंख, दिमाग के तौर पर अपने अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहे उसके शॉर्प शूटर्स की। राहुल गांधी ने आज जिस तरह से सरकार और भक्तों का मखौल उड़ाया हैं बिल्कुल इसी रुख की कब से जरूरत महसूस हो रही थी। जिन लोगों ने अपनी तस्वीर स्क्रीन पर देखी होगी वह समझ गए होंगे कि अब बच निकलने का और कोई रास्ता नहीं है। यह धज्जियां और कहीं न कहीं भक्तों के गढ़ इंदौर में उड़ाई गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय में परिणाम जो भी रहे हो छात्रों की इस अभूतपूर्व भीड़ ने साबित कर दिया है कि इस देश का युवा सिर्फ और सिर्फ राहुल के साथ है। शानदार राहुल

Awesh Tiwari

39,509 görüntüleme • 4 gün önce

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अब इस खबर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर आते हैं । जंतर मंतर प प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज अपने हाथ में स्टील का एक मोटा और भारी कड़ा पहनकर गया था। इस वीडियो में वह खुद स्वीकार कर रहा है कि मैने इसी से नीशू आजाद के पिता का सिर फाड़ा था। दिल्ली पुलिस Delhi Police यह सुबूत तो काफी होना चाहिए इसकी गिरफ्तारी और सजा के लिए? बात यही नहीं रुकती। इस वीडियो में स्वतंत्र खुलेआम धमकी दे रहा है कि सीजेपी के प्रदर्शनकारियों और वन्देमातरम कानून का विरोध करने वालों को बेल्ट और लात घूंसों से ही नहीं कट्टे से मारने में भी संकोच नहीं करेंगे। मुझे याद आता है कि हापुड़ के अल्लाबख्शपुर में सद्दाम नामक अपराधी ने हाल ही में एक ढाबे पर कट्टे से लोगों को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस देश में दो तरह के कानून है एक आम आदमी के लिए एक बीजेपी समर्थकों के लिए।सोचकर देखिए यह आदमी पीएम के शपथग्रहण समारोह और स्वतंत्रता दिवस पर वीआईपी सत्कार पाता है।

Awesh Tiwari

168,292 görüntüleme • 20 gün önce

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राहुल गांधी चुनाव नहीं जीतते हैं, जीतने की चिन्ता नहीं करते हैं या प्रधानमंत्री बनने की जल्दी में नहीं हैं या चुनाव जीतने के लिए वह सब नहीं करते हैं जो आप चाहते हैं - तो यह आप की समस्या है, राहुल गांधी की नहीं। अगर राहुल गांधी को लगता है कि आरएसएस की पोल खोलना ज्यादा जरूरी है तो कोई नहीं कहता कि आप उनसे सहमत होइए या उनकी मदद कीजिए। वे अपना काम अपनी मर्जी से, जो साथ दे रहा है उसकी सहायता से अपनी योग्यता-क्षमता से कर रहे हैं। हो सकता है, नाकाम रहें लेकिन कोशिश कर रहे हैं और खुलकर कर रहे हैं। यह प्रशंसनीय है। आपको नरेन्द्र मोदी या भाजपा को सत्ता से हटाने की जल्दी है यह आपकी समस्या है। आप चाहते हैं कि राहुल गांधी जल्दी से जल्दी प्रधानमंत्री बन जाएं यह आपकी जरूरत हो सकती है। लेकिन इसके लिए उन्हें मजबूर नहीं किया जा सकता है। वैसे भी, एक नागरिक के रूप में देश को मोदी से आजाद कराने के लिए (अगर इसकी जरूरत या संभावना है) वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं या वे आपको सक्षम लगते हैं इसका मतलब नहीं है वे यही काम करें। वे अपना काम कर रहे हैं जो उन्हें पसंद है या जो उन्होंने चुना है। अगर आपको गांधी परिवार से ही उम्मीद है तो कुछ वरुण गांधी से भी रखिए। राहुल गांधी जो कर रहे हैं उसमें गलत हो सकते हैं लेकिन यह तो तय लगता है कि वे प्रधानमंत्री बनने के लिए नहीं कर रहे हैं। आप उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं तो आगे आइए, जुड़िए, सलाह दीजिए, काम कीजिए। चुनाव जीतने के लिए वोट चोरी, चुनाव चोरी, सीट चोरी, उम्मीदवार चोरी एक अलग (और भारत में नई) राजनीतिक शैली है। वे इस बारे में बता चुके हैं। इस पर दूसरों को, आपको-मुझे काम करना चाहिए। अगर सब राहुल गांधी को ही करना है तो प्राथमिकता उनकी ही होगी। पसंद ना पसंद का मामला भी है। हमें यह मान लेना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था में राहुल गांधी चुनाव नहीं जीत सकते हैं। व्यवस्था बदलने के लिए काम कर रहे हैं। आप शॉर्ट कट जानते हैं तो आगे आइए। राहुल गांधी को सत्ता दिला दीजिए या खुद ले लीजिए। मेरे लिए यह जैसे को तैसा है। - साथी संजोय कुमार सिंह

Awesh Tiwari

16,591 görüntüleme • 3 gün önce