
बसावन इंडिया
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लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा की स्वतंत्रता और समता के परिपेक्ष में मानवता को प्रभावित करने वाली घटनाओं और कहानियों का विश्लेषण
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बिहार के जमुई जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहाँ सचिन दूबे ने अपनी ही चाची आयुषी कुमारी से विवाह कर लिया है आयुषी की पहली शादी 2021 में विशाल दूबे से हुई थी, जिससे उन्हें एक संतान भी है अब आरुषि ने अपने भतीजे सचिन से गॉव के ही एक मन्दिर में शादी कर लिया है और सामाजिक परंपराओं को दरकिनार करते हुए साथ में जीवन बिताने का निर्णय लिया है! #Bihar #Jamui #BrahminsJeans
बसावन इंडिया941,714 次观看 • 1 年前

प्रयागराज के PVR में 'फुले' फिल्म का रिव्यू लेने पहुंचे बहुजन पत्रकारों पर जो हमला हुआ, वो सिर्फ एक हिंसक वार नहीं था वो ब्राह्मणवादी सत्ता का डर था, जो कैमरे और कलम से थरथरा रही है। फुले की तस्वीरें PVR में नहीं लगाई गईं, क्योंकि उनके विचार इस व्यवस्था की चूलें हिला देते हैं और जब बहुजन पत्रकारों ने सच दिखाना चाहा, तो उन पर हमला करवा दिया गया। बाउंसर, कर्मचारी और जातिवादी गुंडों की भीड़ ने मिलकर लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने की कोशिश किया है। "'फुले' फिल्म की कवरेज करने से रोकने वाले उसी मानसिकता के लोग हैं जिनके पूर्वजों ने बाबा साहब अम्बेडकर के इस 'संविधान' को आग लगाया था, उन्हीं के वंशज अब भी इस देश को ब्राह्मणवादी मनुवादी विधान 'मनुस्मृति' से चलाना चाहते हैं।" जिस व्यवस्था को फुले का नाम सुनते ही पसीना आने लगे, समझ लो वो व्यवस्था सड़ चुकी है! POLICE COMMISSIONERATE PRAYAGRAJ UP POLICE DGP UP #phulemovie #PVR #Prayagraj
बसावन इंडिया119,261 次观看 • 1 年前

"ये जो पाखण्डी लोग होते हैं ये जमीन में शिव की मूर्ति को गाड़ देते हैं फिर उसके ऊपर मिट्टी डालकर घास बो देते हैं, फिर जब वह घास उग आती है फिर ये एक दिन ड्रामा करते हैं कि रात में मुझे शिव जी सपने में आये बोले मै जमीन में दबा हूँ मेरी सांस फूल रही है मुझे मुक्त करो मुहाल्ले को सुनाएंगे खुदाई करके मन्दिर बना देंगें यह सत्यार्थ प्रकाश में महर्षि दयानंद सरस्वती लिखते हैं यही काम अयोध्या में हुआ!" राजकुमार भाटी बहुजन चिंतक Rajkumar Bhati
बसावन इंडिया106,637 次观看 • 1 年前

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में बहुजन समाज के आरक्षण की खुली चोरी लगातार जारी है उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य बार-बार यह दावा करते हैं कि:- “हम किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने देंगे, और जो करेगा वह बचेगा नहीं यह बातें वे डंके की चोट पर कहते हैं।" लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों को झुठलाती है बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के आठ वर्षों के कार्यकाल में UPPSC, 69000 शिक्षक भर्ती, लेखपाल भर्ती व अन्य आरक्षण चोरी और आरक्षण घोटालों के मामले एक के बाद एक सामने आए, फिर भी आज तक किसी एक भी जिम्मेदार व्यक्ति पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थित किसी भी ओबीसी नेता में इतनी हिम्मत है कि वह लगातार हो रही #आरक्षण_चोरी और #आरक्षण_घोटाला पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने सच बोल सके? सच यह है कि समाज को अब और धोखा नहीं दिया जा सकता सरकारी नौकरियों में बहुजन समाज के अधिकारों की खुली हकमारी हो रही है, और उस पर खुद को ओबीसी समाज का प्रतिनिधि बताने वाले नेताओं की शर्मनाक चुप्पी पूरे देश के सामने उजागर हो चुकी है ये चुप्पी सिर्फ मौन नहीं, बल्कि अन्याय में साझेदारी है समाज सब देख रहा है, समझ रहा है और चुनाव के समय हिसाब भी मांगेगा! Keshav Prasad Maurya Yogi Adityanath
बसावन इंडिया48,416 次观看 • 9 个月前

योगी आदित्यनाथ के रामराज में पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार लगातार जारी है, यादव, कुर्मी, कुशवाहा, राजभर, चौहान, प्रजापति के बाद अब लोधी समाज की बारी है मेरठ से एक प्रकरण प्रकाश में आया है कि आटो रिक्शा चालक अश्वनी लोधी को दरोगा ने जिन्दा जलाया वह ज़िन्दगी और मौत से जूझ रहा है! अश्वनी लोधी का सिर्फ यह कसूर था कि वह दरोगा को रिश्वत नहीं देना चाहता था! प्रकरण की जाँच कर आरोपियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही हो! MEERUT POLICE ADG ZONE MEERUT UP POLICE
बसावन इंडिया37,900 次观看 • 1 年前

फिल्म “संतोष” व "फुले" का रोका जाना यह कोई पहला मामला नहीं है ये एक बड़ी ब्राह्मणवादी साजिश का हिस्सा है ऐसा लगता है कि इस देश में सेंसर बोर्ड की स्थापना ही इसलिये की गई है कि फ़िल्मों और कला के मंच पर केवल ब्राह्मण हितों को परोसा जाए! ताज्जुब की बात ये है कि इस देश में आप बलात्कार दिखा सकते हैं, हिंसा और हत्या को ग्लोरीफाई कर सकते हैं, सेक्स को मनोरंजन बना सकते हैं, मुगल बादशाहों के नाम पर झूठी कहानी रचकर नफरत फैला सकते हैं, लेकिन जैसे ही कोई बहुजन समाज अपने इतिहास, अपने नायकों, अपने संघर्ष को पर्दे पर लाना चाहता है तभी यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था का सेंसर बोर्ड जाग उठता है और उसे “आपत्तिजनक” करार दे देता है! जब बहुजन समाज की पीढ़ियाँ गुलामी, शोषण और जातीय अपमान से लड़ती रहीं, तब उनके संघर्ष को कला और सिनेमा में स्थान देने की बजाय उसे रोका गया। आज भी बहुजन समाज को अपनी ही कहानी कहने की आज़ादी नहीं है क्योंकि ब्राह्मणवादी ताकतें डरती हैं, कि कहीं ये समाज अपनी असली ताकत और पहचान न जान ले! ऐसा सेंसर बोर्ड, जो सामूहिक रूप से बहुजनों की आवाज़ को कुचलने का औजार बन गया है, उस पर अब सवाल उठाना ही नहीं, उसे उखाड़ फेंकना भी ज़रूरी हो गया है। #phulemovie #santoshmovie #film
बसावन इंडिया25,996 次观看 • 1 年前