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Chandra Shekhar Aazad

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Founder @BhimArmy_BEM, National President @AzadSamajParty, Member of Parliament - Nagina Loksabha Uttar Pradesh

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भारत के माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी 10 मई को हुए भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का आज देश को संबोधित कर बखान कर रहे थे, और उधर पाकिस्तान अखनूर, सांबा जम्मू सहित सीमावर्ती इलाकों में अपने ड्रोन और यूएवी भेज रहा था। यह कैसा सीज़फायर है? #ceasfire #ceasefirevoilation

भारत के माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी 10 मई को हुए भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का आज देश को संबोधित कर बखान कर रहे थे, और उधर पाकिस्तान अखनूर, सांबा जम्मू सहित सीमावर्ती इलाकों में अपने ड्रोन और यूएवी भेज रहा था। यह कैसा सीज़फायर है? #ceasfire #ceasefirevoilation

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प्रयागराज जनपद के गऊघाट में हॉलीडे होम योजना के नाम पर चला “अतिक्रमण हटाओ” अभियान विकास नहीं, बल्कि व्यवस्था की कठोरता और मानवीय संवेदनहीनता का प्रतीक है। कल सुबह से जिला प्रशासन, सिविल पुलिस, आरपीएफ व अन्य विभागों की भारी मौजूदगी में अभियान चलाया गया। प्रशासन का दावा है कि किसी भी विरोध को नियंत्रित कर कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। लोगों को लाठियों से खदेड़े जाने, घरों से अर्तन-बर्तन और जरूरी सामान तक उठाने का अवसर नहीं दिया गया। अचानक पहुंची पुलिस द्वारा महिलाओं पर लाठीचार्ज भी किया गया, जिनमें वृद्ध तथा गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने “शांतिपूर्ण कार्रवाई” के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर अंतर ने आधी आबादी को उचित और न्यायसंगत हिस्सेदारी दिए बिना नारी वंदन अधिनियम लागू कर ‘नारी वंदन’ का ढिंढोरा पीटने वाली बीजेपी के आधी आबादी के असली 'वंदन' का सच एक बार फिर से उजागर किया है।

प्रयागराज जनपद के गऊघाट में हॉलीडे होम योजना के नाम पर चला “अतिक्रमण हटाओ” अभियान विकास नहीं, बल्कि व्यवस्था की कठोरता और मानवीय संवेदनहीनता का प्रतीक है। कल सुबह से जिला प्रशासन, सिविल पुलिस, आरपीएफ व अन्य विभागों की भारी मौजूदगी में अभियान चलाया गया। प्रशासन का दावा है कि किसी भी विरोध को नियंत्रित कर कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। लोगों को लाठियों से खदेड़े जाने, घरों से अर्तन-बर्तन और जरूरी सामान तक उठाने का अवसर नहीं दिया गया। अचानक पहुंची पुलिस द्वारा महिलाओं पर लाठीचार्ज भी किया गया, जिनमें वृद्ध तथा गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने “शांतिपूर्ण कार्रवाई” के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर अंतर ने आधी आबादी को उचित और न्यायसंगत हिस्सेदारी दिए बिना नारी वंदन अधिनियम लागू कर ‘नारी वंदन’ का ढिंढोरा पीटने वाली बीजेपी के आधी आबादी के असली 'वंदन' का सच एक बार फिर से उजागर किया है।

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महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के धर्माबाद तहसील के मौजे माष्टी गांव में घटित घटना बेहद शर्मनाक, पीड़ादायक, निंदनीय और संविधान-विरोधी है। काफी संघर्ष के बाद प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद गाँव में पहली बार परम पूज्य बाबा साहेब की जयंती मनाई गई, वो भी 24 अप्रैल को। लेकिन इस हिम्मत की सजा पूरी बस्ती पर सुनियोजित हमले के रूप में दी गई, जो साफ दर्शाता है कि जातिवादी ताकतें आज भी लोकतंत्र और बराबरी के खिलाफ खड़ी हैं। महिलाओं के साथ अभद्रता, नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और निर्दोष लोगों पर जानलेवा हमला।यह सब किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अभी तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि पीड़ित पक्ष के लोगों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया है और भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के पदाधिकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। यह सीधा-सीधा अन्याय और प्रशासनिक पक्षपात को दर्शाता है। हम CMO Maharashtra से मांग करते हैं: सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, पीड़ितों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं, महिलाओं और बच्चियों के साथ हुई घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो, पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए, और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) , प्रदेश अध्यक्ष अशोक कांबले जी के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन करेगी। Devendra Fadnavis

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के धर्माबाद तहसील के मौजे माष्टी गांव में घटित घटना बेहद शर्मनाक, पीड़ादायक, निंदनीय और संविधान-विरोधी है। काफी संघर्ष के बाद प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद गाँव में पहली बार परम पूज्य बाबा साहेब की जयंती मनाई गई, वो भी 24 अप्रैल को। लेकिन इस हिम्मत की सजा पूरी बस्ती पर सुनियोजित हमले के रूप में दी गई, जो साफ दर्शाता है कि जातिवादी ताकतें आज भी लोकतंत्र और बराबरी के खिलाफ खड़ी हैं। महिलाओं के साथ अभद्रता, नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और निर्दोष लोगों पर जानलेवा हमला।यह सब किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अभी तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि पीड़ित पक्ष के लोगों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया है और भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के पदाधिकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। यह सीधा-सीधा अन्याय और प्रशासनिक पक्षपात को दर्शाता है। हम CMO Maharashtra से मांग करते हैं: सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, पीड़ितों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं, महिलाओं और बच्चियों के साथ हुई घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो, पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए, और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) , प्रदेश अध्यक्ष अशोक कांबले जी के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन करेगी। Devendra Fadnavis

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उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी के थाना जामों क्षेत्र के ग्राम बंधवा मजरे रेसी में जातंकवादी द्वारा जानवर चराने गए दलित युवक चन्द्रशेखर सरोज से बेवजह गला दबाकर बेरहमी से मारपीट करने और इतना ही नहीं, उसी रात करीब 1:40 बजे पीड़ित परिवार के घर में आग लगाने, जिससे उनका छप्पर पूरी तरह जलकर राख हो गया। परिवार ने किसी तरह अपनी जान बचाई। घटना अत्यंत पीड़ादायक और दण्डनीय है। जातंकवादी के हौसले इतने बुलंद थे कि नशे की हालत में आए दिन जान से मारने की धमकी देता था। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यह घटना केवल एक परिवार पर हमला नहीं, बल्कि आपके राज में समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि-आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, आगजनी से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। CM Office, GoUP

उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी के थाना जामों क्षेत्र के ग्राम बंधवा मजरे रेसी में जातंकवादी द्वारा जानवर चराने गए दलित युवक चन्द्रशेखर सरोज से बेवजह गला दबाकर बेरहमी से मारपीट करने और इतना ही नहीं, उसी रात करीब 1:40 बजे पीड़ित परिवार के घर में आग लगाने, जिससे उनका छप्पर पूरी तरह जलकर राख हो गया। परिवार ने किसी तरह अपनी जान बचाई। घटना अत्यंत पीड़ादायक और दण्डनीय है। जातंकवादी के हौसले इतने बुलंद थे कि नशे की हालत में आए दिन जान से मारने की धमकी देता था। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यह घटना केवल एक परिवार पर हमला नहीं, बल्कि आपके राज में समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि-आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, आगजनी से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। CM Office, GoUP

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चुनावी रैलियों में "बटेंगे तो कटेंगे" का नारा देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी खुद सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मंच पर समाज को 'हरिजन" और 'गैर हरिजन' में बांट रहे हैं। क्या इस 'हरिजन"शब्द के प्रयोग से उनका तथाकथित हिंदू खतरे में नहीं आता? जबकि 1982 में केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के लिए एक एडवाइजरी जारी कर अनुसूचित जातियों के लिए 'हरिजन' शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा था। 2010 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस संबंध में नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी करके इस पर रोक लगाई थी। यहां तक कि माननीय न्यायालय द्वारा भी इसे अपमानजनक बताते हुए प्रतिबंध लगाया गया था। इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को क्या इन निर्णयों की जानकारी नहीं है? या जानबूझकर "हरिजन" शब्द का प्रयोग करके अनुसूचित वर्ग के लोगों का अपमान किया जा रहा है? जब गांधी जी ने अछूतों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जी ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे अपमानजनक शब्द बताया था। ये सवाल उस समय भी पूछा गया था और आज भी प्रासंगिक है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बताएं, यदि अनुसूचित जाति के लोग 'हरिजन' हैं तो बाकी अन्य लोग ‘हरि’ के जन नहीं तो किसके जन हैं?

चुनावी रैलियों में "बटेंगे तो कटेंगे" का नारा देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी खुद सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मंच पर समाज को 'हरिजन" और 'गैर हरिजन' में बांट रहे हैं। क्या इस 'हरिजन"शब्द के प्रयोग से उनका तथाकथित हिंदू खतरे में नहीं आता? जबकि 1982 में केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के लिए एक एडवाइजरी जारी कर अनुसूचित जातियों के लिए 'हरिजन' शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा था। 2010 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस संबंध में नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी करके इस पर रोक लगाई थी। यहां तक कि माननीय न्यायालय द्वारा भी इसे अपमानजनक बताते हुए प्रतिबंध लगाया गया था। इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को क्या इन निर्णयों की जानकारी नहीं है? या जानबूझकर "हरिजन" शब्द का प्रयोग करके अनुसूचित वर्ग के लोगों का अपमान किया जा रहा है? जब गांधी जी ने अछूतों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जी ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे अपमानजनक शब्द बताया था। ये सवाल उस समय भी पूछा गया था और आज भी प्रासंगिक है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बताएं, यदि अनुसूचित जाति के लोग 'हरिजन' हैं तो बाकी अन्य लोग ‘हरि’ के जन नहीं तो किसके जन हैं?

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ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा अपनी तीन महीने पहले (26 जनवरी 2026 को) मृत हुई बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर ले जा रहे हैं। जिस बहन का पति और इकलौती संतान पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे और अब पूरे परिवार में सिर्फ वही अकेले जीवित बचे हैं। अपनी बहन के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण बैंक कर्मचारियों ने ‘नियमों’ का हवाला देते हुए उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया। परेशान होकर वे सीधे श्मशान घाट पहुंचे। अपनी बहन की कब्र खोदी और उनका कंकाल बाहर निकाला। कंकाल को एक कपड़े में लपेटकर, अपने कंधे पर लादे, 5 किमी नंगे पांव चलते हुए वे सीधे बैंक के भीतर जा पहुंचे। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावे के ये प्रमाण पत्र इतने कम समय में बन पाना किसी के लिए संभव नहीं है। और फिर एक तो वे गरीब, ऊपर से आदिवासी-ऐसे में इन कागजों को तुरंत जुटा पाना उनके लिए असंभव था। वहीं, इसी बैंकिंग व्यवस्था में उद्योगपतियों के वो 11 लाख करोड़ रुपये के कर्जे चुपचाप माफ़ भी हो जाते हैं, जिससे वे अरबों-खरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं। ओडिशा की यह घटना व्यवस्था की संवेदनहीनता और असमानता की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।

ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा अपनी तीन महीने पहले (26 जनवरी 2026 को) मृत हुई बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर ले जा रहे हैं। जिस बहन का पति और इकलौती संतान पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे और अब पूरे परिवार में सिर्फ वही अकेले जीवित बचे हैं। अपनी बहन के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण बैंक कर्मचारियों ने ‘नियमों’ का हवाला देते हुए उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया। परेशान होकर वे सीधे श्मशान घाट पहुंचे। अपनी बहन की कब्र खोदी और उनका कंकाल बाहर निकाला। कंकाल को एक कपड़े में लपेटकर, अपने कंधे पर लादे, 5 किमी नंगे पांव चलते हुए वे सीधे बैंक के भीतर जा पहुंचे। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावे के ये प्रमाण पत्र इतने कम समय में बन पाना किसी के लिए संभव नहीं है। और फिर एक तो वे गरीब, ऊपर से आदिवासी-ऐसे में इन कागजों को तुरंत जुटा पाना उनके लिए असंभव था। वहीं, इसी बैंकिंग व्यवस्था में उद्योगपतियों के वो 11 लाख करोड़ रुपये के कर्जे चुपचाप माफ़ भी हो जाते हैं, जिससे वे अरबों-खरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं। ओडिशा की यह घटना व्यवस्था की संवेदनहीनता और असमानता की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।

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ग्वालियर में डीएम ऑफिस पर ज्ञापन देने गए हमारे गुर्जर समाज के लोगों पर लाठीचार्ज करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है! गुर्जर समाज पर पड़ी एक-एक लाठी को पूरे देश के लोग देख रहे है। कल जिस तरह से गुर्जर महाकुंभ में आये लोगों के वाहनों को पुलिस द्वारा नुकसान पहुंचाया गया उस से यह स्पष्ट होता है कि सरकार के नेताओ के इशारे पर यह सब गुर्जर समाज को डराने के लिये कराया गया है। यदि गुर्जर समाज के निर्दोष लोगों पर फर्जी मुकदमे लगाकर उन्हें परेशान किया गया तो भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) इस अन्याय के विरोध में आंदोलन करेगी!

ग्वालियर में डीएम ऑफिस पर ज्ञापन देने गए हमारे गुर्जर समाज के लोगों पर लाठीचार्ज करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है! गुर्जर समाज पर पड़ी एक-एक लाठी को पूरे देश के लोग देख रहे है। कल जिस तरह से गुर्जर महाकुंभ में आये लोगों के वाहनों को पुलिस द्वारा नुकसान पहुंचाया गया उस से यह स्पष्ट होता है कि सरकार के नेताओ के इशारे पर यह सब गुर्जर समाज को डराने के लिये कराया गया है। यदि गुर्जर समाज के निर्दोष लोगों पर फर्जी मुकदमे लगाकर उन्हें परेशान किया गया तो भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) इस अन्याय के विरोध में आंदोलन करेगी!

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उत्तर प्रदेश के हमीरपुर विधानसभा के पतारा गांव में पिछड़े समाज के छोटेलाल प्रजापति की लाठी डंडे से पीट- पीटकर हत्या कर दी गई। सामंतियों का दुस्साहस देखो भाई छोटेलाल को मारकर उनकी लाश उन्ही के घर के पास फेक गए, इस वारदात के एक दिन पहले भी सामंती गुंडे पूरे परिवार को धमकी देकर गए थे। इतनी बड़ी वारदात के बावजूद आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार से जानकारी मिली है कि तकरीबन 10-12 गुंडों ने भाई छोटेलाल की हत्या की है. लेकिन FIR में सिर्फ 3 ही नाम हैं, बाकी आरोपियों को बचाया जा रहा है। प्रशासन के लोगों सुन लो अगर आरोपियों की जाति देखकर बचाने की कोशिश की गई तो Aazad Samaj Party - Kanshi Ram के कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर विधानसभा के पतारा गांव में पिछड़े समाज के छोटेलाल प्रजापति की लाठी डंडे से पीट- पीटकर हत्या कर दी गई। सामंतियों का दुस्साहस देखो भाई छोटेलाल को मारकर उनकी लाश उन्ही के घर के पास फेक गए, इस वारदात के एक दिन पहले भी सामंती गुंडे पूरे परिवार को धमकी देकर गए थे। इतनी बड़ी वारदात के बावजूद आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार से जानकारी मिली है कि तकरीबन 10-12 गुंडों ने भाई छोटेलाल की हत्या की है. लेकिन FIR में सिर्फ 3 ही नाम हैं, बाकी आरोपियों को बचाया जा रहा है। प्रशासन के लोगों सुन लो अगर आरोपियों की जाति देखकर बचाने की कोशिश की गई तो Aazad Samaj Party - Kanshi Ram के कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।

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नगीना चुनाव के समय हम सब पर प्रचार का बहुत प्रेशर था। लेकिन एक दिन जब इन साथियों का प्रचार देखा तो मन प्रसन्न हो गया, यह प्रचार भी हमेशा याद रहेगा मुझे और आपकी टीम से जल्द मिलूंगा।

नगीना चुनाव के समय हम सब पर प्रचार का बहुत प्रेशर था। लेकिन एक दिन जब इन साथियों का प्रचार देखा तो मन प्रसन्न हो गया, यह प्रचार भी हमेशा याद रहेगा मुझे और आपकी टीम से जल्द मिलूंगा।

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फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह पर उर्स के दौरान फैली गंदगी का वीडियो केवल गंदगी नहीं, बल्कि गंभीर सरकारी विफलता है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के शासन में धार्मिक भेदभाव की पराकाष्ठा को उजागर करता है। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर की भी उपेक्षा की जा रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या कुछ विशेष धार्मिक स्थलों के प्रति जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। जिस स्थान पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं, वहां इस प्रकार की गंदगी और अव्यवस्था सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी धर्मों और आस्थाओं के स्थलों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे तथा उनकी स्वच्छता, सुरक्षा और गरिमा हर हाल में बनाए रखे—लेकिन मौजूदा हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। Government of UP CM Office, GoUP

फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह पर उर्स के दौरान फैली गंदगी का वीडियो केवल गंदगी नहीं, बल्कि गंभीर सरकारी विफलता है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के शासन में धार्मिक भेदभाव की पराकाष्ठा को उजागर करता है। यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर की भी उपेक्षा की जा रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या कुछ विशेष धार्मिक स्थलों के प्रति जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। जिस स्थान पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं, वहां इस प्रकार की गंदगी और अव्यवस्था सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी धर्मों और आस्थाओं के स्थलों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे तथा उनकी स्वच्छता, सुरक्षा और गरिमा हर हाल में बनाए रखे—लेकिन मौजूदा हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। Government of UP CM Office, GoUP

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हरियाणा के जिला पलवल में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के बोर्ड को उखाड़ फेंकने की घटना न सिर्फ निंदनीय, बल्कि सामाजिक न्याय के खिलाफ सोची-समझी साजिश है। यह घटना उन जातिवादी मानसिकताओं की पोल खोलती है जो आज भी पिछड़े, दलित और वंचित समाज के महापुरुषों के सम्मान से चिढ़ती हैं। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि कर्पूरी ठाकुर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति और हक-हकूक की ज्वलंत मशाल हैं, जिसे कोई मिटा नहीं सकता! यह हमला उस विचारधारा पर है जिसने पिछड़ों, दलितों और गरीबों को उनका हक दिलाया। यह घटना दर्शाती है कि जातिवादी शक्तियां आज भी समतामूलक समाज से डरती हैं और कर्पूरी ठाकुर जैसे महापुरुषों के प्रतीकों को मिटाकर बहुजन चेतना को कमजोर करना चाहती हैं। मैं MyGovHaryana से माँग करता हूँ कि — 1. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 2. वहीं पर दोबारा कर्पूरी ठाकुर जी का सम्मानजनक बोर्ड लगाया जाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 3. ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए सरकार व प्रशासन सार्वजनिक रूप से इस घटना की निंदा करें। मैं चेतावनी देता हूं कि अगर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो इसे बहुजन समाज पर हमला माना जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णायक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर जी अमर थे, अमर हैं, और अमर रहेंगे! उनकी विचारधारा को कोई ताकत नहीं मिटा सकती! Nayab Saini, CMO Haryana

हरियाणा के जिला पलवल में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के बोर्ड को उखाड़ फेंकने की घटना न सिर्फ निंदनीय, बल्कि सामाजिक न्याय के खिलाफ सोची-समझी साजिश है। यह घटना उन जातिवादी मानसिकताओं की पोल खोलती है जो आज भी पिछड़े, दलित और वंचित समाज के महापुरुषों के सम्मान से चिढ़ती हैं। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि कर्पूरी ठाकुर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति और हक-हकूक की ज्वलंत मशाल हैं, जिसे कोई मिटा नहीं सकता! यह हमला उस विचारधारा पर है जिसने पिछड़ों, दलितों और गरीबों को उनका हक दिलाया। यह घटना दर्शाती है कि जातिवादी शक्तियां आज भी समतामूलक समाज से डरती हैं और कर्पूरी ठाकुर जैसे महापुरुषों के प्रतीकों को मिटाकर बहुजन चेतना को कमजोर करना चाहती हैं। मैं MyGovHaryana से माँग करता हूँ कि — 1. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 2. वहीं पर दोबारा कर्पूरी ठाकुर जी का सम्मानजनक बोर्ड लगाया जाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 3. ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए सरकार व प्रशासन सार्वजनिक रूप से इस घटना की निंदा करें। मैं चेतावनी देता हूं कि अगर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो इसे बहुजन समाज पर हमला माना जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णायक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर जी अमर थे, अमर हैं, और अमर रहेंगे! उनकी विचारधारा को कोई ताकत नहीं मिटा सकती! Nayab Saini, CMO Haryana

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उत्तर प्रदेश के ज़िला बरेली के नवाबगंज क्षेत्र में अपनी उधार दी गई रकम वापस मांगने पर दलित युवक पप्पू दिवाकर के साथ जो बर्बरता की गई—उसे जातिसूचक गालियाँ देना, जबरन सिर-मूंछ मुंडवाना, चेहरे पर कालिख पोतकर गांव से निकालना—यह अत्यंत पीड़ादायक, शर्मनाक और जातीय आतंक का घिनौना उदाहरण है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह अपराध गांव के लोगों के सामने किया गया, इसका वीडियो बनाया गया और पीड़ित को इतना मानसिक रूप से तोड़ दिया गया कि वह महीनों तक चुप रहने को मजबूर रहा। यह वही भय और दबाव की साजिश है, जिसके ज़रिए दलितों को न्याय मांगने से रोका जाता है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि—सभी आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सख्त धाराएं लगाई जाएं,वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वालों पर अलग से कठोर कार्रवाई हो,पीड़ित को सरकारी सुरक्षा, उचित मुआवजा और मानसिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश के ज़िला बरेली के नवाबगंज क्षेत्र में अपनी उधार दी गई रकम वापस मांगने पर दलित युवक पप्पू दिवाकर के साथ जो बर्बरता की गई—उसे जातिसूचक गालियाँ देना, जबरन सिर-मूंछ मुंडवाना, चेहरे पर कालिख पोतकर गांव से निकालना—यह अत्यंत पीड़ादायक, शर्मनाक और जातीय आतंक का घिनौना उदाहरण है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह अपराध गांव के लोगों के सामने किया गया, इसका वीडियो बनाया गया और पीड़ित को इतना मानसिक रूप से तोड़ दिया गया कि वह महीनों तक चुप रहने को मजबूर रहा। यह वही भय और दबाव की साजिश है, जिसके ज़रिए दलितों को न्याय मांगने से रोका जाता है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि—सभी आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सख्त धाराएं लगाई जाएं,वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वालों पर अलग से कठोर कार्रवाई हो,पीड़ित को सरकारी सुरक्षा, उचित मुआवजा और मानसिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

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देहरादून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर “मुसलमानों के लिए रोड नहीं” जैसा घृणित और विभाजनकारी संदेश लिखा जाना न केवल सामाजिक सौहार्द पर हमला है, बल्कि यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रहार और संविधान के आर्टिकल 15,19 व 21 का उल्लंघन है। इस प्रकार का संदेश यह दर्शाता है कि कुछ ताकतें सुनियोजित तरीके से देश को धार्मिक आधार पर बाँटने की साज़िश कर रही हैं। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है-धर्म, जाति, वर्ग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक और दंडनीय है। आज अगर रास्ते मुसलमानों के लिए बंद करने की बात लिखी जा रही है, तो कल यही सोच दलितों,पिछड़ी जातियों,आदिवासियों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यको के खिलाफ भी खड़ी की जाएगी। यह केवल एक समुदाय का सवाल नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा का प्रश्न है। हम मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी से पूछना चाहते हैं कि ऐसे तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? सार्वजनिक संपत्ति पर नफरत फैलाने वाले संदेश लिखना और समाज को बाँटने की कोशिश करना गंभीर अपराध है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि दोषियों की तत्काल पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि यह कृत्य देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने की मंशा से किया गया है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सहित कठोर धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत नफरत से नहीं, संविधान से चलेगा। समानता, भाईचारा और न्याय - यही इस देश की असली पहचान हैं।

देहरादून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर “मुसलमानों के लिए रोड नहीं” जैसा घृणित और विभाजनकारी संदेश लिखा जाना न केवल सामाजिक सौहार्द पर हमला है, बल्कि यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रहार और संविधान के आर्टिकल 15,19 व 21 का उल्लंघन है। इस प्रकार का संदेश यह दर्शाता है कि कुछ ताकतें सुनियोजित तरीके से देश को धार्मिक आधार पर बाँटने की साज़िश कर रही हैं। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है-धर्म, जाति, वर्ग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक और दंडनीय है। आज अगर रास्ते मुसलमानों के लिए बंद करने की बात लिखी जा रही है, तो कल यही सोच दलितों,पिछड़ी जातियों,आदिवासियों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यको के खिलाफ भी खड़ी की जाएगी। यह केवल एक समुदाय का सवाल नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा का प्रश्न है। हम मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी से पूछना चाहते हैं कि ऐसे तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? सार्वजनिक संपत्ति पर नफरत फैलाने वाले संदेश लिखना और समाज को बाँटने की कोशिश करना गंभीर अपराध है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि दोषियों की तत्काल पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि यह कृत्य देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने की मंशा से किया गया है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सहित कठोर धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत नफरत से नहीं, संविधान से चलेगा। समानता, भाईचारा और न्याय - यही इस देश की असली पहचान हैं।

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“कांशीराम साहब आपकी नेक कमाई, आपने सोती कौम जगाई” बहुजन नायक मान्यवर साहब कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के छठवे स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। #आजाद_समाज_पार्टी_कांशीराम

“कांशीराम साहब आपकी नेक कमाई, आपने सोती कौम जगाई” बहुजन नायक मान्यवर साहब कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के छठवे स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। #आजाद_समाज_पार्टी_कांशीराम

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मुख्यमंत्री योगी जी के राज में बहुजनों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही और अब ये जानलेवा हो गया है। बाराबंकी में सामुहिक दुष्कर्म पीड़ित दलित छात्रा की कहीं सुनवाई न होने से आरोपियों के हौसले बुलन्द हो गए और अपनी हरकतों से बाज़ नही आए और अंत में युवती ने जान दे दी! बेहद दुखद, शर्मनाक और निंदनीय। अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले हैदरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया जाए व दुष्कर्म के आरोपियों को गिरफ्तार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर सख्त सजा दिलाई जाए।

मुख्यमंत्री योगी जी के राज में बहुजनों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही और अब ये जानलेवा हो गया है। बाराबंकी में सामुहिक दुष्कर्म पीड़ित दलित छात्रा की कहीं सुनवाई न होने से आरोपियों के हौसले बुलन्द हो गए और अपनी हरकतों से बाज़ नही आए और अंत में युवती ने जान दे दी! बेहद दुखद, शर्मनाक और निंदनीय। अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले हैदरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया जाए व दुष्कर्म के आरोपियों को गिरफ्तार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर सख्त सजा दिलाई जाए।

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उत्तर प्रदेश के जनपद हाथरस के कोतवाली सहपऊ क्षेत्र के नाले में पत्रकार वेद प्रकाश शर्मा का शव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पड़ी हुई है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है, जहां लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकार भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। परिजनों के अनुसार, मकान पर कब्जा करने की नीयत से पहले उनका अपहरण किया गया और फिर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को सबूत मिटाने के उद्देश्य से नाले में फेंक दिया गया। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के कई निशान पाए गए। दोनों पैर लटके हुए थे और घुटनों के टूटने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा चेहरे, कमर और छाती पर भी गहरी चोटें थीं, जो इस क्रूरता की भयावहता को दर्शाती हैं। गौरतलब है कि घटना से लगभग 15 दिन पहले ही आरोपियों ने मकान पर कब्जे की नीयत से मारपीट की थी और मकान बेचने का दबाव बनाया था। इस संबंध में कोतवाली में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।साथ ही, मृतक द्वारा पूर्व में लिखित शिकायत देकर अपनी जान को खतरा भी जताया गया था, फिर भी प्रशासन की लापरवाही के चलते यह दर्दनाक घटना घटित हो गई। यह घटना कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है और यह भी दर्शाती है कि अपराधियों के हौसले किस कदर बढ़ चुके हैं। घटना अत्यंत दुखद और दण्डनीय है।हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। हम Government of UP से मांग करते हैं कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश के जनपद हाथरस के कोतवाली सहपऊ क्षेत्र के नाले में पत्रकार वेद प्रकाश शर्मा का शव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पड़ी हुई है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता प्रमाण है, जहां लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकार भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। परिजनों के अनुसार, मकान पर कब्जा करने की नीयत से पहले उनका अपहरण किया गया और फिर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को सबूत मिटाने के उद्देश्य से नाले में फेंक दिया गया। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के कई निशान पाए गए। दोनों पैर लटके हुए थे और घुटनों के टूटने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा चेहरे, कमर और छाती पर भी गहरी चोटें थीं, जो इस क्रूरता की भयावहता को दर्शाती हैं। गौरतलब है कि घटना से लगभग 15 दिन पहले ही आरोपियों ने मकान पर कब्जे की नीयत से मारपीट की थी और मकान बेचने का दबाव बनाया था। इस संबंध में कोतवाली में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।साथ ही, मृतक द्वारा पूर्व में लिखित शिकायत देकर अपनी जान को खतरा भी जताया गया था, फिर भी प्रशासन की लापरवाही के चलते यह दर्दनाक घटना घटित हो गई। यह घटना कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है और यह भी दर्शाती है कि अपराधियों के हौसले किस कदर बढ़ चुके हैं। घटना अत्यंत दुखद और दण्डनीय है।हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। हम Government of UP से मांग करते हैं कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

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उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में दलित समाज की दो नाबालिग बच्चियों (12 और 14 वर्ष) का 12 फरवरी को जातिवादी गुंडों ने अपहरण कर बंधक बना लिया। गाँव के कुछ लोगों ने पंचायत कर जबरन सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे आज दिनदहाड़े अवैध हथियारों से लैस होकर पीड़ित परिवार के घर में घुसे। उन्होंने बड़ी बच्ची को जबरन उठाने की कोशिश की, और जब छोटी बच्ची ने विरोध किया, तो उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई, और बड़ी बच्ची को अपराधी जबरन उठा ले गए। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि जातिगत बर्बरता की पराकाष्ठा है। इस नृशंस घटना के बाद परिवार व क्षेत्र में भय का माहौल है। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि दलित समाज पर खुला हमला है! उत्तर प्रदेश में दबंगों और जातिवादी अपराधियों के हौसले कानून से बड़े हो चुके हैं। प्रशासन न्याय देने में विफल है, अपराधियों के सामने घुटने टेक चुका है। Government of UP से हमारी मांगें:- 1. आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, POCSO अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। 3. पीड़ित परिवार को राज्य सरकार सुरक्षा और उचित मुआवजा दे। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा! कासगंज की भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की टीम न्याय के लिए इस जातिवादी बर्बरता के खिलाफ पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में दलित समाज की दो नाबालिग बच्चियों (12 और 14 वर्ष) का 12 फरवरी को जातिवादी गुंडों ने अपहरण कर बंधक बना लिया। गाँव के कुछ लोगों ने पंचायत कर जबरन सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे आज दिनदहाड़े अवैध हथियारों से लैस होकर पीड़ित परिवार के घर में घुसे। उन्होंने बड़ी बच्ची को जबरन उठाने की कोशिश की, और जब छोटी बच्ची ने विरोध किया, तो उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई, और बड़ी बच्ची को अपराधी जबरन उठा ले गए। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि जातिगत बर्बरता की पराकाष्ठा है। इस नृशंस घटना के बाद परिवार व क्षेत्र में भय का माहौल है। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि दलित समाज पर खुला हमला है! उत्तर प्रदेश में दबंगों और जातिवादी अपराधियों के हौसले कानून से बड़े हो चुके हैं। प्रशासन न्याय देने में विफल है, अपराधियों के सामने घुटने टेक चुका है। Government of UP से हमारी मांगें:- 1. आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, POCSO अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। 3. पीड़ित परिवार को राज्य सरकार सुरक्षा और उचित मुआवजा दे। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा! कासगंज की भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की टीम न्याय के लिए इस जातिवादी बर्बरता के खिलाफ पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

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ओडिशा के गंजाम जिले में दो दलित व्यक्तियों को बुरी तरह पीटा गया, आधा सिर मुंडवाया गया, करीब दो किलोमीटर घुटनों के बल रेंगने और मवेशियों का चारा खाने व नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया — यह घटना मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। दोनों दलित अपनी बेटी की शादी के लिए मेहनत की कमाई से तीन गायें खरीदकर घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें रोककर ‘गौ-तस्करी’ का झूठा आरोप लगाया गया और 30,000 रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो उनके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया गया। यह कोई 'गौ-रक्षा' नहीं, यह जातंकवाद है। गौ-रक्षा अब भीड़तंत्र का हथियार बन चुकी है।मोहम्मद अख़लाक से लेकर पहलू ख़ान और जुनैद तक — और अब दलितों तक — यह हिंसा सुनियोजित है। अगर गौ-रक्षा की आड़ में बहुजन समाज को डराने, मारने और अपमानित करने का यह सिलसिला नहीं रुका, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे। हम CMO Odisha से माँग करते हैं: 1. दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और उनके खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाए। 2. पीड़ितों को सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए। 3. ओडिशा सरकार और NHRC इस अमानवीयता पर तुरंत संज्ञान लें। Mohan Charan Majhi National Commission for Scheduled Castes NHRC India

ओडिशा के गंजाम जिले में दो दलित व्यक्तियों को बुरी तरह पीटा गया, आधा सिर मुंडवाया गया, करीब दो किलोमीटर घुटनों के बल रेंगने और मवेशियों का चारा खाने व नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया — यह घटना मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। दोनों दलित अपनी बेटी की शादी के लिए मेहनत की कमाई से तीन गायें खरीदकर घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें रोककर ‘गौ-तस्करी’ का झूठा आरोप लगाया गया और 30,000 रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो उनके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया गया। यह कोई 'गौ-रक्षा' नहीं, यह जातंकवाद है। गौ-रक्षा अब भीड़तंत्र का हथियार बन चुकी है।मोहम्मद अख़लाक से लेकर पहलू ख़ान और जुनैद तक — और अब दलितों तक — यह हिंसा सुनियोजित है। अगर गौ-रक्षा की आड़ में बहुजन समाज को डराने, मारने और अपमानित करने का यह सिलसिला नहीं रुका, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे। हम CMO Odisha से माँग करते हैं: 1. दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और उनके खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाए। 2. पीड़ितों को सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए। 3. ओडिशा सरकार और NHRC इस अमानवीयता पर तुरंत संज्ञान लें। Mohan Charan Majhi National Commission for Scheduled Castes NHRC India

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उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के शाहबाद थाना क्षेत्र के गांव रुस्तमपुर में दलित समाज की एक बारात में डीजे पर बज रहे भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषितों, वंचितों और महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के गाने को जातिवादी मानसिकता ग्रस्त गुंडों द्वारा बंद करवाने की कोशिश की गई। जब बारातियों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी गईं और बुरी तरह पीटा गया। दूल्हे के भाई और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला केवल एक बारात पर नहीं, बल्कि दलित अस्मिता, आस्था और आज़ादी पर सीधा हमला है। हम पूछते हैं — क्या संविधान निर्माता का नाम लेना भी आज के भारत में 'अपराध' बन गया है? क्या दलितों को खुशियाँ मनाने, अपनी संस्कृति और नायकों का सम्मान करने का भी अधिकार नहीं बचा? हम Government of UP से माँग करते है:- 1. हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। 2. घटना में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और BNSS की कठोर धाराएँ लगाई जाएँ। 3. घायलों को निशुल्क सरकारी इलाज और समुचित मुआवज़ा प्रदान किया जाए। 4. पीड़ित पक्ष को सुरक्षा प्रदान की जाए। 5. मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच हो। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के शाहबाद थाना क्षेत्र के गांव रुस्तमपुर में दलित समाज की एक बारात में डीजे पर बज रहे भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषितों, वंचितों और महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के गाने को जातिवादी मानसिकता ग्रस्त गुंडों द्वारा बंद करवाने की कोशिश की गई। जब बारातियों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी गईं और बुरी तरह पीटा गया। दूल्हे के भाई और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला केवल एक बारात पर नहीं, बल्कि दलित अस्मिता, आस्था और आज़ादी पर सीधा हमला है। हम पूछते हैं — क्या संविधान निर्माता का नाम लेना भी आज के भारत में 'अपराध' बन गया है? क्या दलितों को खुशियाँ मनाने, अपनी संस्कृति और नायकों का सम्मान करने का भी अधिकार नहीं बचा? हम Government of UP से माँग करते है:- 1. हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। 2. घटना में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और BNSS की कठोर धाराएँ लगाई जाएँ। 3. घायलों को निशुल्क सरकारी इलाज और समुचित मुआवज़ा प्रदान किया जाए। 4. पीड़ित पक्ष को सुरक्षा प्रदान की जाए। 5. मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच हो। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

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आज ‘व्यवस्था परिवर्तन दिवस’ पर प्रारंभ हो रही सत्ता परिवर्तन यात्रा से घबराकर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी के इशारे पर मुझे मेरे धामपुर स्थित आवास पर पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने का निंदनीय एवं अलोकतांत्रिक कृत्य होने के उपरांत, पुलिस-प्रशासन से वार्ता के बाद मैंने यात्रा शुरू करने से पहले जिला बिजनौर स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के गुरूघर पहुंचकर गुरु महाराज जी को नमन किया। इतने सबके बाद भी बिजनौर की सड़कों पर उमड़े जनसैलाब ने साबित कर दिया कि परिवर्तन की यह लड़ाई अब जन-जन की आवाज़ बन चुकी है और कोई भी दमन या बाधा इस जनसंकल्प को रोक नहीं सकती। आभार बिजनौर, एक बार पुनः आभार नगीना। #ASP_K_Mission2027 #सत्तापरिवर्तनयात्रा #UPMaangeChandraShekharAzad #ASPK #AzadSamajParty #bhimarmy #SattaParivartanYatra

Chandra Shekhar Aazad

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परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi जी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है। इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी। ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

Chandra Shekhar Aazad

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भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं। इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है। सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है।किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है। यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है। सवाल उठते है— पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है? मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को याद दिलाना ज़रूरी है— 1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं। 2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है। 3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा। इसका साफ़ मतलब है—संविधान सर्वोच्च है—कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता। जय भीम,जय भारत,जय संविधान,जय विज्ञान Government of UP CM Office, GoUP DGP UP

Chandra Shekhar Aazad

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उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के पुवायां थाना क्षेत्र के नाहिल गाँव में पाल समाज के बुजुर्ग को जातंकवादियों द्वारा सरेआम “मुर्गा” बनाना, पैरों में माथा रगड़वाना और डंडा लेकर गाली-गलौज व धमकी देना अमानवीय और बेहद चिंताजनक है। किसी भी बुजुर्ग के साथ इस तरह का अपमान सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे भी अधिक भयावह बात यह है कि जातंकवादियों ने खुलेआम ऐलान किया है कि यदि किसी ने पीड़ित की मदद की तो उसके साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जाएगा। यह कानून-व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है और क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करता है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 7 मार्च को हुई इतनी गंभीर घटना के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि इस घटना में शामिल सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, पीड़ित बुजुर्ग और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और समाज में कानून का भरोसा कायम रहे। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

Chandra Shekhar Aazad

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उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद के थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र की पूरा चौकी के बेरगांव में नारी शक्ति, साहस, वीरता और न्याय की अनोखी मिसाल, माता अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में लगाए गए बोर्ड को एक पुलिसकर्मी द्वारा लात मारकर गिराने की घटना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। यह केवल एक बोर्ड नहीं, बल्कि भारत की महान विरासत, नारी सम्मान और करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि इस घटना की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पुलिसकर्मी के विरुद्ध कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। लोक माता अहिल्याबाई होल्कर जी का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Chandra Shekhar Aazad

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ये जातीय कुंठा से ग्रसित एक पाखंडी है, जो सन्त के वस्त्र पहन कर भी जातिगत गाली-गलौच और जातीय ऊंच-नीच की बातें करता रहता है! इसके बयान तमाम मेहनतकश एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों व जातियों, और हमारे महापुरुषों का भी अपमान है जिसे ये बहुजन समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। व्यक्ति कर्म से बड़ा होता है जाति से नहीं, जाति के आधार पर ऊंच-नीच की बात करने वाला स्वयं महानीच होता है। सुन पाखंडी, ये 'अभद्रता' करना बंद कर दे, वरना हम चमड़ी उतारना भी जानते हैं, उसकी जूती बनाना भी जानते हैं और वक्त पड़ने पर जूती से सेवा करना भी जानते हैं। इस ठंड में भी हमारी सेवाएं उपलब्ध हैं, गर्मी आ जायेगी और जातीय श्रेष्ठता का भूत उतर जायेगा। सरकार को चेतावनी है या तो इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर इसे तत्काल जेल में डालो वरना भीम आर्मी मौका मिलते ही इनकी 'सेवा' कर देगी। #ArrestRambhadracharya

Chandra Shekhar Aazad

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हरियाणा के हिसार ज़िले के भारत नगर में 16 वर्षीय गणेश वाल्मीकि के जन्मदिन की खुशी मातम में बदल गई। परिवार म्यूज़िक बजाकर जन्मदिन मना रहा था — यह किसी भी इंसान का मौलिक अधिकार है। लेकिन शराब के नशे में धुत पुलिसकर्मी जबरन म्यूज़िक बंद करवाने आए, जातिसूचक गालियाँ दीं, कुछ और पुलिस कर्मी बुलवा कर मारपीट चालू कर दी महिलाओ को भी नहीं बक्शा।महिलाओं के साथ बदतमीज़ी की, अंततः जिस मासूम का जन्मदिन था, उसे पुलिसवालों ने छत से नीचे फेंक दिया — और गणेश की मौके पर ही मौत हो गई। यह कोई हादसा नहीं, यह साफ़ तौर पर दलित विरोधी पुलिसिया हत्या है। घटना अत्यंत दुखद और दण्डनीय है।मेरी संवेदनाएं परिजनों के साथ है। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। हम मुख्यमंत्री Nayab Saini जी से पूछते हैं: क्या हमारे वाल्मीकि समाज के बच्चों को खुशी मनाने का हक़ नहीं? क्या गणेश की हत्या पर भी प्रशासन चुप रहेगा? हम CMO Haryana से माँग करते हैं: 1. दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी व हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस चले। 3. पीड़ित परिवार को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा और सरकारी नौकरी दी जाए।

Chandra Shekhar Aazad

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हरदोई जिले के बेनीगंज थाना क्षेत्र के महुआ कोला गांव में तीन वर्ष पूर्व बहुजन समाज ने आपसी सहयोग से अपने खेत में बुद्ध विहार का निर्माण करवाया था और तभी से वहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने हेतु अनुमति के लिए प्रयासरत थे। हार-थक कर उन्होंने बुधवार (27 मई) को प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन भाजपा नेता द्वारा वहां अपने इष्ट की प्रतिमा रखकर बुद्ध विहार को मंदिर बताने का प्रयास करते हुए मामले को अलग रूप दे दिया गया। मामले में पुलिस प्रशासन से बातचीत बहस में बदल गई और भाजपा नेता पक्ष के लोगों द्वारा आगजनी किए जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए बहुजन समाज के लोगों पर लाठीचार्ज किया। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं तक को नहीं छोड़ा गया तथा कम से कम 20-25 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। यह घटना बेहद निंदनीय और अस्वीकार्य है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, आखिर बहुजन समाज को अपने ही खेत में बने बुद्ध विहार में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति के लिए तीन साल तक क्यों रोका गया? आखिर तीन साल तक अनुमति रोककर रखने का आधार क्या था? क्या बहुजन समाज की धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकार आपकी व्यवस्था में दोयम दर्जे के हैं? यदि प्रशासन समय पर निष्पक्ष फैसला लेता, तो न विवाद होता, न तनाव फैलता और न ही महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों पर लाठियां बरसतीं। तीन साल तक अनुमति लंबित रखना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि बहुजन समाज की आस्था की उपेक्षा का गंभीर उदाहरण है। और यह पहली बार नहीं है जब हरदोई में बहुजन महापुरुषों और प्रतीकों के प्रति प्रशासनिक उदासीनता देखने को मिली हो। लगभग एक वर्ष पूर्व जिला हरदोई के डीएम चौराहे से सौंदर्यीकरण के नाम पर हटाई गई राष्ट्रनायक, अखंड भारत के निर्माता एवं मानवता के प्रतीक चक्रवर्ती महान सम्राट अशोक मौर्य जी की लाट एवं राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह को आज तक पुनः स्थापित नहीं किया गया। हम Government of UP से मांग करते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, निर्दोष लोगों को तत्काल रिहा किया जाए,घायलों का समुचित एवं निःशुल्क इलाज कराया जाए तथा तथा एकपक्षीय कार्रवाई करने वाले अधिकारियों और माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा मैं शीघ्र वहां पहुंचकर, अपने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होऊंगा।

Chandra Shekhar Aazad

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उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद के राजेपुर थाना क्षेत्र के चाचूपुर जटपुरा गांव में शनिवार सुबह बृजेश लोधी का शव शराब ठेके के नजदीक पुलिया के नीचे नाले में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजनों ने शराब ठेके के सेल्समैन पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के विरोध में उग्र हुए ग्रामीणों और महिलाओं ने शराब ठेके को हटाने की मांग को लेकर शव उठाने से इनकार कर दिया, जिससे मौके पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इसके बाद जो हुआ, वह और भी शर्मनाक है। दबिश के नाम पर पुलिस द्वारा किसी को भी नहीं बख्शा गया और पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को लाठियों से निर्ममता से पीटा, जो निंदनीय और अस्वीकार्य है। संलग्न वीडियो दबिश के दौरान दूसरे दिन का है। हम तो पहले से ही कह रहे हैं कि हमारी नस्लों को बर्बाद करने के उद्देश्य से हमारी बस्तियों में लंबे समय से बड़े पैमाने पर नशे के ठेके खोले जा रहे हैं। इन ठेकों को बंद कराने के लिए जब हमारे लोग आंदोलन करते हैं, तो सरकार उन्हीं पर मुकदमे दर्ज कर देती है-यह एक कड़वी सच्चाई है। हम Government of UP से माँग करते हैं:- इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो।आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई हो।गांव के पास स्थित शराब ठेके को तुरंत हटाया जाए। उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने पर बहुजन बस्तियों से ऐसे सभी नशे के ठेकों को हटाया जाएगा और आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाएगा। CM Office, GoUP Yogi Adityanath #ASP_K_Mission2027

Chandra Shekhar Aazad

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मध्यप्रदेश के कटनी जिले की जीआरपी थाने की वीभत्स घटना से पूरा देश शर्मिंदा है। वीडियो में एक बच्चे और बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा जा रहा है, बताया जा रहा है कि पीड़ित महिला कुसुम वंशकार और उनका 15 वर्षीय पोता दीपराज दलित परिवार से आते हैं। इन दोनों को भाजपा सरकार के वर्दी वाले गुंडों ने कमरे में बंद करके एक दूसरे के सामने ही जमकर जलील करते हुए पाइप से पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया। यही है भाजपा के कुशासन का असली दलित प्रेम जिसमें चोरी के नाम पर किसी भी असहाय परिवार से नाबालिग बच्चे और बुजुर्ग मां को उठा लो फिर उन पर अपनी वर्दी की भड़ास निकाल दो। मुख्यमंत्री Dr Mohan Yadav अगर आप से प्रदेश नहीं संभल रहा तो तत्काल इस्तीफा दे दीजिए, क्योंकि न सिर्फ कटनी बल्कि इससे पहले सागर, सतना, नरसिंहपुर और अशोकनगर की घटनाएं लगातार आपकी प्रशासनिक क्षमता और नियत पर सवाल खड़े कर रही हैं। मैं, भीम आर्मी भारत एकता मिशन और Aazad Samaj Party - Kanshi Ram इस हृदय विदारक घटना में इस पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। इन दोनों को इंसाफ दिलाने के लिए इस घटना में संलिप्त सभी दोषी जीआरपी पुलिस कर्मियों को तत्काल बर्खास्त करके जेल में डालिए ताकि आगे से ऐसा करने की किसी की हिम्मत न पड़े। Ashwini Vaishnaw

Chandra Shekhar Aazad

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के सुभाषपुरा थाना क्षेत्र के इंदरगढ़ गांव में दलित युवक नारद की बर्बर हत्या ने पूरे बहुजन समाज को झकझोर कर रख दिया है। नारद, जो अपने मामा के घर आया हुआ था, ने सरपंच के बोरवेल से पानी भरने की "हिम्मत" की, और इसी "जुर्म" में उसे लाठी-डंडों से इतना बेरहमी से पीटा गया कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह घटना न केवल दलित समाज पर बढ़ते अत्याचारों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भाजपा सरकारों के "एक है तो सेफ है" जैसे दावे, दलितों को "सेफ" करने में पूरी तरह विफल हैं। DGP MP इस जघन्य अपराध के सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर सख्त से सख्त कार्यवाही करें।

Chandra Shekhar Aazad

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कानपुर जिले के सिविल लाइंस स्थित नाइट क्लब में एक सिख युवक के साथ हुई बर्बरता बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। दस्तार खींचकर पीटना, बाल पकड़कर घसीटना, नाक की हड्डी तोड़ देना और थप्पड़ मारना सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि इंसानियत और धार्मिक सम्मान पर हमला है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, जब पुलिस ऑफिस से चंद कदम दूर अपराधी खुलेआम हैवानियत करें, धमकियां दें और कानून का भय बिल्कुल खत्म दिखाई दे, तब प्रदेश की कानून व्यवस्था पर जनता भरोसा कैसे करे? क्या यही “कानून का राज” है, जिसके दावे लगातार किए जाते हैं? Government of UP दोषियों पर सख्त से सख्त धाराओं में कार्रवाई हो, पीड़ित युवक को न्याय मिले और ऐसी घटनाओं पर सरकार एवं प्रशासन स्पष्ट संदेश दे कि धार्मिक पहचान और मान-सम्मान पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Chandra Shekhar Aazad

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तेलंगाना राज्य के संगारेड्डी ज़िले के तेल्लापुर गाँव में सामाजिक व शैक्षणिक क्रांति के अग्रदूत, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले जी की प्रतिमा पर कानून-व्यवस्था के रखवालों की मौजूदगी में दिनदहाड़े किया गया हमला न केवल कायरतापूर्ण और आपराधिक है, बल्कि यह करोड़ों अनुयायियों तथा मानवतावादी विचारधारा में आस्था रखने वाले समाज की भावनाओं पर सीधा हमला है। राष्ट्रपिता फुले जी वही महामानव हैं जिन्होंने- • 1848 में देश का पहला बालिका विद्यालय खोला- पहली महिला शिक्षिका, क्रांति ज्योति राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले को तैयार किया • सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष किया • छूआछूत और जाति प्रथा को पाप बताते हुए शूद्रों की दासता के खिलाफ क्रांति का शंखनाद किया • सत्यशोधक समाज की स्थापना कर जातिविहीन समाज की नींव रखी • दलितों, महिलाओं, पिछड़ों, किसानों और मज़दूरों को संगठित कर चेतना दी यह घटना स्पष्ट करती है कि पितृसत्तात्मक और जातिवादी सोच आज भी स्त्री-मुक्ति, शिक्षा और शूद्रोद्धार के प्रतीकों से भयभीत है। हम सवाल करते हैं- क्या स्त्रियों को शिक्षित करना अपराध है? क्या जातिवाद का विरोध गुनाह है? क्या बहुजन इतिहास और महापुरुषों का सम्मान अब भी असहनीय है? हम Telangana CMO से माँग करते हैं- • दोषियों की तत्काल पहचान कर गिरफ्तारी की जाए और कठोरतम कार्रवाई हो। • क्षतिग्रस्त प्रतिमा के स्थान पर शीघ्र ही नयी, भव्य और सम्मानजनक प्रतिमा स्थापित की जाए। राष्ट्रपिता फुले जी का अपमान बहुजन समाज नहीं सहेगा।

Chandra Shekhar Aazad

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बिहार निवासी मौलाना तौसीफ रजा मजहरी, जो बरेली शरीफ में ताजश्शरिया के सालाना उर्स में शामिल होने आए थे, उनकी उत्तर प्रदेश के बरेली रेलवे स्टेशन के पास संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। परिजनों के पास मौजूद मृतक की आखिरी कॉल की रिकॉर्डिंग इस मामले को और अधिक संवेदनशील और गंभीर बनाती है।। कॉल के दौरान मौलाना ने स्पष्ट रूप से बताया था कि कुछ नशे में धुत लोग उनकी धार्मिक पहचान को लेकर गाली-गलौज और मारपीट कर रहे हैं तथा उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कई बार मदद की गुहार भी लगाई। वहीं दूसरी ओर, घटना पर Bareilly Police का यह बयान कि खिड़की के पास बैठने के दौरान झपकी आने से गिरने के कारण मृत्यु हुई, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एक ओर पीड़ित की आखिरी कॉल में हमले और प्रताड़ना की बात सामने आ रही है, और दूसरी ओर आधिकारिक बयान इसे दुर्घटना बता रहा है।तो यह स्पष्ट रूप से विरोधाभास दर्शाता है। माननीय रेलमंत्री Ashwini Vaishnaw जी, ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। Ministry of Railways

Chandra Shekhar Aazad

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बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में मामूली पार्किंग विवाद को लेकर नवी हुसैन की बीच बाज़ार गला रेतकर की गई निर्मम हत्या मानवता को शर्मसार करने वाली है। सैकड़ों लोगों के सामने इस जघन्य अपराध को अंजाम देना और आरोपी का सिर लेकर खुलेआम घूमना दर्शाता है कि अपराधियों में कानून का खौफ समाप्त हो चुका है और प्रदेश में “जंगल राज” और भी गहराता जा रहा है। इसके बाद भीड़ द्वारा आरोपी की हत्या कर देना भी उतना ही चिंताजनक है। यह बताता है कि जब सरकारें समय पर और प्रभावी कार्रवाई नहीं करती, तो समाज में अराजकता और भीड़तंत्र जन्म लेने लगता है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में न्यायालयों की जगह सड़कों पर ही फैसले होने लगेंगे और लोकतंत्र की जगह “जंगल राज” अपनी जड़ें और गहरी करता जाएगा। कानून का राज ही किसी भी सभ्य समाज की पहचान है और उसकी अनुपस्थिति सबसे बड़ा खतरा है।
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बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में मामूली पार्किंग विवाद को लेकर नवी हुसैन की बीच बाज़ार गला रेतकर की गई निर्मम हत्या मानवता को शर्मसार करने वाली है। सैकड़ों लोगों के सामने इस जघन्य अपराध को अंजाम देना और आरोपी का सिर लेकर खुलेआम घूमना दर्शाता है कि अपराधियों में कानून का खौफ समाप्त हो चुका है और प्रदेश में “जंगल राज” और भी गहराता जा रहा है। इसके बाद भीड़ द्वारा आरोपी की हत्या कर देना भी उतना ही चिंताजनक है। यह बताता है कि जब सरकारें समय पर और प्रभावी कार्रवाई नहीं करती, तो समाज में अराजकता और भीड़तंत्र जन्म लेने लगता है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में न्यायालयों की जगह सड़कों पर ही फैसले होने लगेंगे और लोकतंत्र की जगह “जंगल राज” अपनी जड़ें और गहरी करता जाएगा। कानून का राज ही किसी भी सभ्य समाज की पहचान है और उसकी अनुपस्थिति सबसे बड़ा खतरा है।

Chandra Shekhar Aazad

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