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Chandra Shekhar Aazad

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Founder @BhimArmy_BEM, National President @AzadSamajParty, Member of Parliament - Nagina Loksabha Uttar Pradesh

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बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा। महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।

बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा। महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।

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दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।

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दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।

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15 मई 2026 को मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम का अपहरण कर निर्मम हत्या से जुड़े बाकी आरोपियों को जेल भेजने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजनों और समाज के लोगों पर लाठीचार्ज तथा न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाना भाजपा सरकार की दलित विरोधी और दमनकारी कार्यशैली को दर्शाता है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यदि पीड़ित परिवार इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता का आरोप लगा रहा है, तो उनकी मांगों को दबाने के बजाय पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई दोषी बचने न पाए और कोई निर्दोष फंसने न पाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। मैं शीघ्र ही मेरठ पहुंचकर अपने इस परिवार से मुलाकात करूंगा।

15 मई 2026 को मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम का अपहरण कर निर्मम हत्या से जुड़े बाकी आरोपियों को जेल भेजने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजनों और समाज के लोगों पर लाठीचार्ज तथा न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाना भाजपा सरकार की दलित विरोधी और दमनकारी कार्यशैली को दर्शाता है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यदि पीड़ित परिवार इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता का आरोप लगा रहा है, तो उनकी मांगों को दबाने के बजाय पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई दोषी बचने न पाए और कोई निर्दोष फंसने न पाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। मैं शीघ्र ही मेरठ पहुंचकर अपने इस परिवार से मुलाकात करूंगा।

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भारत के माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी 10 मई को हुए भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का आज देश को संबोधित कर बखान कर रहे थे, और उधर पाकिस्तान अखनूर, सांबा जम्मू सहित सीमावर्ती इलाकों में अपने ड्रोन और यूएवी भेज रहा था। यह कैसा सीज़फायर है? #ceasfire #ceasefirevoilation

भारत के माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी 10 मई को हुए भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का आज देश को संबोधित कर बखान कर रहे थे, और उधर पाकिस्तान अखनूर, सांबा जम्मू सहित सीमावर्ती इलाकों में अपने ड्रोन और यूएवी भेज रहा था। यह कैसा सीज़फायर है? #ceasfire #ceasefirevoilation

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चुनावी रैलियों में "बटेंगे तो कटेंगे" का नारा देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी खुद सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मंच पर समाज को 'हरिजन" और 'गैर हरिजन' में बांट रहे हैं। क्या इस 'हरिजन"शब्द के प्रयोग से उनका तथाकथित हिंदू खतरे में नहीं आता? जबकि 1982 में केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के लिए एक एडवाइजरी जारी कर अनुसूचित जातियों के लिए 'हरिजन' शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा था। 2010 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस संबंध में नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी करके इस पर रोक लगाई थी। यहां तक कि माननीय न्यायालय द्वारा भी इसे अपमानजनक बताते हुए प्रतिबंध लगाया गया था। इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को क्या इन निर्णयों की जानकारी नहीं है? या जानबूझकर "हरिजन" शब्द का प्रयोग करके अनुसूचित वर्ग के लोगों का अपमान किया जा रहा है? जब गांधी जी ने अछूतों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जी ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे अपमानजनक शब्द बताया था। ये सवाल उस समय भी पूछा गया था और आज भी प्रासंगिक है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बताएं, यदि अनुसूचित जाति के लोग 'हरिजन' हैं तो बाकी अन्य लोग ‘हरि’ के जन नहीं तो किसके जन हैं?

चुनावी रैलियों में "बटेंगे तो कटेंगे" का नारा देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी खुद सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मंच पर समाज को 'हरिजन" और 'गैर हरिजन' में बांट रहे हैं। क्या इस 'हरिजन"शब्द के प्रयोग से उनका तथाकथित हिंदू खतरे में नहीं आता? जबकि 1982 में केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के लिए एक एडवाइजरी जारी कर अनुसूचित जातियों के लिए 'हरिजन' शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा था। 2010 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस संबंध में नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी करके इस पर रोक लगाई थी। यहां तक कि माननीय न्यायालय द्वारा भी इसे अपमानजनक बताते हुए प्रतिबंध लगाया गया था। इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को क्या इन निर्णयों की जानकारी नहीं है? या जानबूझकर "हरिजन" शब्द का प्रयोग करके अनुसूचित वर्ग के लोगों का अपमान किया जा रहा है? जब गांधी जी ने अछूतों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जी ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे अपमानजनक शब्द बताया था। ये सवाल उस समय भी पूछा गया था और आज भी प्रासंगिक है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बताएं, यदि अनुसूचित जाति के लोग 'हरिजन' हैं तो बाकी अन्य लोग ‘हरि’ के जन नहीं तो किसके जन हैं?

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ग्वालियर में डीएम ऑफिस पर ज्ञापन देने गए हमारे गुर्जर समाज के लोगों पर लाठीचार्ज करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है! गुर्जर समाज पर पड़ी एक-एक लाठी को पूरे देश के लोग देख रहे है। कल जिस तरह से गुर्जर महाकुंभ में आये लोगों के वाहनों को पुलिस द्वारा नुकसान पहुंचाया गया उस से यह स्पष्ट होता है कि सरकार के नेताओ के इशारे पर यह सब गुर्जर समाज को डराने के लिये कराया गया है। यदि गुर्जर समाज के निर्दोष लोगों पर फर्जी मुकदमे लगाकर उन्हें परेशान किया गया तो भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) इस अन्याय के विरोध में आंदोलन करेगी!

ग्वालियर में डीएम ऑफिस पर ज्ञापन देने गए हमारे गुर्जर समाज के लोगों पर लाठीचार्ज करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है! गुर्जर समाज पर पड़ी एक-एक लाठी को पूरे देश के लोग देख रहे है। कल जिस तरह से गुर्जर महाकुंभ में आये लोगों के वाहनों को पुलिस द्वारा नुकसान पहुंचाया गया उस से यह स्पष्ट होता है कि सरकार के नेताओ के इशारे पर यह सब गुर्जर समाज को डराने के लिये कराया गया है। यदि गुर्जर समाज के निर्दोष लोगों पर फर्जी मुकदमे लगाकर उन्हें परेशान किया गया तो भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) इस अन्याय के विरोध में आंदोलन करेगी!

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उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी के थाना जामों क्षेत्र के ग्राम बंधवा मजरे रेसी में जातंकवादी द्वारा जानवर चराने गए दलित युवक चन्द्रशेखर सरोज से बेवजह गला दबाकर बेरहमी से मारपीट करने और इतना ही नहीं, उसी रात करीब 1:40 बजे पीड़ित परिवार के घर में आग लगाने, जिससे उनका छप्पर पूरी तरह जलकर राख हो गया। परिवार ने किसी तरह अपनी जान बचाई। घटना अत्यंत पीड़ादायक और दण्डनीय है। जातंकवादी के हौसले इतने बुलंद थे कि नशे की हालत में आए दिन जान से मारने की धमकी देता था। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यह घटना केवल एक परिवार पर हमला नहीं, बल्कि आपके राज में समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि-आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, आगजनी से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। CM Office, GoUP

उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी के थाना जामों क्षेत्र के ग्राम बंधवा मजरे रेसी में जातंकवादी द्वारा जानवर चराने गए दलित युवक चन्द्रशेखर सरोज से बेवजह गला दबाकर बेरहमी से मारपीट करने और इतना ही नहीं, उसी रात करीब 1:40 बजे पीड़ित परिवार के घर में आग लगाने, जिससे उनका छप्पर पूरी तरह जलकर राख हो गया। परिवार ने किसी तरह अपनी जान बचाई। घटना अत्यंत पीड़ादायक और दण्डनीय है। जातंकवादी के हौसले इतने बुलंद थे कि नशे की हालत में आए दिन जान से मारने की धमकी देता था। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यह घटना केवल एक परिवार पर हमला नहीं, बल्कि आपके राज में समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि-आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, आगजनी से हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। CM Office, GoUP

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उत्तर प्रदेश के हमीरपुर विधानसभा के पतारा गांव में पिछड़े समाज के छोटेलाल प्रजापति की लाठी डंडे से पीट- पीटकर हत्या कर दी गई। सामंतियों का दुस्साहस देखो भाई छोटेलाल को मारकर उनकी लाश उन्ही के घर के पास फेक गए, इस वारदात के एक दिन पहले भी सामंती गुंडे पूरे परिवार को धमकी देकर गए थे। इतनी बड़ी वारदात के बावजूद आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार से जानकारी मिली है कि तकरीबन 10-12 गुंडों ने भाई छोटेलाल की हत्या की है. लेकिन FIR में सिर्फ 3 ही नाम हैं, बाकी आरोपियों को बचाया जा रहा है। प्रशासन के लोगों सुन लो अगर आरोपियों की जाति देखकर बचाने की कोशिश की गई तो Aazad Samaj Party - Kanshi Ram के कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर विधानसभा के पतारा गांव में पिछड़े समाज के छोटेलाल प्रजापति की लाठी डंडे से पीट- पीटकर हत्या कर दी गई। सामंतियों का दुस्साहस देखो भाई छोटेलाल को मारकर उनकी लाश उन्ही के घर के पास फेक गए, इस वारदात के एक दिन पहले भी सामंती गुंडे पूरे परिवार को धमकी देकर गए थे। इतनी बड़ी वारदात के बावजूद आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। परिवार से जानकारी मिली है कि तकरीबन 10-12 गुंडों ने भाई छोटेलाल की हत्या की है. लेकिन FIR में सिर्फ 3 ही नाम हैं, बाकी आरोपियों को बचाया जा रहा है। प्रशासन के लोगों सुन लो अगर आरोपियों की जाति देखकर बचाने की कोशिश की गई तो Aazad Samaj Party - Kanshi Ram के कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।

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नगीना चुनाव के समय हम सब पर प्रचार का बहुत प्रेशर था। लेकिन एक दिन जब इन साथियों का प्रचार देखा तो मन प्रसन्न हो गया, यह प्रचार भी हमेशा याद रहेगा मुझे और आपकी टीम से जल्द मिलूंगा।

नगीना चुनाव के समय हम सब पर प्रचार का बहुत प्रेशर था। लेकिन एक दिन जब इन साथियों का प्रचार देखा तो मन प्रसन्न हो गया, यह प्रचार भी हमेशा याद रहेगा मुझे और आपकी टीम से जल्द मिलूंगा।

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प्रयागराज जनपद के गऊघाट में हॉलीडे होम योजना के नाम पर चला “अतिक्रमण हटाओ” अभियान विकास नहीं, बल्कि व्यवस्था की कठोरता और मानवीय संवेदनहीनता का प्रतीक है। कल सुबह से जिला प्रशासन, सिविल पुलिस, आरपीएफ व अन्य विभागों की भारी मौजूदगी में अभियान चलाया गया। प्रशासन का दावा है कि किसी भी विरोध को नियंत्रित कर कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। लोगों को लाठियों से खदेड़े जाने, घरों से अर्तन-बर्तन और जरूरी सामान तक उठाने का अवसर नहीं दिया गया। अचानक पहुंची पुलिस द्वारा महिलाओं पर लाठीचार्ज भी किया गया, जिनमें वृद्ध तथा गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने “शांतिपूर्ण कार्रवाई” के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर अंतर ने आधी आबादी को उचित और न्यायसंगत हिस्सेदारी दिए बिना नारी वंदन अधिनियम लागू कर ‘नारी वंदन’ का ढिंढोरा पीटने वाली बीजेपी के आधी आबादी के असली 'वंदन' का सच एक बार फिर से उजागर किया है।

प्रयागराज जनपद के गऊघाट में हॉलीडे होम योजना के नाम पर चला “अतिक्रमण हटाओ” अभियान विकास नहीं, बल्कि व्यवस्था की कठोरता और मानवीय संवेदनहीनता का प्रतीक है। कल सुबह से जिला प्रशासन, सिविल पुलिस, आरपीएफ व अन्य विभागों की भारी मौजूदगी में अभियान चलाया गया। प्रशासन का दावा है कि किसी भी विरोध को नियंत्रित कर कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। लोगों को लाठियों से खदेड़े जाने, घरों से अर्तन-बर्तन और जरूरी सामान तक उठाने का अवसर नहीं दिया गया। अचानक पहुंची पुलिस द्वारा महिलाओं पर लाठीचार्ज भी किया गया, जिनमें वृद्ध तथा गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने “शांतिपूर्ण कार्रवाई” के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर अंतर ने आधी आबादी को उचित और न्यायसंगत हिस्सेदारी दिए बिना नारी वंदन अधिनियम लागू कर ‘नारी वंदन’ का ढिंढोरा पीटने वाली बीजेपी के आधी आबादी के असली 'वंदन' का सच एक बार फिर से उजागर किया है।

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हरियाणा के जिला पलवल में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के बोर्ड को उखाड़ फेंकने की घटना न सिर्फ निंदनीय, बल्कि सामाजिक न्याय के खिलाफ सोची-समझी साजिश है। यह घटना उन जातिवादी मानसिकताओं की पोल खोलती है जो आज भी पिछड़े, दलित और वंचित समाज के महापुरुषों के सम्मान से चिढ़ती हैं। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि कर्पूरी ठाकुर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति और हक-हकूक की ज्वलंत मशाल हैं, जिसे कोई मिटा नहीं सकता! यह हमला उस विचारधारा पर है जिसने पिछड़ों, दलितों और गरीबों को उनका हक दिलाया। यह घटना दर्शाती है कि जातिवादी शक्तियां आज भी समतामूलक समाज से डरती हैं और कर्पूरी ठाकुर जैसे महापुरुषों के प्रतीकों को मिटाकर बहुजन चेतना को कमजोर करना चाहती हैं। मैं MyGovHaryana से माँग करता हूँ कि — 1. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 2. वहीं पर दोबारा कर्पूरी ठाकुर जी का सम्मानजनक बोर्ड लगाया जाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 3. ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए सरकार व प्रशासन सार्वजनिक रूप से इस घटना की निंदा करें। मैं चेतावनी देता हूं कि अगर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो इसे बहुजन समाज पर हमला माना जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णायक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर जी अमर थे, अमर हैं, और अमर रहेंगे! उनकी विचारधारा को कोई ताकत नहीं मिटा सकती! Nayab Saini, CMO Haryana

हरियाणा के जिला पलवल में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के बोर्ड को उखाड़ फेंकने की घटना न सिर्फ निंदनीय, बल्कि सामाजिक न्याय के खिलाफ सोची-समझी साजिश है। यह घटना उन जातिवादी मानसिकताओं की पोल खोलती है जो आज भी पिछड़े, दलित और वंचित समाज के महापुरुषों के सम्मान से चिढ़ती हैं। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि कर्पूरी ठाकुर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति और हक-हकूक की ज्वलंत मशाल हैं, जिसे कोई मिटा नहीं सकता! यह हमला उस विचारधारा पर है जिसने पिछड़ों, दलितों और गरीबों को उनका हक दिलाया। यह घटना दर्शाती है कि जातिवादी शक्तियां आज भी समतामूलक समाज से डरती हैं और कर्पूरी ठाकुर जैसे महापुरुषों के प्रतीकों को मिटाकर बहुजन चेतना को कमजोर करना चाहती हैं। मैं MyGovHaryana से माँग करता हूँ कि — 1. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 2. वहीं पर दोबारा कर्पूरी ठाकुर जी का सम्मानजनक बोर्ड लगाया जाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 3. ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए सरकार व प्रशासन सार्वजनिक रूप से इस घटना की निंदा करें। मैं चेतावनी देता हूं कि अगर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो इसे बहुजन समाज पर हमला माना जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णायक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर जी अमर थे, अमर हैं, और अमर रहेंगे! उनकी विचारधारा को कोई ताकत नहीं मिटा सकती! Nayab Saini, CMO Haryana

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ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा अपनी तीन महीने पहले (26 जनवरी 2026 को) मृत हुई बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर ले जा रहे हैं। जिस बहन का पति और इकलौती संतान पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे और अब पूरे परिवार में सिर्फ वही अकेले जीवित बचे हैं। अपनी बहन के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण बैंक कर्मचारियों ने ‘नियमों’ का हवाला देते हुए उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया। परेशान होकर वे सीधे श्मशान घाट पहुंचे। अपनी बहन की कब्र खोदी और उनका कंकाल बाहर निकाला। कंकाल को एक कपड़े में लपेटकर, अपने कंधे पर लादे, 5 किमी नंगे पांव चलते हुए वे सीधे बैंक के भीतर जा पहुंचे। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावे के ये प्रमाण पत्र इतने कम समय में बन पाना किसी के लिए संभव नहीं है। और फिर एक तो वे गरीब, ऊपर से आदिवासी-ऐसे में इन कागजों को तुरंत जुटा पाना उनके लिए असंभव था। वहीं, इसी बैंकिंग व्यवस्था में उद्योगपतियों के वो 11 लाख करोड़ रुपये के कर्जे चुपचाप माफ़ भी हो जाते हैं, जिससे वे अरबों-खरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं। ओडिशा की यह घटना व्यवस्था की संवेदनहीनता और असमानता की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।

ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा अपनी तीन महीने पहले (26 जनवरी 2026 को) मृत हुई बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर ले जा रहे हैं। जिस बहन का पति और इकलौती संतान पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे और अब पूरे परिवार में सिर्फ वही अकेले जीवित बचे हैं। अपनी बहन के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण बैंक कर्मचारियों ने ‘नियमों’ का हवाला देते हुए उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया। परेशान होकर वे सीधे श्मशान घाट पहुंचे। अपनी बहन की कब्र खोदी और उनका कंकाल बाहर निकाला। कंकाल को एक कपड़े में लपेटकर, अपने कंधे पर लादे, 5 किमी नंगे पांव चलते हुए वे सीधे बैंक के भीतर जा पहुंचे। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावे के ये प्रमाण पत्र इतने कम समय में बन पाना किसी के लिए संभव नहीं है। और फिर एक तो वे गरीब, ऊपर से आदिवासी-ऐसे में इन कागजों को तुरंत जुटा पाना उनके लिए असंभव था। वहीं, इसी बैंकिंग व्यवस्था में उद्योगपतियों के वो 11 लाख करोड़ रुपये के कर्जे चुपचाप माफ़ भी हो जाते हैं, जिससे वे अरबों-खरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं। ओडिशा की यह घटना व्यवस्था की संवेदनहीनता और असमानता की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।

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मुख्यमंत्री योगी जी के राज में बहुजनों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही और अब ये जानलेवा हो गया है। बाराबंकी में सामुहिक दुष्कर्म पीड़ित दलित छात्रा की कहीं सुनवाई न होने से आरोपियों के हौसले बुलन्द हो गए और अपनी हरकतों से बाज़ नही आए और अंत में युवती ने जान दे दी! बेहद दुखद, शर्मनाक और निंदनीय। अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले हैदरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया जाए व दुष्कर्म के आरोपियों को गिरफ्तार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर सख्त सजा दिलाई जाए।

मुख्यमंत्री योगी जी के राज में बहुजनों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही और अब ये जानलेवा हो गया है। बाराबंकी में सामुहिक दुष्कर्म पीड़ित दलित छात्रा की कहीं सुनवाई न होने से आरोपियों के हौसले बुलन्द हो गए और अपनी हरकतों से बाज़ नही आए और अंत में युवती ने जान दे दी! बेहद दुखद, शर्मनाक और निंदनीय। अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले हैदरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया जाए व दुष्कर्म के आरोपियों को गिरफ्तार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चला कर सख्त सजा दिलाई जाए।

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महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के धर्माबाद तहसील के मौजे माष्टी गांव में घटित घटना बेहद शर्मनाक, पीड़ादायक, निंदनीय और संविधान-विरोधी है। काफी संघर्ष के बाद प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद गाँव में पहली बार परम पूज्य बाबा साहेब की जयंती मनाई गई, वो भी 24 अप्रैल को। लेकिन इस हिम्मत की सजा पूरी बस्ती पर सुनियोजित हमले के रूप में दी गई, जो साफ दर्शाता है कि जातिवादी ताकतें आज भी लोकतंत्र और बराबरी के खिलाफ खड़ी हैं। महिलाओं के साथ अभद्रता, नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और निर्दोष लोगों पर जानलेवा हमला।यह सब किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अभी तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि पीड़ित पक्ष के लोगों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया है और भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के पदाधिकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। यह सीधा-सीधा अन्याय और प्रशासनिक पक्षपात को दर्शाता है। हम CMO Maharashtra से मांग करते हैं: सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, पीड़ितों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं, महिलाओं और बच्चियों के साथ हुई घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो, पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए, और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) , प्रदेश अध्यक्ष अशोक कांबले जी के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन करेगी। Devendra Fadnavis

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के धर्माबाद तहसील के मौजे माष्टी गांव में घटित घटना बेहद शर्मनाक, पीड़ादायक, निंदनीय और संविधान-विरोधी है। काफी संघर्ष के बाद प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद गाँव में पहली बार परम पूज्य बाबा साहेब की जयंती मनाई गई, वो भी 24 अप्रैल को। लेकिन इस हिम्मत की सजा पूरी बस्ती पर सुनियोजित हमले के रूप में दी गई, जो साफ दर्शाता है कि जातिवादी ताकतें आज भी लोकतंत्र और बराबरी के खिलाफ खड़ी हैं। महिलाओं के साथ अभद्रता, नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और निर्दोष लोगों पर जानलेवा हमला।यह सब किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अभी तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि पीड़ित पक्ष के लोगों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया है और भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के पदाधिकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। यह सीधा-सीधा अन्याय और प्रशासनिक पक्षपात को दर्शाता है। हम CMO Maharashtra से मांग करते हैं: सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, पीड़ितों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं, महिलाओं और बच्चियों के साथ हुई घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो, पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए, और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) , प्रदेश अध्यक्ष अशोक कांबले जी के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन करेगी। Devendra Fadnavis

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उत्तर प्रदेश के ज़िला बरेली के नवाबगंज क्षेत्र में अपनी उधार दी गई रकम वापस मांगने पर दलित युवक पप्पू दिवाकर के साथ जो बर्बरता की गई—उसे जातिसूचक गालियाँ देना, जबरन सिर-मूंछ मुंडवाना, चेहरे पर कालिख पोतकर गांव से निकालना—यह अत्यंत पीड़ादायक, शर्मनाक और जातीय आतंक का घिनौना उदाहरण है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह अपराध गांव के लोगों के सामने किया गया, इसका वीडियो बनाया गया और पीड़ित को इतना मानसिक रूप से तोड़ दिया गया कि वह महीनों तक चुप रहने को मजबूर रहा। यह वही भय और दबाव की साजिश है, जिसके ज़रिए दलितों को न्याय मांगने से रोका जाता है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि—सभी आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सख्त धाराएं लगाई जाएं,वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वालों पर अलग से कठोर कार्रवाई हो,पीड़ित को सरकारी सुरक्षा, उचित मुआवजा और मानसिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश के ज़िला बरेली के नवाबगंज क्षेत्र में अपनी उधार दी गई रकम वापस मांगने पर दलित युवक पप्पू दिवाकर के साथ जो बर्बरता की गई—उसे जातिसूचक गालियाँ देना, जबरन सिर-मूंछ मुंडवाना, चेहरे पर कालिख पोतकर गांव से निकालना—यह अत्यंत पीड़ादायक, शर्मनाक और जातीय आतंक का घिनौना उदाहरण है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह अपराध गांव के लोगों के सामने किया गया, इसका वीडियो बनाया गया और पीड़ित को इतना मानसिक रूप से तोड़ दिया गया कि वह महीनों तक चुप रहने को मजबूर रहा। यह वही भय और दबाव की साजिश है, जिसके ज़रिए दलितों को न्याय मांगने से रोका जाता है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि—सभी आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सख्त धाराएं लगाई जाएं,वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वालों पर अलग से कठोर कार्रवाई हो,पीड़ित को सरकारी सुरक्षा, उचित मुआवजा और मानसिक उपचार उपलब्ध कराया जाए। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

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उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में दलित समाज की दो नाबालिग बच्चियों (12 और 14 वर्ष) का 12 फरवरी को जातिवादी गुंडों ने अपहरण कर बंधक बना लिया। गाँव के कुछ लोगों ने पंचायत कर जबरन सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे आज दिनदहाड़े अवैध हथियारों से लैस होकर पीड़ित परिवार के घर में घुसे। उन्होंने बड़ी बच्ची को जबरन उठाने की कोशिश की, और जब छोटी बच्ची ने विरोध किया, तो उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई, और बड़ी बच्ची को अपराधी जबरन उठा ले गए। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि जातिगत बर्बरता की पराकाष्ठा है। इस नृशंस घटना के बाद परिवार व क्षेत्र में भय का माहौल है। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि दलित समाज पर खुला हमला है! उत्तर प्रदेश में दबंगों और जातिवादी अपराधियों के हौसले कानून से बड़े हो चुके हैं। प्रशासन न्याय देने में विफल है, अपराधियों के सामने घुटने टेक चुका है। Government of UP से हमारी मांगें:- 1. आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, POCSO अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। 3. पीड़ित परिवार को राज्य सरकार सुरक्षा और उचित मुआवजा दे। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा! कासगंज की भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की टीम न्याय के लिए इस जातिवादी बर्बरता के खिलाफ पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में दलित समाज की दो नाबालिग बच्चियों (12 और 14 वर्ष) का 12 फरवरी को जातिवादी गुंडों ने अपहरण कर बंधक बना लिया। गाँव के कुछ लोगों ने पंचायत कर जबरन सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे आज दिनदहाड़े अवैध हथियारों से लैस होकर पीड़ित परिवार के घर में घुसे। उन्होंने बड़ी बच्ची को जबरन उठाने की कोशिश की, और जब छोटी बच्ची ने विरोध किया, तो उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई, और बड़ी बच्ची को अपराधी जबरन उठा ले गए। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि जातिगत बर्बरता की पराकाष्ठा है। इस नृशंस घटना के बाद परिवार व क्षेत्र में भय का माहौल है। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि दलित समाज पर खुला हमला है! उत्तर प्रदेश में दबंगों और जातिवादी अपराधियों के हौसले कानून से बड़े हो चुके हैं। प्रशासन न्याय देने में विफल है, अपराधियों के सामने घुटने टेक चुका है। Government of UP से हमारी मांगें:- 1. आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, POCSO अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। 3. पीड़ित परिवार को राज्य सरकार सुरक्षा और उचित मुआवजा दे। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा! कासगंज की भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की टीम न्याय के लिए इस जातिवादी बर्बरता के खिलाफ पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

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ओडिशा के गंजाम जिले में दो दलित व्यक्तियों को बुरी तरह पीटा गया, आधा सिर मुंडवाया गया, करीब दो किलोमीटर घुटनों के बल रेंगने और मवेशियों का चारा खाने व नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया — यह घटना मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। दोनों दलित अपनी बेटी की शादी के लिए मेहनत की कमाई से तीन गायें खरीदकर घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें रोककर ‘गौ-तस्करी’ का झूठा आरोप लगाया गया और 30,000 रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो उनके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया गया। यह कोई 'गौ-रक्षा' नहीं, यह जातंकवाद है। गौ-रक्षा अब भीड़तंत्र का हथियार बन चुकी है।मोहम्मद अख़लाक से लेकर पहलू ख़ान और जुनैद तक — और अब दलितों तक — यह हिंसा सुनियोजित है। अगर गौ-रक्षा की आड़ में बहुजन समाज को डराने, मारने और अपमानित करने का यह सिलसिला नहीं रुका, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे। हम CMO Odisha से माँग करते हैं: 1. दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और उनके खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाए। 2. पीड़ितों को सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए। 3. ओडिशा सरकार और NHRC इस अमानवीयता पर तुरंत संज्ञान लें। Mohan Charan Majhi National Commission for Scheduled Castes NHRC India

ओडिशा के गंजाम जिले में दो दलित व्यक्तियों को बुरी तरह पीटा गया, आधा सिर मुंडवाया गया, करीब दो किलोमीटर घुटनों के बल रेंगने और मवेशियों का चारा खाने व नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया — यह घटना मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। दोनों दलित अपनी बेटी की शादी के लिए मेहनत की कमाई से तीन गायें खरीदकर घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें रोककर ‘गौ-तस्करी’ का झूठा आरोप लगाया गया और 30,000 रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो उनके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया गया। यह कोई 'गौ-रक्षा' नहीं, यह जातंकवाद है। गौ-रक्षा अब भीड़तंत्र का हथियार बन चुकी है।मोहम्मद अख़लाक से लेकर पहलू ख़ान और जुनैद तक — और अब दलितों तक — यह हिंसा सुनियोजित है। अगर गौ-रक्षा की आड़ में बहुजन समाज को डराने, मारने और अपमानित करने का यह सिलसिला नहीं रुका, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे। हम CMO Odisha से माँग करते हैं: 1. दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और उनके खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाए। 2. पीड़ितों को सरकारी सुरक्षा और उचित मुआवज़ा दिया जाए। 3. ओडिशा सरकार और NHRC इस अमानवीयता पर तुरंत संज्ञान लें। Mohan Charan Majhi National Commission for Scheduled Castes NHRC India

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देहरादून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर “मुसलमानों के लिए रोड नहीं” जैसा घृणित और विभाजनकारी संदेश लिखा जाना न केवल सामाजिक सौहार्द पर हमला है, बल्कि यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रहार और संविधान के आर्टिकल 15,19 व 21 का उल्लंघन है। इस प्रकार का संदेश यह दर्शाता है कि कुछ ताकतें सुनियोजित तरीके से देश को धार्मिक आधार पर बाँटने की साज़िश कर रही हैं। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है-धर्म, जाति, वर्ग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक और दंडनीय है। आज अगर रास्ते मुसलमानों के लिए बंद करने की बात लिखी जा रही है, तो कल यही सोच दलितों,पिछड़ी जातियों,आदिवासियों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यको के खिलाफ भी खड़ी की जाएगी। यह केवल एक समुदाय का सवाल नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा का प्रश्न है। हम मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी से पूछना चाहते हैं कि ऐसे तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? सार्वजनिक संपत्ति पर नफरत फैलाने वाले संदेश लिखना और समाज को बाँटने की कोशिश करना गंभीर अपराध है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि दोषियों की तत्काल पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि यह कृत्य देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने की मंशा से किया गया है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सहित कठोर धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत नफरत से नहीं, संविधान से चलेगा। समानता, भाईचारा और न्याय - यही इस देश की असली पहचान हैं।

देहरादून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर “मुसलमानों के लिए रोड नहीं” जैसा घृणित और विभाजनकारी संदेश लिखा जाना न केवल सामाजिक सौहार्द पर हमला है, बल्कि यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रहार और संविधान के आर्टिकल 15,19 व 21 का उल्लंघन है। इस प्रकार का संदेश यह दर्शाता है कि कुछ ताकतें सुनियोजित तरीके से देश को धार्मिक आधार पर बाँटने की साज़िश कर रही हैं। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है-धर्म, जाति, वर्ग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक और दंडनीय है। आज अगर रास्ते मुसलमानों के लिए बंद करने की बात लिखी जा रही है, तो कल यही सोच दलितों,पिछड़ी जातियों,आदिवासियों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यको के खिलाफ भी खड़ी की जाएगी। यह केवल एक समुदाय का सवाल नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और सामाजिक न्याय की अवधारणा का प्रश्न है। हम मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी से पूछना चाहते हैं कि ऐसे तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? सार्वजनिक संपत्ति पर नफरत फैलाने वाले संदेश लिखना और समाज को बाँटने की कोशिश करना गंभीर अपराध है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि दोषियों की तत्काल पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि यह कृत्य देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने की मंशा से किया गया है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) सहित कठोर धाराओं में कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत नफरत से नहीं, संविधान से चलेगा। समानता, भाईचारा और न्याय - यही इस देश की असली पहचान हैं।

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उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के शाहबाद थाना क्षेत्र के गांव रुस्तमपुर में दलित समाज की एक बारात में डीजे पर बज रहे भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषितों, वंचितों और महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के गाने को जातिवादी मानसिकता ग्रस्त गुंडों द्वारा बंद करवाने की कोशिश की गई। जब बारातियों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी गईं और बुरी तरह पीटा गया। दूल्हे के भाई और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला केवल एक बारात पर नहीं, बल्कि दलित अस्मिता, आस्था और आज़ादी पर सीधा हमला है। हम पूछते हैं — क्या संविधान निर्माता का नाम लेना भी आज के भारत में 'अपराध' बन गया है? क्या दलितों को खुशियाँ मनाने, अपनी संस्कृति और नायकों का सम्मान करने का भी अधिकार नहीं बचा? हम Government of UP से माँग करते है:- 1. हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। 2. घटना में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और BNSS की कठोर धाराएँ लगाई जाएँ। 3. घायलों को निशुल्क सरकारी इलाज और समुचित मुआवज़ा प्रदान किया जाए। 4. पीड़ित पक्ष को सुरक्षा प्रदान की जाए। 5. मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच हो। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर के शाहबाद थाना क्षेत्र के गांव रुस्तमपुर में दलित समाज की एक बारात में डीजे पर बज रहे भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, शोषितों, वंचितों और महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के गाने को जातिवादी मानसिकता ग्रस्त गुंडों द्वारा बंद करवाने की कोशिश की गई। जब बारातियों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी गईं और बुरी तरह पीटा गया। दूल्हे के भाई और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला केवल एक बारात पर नहीं, बल्कि दलित अस्मिता, आस्था और आज़ादी पर सीधा हमला है। हम पूछते हैं — क्या संविधान निर्माता का नाम लेना भी आज के भारत में 'अपराध' बन गया है? क्या दलितों को खुशियाँ मनाने, अपनी संस्कृति और नायकों का सम्मान करने का भी अधिकार नहीं बचा? हम Government of UP से माँग करते है:- 1. हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। 2. घटना में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और BNSS की कठोर धाराएँ लगाई जाएँ। 3. घायलों को निशुल्क सरकारी इलाज और समुचित मुआवज़ा प्रदान किया जाए। 4. पीड़ित पक्ष को सुरक्षा प्रदान की जाए। 5. मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच हो। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आईएएस-पीसीएस प्री एग्जामिनेशन सेंटर छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों को अवैध बताकर जबरन छात्रावास खाली कराना, कमरों के ताले तोड़ना तथा बिजली-पानी काटना एनडीए सरकार की बहुजन विरोधी मानसिकता का एक और उदाहरण है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2024 में प्रवेश लिया था तथा 13 सितंबर 2024 को उन्हें छात्रावास आवंटित किया गया। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने छात्रावास में नए प्रवेश की प्रक्रिया ही नहीं कराई और न ही नए आवेदन आमंत्रित किए। ऐसे में छात्रों का कहना है कि उनका आवंटन सितंबर 2026 तक वैध है। बांग्लादेश में दलितों की दिखावटी चिंता करने वाले मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, क्या इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी छात्रों के साथ हो रही ज्यादती आपको दिखाई नहीं देती? हम Government of UP से मांग करते हैं कि छात्रों का उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए, छात्रावास की बिजली-पानी की व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए, वर्ष 2025 से लंबित छात्रावास प्रवेश प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों की शिक्षा और सम्मान पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा। University of Allahabad

Chandra Shekhar Aazad

82,763 görüntüleme • 5 gün önce

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15 मई 2026 को मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम का अपहरण कर निर्मम हत्या से जुड़े बाकी आरोपियों को जेल भेजने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजनों और समाज के लोगों पर लाठीचार्ज तथा न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाना भाजपा सरकार की दलित विरोधी और दमनकारी कार्यशैली को दर्शाता है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, यदि पीड़ित परिवार इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता का आरोप लगा रहा है, तो उनकी मांगों को दबाने के बजाय पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई दोषी बचने न पाए और कोई निर्दोष फंसने न पाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। मैं शीघ्र ही मेरठ पहुंचकर अपने इस परिवार से मुलाकात करूंगा।

Chandra Shekhar Aazad

151,006 görüntüleme • 16 gün önce

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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कोड़ा में किसान मोतीलाल कुशवाहा जी पर गोली चलाने की घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। पीड़ित किसान के अनुसार, कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग और उसके साथियों द्वारा गरीब किसानों की जमीनें हथियाने की शिकायत को लेकर ज्ञापन देने पर उन पर गोली चलाई गई। यह घटना कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है मुख्यमंत्री Dr Mohan Yadav, शालिग्राम गर्ग का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। कुछ समय पूर्व एक दलित परिवार की शादी में उत्पात मचाने और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटना प्रमुख हैं। उस मामले की जांच अभी भी जारी है। यदि उस मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता था। हम MP MyGov से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराई जाए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध उसकी सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी किसान को भय, हिंसा या दबाव के बल पर अपनी जमीन छोड़ने के लिए विवश करना अस्वीकार्य है। हम घायल किसान मोतीलाल कुशवाहा जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।

Chandra Shekhar Aazad

63,449 görüntüleme • 10 gün önce

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उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद के बिलग्राम थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना बेहद शर्मनाक, अमानवीय और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली है। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि बच्ची 22 जून से लापता थी, लेकिन सूचना देने के बावजूद पुलिस ने उसी दिन शिकायत दर्ज नहीं की और अगले दिन एफआईआर दर्ज की। 28 जून को बच्ची के मिलने के बाद, परिजनों के अनुसार, उसे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। इसके बावजूद यदि उसका समय पर चिकित्सीय उपचार और मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया तथा महिला पुलिसकर्मियों द्वारा उसे डराने-धमकाने की भी शिकायत है। ये आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। परिजनों का यह भी आरोप है कि मामले में प्रारंभिक स्तर पर POCSO अधिनियम और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान भी लागू नहीं किए गए। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, आखिर बेटियों को समय पर न्याय और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था कब मिलेगी? हम Government of UP से मांग करते हैं कि पीड़िता को तत्काल सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और प्रभावी जांच कर सभी आवश्यक कानूनी प्रावधानों, जिनमें POCSO अधिनियम और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की लागू होने वाली धाराएं भी शामिल हैं, के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पुलिस कर्मियों द्वारा लापरवाही, संवेदनहीनता या अनुचित व्यवहार पर सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। पीड़िता और उसके परिवार को शीघ्र न्याय मिले। भीम आर्मी–आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) की हरदोई टीम शुरुआत से ही पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है। CM Office, GoUP

Chandra Shekhar Aazad

82,457 görüntüleme • 25 gün önce

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भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं। इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है। सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है।किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है। यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है। सवाल उठते है— पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है? मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को याद दिलाना ज़रूरी है— 1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं। 2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है। 3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा। इसका साफ़ मतलब है—संविधान सर्वोच्च है—कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता। जय भीम,जय भारत,जय संविधान,जय विज्ञान Government of UP CM Office, GoUP DGP UP

Chandra Shekhar Aazad

319,608 görüntüleme • 7 ay önce

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ये जातीय कुंठा से ग्रसित एक पाखंडी है, जो सन्त के वस्त्र पहन कर भी जातिगत गाली-गलौच और जातीय ऊंच-नीच की बातें करता रहता है! इसके बयान तमाम मेहनतकश एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों व जातियों, और हमारे महापुरुषों का भी अपमान है जिसे ये बहुजन समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। व्यक्ति कर्म से बड़ा होता है जाति से नहीं, जाति के आधार पर ऊंच-नीच की बात करने वाला स्वयं महानीच होता है। सुन पाखंडी, ये 'अभद्रता' करना बंद कर दे, वरना हम चमड़ी उतारना भी जानते हैं, उसकी जूती बनाना भी जानते हैं और वक्त पड़ने पर जूती से सेवा करना भी जानते हैं। इस ठंड में भी हमारी सेवाएं उपलब्ध हैं, गर्मी आ जायेगी और जातीय श्रेष्ठता का भूत उतर जायेगा। सरकार को चेतावनी है या तो इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर इसे तत्काल जेल में डालो वरना भीम आर्मी मौका मिलते ही इनकी 'सेवा' कर देगी। #ArrestRambhadracharya

Chandra Shekhar Aazad

1,088,036 görüntüleme • 2 yıl önce

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हरियाणा के हिसार ज़िले के भारत नगर में 16 वर्षीय गणेश वाल्मीकि के जन्मदिन की खुशी मातम में बदल गई। परिवार म्यूज़िक बजाकर जन्मदिन मना रहा था — यह किसी भी इंसान का मौलिक अधिकार है। लेकिन शराब के नशे में धुत पुलिसकर्मी जबरन म्यूज़िक बंद करवाने आए, जातिसूचक गालियाँ दीं, कुछ और पुलिस कर्मी बुलवा कर मारपीट चालू कर दी महिलाओ को भी नहीं बक्शा।महिलाओं के साथ बदतमीज़ी की, अंततः जिस मासूम का जन्मदिन था, उसे पुलिसवालों ने छत से नीचे फेंक दिया — और गणेश की मौके पर ही मौत हो गई। यह कोई हादसा नहीं, यह साफ़ तौर पर दलित विरोधी पुलिसिया हत्या है। घटना अत्यंत दुखद और दण्डनीय है।मेरी संवेदनाएं परिजनों के साथ है। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। हम मुख्यमंत्री Nayab Saini जी से पूछते हैं: क्या हमारे वाल्मीकि समाज के बच्चों को खुशी मनाने का हक़ नहीं? क्या गणेश की हत्या पर भी प्रशासन चुप रहेगा? हम CMO Haryana से माँग करते हैं: 1. दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी व हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस चले। 3. पीड़ित परिवार को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा और सरकारी नौकरी दी जाए।

Chandra Shekhar Aazad

392,090 görüntüleme • 1 yıl önce

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उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के पुवायां थाना क्षेत्र के नाहिल गाँव में पाल समाज के बुजुर्ग को जातंकवादियों द्वारा सरेआम “मुर्गा” बनाना, पैरों में माथा रगड़वाना और डंडा लेकर गाली-गलौज व धमकी देना अमानवीय और बेहद चिंताजनक है। किसी भी बुजुर्ग के साथ इस तरह का अपमान सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे भी अधिक भयावह बात यह है कि जातंकवादियों ने खुलेआम ऐलान किया है कि यदि किसी ने पीड़ित की मदद की तो उसके साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जाएगा। यह कानून-व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है और क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करता है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 7 मार्च को हुई इतनी गंभीर घटना के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हम Government of UP से मांग करते हैं कि इस घटना में शामिल सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, पीड़ित बुजुर्ग और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और समाज में कानून का भरोसा कायम रहे। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

Chandra Shekhar Aazad

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परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi जी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है। इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी। ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

Chandra Shekhar Aazad

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मध्यप्रदेश के कटनी जिले की जीआरपी थाने की वीभत्स घटना से पूरा देश शर्मिंदा है। वीडियो में एक बच्चे और बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा जा रहा है, बताया जा रहा है कि पीड़ित महिला कुसुम वंशकार और उनका 15 वर्षीय पोता दीपराज दलित परिवार से आते हैं। इन दोनों को भाजपा सरकार के वर्दी वाले गुंडों ने कमरे में बंद करके एक दूसरे के सामने ही जमकर जलील करते हुए पाइप से पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया। यही है भाजपा के कुशासन का असली दलित प्रेम जिसमें चोरी के नाम पर किसी भी असहाय परिवार से नाबालिग बच्चे और बुजुर्ग मां को उठा लो फिर उन पर अपनी वर्दी की भड़ास निकाल दो। मुख्यमंत्री Dr Mohan Yadav अगर आप से प्रदेश नहीं संभल रहा तो तत्काल इस्तीफा दे दीजिए, क्योंकि न सिर्फ कटनी बल्कि इससे पहले सागर, सतना, नरसिंहपुर और अशोकनगर की घटनाएं लगातार आपकी प्रशासनिक क्षमता और नियत पर सवाल खड़े कर रही हैं। मैं, भीम आर्मी भारत एकता मिशन और Aazad Samaj Party - Kanshi Ram इस हृदय विदारक घटना में इस पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। इन दोनों को इंसाफ दिलाने के लिए इस घटना में संलिप्त सभी दोषी जीआरपी पुलिस कर्मियों को तत्काल बर्खास्त करके जेल में डालिए ताकि आगे से ऐसा करने की किसी की हिम्मत न पड़े। Ashwini Vaishnaw

Chandra Shekhar Aazad

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के सुभाषपुरा थाना क्षेत्र के इंदरगढ़ गांव में दलित युवक नारद की बर्बर हत्या ने पूरे बहुजन समाज को झकझोर कर रख दिया है। नारद, जो अपने मामा के घर आया हुआ था, ने सरपंच के बोरवेल से पानी भरने की "हिम्मत" की, और इसी "जुर्म" में उसे लाठी-डंडों से इतना बेरहमी से पीटा गया कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह घटना न केवल दलित समाज पर बढ़ते अत्याचारों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भाजपा सरकारों के "एक है तो सेफ है" जैसे दावे, दलितों को "सेफ" करने में पूरी तरह विफल हैं। DGP MP इस जघन्य अपराध के सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर सख्त से सख्त कार्यवाही करें।

Chandra Shekhar Aazad

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सरकार के पास इतनी शक्ति होती है कि जब सरकार ठान लेती है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। 6 महीने में रेत पर इस तरह एक शहर बसाना भी इसी शक्ति का उदाहरण है, जो दर्शाता है कि अगर सरकार चाहती है, तो किसी भी बड़ी चुनौती का समाधान किया जा सकता है। लेकिन जब बात आती है देश के गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, दलित, आदिवासी और महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की, तो सवाल उठता है कि यदि इन आयोजनों को इतने बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जा सकता है, तो शिक्षा, चिकित्सा, महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और बच्चों के भविष्य के लिए क्यों नहीं इस तरह की इच्छाशक्ति दिखाई जा रही है। झांसी में आग लगने से नवजात बच्चों की मौत और ऑक्सीजन की कमी से बच्चों का दम तोड़ना—ये घटनाएँ साफ दिखाती हैं कि जनता की जान और उनके बुनियादी अधिकार हमारी प्राथमिकताओं में कहीं पीछे रह गए हैं। क्या हमारी प्राथमिकताएँ गलत हैं? क्या सामाजिक उत्थान की दिशा में गंभीरता की कमी है? क्या व्यापक जनकल्याण में सरकार से हमारे द्वारा सवाल करना गलत है? यदि समाज के वंचित तबकों के उत्थान के लिए भी उसी दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति से काम किया जाए, तो एक स्थायी बदलाव संभव है। जय भीम, जय भारत, जय संविधान।

Chandra Shekhar Aazad

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तेलंगाना राज्य के संगारेड्डी ज़िले के तेल्लापुर गाँव में सामाजिक व शैक्षणिक क्रांति के अग्रदूत, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले जी की प्रतिमा पर कानून-व्यवस्था के रखवालों की मौजूदगी में दिनदहाड़े किया गया हमला न केवल कायरतापूर्ण और आपराधिक है, बल्कि यह करोड़ों अनुयायियों तथा मानवतावादी विचारधारा में आस्था रखने वाले समाज की भावनाओं पर सीधा हमला है। राष्ट्रपिता फुले जी वही महामानव हैं जिन्होंने- • 1848 में देश का पहला बालिका विद्यालय खोला- पहली महिला शिक्षिका, क्रांति ज्योति राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले को तैयार किया • सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष किया • छूआछूत और जाति प्रथा को पाप बताते हुए शूद्रों की दासता के खिलाफ क्रांति का शंखनाद किया • सत्यशोधक समाज की स्थापना कर जातिविहीन समाज की नींव रखी • दलितों, महिलाओं, पिछड़ों, किसानों और मज़दूरों को संगठित कर चेतना दी यह घटना स्पष्ट करती है कि पितृसत्तात्मक और जातिवादी सोच आज भी स्त्री-मुक्ति, शिक्षा और शूद्रोद्धार के प्रतीकों से भयभीत है। हम सवाल करते हैं- क्या स्त्रियों को शिक्षित करना अपराध है? क्या जातिवाद का विरोध गुनाह है? क्या बहुजन इतिहास और महापुरुषों का सम्मान अब भी असहनीय है? हम Telangana CMO से माँग करते हैं- • दोषियों की तत्काल पहचान कर गिरफ्तारी की जाए और कठोरतम कार्रवाई हो। • क्षतिग्रस्त प्रतिमा के स्थान पर शीघ्र ही नयी, भव्य और सम्मानजनक प्रतिमा स्थापित की जाए। राष्ट्रपिता फुले जी का अपमान बहुजन समाज नहीं सहेगा।

Chandra Shekhar Aazad

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