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Dr Anuj Kumar

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Craniofacial Surgeon | Public Health Expert | Campaigner for Healthy Jharkhand

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आप चाहे किसी भी पीढ़ी के हों, Boomers, Gen X, Millenial, Gen-Z या Gen-Alpha कभी भी कश्मीर , लद्दाक, अरुणाचल जैसी दुर्गम जगह पर घूमने अगर जा रहे हैं, तो मन में कृतज्ञता का भाव लेकर जाइएगा । क्यूँकि जो आपके लिए महज सैर-सपाटा है, उसे महफ़ूज़ रखने के लिए भारतीय सेना अपना ख़ून बहाती है । (ऐसी ही एक की एक वीडियो , 18000 फीट पर, पहाड़ों के ऊपर, बंकरों में, जहाँ सड़कें नहीं पहुँचती, वहाँ भारतीय सेना के जवान अपने बंदूक की ट्रिगर पर उँगलियाँ रख तैनात रहते हैं, ताकि आपको आज़ादी मिलते रहे बुद्धिजीवी बन कर बात करने की)

आप चाहे किसी भी पीढ़ी के हों, Boomers, Gen X, Millenial, Gen-Z या Gen-Alpha कभी भी कश्मीर , लद्दाक, अरुणाचल जैसी दुर्गम जगह पर घूमने अगर जा रहे हैं, तो मन में कृतज्ञता का भाव लेकर जाइएगा । क्यूँकि जो आपके लिए महज सैर-सपाटा है, उसे महफ़ूज़ रखने के लिए भारतीय सेना अपना ख़ून बहाती है । (ऐसी ही एक की एक वीडियो , 18000 फीट पर, पहाड़ों के ऊपर, बंकरों में, जहाँ सड़कें नहीं पहुँचती, वहाँ भारतीय सेना के जवान अपने बंदूक की ट्रिगर पर उँगलियाँ रख तैनात रहते हैं, ताकि आपको आज़ादी मिलते रहे बुद्धिजीवी बन कर बात करने की)

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हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट हाल के दिनों में हम लोग ये दोनों शब्दों को सुनते आ रहे हैं । अक्सर लोग दोनों को एक ही चीज़ समझते हैं बल्कि दोनों बिलकुल अलग अलग चीज़ें हैं। हम ज़्यादा टेक्निकल ना जा कर सामान्य शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे। चलिये समझने के लिये हम हृदय को एक पानी के पम्प की तरह मानते हैं। पम्प को अगर देखें तो इसमें दो चीज़ें हैं। पहली की उसमें बिजली का प्रवाह आता है और उस बिजली के प्रवाह से जो ऊर्जा आती है उसकी मदद से पम्प पानी को खींच कर बाहर फेंकता है। ⭕️ अगर पम्प के नली में कुछ फँस जाए तो पम्प पानी ठीक से फेंक नहीं पाएगा | हार्ट अटैक में यही होता है। हृदय की नली में किसी कारणवश सिकुड़ने आ जाये या कुछ फँस जाए या जम जाए तो वो शरीर में खून अच्छे से नहीं भेज पाता। हार्ट अटैक में मरीज़ अचानक से बेहोश नहीं होते। उनमें ये लक्षण देखने को मिल सकता है सीने में दर्द होना। यह दर्द पेट के ऊपर की तरफ जाता है कभी बायें हाथ या कंधे की तरफ जाता है कई बार जबड़े में या दांत में भी दर्द हो सकता है। सांस लेने में तकलीफ और पसीना आना। कुछ लोगो को गैस होने की फीलिंग आती है। ⭕️ लेकिन अगर पम्प में बिजली का प्रवाह अचानक बंद हो जाए तो पम्प बिलकुल काम करना बंद कर देगा। कार्डियक अरेस्ट में यही होता है। हृदय में करेंट का प्रवाह अचानक से बंद हो जाता है जिसके कारण हृदय अचानक से पूरी तरह रुक जाता। इसी कारणवश मरीज़ अचानक से तुरंत बेहोश हो जाता। इसमें आप CPR दे कर कोशिश करते हैं कि हृदय वापस पम्प करना शुरू करे या प्रेशर से वो खून पम्प करता रहे। और जैसे ही मरीज़ अस्पताल पहुँचता है AED मशीन की मदद से उसे वापस से स्टार्ट करने की कोशिश की जाती है। आशा करता हूँ कि आपको दोनों के बीच अंतर समझने में थोड़ी आसानी होगी। आप ये वीडियो में एनीमेशन से भी समझने की कोशिश कर सकते हैं

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट हाल के दिनों में हम लोग ये दोनों शब्दों को सुनते आ रहे हैं । अक्सर लोग दोनों को एक ही चीज़ समझते हैं बल्कि दोनों बिलकुल अलग अलग चीज़ें हैं। हम ज़्यादा टेक्निकल ना जा कर सामान्य शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे। चलिये समझने के लिये हम हृदय को एक पानी के पम्प की तरह मानते हैं। पम्प को अगर देखें तो इसमें दो चीज़ें हैं। पहली की उसमें बिजली का प्रवाह आता है और उस बिजली के प्रवाह से जो ऊर्जा आती है उसकी मदद से पम्प पानी को खींच कर बाहर फेंकता है। ⭕️ अगर पम्प के नली में कुछ फँस जाए तो पम्प पानी ठीक से फेंक नहीं पाएगा | हार्ट अटैक में यही होता है। हृदय की नली में किसी कारणवश सिकुड़ने आ जाये या कुछ फँस जाए या जम जाए तो वो शरीर में खून अच्छे से नहीं भेज पाता। हार्ट अटैक में मरीज़ अचानक से बेहोश नहीं होते। उनमें ये लक्षण देखने को मिल सकता है सीने में दर्द होना। यह दर्द पेट के ऊपर की तरफ जाता है कभी बायें हाथ या कंधे की तरफ जाता है कई बार जबड़े में या दांत में भी दर्द हो सकता है। सांस लेने में तकलीफ और पसीना आना। कुछ लोगो को गैस होने की फीलिंग आती है। ⭕️ लेकिन अगर पम्प में बिजली का प्रवाह अचानक बंद हो जाए तो पम्प बिलकुल काम करना बंद कर देगा। कार्डियक अरेस्ट में यही होता है। हृदय में करेंट का प्रवाह अचानक से बंद हो जाता है जिसके कारण हृदय अचानक से पूरी तरह रुक जाता। इसी कारणवश मरीज़ अचानक से तुरंत बेहोश हो जाता। इसमें आप CPR दे कर कोशिश करते हैं कि हृदय वापस पम्प करना शुरू करे या प्रेशर से वो खून पम्प करता रहे। और जैसे ही मरीज़ अस्पताल पहुँचता है AED मशीन की मदद से उसे वापस से स्टार्ट करने की कोशिश की जाती है। आशा करता हूँ कि आपको दोनों के बीच अंतर समझने में थोड़ी आसानी होगी। आप ये वीडियो में एनीमेशन से भी समझने की कोशिश कर सकते हैं

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मुंबई पुलिस कमिश्नर और मानखुर्द पुलिस स्टेशन के SHO कृपया ये बतायें की वीडियो में दिख रहे बच्चे की जगह अगर आपका अपना बच्चा होता तो भी क्या आप इस आरोपी को वार्निंग दे कर थाने से जाने देते । और अगर पैसे दे कर छोड़े हैं तो जितने पैसे लिए उससे दोगुने मैं देता हूँ, आप इस आरोपी व्यक्ति को इसी तरह शेर के बाड़े में छोड़ दीजिए । मुंबई पोलीस Mumbai Police Commissioner of Police, Greater Mumbai

मुंबई पुलिस कमिश्नर और मानखुर्द पुलिस स्टेशन के SHO कृपया ये बतायें की वीडियो में दिख रहे बच्चे की जगह अगर आपका अपना बच्चा होता तो भी क्या आप इस आरोपी को वार्निंग दे कर थाने से जाने देते । और अगर पैसे दे कर छोड़े हैं तो जितने पैसे लिए उससे दोगुने मैं देता हूँ, आप इस आरोपी व्यक्ति को इसी तरह शेर के बाड़े में छोड़ दीजिए । मुंबई पोलीस Mumbai Police Commissioner of Police, Greater Mumbai

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ये आज दिल्ली एयरपोर्ट की वीडियो है जहाँ एक 60 वर्षीय बुजुर्ग को कार्डियक अरेस्ट आ जाता है। वहाँ मौजूद एक महिला चिकित्सक ने तुरंत CPR शुरू किया और मरीज़ बच गये। ऐसी परिस्थितियों में आप इससे बेहतर और कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने लगातार CPR दिया। और आस पास खड़े लोगों को मदद बुलाने को कहा।

ये आज दिल्ली एयरपोर्ट की वीडियो है जहाँ एक 60 वर्षीय बुजुर्ग को कार्डियक अरेस्ट आ जाता है। वहाँ मौजूद एक महिला चिकित्सक ने तुरंत CPR शुरू किया और मरीज़ बच गये। ऐसी परिस्थितियों में आप इससे बेहतर और कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने लगातार CPR दिया। और आस पास खड़े लोगों को मदद बुलाने को कहा।

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dranuj_k's profile picture

गॉल ब्लैडर स्टोन को लेकर अब तक जो स्थापित तथ्य हैं और जो आप सभी को जाननी चाहिये 1) गॉल ब्लैडर, शरीर का एक छोटा सा अंग है. यह लीवर के ठीक नीचे होता है। गॉल ब्लैडर में आमतौर पर बहुत ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल पित्त में जमा हो जाने के कारण स्टोन बनने लगते हैं। अगर ये स्टोन गॉल ब्लैडर से निकलने वाली नली को ब्लॉक कर दे तो परेशानी बढ़ जाती है। 2) गॉल ब्लैडर स्टोन होने पर लक्षण हैं पेट दर्द जो की सामान्यतः पेट के ऊपरी दाहिने भाग से शुरू हो कर बीच तक जा सकता है, गैस की शिकायत, उल्टी, बुख़ार। कई बार जोन्डिस जैसे लक्षण भी आते हैं। लेकिन ये ज़रूरी नहीं की हर मामले में मरीज़ लक्षण आएँ। कई बार स्टोन होने पर भी किसी तरह के लक्षण मरीज़ को नहीं आते। लक्षण मुख्यतः तब आते हैं जब वो स्टोन कि वजह से सूजन आ जाए या नली ब्लॉक हो जाए। 3) गॉल ब्लैडर स्टोन के कई मामलों में दवाई दिया जाता है। दवाई से स्टोन बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई रिसर्च में पाया गया कि स्टोन दवाई से घुल भी जाती है। लेकिन ये मुख्यतः किस तरह का स्टोन है उसपर निर्भर करता है। हर मामले में दवाई काम नहीं करती है। 4) अगर लक्षण बार बार आ रहे तो एक मात्र संपूर्ण इलाज सर्जरी है। सर्जरी में गॉल ब्लैडर को निकाल कर हटा दिया जाता है। ये एक काफ़ी हद तक सुरक्षित प्रक्रिया है। 5) अगर आपको लक्षण बार बार आ रहे हैं तो इसे बिलकुल नज़रअंदाज़ ना करें। इससे शरीर में गंभीर इन्फेक्शन, काफ़ी तेज़ दर्द और यहाँ तक की कैंसर होने तक का ख़तरा रहता है

Dr Anuj Kumar

274,495 Aufrufe • vor 2 Jahren

इस आतंकवादी को मरते दम तक जेल में सड़ा देना चाहिए ।
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