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Gurdeep Singh Sappal

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Permanent Invitee, Congress Working Com; Coordinator O/o Cong President, Incharge (Admin) @INCIndia; Ex-CEO/Editor RSTV; Ex-OSD to Vice Pres of India; @sbfindia

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बस यही तो आख़िरी मंज़िल है मीडिया की….. देहरादून में 16 करोड़ रुपये में पुल बना। कुछ दिनों में नीचे से ज़मीन खिसक गई। अब मज़दूर का इस्तीफ़ा चाहिये 😂😂

बस यही तो आख़िरी मंज़िल है मीडिया की….. देहरादून में 16 करोड़ रुपये में पुल बना। कुछ दिनों में नीचे से ज़मीन खिसक गई। अब मज़दूर का इस्तीफ़ा चाहिये 😂😂

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जो ज्ञानेश कुमार पिछले साल Rahul Gandhi की वोट चोरी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद कूद कर मीडिया के सामने आए थे, ख़ुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के राहुल जी को चैलेंज कर रहे थे कि एफिडेविट दो, सबूत दो या माफ़ी माँगो, वो ज्ञानेश कुमार अब कहाँ हैं? सवाल उनसे हैं, जवाब BJP दे रही है, उस पर भी जवाब ऐसा कि झूठे को झूठ का सहारा! सुधांशु त्रिवेदी बोल गए कि फॉर्म 6 बदला ही नहीं गया, जो सफेद झूठ है। बोल गए कि ट्रम्प ने बताया कि USAID ने भारत के चुनावों को प्रभावित करने के लिए millions of dollars दिए। साफ़ झूठ, जो ख़ुद मोदी सरकार ने संसद को बताया कि झूठ है, अमरीकी एम्बेसी ने कहा कि झूठ है। BJP को आज अपनी प्रेस कांफ्रेंस में ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए ऐसे झूठ का सहारा क्यों लेना पड़ा? इसलिए, कि ज्ञानेश कुमार के साथ मोदी शाह को भी बचाना है। लेकिन अब बच नहीं पाएंगे।

Gurdeep Singh Sappal

34,902 просмотров • 9 дней назад

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ट्रम्प कब क्या करेंगे, इसका तो कोई ओर-छोर होता नहीं है। लेकिन आज जो बिल पास हुआ, जिसमें 100 % टैरिफ का अधिकार senate ne ट्रम्प को दे दिया है, उसमें 80% डेमोक्रेट सांसद भी ट्रम्प के साथ खड़े हो गए, और भारत के ख़िलाफ़ हो गए हैं। ये कैसे हो गया? वो भी जब अभी अभी मोहन भागवत अमरीका हो कर आए हैं! लॉबिंग फर्म भारत सरकार ने लगा रखी हैं। ट्रेड डीलंपर बात हो रही है। तो फिर सब कैसे बदल गया? मोदी सरकार के पास रास्ता है।भारत अमरीका ट्रेड डील फ्रेमवर्क में ख़ुद मोदी सरकार ने साइन किए हैं, जिसमें पारा 8 में साफ़ लिखा है कि अगर भारत या अमरीका इकतरफ़ा टैरिफ बदलेंगे, तो दूसरे देश को भी टैरिफ का अधिकार होगा। अब वक़्त है, इस क्लॉज़ को लागू करे मोदी सरकार। जो सभी अमरीका से आने वाले औद्योगिक प्रोडक्ट पर जीरो प्रतिशत टैक्स मोदी सरकार ने लगाने की बात मानी है, उसे ख़ारिज करें।जवाबी reciprocal टैरिफ लगाये। जो ट्रेड बैरियर हटाने की बात मानते हुए UPI पर MDR चार्ज लगा दिया है, मोदी सरकार उसे वापिस ले कर ट्रम्प को मुँह तोड़ जवाब दें। लेकिन इसके लिए मोदी सरकार को हिम्मत दिखानी होगी। है हिम्मत? लंबलेट सरकार ऐसा नहीं कर सकेगी। Congress

Gurdeep Singh Sappal

42,833 просмотров • 17 дней назад

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दिसम्बर 1946 में सब संविधान सभा की बैठक हुई, तो उसके 389 सदस्यों में से 93 की सीट रियासतों के प्रतिनिधित्व के लिए थीं। लेकिन उस पहली मीटिंग में एक भी राजा या रियासत ने हिस्सा नहीं लिया। रियासतों का देश के 40% हिस्से पर क़ब्ज़ा था, भारत की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा वहाँ बसता था। उनकी हिस्सेदारी के बग़ैर संविधान और आज़ादी दोनों अधूरे थे। रियासतों में एक तरफ़ ग्वालियर, कोटा, अलवर नेतृत्व कर रहे थे, दूसरी तरफ़ हैदराबाद, जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर आदि थे। जब वे राजा भारत में शामिल होने में अनिच्छा दिखा रहे थे, तब अप्रैल 1946 में जवाहरलाल नेहरू ने उनके गढ़ ग्वालियर में जा कर ललकारा और ऐलान किया कि जो रियासतें भारत की संविधान सभा में शामिल नहीं होंगी, उन्हें भारत का दुश्मन माना जाएगा। फिर उन्होंने सरदार पटेल को ज़िम्मेदारी सौंपी। अगले चार महीने में 565 में से 562 रियासतें लाइन पर आ गई। जो तीन उन्हें अगले एक साल के भीतर भारत में शामिल करा लिया। ये हैदराबाद, जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर रियासतें थीं। ख़ास बात ये है, कि हिंदू रियासतों को लोकतांत्रिक भारत में शामिल न होने की शह सावरकर दे रहे थे। उनका सोचना था कि हिंदू राष्ट्र हिंदू राजाओं के दम पर ही बनेगा। आज उनके भक्त अखंड भारत की बात करते हैं। लेकिन तब वो एक लोकतांत्रिक भारत के स्वरूप के ही ख़िलाफ़ थे। आज श्री रत्नप्पा कुम्हार जी जन्म जयंती पर कांग्रेस हेडक्वार्टर, 24 अकबर रोड, नई दिल्ली ऑफिस में श्रद्धांजलि समारोह में उद्बोधन के अंश। Congress

Gurdeep Singh Sappal

30,494 просмотров • 18 дней назад

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गौरव भाटिया कहने लगे कि UPA के वक्त LPG सिलिंडर ₹1241 का था। लेकिन वो बताना भूल गए कि तब उस पर 600 रुपये की सब्सिडी भी मिलती थी। उस वक्त कच्चे तेल का रेट $ 145 होने पर भी आम लोगों को पेट्रोल 72 रुपये लीटर मिलता रहा। वो इसलिए कि डॉ मनमोहन सिंह जी की सरकार को दस साल में पेट्रोल- डीजल से 10 लाख करोड़ का टैक्स मिला और उस में से 9 लाख करोड़ उन्होंने सब्सिडी के रूप में वापिस कर दिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों का भार आम लोगों पर न पड़े। दूसरी तरफ़ मोदी सरकार ने 11 साल में 42 लाख करोड़ का टैक्स पेट्रोल डीजल से कमाया और सब्सिडी दो सिर्फ 1.70 लाख करोड़! इसीलिए कच्चे तेल के भाव $ 30-60 के बीच रहने पर भी लोग 90-100 रुपए प्रति लीटर पर पेट्रोल खरीदते रहे।

Gurdeep Singh Sappal

164,545 просмотров • 6 месяцев назад

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15 अगस्त, 1947 को जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने। किसी को आज़ाद भारत का मैप का पता ही ना था। अंग्रेजों ने भारत-पाकिस्तान का नक्शा दो दिन बाद 17 अगस्त को जारी किया। यही नहीं, 40 % भूभाग रियासतों के अधीन था। भारत- पाकिस्तान का नक्शा जारी होते ही विश्व का सबसे बड़ा पलायन शुरू हो गया। पलायन और दंगों में कोई बीस लाख लोग मारे गए। ऐसे माहौल में ये नेहरू ही थे, कि साम्प्रदायिक उन्माद के बावजूद भारत धर्मनिरपेक्ष देश बना। उन्हें जो देश मिला उसमें करीब 90 % गरीब थे, और करीब 90% निरक्षर थे। करीब 85-90% लोगों ने इतिहास में वोट नहीं दिया था। उन्हें मालूम ही नहीं था कि वोट कैसे देना है। पार्टी-प्रत्याशी का नाम भी वो नहीं पढ़ना जानते थे। नागरिकता साबित करने का कोई काग़ज़ उनके पास नहीं था। ऐसे में सबको वोटर बनाना, वोटिंग कराना, अनपढ़ वोटर अपनी पसंद का प्रत्याशी-पार्टी चुन सके इसके लिए चुनाव चिह्न का आईडिया लाना, ये सब विश्व में, इस स्केल पर पहली बार हो रहा था। नेहरू यदि उस वक़्त फेल जो जाते, तो भारत में लोकतंत्र जड़ें जमा ही नहीं पाता! Congress

Gurdeep Singh Sappal

16,108 просмотров • 16 дней назад

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Authentication के नाम पर संसद में विपक्ष की आवाज़ चुप कराई जा रही है। पहले भी authentication यानि सत्यापन की बात होती थी। लेकिन संसद में अपनी बात कहने के बाद। भाषण के दो दिन के भीतर स्पीकर या राज्यसभा अध्यक्ष को सबूत दिखाने होते थे। एडवांस में सूचना या authentication की शर्त केवल तब होती थी जब किसी सांसद या मंत्री या उच्च पदों पर आसीन लोगों के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पेश करना होता था, उस पर आरोप का अलग से विशेष प्रस्ताव, जिसे substantive motion कहते हैं। अगर पहले से सबूत लाने की शर्त हमेशा से होती तो ख़ुद बीजेपी पाच-छह दशक तक विपक्ष में रह कर संसद के मुद्दे न उठा पाती। एक आम सांसद या विपक्ष के पास कोई पुलिस या जाँच एजेंसी नहीं होती है। वो हमेशा पब्लिक जानकारी, अख़बार, मीडिया, किसी एक्सपर्ट ग्रुप या फिर निजी जानकारी के आधार पर मुद्दा उठाते है, जिसकी सत्यता की जाँच की ज़िम्मेदारीपूर्ण सरकार की होती है। पहले सबूत लाओ, फिर मुद्दा उठाओ, ये मोदी सरकार का ट्रेंड है। बाकी बीजेपी के सांसद तो जब चाहे, जो चाहे आरोप लगा हो सकते हैं, बदनाम कर ही सकते हैं, उन पर कोई रोक नहीं है!

Gurdeep Singh Sappal

27,796 просмотров • 2 месяцев назад

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आमतौर पर सिस्टम होता है कि कोई उत्पादन करता है, कोई पैकेजिंग करता है, कोई स्टोरेज का व्यापार करता है, कोई ट्रांसपोर्ट करता है, कोई आढ़ती या थोक का व्यापारी होता है, कोई मार्केटिंग देखता है, कोई रिटेल का बिज़नेस करता है। और सभी इसमें अपनी अपनी कमाई करते हैं। लेकिन मोदी सरकार ने जो सिस्टम बना दिया है, उसमें ये सभी काम सिर्फ एक कॉर्पोरेट ग्रुप करने लगा है। जैसे हिमाचल में सेब की पूरी सप्लाई चेन अदानी ग्रुप के पास हो गई है। तो कमाई भी सिर्फ अदानी की! इसीलिए बाक़ी सभी परेशान हैं। ज़्यादातर देशों में इस तरह के सिस्टम पर रोक है। उदाहरण के लिए, अमरीका में सौ साल पहले मीट की पूरी चेन पर- मवेशी, बुचड़ख़ाने, कोल्ड स्टोरेज, रेल, होलसेल, रिटेल पर ‘The Beef Trust’ का क़ब्ज़ा हो गया था। इसके ख़िलाफ़ वहाँ आंदोलन चला। आख़िरकार 1920 में Packers and Stockyards Act बना और इस पर रोक लगी। मोनोपॉली के जिस सिस्टम से सभी विकसित देश शताब्दी पहले किनारा कर चुके, उसे लोगों के हित के ख़िलाफ़ मान चुके, उसे मोदी भारत के लोगों पर क्यों लाद रहे हैं? Congress Mallikarjun Kharge Rahul Gandhi

Gurdeep Singh Sappal

16,089 просмотров • 1 месяц назад

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NTA के चेयरमैन हैं प्रदीप कुमार जोशी। मध्यप्रदेश में ये राज्य के पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) के अध्यक्ष बनाये गए थे। RTI में जानकारी मिली कि RSS प्रचारक विनोद ने बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी थी कि प्रदीप जोशी RSS और ABVP से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें अध्यक्ष बयाना जाये। और वो अध्यक्ष बन भी गए। प्रदीप जोशी के कार्यकाल में MPPSC में भर्ती घोटाला हुआ। BJP की सरकार ने तीन सदस्यीय जांच बैठाई। जाँच में पाया गया कि 350 नियुक्तियों में से 57 में घोटाला था। जाँच समिति ने SIT या EOW या CBI की आगे जांच की संस्तुति भी की। फिर क्या हुआ? फिर, प्रदीप जोशी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, न ही आगे कोई जाँच हुई। उल्टे, उनकी तरक्की हो गई। वो पहले UPSC के चेयरमैन बना दिए गए, फिर NTA के अध्यक्ष। जिन 57 लोगों की भर्ती ग़लत पायी गई, उनमें से कई अच्छे अच्छे पदों पर नियुक्त किए गए। डॉ राकेश मेहरा MPPSC के चेयरमैन बने, राजेश वर्मा दुर्गावती विश्वविद्यालय के VC बने इत्यादि। सवाल है, कि दागदार व्यक्ति को NTA का चेयरमैन क्यों बनाया गया, क्यों उसके भर्ती घोटाले की आगे जांच नहीं हुई, क्यों उसे अब बचाया जा रहा है। सिर्फ इसीलिए न की वह RSS से जुड़ा है। यह हकीकत है मोदी सरकार की नीयत की। यही नहीं, NTA की एक गवर्निंग बॉडी है, जिसमें IIT, IIM, IISER, JNU, IGNOU के डायरेक्टर और VC सदस्य हैं। 2024 से देश में NTA के काम को ले कर इतना हंगामा मचा है। लेकिन इस मैनेजमेंट बॉडी की पिछले ढाई साल में सिर्फ दो मीटिंग ही हुई हैं! ये है मोदी सरकार और उसकी संस्थाओं की गंभीरता! सिर्फ़ कड़े क़ानून पास करने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। व्यवस्था ही गड़बड़ है।

Gurdeep Singh Sappal

24,207 просмотров • 2 месяцев назад

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AI summit में मोदी सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है। लेकिन हक़ीक़त क्या है? * दुनिया में कुल AI पेटेंट में भारत का हिस्सा केवल 0.39% है। चीन का 70% है! * अगले साल चीन AI पर 100 billion डॉलर खर्च करेगा, अमरीकी कंपनियां 650 billion डॉलर खर्चेंगी, और भारत सरकार ने अपने बजट में मात्र 1000 करोड़ रुपये (करीब 12 million डॉलर) का प्रावधान किया है! * दुनिया के कुल डेटा का 20% अकेले भारत पैदा करता है, लेकिन डेटा स्टोरेज सुविधाओं में केवल 3 % हिस्सा है। * AI क्रांति के लिए ज़रूरी डेटा स्टोरेज के लिए हर साल 7 GW से 30 GW अतिरिक्त बिजली चाहिए। लेकिन आज तक मोदी सरकार ने AI की ऊर्जा जरूरतों के लिए कोई स्ट्रेटेजी पेपर तक नहीं बनाया है। * भारत की किसी यूनिवर्सिटी, किसी IIT, किसी कंपनी ने कोई काम का LLM यानि इंजन नहीं बनाया है। हम विदेशी LLM पर निर्भर हैं। * Semi-conductor/ GPU में हम विदेशों पर निर्भर हैं। इन सवालों के जवाब प्रधानमंत्री मोदी के पास नहीं हैं। बड़ी बड़ी बातें तो मोदी पहले भी कहते रहे हैं। लेकिन बिना इन्वेस्टमेंट के स्वच्छ भारत, स्मार्ट सिटी जैसी बातों का हश्र देश चुका है। बस एक इवेंट मैनेजमेंट में महारत थी, लेकिन AI समिट की अफ़रातफ़री ही बताती है कि अब वहाँ भी फेल हो गए हैं!

Gurdeep Singh Sappal

42,576 просмотров • 7 месяцев назад