
Gurdeep Singh Sappal
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Permanent Invitee, Congress Working Com; Coordinator O/o Cong President, Incharge (Admin) @INCIndia; Ex-CEO/Editor RSTV; Ex-OSD to Vice Pres of India; @sbfindia
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जो ज्ञानेश कुमार पिछले साल Rahul Gandhi की वोट चोरी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद कूद कर मीडिया के सामने आए थे, ख़ुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के राहुल जी को चैलेंज कर रहे थे कि एफिडेविट दो, सबूत दो या माफ़ी माँगो, वो ज्ञानेश कुमार अब कहाँ हैं? सवाल उनसे हैं, जवाब BJP दे रही है, उस पर भी जवाब ऐसा कि झूठे को झूठ का सहारा! सुधांशु त्रिवेदी बोल गए कि फॉर्म 6 बदला ही नहीं गया, जो सफेद झूठ है। बोल गए कि ट्रम्प ने बताया कि USAID ने भारत के चुनावों को प्रभावित करने के लिए millions of dollars दिए। साफ़ झूठ, जो ख़ुद मोदी सरकार ने संसद को बताया कि झूठ है, अमरीकी एम्बेसी ने कहा कि झूठ है। BJP को आज अपनी प्रेस कांफ्रेंस में ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए ऐसे झूठ का सहारा क्यों लेना पड़ा? इसलिए, कि ज्ञानेश कुमार के साथ मोदी शाह को भी बचाना है। लेकिन अब बच नहीं पाएंगे।
Gurdeep Singh Sappal34,902 görüntüleme • 9 gün önce

सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि पहले प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सीटें बिकती थी, MBBS की सीट 20-45 लाख रुपये तक जाती थी। प्रधानमंत्री मोदी ने NEET से जो व्यवस्था बनाई उसमें गरीब बच्चा भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में जा सकता है। लेकिन त्रिवेदी जी बताना भूल गए कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फीस एक करोड़ से तीन करोड़ रुपये तक हो गई है। कितने गरीब बच्चे ये फीस दे कर डॉक्टर बन सकते हैं?
Gurdeep Singh Sappal180,410 görüntüleme • 2 ay önce

ट्रम्प कब क्या करेंगे, इसका तो कोई ओर-छोर होता नहीं है। लेकिन आज जो बिल पास हुआ, जिसमें 100 % टैरिफ का अधिकार senate ne ट्रम्प को दे दिया है, उसमें 80% डेमोक्रेट सांसद भी ट्रम्प के साथ खड़े हो गए, और भारत के ख़िलाफ़ हो गए हैं। ये कैसे हो गया? वो भी जब अभी अभी मोहन भागवत अमरीका हो कर आए हैं! लॉबिंग फर्म भारत सरकार ने लगा रखी हैं। ट्रेड डीलंपर बात हो रही है। तो फिर सब कैसे बदल गया? मोदी सरकार के पास रास्ता है।भारत अमरीका ट्रेड डील फ्रेमवर्क में ख़ुद मोदी सरकार ने साइन किए हैं, जिसमें पारा 8 में साफ़ लिखा है कि अगर भारत या अमरीका इकतरफ़ा टैरिफ बदलेंगे, तो दूसरे देश को भी टैरिफ का अधिकार होगा। अब वक़्त है, इस क्लॉज़ को लागू करे मोदी सरकार। जो सभी अमरीका से आने वाले औद्योगिक प्रोडक्ट पर जीरो प्रतिशत टैक्स मोदी सरकार ने लगाने की बात मानी है, उसे ख़ारिज करें।जवाबी reciprocal टैरिफ लगाये। जो ट्रेड बैरियर हटाने की बात मानते हुए UPI पर MDR चार्ज लगा दिया है, मोदी सरकार उसे वापिस ले कर ट्रम्प को मुँह तोड़ जवाब दें। लेकिन इसके लिए मोदी सरकार को हिम्मत दिखानी होगी। है हिम्मत? लंबलेट सरकार ऐसा नहीं कर सकेगी। Congress
Gurdeep Singh Sappal42,833 görüntüleme • 17 gün önce

दिसम्बर 1946 में सब संविधान सभा की बैठक हुई, तो उसके 389 सदस्यों में से 93 की सीट रियासतों के प्रतिनिधित्व के लिए थीं। लेकिन उस पहली मीटिंग में एक भी राजा या रियासत ने हिस्सा नहीं लिया। रियासतों का देश के 40% हिस्से पर क़ब्ज़ा था, भारत की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा वहाँ बसता था। उनकी हिस्सेदारी के बग़ैर संविधान और आज़ादी दोनों अधूरे थे। रियासतों में एक तरफ़ ग्वालियर, कोटा, अलवर नेतृत्व कर रहे थे, दूसरी तरफ़ हैदराबाद, जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर आदि थे। जब वे राजा भारत में शामिल होने में अनिच्छा दिखा रहे थे, तब अप्रैल 1946 में जवाहरलाल नेहरू ने उनके गढ़ ग्वालियर में जा कर ललकारा और ऐलान किया कि जो रियासतें भारत की संविधान सभा में शामिल नहीं होंगी, उन्हें भारत का दुश्मन माना जाएगा। फिर उन्होंने सरदार पटेल को ज़िम्मेदारी सौंपी। अगले चार महीने में 565 में से 562 रियासतें लाइन पर आ गई। जो तीन उन्हें अगले एक साल के भीतर भारत में शामिल करा लिया। ये हैदराबाद, जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर रियासतें थीं। ख़ास बात ये है, कि हिंदू रियासतों को लोकतांत्रिक भारत में शामिल न होने की शह सावरकर दे रहे थे। उनका सोचना था कि हिंदू राष्ट्र हिंदू राजाओं के दम पर ही बनेगा। आज उनके भक्त अखंड भारत की बात करते हैं। लेकिन तब वो एक लोकतांत्रिक भारत के स्वरूप के ही ख़िलाफ़ थे। आज श्री रत्नप्पा कुम्हार जी जन्म जयंती पर कांग्रेस हेडक्वार्टर, 24 अकबर रोड, नई दिल्ली ऑफिस में श्रद्धांजलि समारोह में उद्बोधन के अंश। Congress
Gurdeep Singh Sappal30,494 görüntüleme • 18 gün önce

श्री सुधांशु त्रिवेदी ने चार मुद्दे उठाये: हर आंदोलन में एक से नारे क्यों लगते हैं आंदोलनकारी ग़ैर-राजनीति का मुखौटा पहन कर राजनीति करते हैं तीसरा कांग्रेस की चार राज्य सरकारें गुजरात मॉडल जैसा मॉडल क्यों नहीं पेश कर रही हैं राजस्थान में भी पेपर लीक हुआ था। मेरा जवाब:
Gurdeep Singh Sappal73,513 görüntüleme • 2 ay önce

गौरव भाटिया कहने लगे कि UPA के वक्त LPG सिलिंडर ₹1241 का था। लेकिन वो बताना भूल गए कि तब उस पर 600 रुपये की सब्सिडी भी मिलती थी। उस वक्त कच्चे तेल का रेट $ 145 होने पर भी आम लोगों को पेट्रोल 72 रुपये लीटर मिलता रहा। वो इसलिए कि डॉ मनमोहन सिंह जी की सरकार को दस साल में पेट्रोल- डीजल से 10 लाख करोड़ का टैक्स मिला और उस में से 9 लाख करोड़ उन्होंने सब्सिडी के रूप में वापिस कर दिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों का भार आम लोगों पर न पड़े। दूसरी तरफ़ मोदी सरकार ने 11 साल में 42 लाख करोड़ का टैक्स पेट्रोल डीजल से कमाया और सब्सिडी दो सिर्फ 1.70 लाख करोड़! इसीलिए कच्चे तेल के भाव $ 30-60 के बीच रहने पर भी लोग 90-100 रुपए प्रति लीटर पर पेट्रोल खरीदते रहे।
Gurdeep Singh Sappal164,545 görüntüleme • 6 ay önce

15 अगस्त, 1947 को जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने। किसी को आज़ाद भारत का मैप का पता ही ना था। अंग्रेजों ने भारत-पाकिस्तान का नक्शा दो दिन बाद 17 अगस्त को जारी किया। यही नहीं, 40 % भूभाग रियासतों के अधीन था। भारत- पाकिस्तान का नक्शा जारी होते ही विश्व का सबसे बड़ा पलायन शुरू हो गया। पलायन और दंगों में कोई बीस लाख लोग मारे गए। ऐसे माहौल में ये नेहरू ही थे, कि साम्प्रदायिक उन्माद के बावजूद भारत धर्मनिरपेक्ष देश बना। उन्हें जो देश मिला उसमें करीब 90 % गरीब थे, और करीब 90% निरक्षर थे। करीब 85-90% लोगों ने इतिहास में वोट नहीं दिया था। उन्हें मालूम ही नहीं था कि वोट कैसे देना है। पार्टी-प्रत्याशी का नाम भी वो नहीं पढ़ना जानते थे। नागरिकता साबित करने का कोई काग़ज़ उनके पास नहीं था। ऐसे में सबको वोटर बनाना, वोटिंग कराना, अनपढ़ वोटर अपनी पसंद का प्रत्याशी-पार्टी चुन सके इसके लिए चुनाव चिह्न का आईडिया लाना, ये सब विश्व में, इस स्केल पर पहली बार हो रहा था। नेहरू यदि उस वक़्त फेल जो जाते, तो भारत में लोकतंत्र जड़ें जमा ही नहीं पाता! Congress
Gurdeep Singh Sappal16,108 görüntüleme • 16 gün önce

युवाओं के आंदोलन पर और नीट के मुद्दे पर क्या है कांग्रेस की पोजीशन, इस सवाल पर आजतक पर मेरा जवाब
Gurdeep Singh Sappal54,459 görüntüleme • 2 ay önce

अमित शाह को बचाना है, तो पैलेट गन और AK 47 चलाने के सच को ही नकार रहे हैं। बाक़ी रही पेपर लीक बिल की हक़ीक़त, तो आज ही फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई थी, आज ही CBI का वकील नहीं पहुँचा। अभी जब मामला इतना गर्म है, तब ये हाल है, तो बाद में क्या हश्र होगा?
Gurdeep Singh Sappal34,035 görüntüleme • 2 ay önce

युद्ध है तो दिक्कत आएगी ही, सप्लाई चेन रुकेगी ही। लेकिन ये भी सच है कि आयल मार्केटिंग कंपनियां 2014 के मुक़ाबले 500 से 800% ज़्यादा मुनाफे के पहाड़ पर बैठी हैं। यही नहीं, मोदी सरकार ने 2014 से अब तक 44 लाख करोड़ रुपए पेट्रोलियम पर टैक्स से वसूल चुकी है। ये मुनाफा अब आम लोगों में बाँटने का वक्त है।
Gurdeep Singh Sappal77,995 görüntüleme • 6 ay önce

Authentication के नाम पर संसद में विपक्ष की आवाज़ चुप कराई जा रही है। पहले भी authentication यानि सत्यापन की बात होती थी। लेकिन संसद में अपनी बात कहने के बाद। भाषण के दो दिन के भीतर स्पीकर या राज्यसभा अध्यक्ष को सबूत दिखाने होते थे। एडवांस में सूचना या authentication की शर्त केवल तब होती थी जब किसी सांसद या मंत्री या उच्च पदों पर आसीन लोगों के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पेश करना होता था, उस पर आरोप का अलग से विशेष प्रस्ताव, जिसे substantive motion कहते हैं। अगर पहले से सबूत लाने की शर्त हमेशा से होती तो ख़ुद बीजेपी पाच-छह दशक तक विपक्ष में रह कर संसद के मुद्दे न उठा पाती। एक आम सांसद या विपक्ष के पास कोई पुलिस या जाँच एजेंसी नहीं होती है। वो हमेशा पब्लिक जानकारी, अख़बार, मीडिया, किसी एक्सपर्ट ग्रुप या फिर निजी जानकारी के आधार पर मुद्दा उठाते है, जिसकी सत्यता की जाँच की ज़िम्मेदारीपूर्ण सरकार की होती है। पहले सबूत लाओ, फिर मुद्दा उठाओ, ये मोदी सरकार का ट्रेंड है। बाकी बीजेपी के सांसद तो जब चाहे, जो चाहे आरोप लगा हो सकते हैं, बदनाम कर ही सकते हैं, उन पर कोई रोक नहीं है!
Gurdeep Singh Sappal27,796 görüntüleme • 2 ay önce

आमतौर पर सिस्टम होता है कि कोई उत्पादन करता है, कोई पैकेजिंग करता है, कोई स्टोरेज का व्यापार करता है, कोई ट्रांसपोर्ट करता है, कोई आढ़ती या थोक का व्यापारी होता है, कोई मार्केटिंग देखता है, कोई रिटेल का बिज़नेस करता है। और सभी इसमें अपनी अपनी कमाई करते हैं। लेकिन मोदी सरकार ने जो सिस्टम बना दिया है, उसमें ये सभी काम सिर्फ एक कॉर्पोरेट ग्रुप करने लगा है। जैसे हिमाचल में सेब की पूरी सप्लाई चेन अदानी ग्रुप के पास हो गई है। तो कमाई भी सिर्फ अदानी की! इसीलिए बाक़ी सभी परेशान हैं। ज़्यादातर देशों में इस तरह के सिस्टम पर रोक है। उदाहरण के लिए, अमरीका में सौ साल पहले मीट की पूरी चेन पर- मवेशी, बुचड़ख़ाने, कोल्ड स्टोरेज, रेल, होलसेल, रिटेल पर ‘The Beef Trust’ का क़ब्ज़ा हो गया था। इसके ख़िलाफ़ वहाँ आंदोलन चला। आख़िरकार 1920 में Packers and Stockyards Act बना और इस पर रोक लगी। मोनोपॉली के जिस सिस्टम से सभी विकसित देश शताब्दी पहले किनारा कर चुके, उसे लोगों के हित के ख़िलाफ़ मान चुके, उसे मोदी भारत के लोगों पर क्यों लाद रहे हैं? Congress Mallikarjun Kharge Rahul Gandhi
Gurdeep Singh Sappal16,089 görüntüleme • 1 ay önce

NTA के चेयरमैन हैं प्रदीप कुमार जोशी। मध्यप्रदेश में ये राज्य के पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) के अध्यक्ष बनाये गए थे। RTI में जानकारी मिली कि RSS प्रचारक विनोद ने बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी थी कि प्रदीप जोशी RSS और ABVP से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें अध्यक्ष बयाना जाये। और वो अध्यक्ष बन भी गए। प्रदीप जोशी के कार्यकाल में MPPSC में भर्ती घोटाला हुआ। BJP की सरकार ने तीन सदस्यीय जांच बैठाई। जाँच में पाया गया कि 350 नियुक्तियों में से 57 में घोटाला था। जाँच समिति ने SIT या EOW या CBI की आगे जांच की संस्तुति भी की। फिर क्या हुआ? फिर, प्रदीप जोशी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, न ही आगे कोई जाँच हुई। उल्टे, उनकी तरक्की हो गई। वो पहले UPSC के चेयरमैन बना दिए गए, फिर NTA के अध्यक्ष। जिन 57 लोगों की भर्ती ग़लत पायी गई, उनमें से कई अच्छे अच्छे पदों पर नियुक्त किए गए। डॉ राकेश मेहरा MPPSC के चेयरमैन बने, राजेश वर्मा दुर्गावती विश्वविद्यालय के VC बने इत्यादि। सवाल है, कि दागदार व्यक्ति को NTA का चेयरमैन क्यों बनाया गया, क्यों उसके भर्ती घोटाले की आगे जांच नहीं हुई, क्यों उसे अब बचाया जा रहा है। सिर्फ इसीलिए न की वह RSS से जुड़ा है। यह हकीकत है मोदी सरकार की नीयत की। यही नहीं, NTA की एक गवर्निंग बॉडी है, जिसमें IIT, IIM, IISER, JNU, IGNOU के डायरेक्टर और VC सदस्य हैं। 2024 से देश में NTA के काम को ले कर इतना हंगामा मचा है। लेकिन इस मैनेजमेंट बॉडी की पिछले ढाई साल में सिर्फ दो मीटिंग ही हुई हैं! ये है मोदी सरकार और उसकी संस्थाओं की गंभीरता! सिर्फ़ कड़े क़ानून पास करने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। व्यवस्था ही गड़बड़ है।
Gurdeep Singh Sappal24,207 görüntüleme • 2 ay önce

Since 2015, 152 paper leaks have happened. Since 2015, the CBI has investigated 17 exam frauds. Its investigations has led to ZERO convictions in these 17 cases, which included NEET, SSC, JEE, NET paper leaks. Also, Rahul Gandhi has clearly said that the use of force against students protesting in Jharkhand is wrong. It’s not like Modi-Shah’s BJP government which authorised use of pellet guns, shock batons, nailed lathis in Delhi. And also use of AK 47 in Bihar.
Gurdeep Singh Sappal18,985 görüntüleme • 1 ay önce

AI summit में मोदी सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है। लेकिन हक़ीक़त क्या है? * दुनिया में कुल AI पेटेंट में भारत का हिस्सा केवल 0.39% है। चीन का 70% है! * अगले साल चीन AI पर 100 billion डॉलर खर्च करेगा, अमरीकी कंपनियां 650 billion डॉलर खर्चेंगी, और भारत सरकार ने अपने बजट में मात्र 1000 करोड़ रुपये (करीब 12 million डॉलर) का प्रावधान किया है! * दुनिया के कुल डेटा का 20% अकेले भारत पैदा करता है, लेकिन डेटा स्टोरेज सुविधाओं में केवल 3 % हिस्सा है। * AI क्रांति के लिए ज़रूरी डेटा स्टोरेज के लिए हर साल 7 GW से 30 GW अतिरिक्त बिजली चाहिए। लेकिन आज तक मोदी सरकार ने AI की ऊर्जा जरूरतों के लिए कोई स्ट्रेटेजी पेपर तक नहीं बनाया है। * भारत की किसी यूनिवर्सिटी, किसी IIT, किसी कंपनी ने कोई काम का LLM यानि इंजन नहीं बनाया है। हम विदेशी LLM पर निर्भर हैं। * Semi-conductor/ GPU में हम विदेशों पर निर्भर हैं। इन सवालों के जवाब प्रधानमंत्री मोदी के पास नहीं हैं। बड़ी बड़ी बातें तो मोदी पहले भी कहते रहे हैं। लेकिन बिना इन्वेस्टमेंट के स्वच्छ भारत, स्मार्ट सिटी जैसी बातों का हश्र देश चुका है। बस एक इवेंट मैनेजमेंट में महारत थी, लेकिन AI समिट की अफ़रातफ़री ही बताती है कि अब वहाँ भी फेल हो गए हैं!
Gurdeep Singh Sappal42,576 görüntüleme • 7 ay önce

राहुल गांधी सिर्फ़ कांग्रेस के नेता नहीं हैं, वो नेता विपक्ष भी हैं। इस देश में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज आदि भी नेता विपक्ष रहे हैं। क्या कभी ये कल्पना की जा सकती है कि उन्हें पुलिस यूँ गिरा कर, चोटिल कर, बदतमीज़ी से उठाये? मोदी-शाह ने लोकतंत्र को तार तार कर कर दिया है। इस देश में जब नेता विपक्ष के साथ पुलिस ऐसा कर सकती है, तो सोचिए कि कल छात्रों, युवाओं के साथ कितना दुर्व्यवहार और उन पर कितना पुलिस अत्याचार किया होगा।
Gurdeep Singh Sappal17,789 görüntüleme • 2 ay önce